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बांध सुरक्षा विधेयक, 2018

  • 21 Jun 2018
  • 17 min read

चर्चा में क्यों?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 13 जून, 2018 को बांध सुरक्षा विधेयक (Dam Safety Bill), 2018 को संसद में प्रस्तुत करने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी। इस विधेयक का उद्देश्य बांधों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिये एकसमान देशव्यापी प्रक्रियाएँ विकसित करने में सहायता देना है।

बांध सुरक्षा विधेयक, 2018 

  • बांध सुरक्षा विधेयक, 2018 के प्रावधानों से केंद्र और राज्यों में बांध सुरक्षा की संस्थागत व्यवस्थाओं को शक्तियाँ प्राप्त होंगी और इससे पूरे देश में मानकीकरण एवं बांध सुरक्षा व्यवस्था में सुधार करने में मदद मिलेगी।
  • विधेयक में बांध सुरक्षा संबंधी सभी विषयों को शामिल किया गया है। इसमें बांध का नियमित निरीक्षण, आपात कार्य-योजना, विस्‍तृत सुरक्षा के लिये पर्याप्‍त मरम्‍मत और रख-रखाव कोष, इंस्‍ट्रूमेंटेशन तथा सुरक्षा मैनुअल शामिल हैं।
  • इसमें बांध सुरक्षा का दायित्‍व बांध के स्‍वामी पर है और विफलता के लिये दंड का प्रावधान भी है।

संस्थागत ढांचा
बांध सुरक्षा विधेयक, 2018 के अंतर्गत बांध सुरक्षा के लिये संस्थागत ढाँचे का प्रावधान है। इसमें निम्नलिखित शामिल हैं:

I. बांध सुरक्षा पर राष्ट्रीय समिति (National Committee on Dam Safety -NCDS)

  • विधेयक में बांध सुरक्षा पर राष्‍ट्रीय समिति गठित करने का प्रावधान है। यह समिति बांध सुरक्षा नीतियों को विकसित करेगी और आवश्‍यक नियमनों की सिफारिश करेगी।

II. राष्‍ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण (National Dam Safety Authority - NDSA)

  • विधेयक नियामक संस्था के रूप में राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण की स्थापना का प्रावधान करता है। यह प्राधिकरण देश में बांध सुरक्षा के लिये नीति, दिशा-निर्देशों तथा मानकों को लागू करने का दायित्व निभाएगा।
  • यह प्राधिकरण बांध सुरक्षा संबंधी डाटा और व्‍यवहारों के मानकीकरण के लिये राज्‍य बांध सुरक्षा संगठनों तथा बांधों के मालिकों के साथ संपर्क बनाए रखेगा।
  • प्राधिकरण राज्‍यों तथा राज्‍य बांध सुरक्षा संगठनों को तकनीकी और प्रबंधकीय सहायता उपलब्‍ध कराएगा।
  • प्राधिकरण देश के सभी बांधों का राष्‍ट्रीय स्‍तर पर डाटाबेस तथा प्रमुख बांध विफलताओं का रिकॉर्ड रखेगा।
  • प्राधिकरण किसी प्रमुख बांध की विफलता के कारणों की जाँच करेगा।
  • प्राधिकरण नियमित निरीक्षण तथा बांधों की विस्‍तृत जाँच के लिये मानक व दिशा-निर्देशों, नियंत्रण सूचियों को प्रकाशित और अद्यतन करेगा।
  • प्राधिकरण उन संगठनों की मान्‍यता या प्रत्‍यायन का रिकॉर्ड रखेगा, जिन्‍हें जाँच, नए बांधों की डिज़ाइन और निर्माण का कार्य सौंपा जा सकता है।
  • प्राधिकरण दो राज्‍यों के राज्‍य बांध सुरक्षा संगठनों के बीच या किसी राज्‍य बांध सुरक्षा संगठन और उस राज्‍य के बांध के स्‍वामी के बीच विवाद का उचित समाधान करेगा।
  • कुछ मामलों में जैसे- एक राज्‍य का बांध दूसरे राज्‍य के भू-भाग में आता है तो राष्‍ट्रीय प्राधिकरण राज्‍य बांध सुरक्षा संगठन की भूमिका भी निभाएगा और इस तरह अंतर-राज्‍यीय विवादों के संभावित कारणों को दूर करेगा।

