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जैवविविधता और पर्यावरण

ब्लू फूड

  • 25 Sep 2021
  • 4 min read

प्रिलिम्स के लिये:

ब्लू फूड

मेन्स के लिये:

ब्लू फूड का महत्त्व और संबंधित मुद्दे 

चर्चा में क्यों?

हाल ही में ब्लू फूड के पर्यावरणीय प्रदर्शन शीर्षक वाली एक रिपोर्ट में कहा गया है कि जलीय या ब्लू फूड को वर्तमान की तुलना में पर्यावरणीय रूप से अधिक टिकाऊ बनाया जा सकता है।

  • रिपोर्ट ब्लू फूड असेसमेंट (BFA) के हिस्से के रूप में प्रकाशित हुई है।
  • BFA स्वीडन स्थित स्टॉकहोम रेजिलियेंस सेंटर, संयुक्त राज्य अमेरिका स्थित स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय और गैर-लाभकारी EAT के बीच एक सहयोग मंच है।

प्रमुख बिंदु:

  • ब्लू फूड्स और इसके लाभ:
    • ब्लू फूड जलीय जानवरों, पौधों या शैवाल से प्राप्त भोजन होते हैं जो ताज़े पानी और समुद्री वातावरण में पाए जाते हैं।
    • ब्लू फूड में स्थलीय पशु-स्रोत खाद्य पदार्थों की तुलना में अधिक पोषक तत्त्व पाए जाते हैं।
      • कई ब्लू फूड प्रजातियाँ ओमेगा-3 फैटी एसिड, विटामिन और खनिजों जैसे महत्त्वपूर्ण पोषक तत्वों से भरपूर होती हैं।
    • औसतन एक्वाकल्चर (Aquaculture) में उत्पादित प्रमुख प्रजातियों, जैसे कि तिलापिया, सैल्मन, कैटफ़िश और कार्प में स्थलीय जीवों के मांस की तुलना में कम पर्यावरणीय फुटप्रिंट पाए जाते हैं।
  • रिपोर्ट के बारे में:
    • रिपोर्ट ने खुलासा किया है कि ब्लू फूड पदार्थ पानी में पाए जाते हैं जो स्वस्थ, न्यायसंगत और टिकाऊ खाद्य प्रणालियों की दिशा में बदलाव हेतु एक आवश्यक भूमिका निभाएंगे।
    • ब्लू फूड के उत्पादन में कम ग्रीनहाउस गैस और पोषक तत्त्व उत्सर्जन (Nutrient Emissions) होता है तथा कम भूमि व पानी की आवश्यकता होती है। 
      • समुद्री और मीठे पानी के मत्स्यन से वहाँ पाए जाने वाले जीवित संसाधनों को हानि होती है। इनमें बेहतर प्रबंधन और अनुकूलन के माध्यम से ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने की क्षमता होती है।
    • नवाचार को बढ़ावा देकर मत्स्य प्रबंधन में सुधार के माध्यम से खपत और अधिक बढ़ सकती है तथा कुपोषण पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है।
    • ब्लू फूड को बढ़ावा देने से कई सतत् विकास लक्ष्यों (एसडीजी 2 - पोषण और 14 - समुद्री संसाधनों का सतत् उपयोग) को पूरा करने में मदद मिलेगी।

आगे की राह 

  • छोटे पैमाने के मछुआरों के पास वैश्विक समुद्री भोजन प्रणाली का एक बड़ा हिस्सा है जो अविश्वसनीय रूप से विविध है। इसलिये ब्लू फूड सिस्टम के टिकाऊ उत्पादन के लिये छोटे पैमाने के मछुआरों को मज़बूत करने की ज़रूरत है।
  • ब्लू फूड की विशाल विविधता महत्त्वपूर्ण पोषण, सांस्कृतिक, आर्थिक और पर्यावरणीय मूल्य को संदर्भित करती है। इसकी क्षमता को संदर्भित करने के लिये नीति निर्माताओं को निम्नलिखित उपाय करने चाहिए:
    • छोटे उत्पादकों, महिलाओं और अन्य हाशिये के समूहों की भागीदारी सहित बेहतर शासन।
    • प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर प्रबंधन जिस पर ब्लू फूड पदार्थ निर्भर करते हैं।
    • जलवायु परिवर्तन के प्रति लचीलेपन के निर्माण में निवेश।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

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