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भारतीय अर्थव्यवस्था

राशन वितरण से लगभग 10 करोड़ लोग वंचित

  • 18 Apr 2020
  • 6 min read

प्रीलिम्स के लिये:

COVID-19, सार्वजनिक वितरण प्रणाली, राष्‍ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम-2013

मेन्स के लिये:

सार्वजनिक वितरण प्रणाली से संबंधित मुद्दे

चर्चा में क्यों?

ज्याँ द्रेज़ (Jean Dreze) और रीतिका खेड़ा (Reetika Khera) जैसे प्रसिद्ध अर्थशास्त्रियों के अनुसार, सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत किये जा रहे राशन वितरण से लगभग 10 करोड़ लोग वंचित हैं। 

प्रमुख बिंदु:

  • वर्ष 2011 की जनगणना के आँकड़ों का उपयोग करते हुए राष्‍ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (National Food Security Act) के तहत कुल आबादी के 67% हिस्से को सार्वजनिक वितरण प्रणाली (Public Distribution System) के माध्यम से राशन वितरण किया जाता है। इसमें ग्रामीण क्षेत्रों में 75% और शहरी क्षेत्रों में 50% लोग शामिल हैं।
  • ध्यातव्य है कि वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार, भारत की जनसंख्या लगभग 121 करोड़ है।
    • वर्तमान में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत लगभग 80 करोड़ लोगों को कवर किया जा रहा है। 
  • हालाँकि, वर्ष 2020 के लिये अनुमानित 137 करोड़ की आबादी हेतु 67% के अनुपात को लागू करने पर हम पाते हैं कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत लगभग 90 करोड़ लोग कवर होने चाहिये। इसका तात्पर्य यह है कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत राशन वितरण से लगभग 10 करोड़ लोग वंचित होंगे। 
  • उल्लेखनीय है कि लॉकडाउन के कारण नौकरी खो चुके लोग अब सिर्फ सार्वजनिक वितरण प्रणाली पर आश्रित हैं। इन्हीं परिस्थितियों के बीच COVID-19 के कारण देशभर में लॉकडाउन की वजह से सार्वजनिक वितरण प्रणाली से संबंधित खामियाँ सामने आई हैं। 

सार्वजनिक वितरण प्रणाली

(Public Distribution System-PDS):

  • सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से सस्ता खाद्यान्न आम लोगों तक पहुँचाया जाता है, जो केंद्र और राज्य दोनों सरकारों की संयुक्त ज़िम्मेदारी है।
  • केंद्र सरकार सस्ता खाद्यान्न उपलब्ध कराती है और उसका वितरण स्थानीय स्तर पर राज्य सरकारों द्वारा आवंटित उचित दर की दुकानों (राशन की दुकान) के द्वारा किया जाता है।

राज्यों से संबंधित आँकड़े:

  • विशेषज्ञों के अनुसार, राष्‍ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत राशन वितरण से उत्तर प्रदेश में 2.8 करोड़ लोग और बिहार में 1.8 करोड़ लोग वंचित होंगे।
    • वर्ष 2016 से जन्म और मृत्यु दर का उपयोग कर अनुमानित जनसंख्या वृद्धि दर और जनसंख्या की गणना की जा रही है, जबकि वास्तविक जनसंख्या इससे कहीं ज्यादा है।

राष्‍ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम-2013

(National Food Security Act-2013):

  • राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम एक ऐतिहासिक पहल है जिसके माध्यम से निर्धनों, महिलाओं एवं बच्‍चों की खाद्य और पोषण सुरक्षा सुनिश्चित की जाती है। 
  • इस अधिनियम में शिकायत निवारण तंत्र की भी व्‍यवस्‍था है। अगर कोई लोकसेवक या अधिकृत व्‍यक्ति इसका अनुपालन नहीं करता है तो उसके विरुद्ध शिकायत पर सुनवाई का प्रावधान किया गया है।
  • राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के तहत गरीबों को 2 रुपए प्रति किलो गेहूँ और 3 रुपए प्रति किलो चावल देने की व्यवस्था की गई है। इस कानून के तहत व्यवस्था है कि लाभार्थियों को उनके लिये निर्धारित खाद्यान्न हर हाल में मिले, इसके लिये खाद्यान्न की आपूर्ति न होने की स्थिति में खाद्य सुरक्षा भत्ते के भुगतान के नियम को जनवरी 2015 में लागू किया गया।
  • इस अधिनियम के तहत समाज के अति निर्धन वर्ग के प्रत्येक परिवार को प्रत्येक माह अंत्‍योदय अन्‍न योजना में सब्सिडी दरों पर तीन रुपए, दो रुपए, एक रुपए प्रति किलो क्रमशः चावल, गेहूँ और मोटा अनाज दिया जाता है।

आगे की राह:

  • COVID-19 के कारण उत्पन्न इस संकट से निपटने हेतु योजनाओं के निर्माण के दौरान सावधानियाँ बरतनी होंगी। योजनाओं के निर्माण में दक्षता इस संकट से देश को बाहर निकलने में सहायक साबित हो सकती है। 

स्रोत: द हिंदू

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