III. बांध सुरक्षा पर राज्‍य समिति (State Committee on Dam Safety - SCDS)

  • विधेयक में राज्य सरकार द्वारा बांध सुरक्षा पर राज्य समिति गठित करने का प्रावधान है।
  • यह समिति राज्‍य में निर्दिष्‍ट सभी बांधों की उचित निगरानी, निरीक्षण, संचालन और रख-रखाव सुनिश्‍चित करेगी।
  • समिति यह सुनिश्‍चित करेगी की बांध सुरक्षा के साथ काम कर रहे हैं। इसमें प्रत्‍येक राज्‍य में राज्‍य बांध सुरक्षा संगठन स्‍थापित करने का प्रावधान है।
  • यह संगठन फील्‍ड बांध सुरक्षा के अधिकारियों द्वारा चलाया जाएगा। इन अधिकारियों में प्राथमिक रूप से बांध डिज़ाइन, हाईड्रो-मैकेनिकल इंजीनियरिंग, हाईड्रोलॉजी, भू-तकनीकी जाँच और बांध पुनर्वास क्षेत्र के अधिकारी होंगे।

IV. राज्य बांध सुरक्षा संगठन (State Dam Safety Organizations -SDSO)

  • विधेयक में निर्दिष्ट संख्या में बांध वाले प्रत्‍येक राज्‍य में राज्‍य बांध सुरक्षा संगठन स्‍थापित करने का प्रावधान है। यह संगठन फील्‍ड बांध सुरक्षा के अधिकारियों द्वारा चलाया जाएगा।

कर्त्तव्य और कार्य

  • विधेयक में प्रावधान है कि सभी निर्दिष्ट बांध उस राज्य के SDSO के क्षेत्राधिकार में आएंगे जिस राज्य में वे बांध हैं।
  • सीपीएसयू (Community and Public Sector Union - CPSUs) के स्वामित्व वाले निर्दिष्ट बांधों के लिये या जहाँ बांध दो और दो से अधिक राज्यों में विस्तारित हैं या राज्य स्वामित्व वाला कोई बांध दूसरे राज्य में है तो NDSA को SDSO माना जाएगा।
  • अपने अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत सभी बांधों के लिये राज्य बांध सुरक्षा संगठनों को निम्नलिखित कार्य करने होंगे:
    ♦ निरंतर निगरानी।
    ♦ नियमित निरीक्षण।
    ♦ संचालन और रख-रखाव की निगरानी।
    ♦ आवश्यकता अनुसार जाँच करना तथा डाटा एकत्रित करना।
    ♦ एनसीडीएस द्वारा निर्धारित मानकों के अनुसार प्रत्येक बांध को कमज़ोर और खतरनाक बांध की श्रेणी में रखना।
    ♦ निगरानी/निरीक्षण और अन्य गतिविधियों का लॉग बुक/डाटाबेस रखना।
    ♦ प्रमुख बांध घटनाओं का रिकार्ड रखना।
    ♦ सुरक्षा या समाधान उपायों के बारे में संबंधित बांध स्वामी को सलाह देना।

बांध के स्वामियों को निम्नलिखित कार्य करने होंगे:

  • रख-रखाव तथा मरम्मत के लिये पर्याप्त कोष निर्धारित करना तथा SDSO की सिफारिशों को लागू करना।
  • बांध सुरक्षा से संबंधित सभी तकनीकी प्रलेखनों को संकलित करना और साथ-साथ बांध विफलता से प्रभावित संसाधनों/सुविधाओं के बारे में सूचना संकलित करना।
  • अत्याधुनिक प्रबंधन साधनों को प्रयोग में लाना।
  • बांध सुरक्षा के लिये उत्तरदायी व्यक्ति, नियमों द्वारा निर्दिष्ट योग्यता और अनुभव रखेंगे तथा पर्याप्त प्रशिक्षण लेंगे।

