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NIIF में कैपिटल इन्फ्यूज़न को कैबिनेट की मंज़ूरी

  • 27 Nov 2020
  • 8 min read

प्रिलिम्स के लिये:

राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन,  राष्ट्रीय निवेश और बुनियादी ढाँचा कोष, NIIF- ऋण प्लेटफॉर्म, सॉवरेन वेल्थ फंड

मेन्स के लिये:

राष्ट्रीय निवेश और अवसंरचना कोष

चर्चा में क्यों?

हाल ही में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सरकार के 'राष्ट्रीय निवेश और अवसंरचना कोष' (National Investment and Infrastructure Fund- NIIF) द्वारा प्रायोजित NIIF- ऋण प्लेटफॉर्म में 6000 करोड़ रुपए के 'इक्विटी इन्फ्यूज़न' (पूंजी डालने) के प्रस्ताव को अपनी मंज़ूरी दे दी है।

प्रमुख बिंदु:

पृष्ठभूमि:

  • राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन’ (National Infrastructure Pipeline- NIP) के अनुसार, अवसंरचना क्षेत्र में अगले 5 वर्षों में 111 लाख करोड़ के निवेश का लक्ष्य रखा गया है। 
  • यह विभिन्न उप-क्षेत्रों में ऋण वित्तपोषण की पर्याप्त आवश्यकता को पूरा करेगा। इसके लिये ऋण वित्तपोषण के रूप में कम-से-कम 60 से 70 लाख करोड़ रुपए की आवश्यकता होगी।
  • वर्तमान परिवेश में अच्छी तरह से पूंजीकृत तथा विशिष्ट बुनियादी ढाँचे पर केंद्रित वित्तीय संस्थानों की आवश्यकता है, इस दिशा में NIIF- ऋण प्लेटफॉर्म को NIIF द्वारा विकसित किया जा रहा है।
    • यह एक मज़बूत पूंजी आधार और विशेषज्ञता संचालित दृष्टिकोण के साथ आधारित परियोजनाओं को ऋण देने पर ध्यान केंद्रित कर सकता है।

वर्तमान इक्विटी इन्फ्यूज़न की स्वीकृति दो शर्तों के अधीन है:

  • प्रस्तावित राशि में से केवल 2,000 करोड़ रुपए का आवंटन वित्त वर्ष 2020-21 के दौरान किया जाएगा।
  • हालाँकि वर्तमान COVID -19 महामारी के कारण उत्पन्न अभूतपूर्व वित्तीय स्थिति और सीमित वित्तीय उपलब्धता के मद्देनज़र प्रस्तावित राशि को पुन: वितरित किया जा सकता है लेकिन इसके लिये तत्परता और ऋण जुटाने की मांग का होना आवश्यक है।
  • NIIF, घरेलू और वैश्विक पेंशन फंड और सॉवरेन वेल्थ फंड से इक्विटी निवेश का उपयोग करने के लिये सभी आवश्यक कदम शीघ्रता से उठाएगा।

NIIF- ऋण प्लेटफॉर्म: 

इसमें शामिल हैं:

  • एसेम (Aseem) इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस लिमिटेड (AIFL):
    • यह एक अवसंरचना वित्तीयन कंपनी (IFC) है, जो भारतीय बुनियादी ढाँचे के ऋण वित्तपोषण की वृद्धि में परिवर्तनकारी भूमिका निभाने के उद्देश्य से स्थापित है।
  • NIIF- ‘इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस लिमिटेड’ (NIIF-IFL): 
    • इसे वर्ष 2014 में ‘अवसंरचना ऋण कोष’ (IDF) के रूप में परिचालित अवसंरचना परियोजनाओं के वित्तपोषण के लिये स्थापित किया गया था।

योगदान: 

  • ऐसी उम्मीद है कि यह अगले 5 वर्षों में अवसंरचना क्षेत्र को 1 लाख करोड़ रुपए का ऋण उपलब्ध कराएगा।

प्रभाव:

