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भारतीय अर्थव्यवस्था

क्रिप्टो फाइनेंस

  • 07 Sep 2021
  • 8 min read

प्रिलिम्स के लिये:

क्रिप्टो फाइनेंस, बिटकॉइन, क्रिप्टोकरेंसी

मेन्स के लिये:

क्रिप्टो फाइनेंस का महत्त्व और संबंधित मुद्दे 

चर्चा में क्यों? 

एक दशक में बिटकॉइन और अन्य क्रिप्टोकरेंसी के विकास ने रुपए की परिभाषा बदल दी है तथा वैकल्पिक वित्तीय सेवाओं (AFS) के समानांतर जगत का निर्माण किया है।

  • इस प्रकार के विकास ने क्रिप्टो व्यवसायों को पारंपरिक बैंकिंग क्षेत्र में प्रवेश की अनुमति दी है।
  • AFS एक ऐसा शब्द है जिसका उपयोग अक्सर उन प्रदाताओं द्वारा प्रदान की जाने वाली वित्तीय सेवाओं की श्रेणी का वर्णन करने के लिये किया जाता है जो संघ द्वारा बीमित बैंकों और मितव्ययिता के बाहर काम करते हैं।

Cryptocurrency

मुख्य बिंदु

  • क्रिप्टो द्वारा दी जाने वाली वैकल्पिक सेवाएँ:
    • वैकल्पिक सेवाओं के बारे में: मुख्य रूप से उधार देना और उधार लेना। 
    • बैंकों को लाभ: निवेशक डिजिटल करेंसी की अपनी होल्डिंग्स पर ब्याज अर्जित कर सकते हैं, अक्सर वे बैंक में नकद जमा पर बहुत अधिक या ऋण वापस करने के लिये क्रिप्टो के साथ संपार्श्विक के रूप में उधार लेते हैं।
      • कारण: कानून के अनुसार, बैंकों के लिये नकद रिज़र्व रखना आवश्यक होता है ताकि यदि कुल ऋण में से कुछ बैड लोन में परिवर्तित भी हो जाए तो यह सुनिश्चित किया जा सके कि ग्राहक अपना धन निकाल सकें, जबकि क्रिप्टो बैंकों के पास इस प्रकार का कोई भी रिज़र्व नहीं होता है और वे जिन संस्थानों को उधार देते हैं उनमें जोखिमपूर्ण गतिविधियों की संभावना रहती है।
    • जोखिम: इस प्रकार के जमा की गारंटी केंद्रीय बैंक के समर्थित जमा बीमा निगम द्वारा नहीं दी जाती है। साइबर हमले, बाज़ार की प्रतिकूल स्थिति या अन्य परिचालन या तकनीकी कठिनाइयों के कारण निकासी या स्थानांतरण पर अस्थायी या स्थायी रोक लग सकती है।
  • स्टेबलकॉइन:
    • स्टेबल करेंसी वह क्रिप्टोकरेंसी है जो आमतौर पर डॉलर से जुड़ी होती है। वे ब्लॉकचेन लेन-देन हेतु डिजिटल रूप में सरकार द्वारा जारी धन का स्थिर मूल्य प्रदान करने के लिये हैं, लेकिन निजी संस्थाओं द्वारा जारी किये जाते हैं।
      • क्रिप्टोकरेंसी अस्थिर प्रकृति की होती है, जिससे भुगतान या ऋण जैसे लेन-देन के लिये यह कम व्यावहारिक है। यहीं से स्टेबलकॉइन का महत्त्व बढ़ जाता है।
    • स्टेबलकॉइन जारीकर्त्ता को सरकारी संस्थानों की तरह भंडार बनाए रखने के साथ-साथ उसकी निगरानी करनी चाहिये लेकिन इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि वे वास्तव में वे डॉलर के समर्थन का दावा करते हों। 
  • केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा:
    • यह एक विशेष राष्ट्र या क्षेत्र के लिये फिएट मुद्रा (सरकार द्वारा जारी और एक केंद्रीय प्राधिकरण जैसे केंद्रीय बैंक द्वारा विनियमित) मुद्रा का आभासी प्रारूप है।
    • केंद्रीय बैंकर सरकार की क्रिप्टोकरेंसी जारी करने की क्षमता की जाँच कर रहे हैं। यह सैद्धांतिक रूप से केंद्रीय बैंक द्वारा नियंत्रित धन की विश्वसनीयता के साथ क्रिप्टो की सुविधा प्रदान करेगा।
    • अमेरिका और भारत सहित कई देश केंद्रीय बैंक की डिजिटल मुद्रा विकसित करने पर विचार कर रहे हैं। 
  • विकेंद्रीकृत वित्त:
    • विकेंद्रीकृत वित्त या DeFi, एक वैकल्पिक वित्त पारिस्थितिकी तंत्र को संदर्भित करता है, जहाँ उपभोक्ता सैद्धांतिक रूप से पारंपरिक वित्तीय संस्थानों और नियामक संरचनाओं से अलग एवं स्वतंत्र रूप से क्रिप्टोकरेंसी को स्थानांतरित, व्यापार, उधार देने जैसे कार्य करते हैं।
    • DeFi का उद्देश्य कंप्यूटर कोड का उपयोग करके वित्तीय लेन-देन की प्रक्रिया में बिचौलियों और मध्यस्थों को समाप्त करना है।
    • इस प्लेटफॉर्म को समय के साथ अपने डेवलपर्स और बैकर्स से स्वतंत्र होने के लिये संरचित किया जाता है और अंततः यह उपयोगकर्त्ताओं के एक समुदाय द्वारा शासित किया जाता है।
  • क्रिप्टो वित्त का महत्त्व:
    • वित्तीय समावेशन
      • नवोन्मेषकों का तर्क है कि क्रिप्टो, वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देता है। इससे उपभोक्ता बैंकों के विपरीत अपनी होल्डिंग पर असामान्य रूप से उच्च रिटर्न अर्जित कर सकते हैं।
    • त्वरित और मितव्ययी लेन-देन:
      • क्रिप्टो फाइनेंस, पारंपरिक संस्थानों द्वारा लंबे समय से बहिष्कृत लोगों को त्वरित, सस्ते और बिना निर्णय के लेन-देन में संलग्न होने का अवसर देता है।
      • चूँकि क्रिप्टो अपने ऋणों का समर्थन करता है, अतः सेवाओं को प्रायः किसी प्रकार की  क्रेडिट जाँच की आवश्यकता नहीं होती है, हालाँकि इसमें कुछ कर रिपोर्टिंग और धोखाधड़ी-विरोधी उद्देश्यों के लिये ग्राहक पहचान संबंधी जानकारी ली जाती है।
      • इसके तहत आमतौर पर उपयोगकर्त्ता की व्यक्तिगत पहचान साझा नहीं की जाती है, क्योंकि उन्हें पूरी तरह से उनके क्रिप्टो के मूल्य से आँका जाता है।