बांधों के निर्माण या बदलावों के मामले में

  • मान्यता प्राप्त संगठनों द्वारा जाँच, डिज़ाइन और निर्माण का कार्य किया जाएगा।
  • बीआईएस (Bureau of Indian Standards) के प्रासंगिक मानक संहिताओं तथा दिशा-निर्देशों का उपयोग किया जाएगा।
  • जाँच, डिज़ाइन और निर्माण के लिये एनसीडीएस द्वारा निर्दिष्ट योग्यता प्राप्त अनुभवी और सक्षम इंजीनियर होंगे।
  • स्वीकृति के लिये डिज़ाइन, सुरक्षा, संचालन मानकों तथा नीतियों को NDSA / SDSO को दिखाना होगा।
  • NCDS द्वारा निर्दिष्ट गुणवत्ता नियंत्रण उपाय अपनाए जाएंगे।
  • केवल सक्षम प्राधिकार की स्वीकृति से ही नए बांध का निर्माण या बदलाव/वर्तमान बांध को विस्तारित करने का काम किया जा सकता है।
  • किसी जलाशय को शुरू में भरने से पहले उसे भरने के मानक और प्रारम्भिक भराव योजना तैयार करनी होगी।
  • प्रारम्भिक भराव से पहले SDSO द्वारा सुरक्षा व्यस्व्था का निरीक्षण किया जाएगा।
  • पर्याप्त कर्मियों के साथ ओएंडएम (Operations and Maintenance - O&M) व्यवस्था स्थापित की जाएगी।
  • अच्छे ढंग से प्रलेखित ओएंडएम (Operations and Maintenance - O&M) मैनुअल की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।

सुरक्षा निरीक्षण तथा डाटा संग्रह

  • प्रत्येक बांध के लिये उसके O&M व्यवस्था के भीतर एक बांध सुरक्षा इकाई की स्थापना की जाएगी।
  • बांध के स्वामी द्वारा बांध सुरक्षा इकाई के माध्यम से बांधों का मॉनसून पूर्व तथा मॉनसून पश्चात् निरीक्षण किया जाएगा।
  • बाढ़ के दौरान, बाढ़ के बाद और भूकंप के बाद दिखाई देने वाले असामान्य परिवर्तन को लेकर विशेष निरीक्षण किया जाएगा।
  • इंजीनियर SDSO की सहमति से पूरी मॉनसून अवधि के दौरान तथा भूकंप/आपदा के बाद आपात अवधि के दौरान बांध पर तैनात रहेंगे।
  • बांध के स्वामी को प्रत्येक बांध के लिये न्यूनतम संख्या में बांध उपकरण लगाने होंगे, रीडिंग का रिकॉर्ड रखना होगा और विश्लेषणों को SDSO को अग्रसारित करना होगा।
  • प्रत्येक बांध स्थल पर हाइड्रो-मौसम विज्ञान स्टेशन स्थापित किया जाएगा।
  • तीस मीटर से ऊँचे बांधों या जोन-III और उससे ऊपर के जोन में आने वाले बांधों के लिये भूकंप विज्ञान केंद्र स्थपित किये जाएंगे।

आपात कार्य -योजना तथा आपदा प्रबंधन

प्रत्येक बांध स्वामी को बांध के संबंध में निम्नलिखित कार्य करने होंगे:

  • हाइड्रो-मौसम विज्ञान नेटवर्क तथा अंतर्वाह पूर्वानुमान प्रणाली की स्थापना।
  • आपात बाढ़ चेतावनी प्रणाली की स्थापना।
  • उपरोक्त प्रणालियों के लिये समय-समय पर जाँच।
  • अंदरूनी प्रभावों, बाह्य प्रभावों, बाढ़ संबंधी चेतावनी तथा विपरीत प्रभावों से संबंधित सूचना को अधिकारियों तथा सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराना।
  • प्रारम्भिक चेतावनी प्रणाली सुचारू बनाए रखने में NDSA को सहयोग देना।
  • निर्दिष्ट अंतराल पर जोखिम का मूल्यांकन व अध्ययन करना, ऐसा पहला अध्ययन पाँच वर्षों के अंदर किया जाएगा।
  • आपात कार्य योजना में निम्नलिखित आपात कार्य शामिल किये जा सकते हैं- बांध विफलता की स्थिति में आनेवाली बाढ़ और बाढ़ से प्रभावित होने वाले क्षेत्र, आबादी, ढाँचे और प्रतिष्ठान, चेतावनी प्रक्रियाएँ, जान-माल के नुकसान को टालने के लिये विपरीत परिस्थितियों से निपटने की अग्रिम तैयारी, परामर्श एजेंसियों के साथ सहयोग।