  • यह ‘राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन’ के तहत अवसंरचना क्षेत्र में परिकल्पित  निवेश को आकर्षित करने में मदद करेगा।
  • यह प्रक्रिया आधारभूत अवसंरचना परियोजनाओं के लिये बैंकों पर ऋण दबाव को कम करेगा और हरित क्षेत्र की नवीन परियोजनाओं को शुरू करने में भी मदद करेगी।
  • यह आधारभूत अवसंरचना की परिसंपत्तियों की तरलता को बढ़ाएगा और जोखिमों को कम करेगा।
  • यह उम्मीद की जाती है कि एक अच्छी तरह से पूंजीकृत, वित्त पोषित और शासित NIIF- ऋण प्लेटफॉर्म भारत के बुनियादी ढाँचे के वित्तपोषण तथा बॉण्ड बाज़ार और आधारभूत अवसंरचना परियोजनाओं एवं कंपनियों के बीच मध्यस्थ के रूप में कार्य करके भारत में बॉण्ड बाज़ार के विकास में एक प्रमुख भूमिका निभा सकता है।

राष्ट्रीय निवेश और अवसंरचना कोष (NIIF):

  • राष्ट्रीय निवेश और अवसंरचना कोष (NIIF) देश में अवसंरचना क्षेत्र की वित्तीय समस्याओं का समाधान प्रस्तुत करने वाला और वित्तपोषण सुनिश्चित करने वाला भारत सरकार द्वारा निर्मित किया गया एक कोष है।
  • NIIF में 49% हिस्सेदारी भारत सरकार की है तथा शेष हिस्सेदारी विदेशी और घरेलू निवेशकों की है।
  • केंद्र की अति महत्त्वपूर्ण हिस्सेदारी के साथ NIIF को भारत का ‘अर्द्ध-संप्रभु धन कोष’ (Quasi-sovereign Wealth Fund) माना जाता है।
  • इसे दिसंबर, 2015 में द्वितीय श्रेणी के 'वैकल्पिक निवेश कोष' (Alternate Investment Fund) के रूप में स्थापित किया गया था।
  • इसके तीन कोषों मास्टर फंड, फंड ऑफ फंड्स और स्ट्रैटेजिक अपॉर्चुनिटीज़ फंड में  यह 4.3 बिलियन डॉलर से अधिक की पूंजी का प्रबंधन करता है।
  • इसका पंजीकृत कार्यालय नई दिल्ली में है।

परिभाषाएँ (Terms):

ऋण वित्तपोषण:

  • जब कोई कंपनी ब्याज के साथ भविष्य की किसी तारीख पर वापस भुगतान करने के वादे के साथ वित्त उधार लेती है, तो इसे ऋण वित्तपोषण के रूप में जाना जाता है।

इक्विटी:

  • इक्विटी कंपनी में शेयरधारकों की हिस्सेदारी का प्रतिनिधित्व करती है, जिसे कंपनी की बैलेंस शीट पर पहचाना जाता है।

सॉवरेन वेल्थ फंड:

  • 'सॉवरेन वेल्थ फंड' एक राज्य के स्वामित्व वाली निवेश निधि होती है जो सरकार के धन से बना होता है, जिसे अक्सर देश के अधिशेष भंडार से प्राप्त किया जाता है।

पेंशन निधि:

  • पेंशन फंड कोई भी योजना, फंड या स्कीम है जो सेवानिवृत्ति पर निश्चित आय प्रदान करता है।

 बॉण्ड:

  • यह एक निश्चित आय साधन है जो एक निवेशक द्वारा एक उधारकर्त्ता को दिये गए ऋण का प्रतिनिधित्व करता है। सरल शब्दों में, एक बॉण्ड निवेशक और उधारकर्त्ता के बीच एक अनुबंध के रूप में कार्य करता है। ज्यादातर कंपनियाँ और सरकार बॉण्ड जारी करती हैं और निवेशक उन बॉण्डों को बचत और सुरक्षा विकल्प के रूप में खरीदते हैं।

 स्रोत: द हिंदू

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