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विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं COVID-19

  • 18 Apr 2020
  • 4 min read

प्रीलिम्स के लिये:

कृत्रिम बुद्धिमत्ता, COVID-19

मेन्स के लिये:

COVID-19 से निपटने में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के योगदान से संबंधित मुद्दे 

चर्चा में क्यों?

हाल ही में COVID-19 के परीक्षण हेतु इटली और भारत के कुछ छात्रों द्वारा संयुक्त रूप से एक एप विकसित किया गया है। 

प्रमुख बिंदु:

  • इस एप द्वारा लोगों की आवाज (Voice) के आधार पर COVID-19 का परीक्षण किया जा सकता है। 
  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence- AI) पर आधारित इस एप द्वारा COVID-19 से संक्रमित 300 व्यक्तियों का परीक्षण किया गया जिसमें इस तकनीक की सटीकता 98% पाई गयी। 
  • गौरतलब है कि भारतीय विज्ञान संस्थान (Indian Institute of Science-IISc), बैंगलोर की एक टीम भी खाँसी और श्वसन ध्वनियों के विश्लेषण के आधार पर COVID-19 हेतु परीक्षण पर कार्य कर रही है।

एप की कार्यप्रणाली:

  • एप पर माइक्रोफोन से बात करने से लोगों के आवाज की आवृत्ति और शोर को कई मापदंडों में एप द्वारा वर्गीकृत कर दिया जाता है।
  • एक सामान्य व्यक्ति तथा COVID-19 से संक्रमित व्यक्ति के आवाज की आवृत्ति और शोर की तुलना कर यह निर्धारित किया जाता है कि व्यक्ति संक्रमित है या नहीं।

लाभ:

  • यह एप COVID-19 से संक्रमित लोगों की पहचान करने हेतु प्राथमिक स्तर के परीक्षण को शीघ्रता से करने में सक्षम है।
    • प्राथमिक स्तर के परीक्षण में सकारात्मक परिणाम वाले व्यक्ति को ही अगले चरण के परीक्षण हेतु प्रयोगशाला में भेजा जाएगा। 
  • एप की सहायता से किया जाने वाला परीक्षण निःशुल्क होगा।
  • सरकार को COVID-19 से अत्यधिक प्रभावित क्षेत्रों (Hotspot Regions) की पहचान करने में मदद मिलेगी। 

चुनौतियाँ:

  • हाल के दिनों में देश में COVID-19 से संक्रमित लोगों की संख्या तेज़ी से बढ़ी है ऐसे में यह अति आवश्यक है कि शीघ्र ही अधिक-से-अधिक संक्रमित लोगों की पहचान की जाए। परंतु इस एप के बारे में लोगों को बताना/प्रचार-प्रसार करना तथा एप की कार्यप्रणाली से अवगत कराना एक बड़ी चुनौती होगी।  

कृत्रिम बुद्धिमत्ता

(Artificial Intelligence-AI):

  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंप्यूटर विज्ञान की वह शाखा है जो कंप्यूटर के इंसानों की तरह व्यवहार करने की धारणा पर आधारित है। इसके जनक जॉन मैकार्थी हैं।
  • यह मशीनों की सोचने, समझने, सीखने, समस्या हल करने और निर्णय लेने जैसी संज्ञानात्मक कार्यों को करने की क्षमता को सूचित करता है।
  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर शोध की शुरुआत 1950 के दशक में हुई थी। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का अर्थ है कृत्रिम तरीके से विकसित बौद्धिक क्षमता।
  • इसके ज़रिये कंप्यूटर सिस्टम या रोबोटिक सिस्टम तैयार किया जाता है, जिसे उन्हीं तर्कों के आधार पर संचालित करने का प्रयास किया जाता है जिसके आधार पर मानव मस्तिष्क कार्य करता है।
  • AI पूर्णतः प्रतिक्रियात्मक (Purely Reactive), सीमित स्मृति (Limited Memory), मस्तिष्क सिद्धांत (Brain Theory) एवं आत्म-चेतन (Self Conscious) जैसी अवधारणाओं पर कार्य करता है।

स्रोत: द हिंदू

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