आगे की राह

  • कुछ नियामकों और नवोन्मेषकों का तर्क है कि नई तकनीक एक नए दृष्टिकोण की मांग करती है, क्योंकि नए प्रकार के जोखिम को नवाचार को बाधित किये बिना भी संबोधित किया जा सकता है।
    • उदाहरण के लिये यह अनिवार्य करने के बजाय कि DeFi प्रोटोकॉल बैंक के भंडार को बनाए रखेंगे और ग्राहक जानकारी एकत्र करेंगे, अधिकारी प्रौद्योगिकी तथा उत्पादों के लिये ‘कोड ऑडिट’ और ‘जोखिम पैरामीटर’ जैसी नई व्यवस्था बना सकते हैं।
  • पहचान से संबंधित मुद्दे, जो कि वित्तीय धोखाधड़ी से मुकाबले के लिये महत्त्वपूर्ण हैं, को संबोधित करने की आवश्यकता है। विशिष्टताओं से शुरू करने के बजाय- व्यक्तियों की पहचान से संबंधित कानून लागू करने वाले व्यापक दृष्टिकोण को अपना सकते हैं।
  • संदिग्ध गतिविधि पर नज़र रखने तथा  पहचान को ट्रैक करने के लिये कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डेटा विश्लेषण का उपयोग भी किया जा सकता है।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

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