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भारतीय अर्थव्यवस्था

क्लॉबैक मैकेनिज़्म

  • 11 Nov 2019
  • 5 min read

प्रीलिम्स के लिये:

क्लॉबैक मैकेनिज़्म,मेलूस क्लाॅज़, NPA, RBI

मेन्स के लिये:

NPA, काॅर्पोरेट गवर्नेंस से संबंधित मुद्दे

चर्चा में क्यों?

भारतीय रिज़र्व बैंक (Reserve Bank of India- RBI) ने गैर निष्पादित संपत्ति (Non Performing Asset- NPA) से निपटने के लिये निजी बैंकों से क्लॉबैक मैकेनिज़्म (Clawback mechanism) के प्रावधान को लागू करने का निर्देश दिया है।

वर्तमान स्थिति:

  • कई निजी बैंकों द्वारा अपनी गवर्नेंस से संबंधित रिपोर्ट में NPA से संबंधित आँकड़ो को ठीक प्रकार से स्पष्ट नहीं किया गया। बैंकों में NPA की स्थिति के बावज़ूद उनके CEO (Chief Executive Officer) और पूर्णकालिक निदेशकों को वर्ष दर वर्ष उच्च परिवर्तनीय भुगतान दिया गया।
  • इस प्रकार की काॅर्पोरेट गवर्नेंस की कुप्रबंधन की स्थिति से निपटने हेतु RBI द्वारा परिवर्तनीय भुगतान पर लागू होने वाले मेलूस क्लाॅज़ (Malus Clause) और क्लॉबैक मैकेनिज़्म की आवश्यकता पर बल दिया जा रहा है।

मेलूस क्लाॅज़ और क्लॉबैक मैकेनिज़्म:

  • कंपनियाँ मुख्य प्रबंधन कार्मिक (Key Management Personnel- KMP) और भागीदारों के हितों को आगे बढ़ाने तथा कंपनी के दीर्घकालिक हितों के साथ इनको समायोजित करने के लिये दो प्रकार की नीतियाँ- मेलूस क्लाॅज़ और क्लॉबैक मैकेनिज़्म बनाती है।
  • मेलूस क्लाॅज़ के तहत कंपनी के कर्मचारियों के आवश्यक पारिश्रमिक या परिवर्तनीय भुगतान में कटौती की जाती है। यह एक प्रकार की गैर-प्रोत्साहन व्यवस्था है, जहाँ कुछ या सभी प्रदर्शन आधारित पारिश्रमिक प्राप्त नहीं होते हैं।
  • RBI के अनुसार- मेलूस क्लाॅज़ के तहत बैंक को सभी को छूट देने वाले पारिश्रमिक की राशि के हिस्से को रोकने अर्थात् परिवर्तनीय भुगतान की राशि में कटौती की जाती है। इसी प्रकार क्लॉबैक मैकेनिज़्म के तहत कर्मचारी और बैंक के बीच एक संविदात्मक समझौता होता है, जिसमें कर्मचारी कुछ परिस्थितियों में बैंक को पहले भुगतान या निहित पारिश्रमिक वापस करने के लिए सहमत होता है।

उद्देश्य:

  • इस प्रकार के प्रावधान का उद्देश्य पूर्णकालिक निदेशकों और CEO के परिवर्तनीय भुगतान हेतु मानदंड निर्धारित करना है।

RBI के दिशा-निर्देश:

  • मूल्यांकित NPA या परिसंपत्ति वर्गीकरण सार्वजनिक प्रकटीकरण की निर्धारित सीमा से अधिक होने की स्थिति में, बैंक को उस मूल्यांकन वर्ष का परिवर्तनीय भुगतान (पूर्णकालिक निदेशकों और CEO का)मेलूस क्लाॅज़ के तहत रोक देना चाहिये।
  • यदि गारंटीकृत बोनस (Guaranteed Bonus) जोखिम प्रबंधन या भुगतानों आधारित प्रदर्शन (Pay for Performance) के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है तो उन्हें क्षतिपूर्ति योजना (Compensation Plan) का हिस्सा नहीं बनाना चाहिये। इसके अतिरिक्त गारंटीकृत बोनस केवल नए कर्मचारियों (केवल पहले वर्ष तक सीमित) को ही प्रदान किया जाना चाहिये।
  • परिवर्तनीय भुगतान के मानकों में से कम से कम 50%; वैयक्तिक (Individual), व्यवसाय-इकाई (Business-Unit) और फर्म-वाइड (Firm-Wide) जैसे मानकों का समावेश किया जाना चाहिये।
  • कुल परिवर्तनीय भुगतान निर्धारित वेतन के अधिकतम 300% तक सीमित किया जाना चाहिये।
  • परिवर्तनीय भुगतान निर्धारित भुगतान (Fixed Pay) से 200% से अधिक होने पर कम-से-कम 67% भुगतान नॉन-कैश इंस्ट्रूमेंट्स (Non-Cash Instrument) के जरिये दिया जाना चाहिये।
  • परिवर्तनीय भुगतान को 150% तक कैप किया जा सकता है लेकिन इसे निर्धारित वेतन से 50% से कम नहीं किया जा सकता है।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

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