विस्तृत बांध सुरक्षा मूल्यांकन

  • विधेयक में स्वतंत्र विशेषज्ञों के पैनल द्वारा विस्तृत सुरक्षा मूल्यांकन किये जाने का प्रावधान है। 
  • पहले पाँच वर्षों के अंदर सीएसई और उसके बाद NCDS द्वारा नियमित अंतरालों पर निर्दिष्ट ढाँचे या डिज़ाइन के मानक में बड़े बदलाव, बांध पर या जलाशय रीम पर असामान्य स्थिति का पाया जाना, अत्यधिक जलीय या भूकंप की प्रभावशाली घटना के मामले में CSE अनिवार्य होगा।

दोष और दंड

  • बांध सुरक्षा प्रावधानों का पालन नहीं करने पर दोष/दंड का प्रावधान है।
  • यदि कोई व्यक्ति किसी अधिकारी/कर्मचारी के कार्य में बाधा डालता है या केंद्र/राज्य सरकार या NCDS/NDSA/SCDS/SDSO के किसी निर्देश का पालन करने से मना करता है तो ऐसे व्यक्ति को एक वर्ष जेल की सजा या दंड (जीवन नुकसान के लिये दो वर्ष) का प्रावधान है।
  • यदि किसी विभाग द्वारा दोषपूर्ण कार्य किया जाता है तो विभाग प्रमुख को दोषी माना जाएगा यदि उसकी जानकारी में अपराध होता है।
  • यदि दोषपूर्ण कार्य किसी कंपनी/कारपोरेट द्वारा किया जाता है तो कंपनी के व्यवसाय संचालन के लिये प्रभारी/उत्तरदायी प्रत्येक व्यक्ति को दोषी माना जाएगा।
  • केंद्र/राज्य सरकार या NCDS/NDSA/SCDS/SDSO द्वारा की गई शिकायत को छोड़कर दोषपूर्ण कार्य का कोई संज्ञान नहीं लिया जाएगा।

वर्तमान में भारत में बांधों की स्थिति

  • भारत ने पिछले 50 वर्षों में बांधों तथा संबंधित अवसंरचनाओं में भारी निवेश किया है और बड़े बांधों की संख्या की दृष्टि से भारत का स्थान अमेरिका और चीन के बाद तीसरा है।
  • देश में 5254 बड़े बांध हैं और 450 बांध निर्माणाधीन हैं। इसके अतिरिक्‍त बहुत-से मझौले और हज़ारों छोटे बांध हैं।

निष्कर्ष

यद्यपि बांधों ने कृषि के सतत् विकास और भारत के विकास में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है, लेकिन बांधों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिये लंबे समय से एकरूप कानून और प्रशासनिक ढाँचे की आवश्यकता महसूस की जाती रही है। केंद्रीय जल आयोग (Central Water Commission), बांध सुरक्षा पर राष्ट्रीय समिति (National Committee on Dam Safety -NCDS), केंद्रीय बांध सुरक्षा संगठन (Central Dam Safety Organization - CDSO) तथा राज्य बांध सुरक्षा संगठनों (State Dam Safety Organizations - SDSO) के माध्यम से इस दिशा में प्रयास कर रहा है, लेकिन इन संगठनों के पास वैधानिक शक्तियाँ नहीं हैं और ये संगठन केवल परामर्शदायी भूमिका में हैं। यह चिंता का विषय है, क्योंकि भारत के लगभग 75 प्रतिशत बड़े बांध 25 वर्ष से अधिक पुराने हैं और लगभग 164 बांध 100 वर्षों से भी अधिक पुराने हैं। खराब रख-रखाव के कारण असुरक्षित बांध मानव जीवन, वनस्पति, सार्वजनिक तथा निजी संपत्तियों और पर्यावरण के लिये खतरनाक हो सकते हैं। भारत में बांध विफलताओं की 36 घटनाएँ हुई हैं। इनमें राजस्थान में 11, मध्य प्रदेश में 10, गुजरात में 5, महाराष्ट्र में 4 और आंध्र प्रदेश में 2 तथा उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, तमिलनाडु एवं ओडिशा में एक-एक घटना हुई है।

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