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असम निरसन विधेयक, 2020

  • 31 Dec 2020
  • 4 min read

चर्चा में क्यों?

हाल ही में असम विधानसभा में राज्य द्वारा धार्मिक शिक्षा केंद्रों के रूप में संचालित मदरसों को नियमित स्कूलों में परिवर्तित करने से संबंधित एक विधेयक पारित किया गया है ।

  • मंत्रिमंडल द्वारा निर्णय लिया गया है कि 1 अप्रैल, 2022 से कुमार भास्कर वर्मा संस्कृत और प्राचीन अध्ययन विश्वविद्यालय, नलबाड़ी द्वारा शुरू किये जाने वाले सर्टिफिकेट/ डिप्लोमा/ डिग्री पाठ्यक्रम का अध्ययन करने हेतु मौज़ूदा प्रांतीय संस्कृत पाठशालाओं को अध्ययन केंद्र, अनुसंधान केंद्र और संस्थानों में परिवर्तित कर दिया जाएगा।

प्रमुख बिंदु: 

  • असम निरसन विधेयक, 2020 को वर्तमान में दो मौजूदा अधिनियमों को निरस्त करने हेतु लाया गया:
    • असम मदरसा शिक्षा (प्रांतीयकरण) अधिनियम, 1995
    • असम मदरसा शिक्षा (कर्मचारियों की सेवा का प्रांतीयकरण और मदरसा शैक्षणिक संस्थानों का पुन: संगठन) अधिनियम, 2018
  • नए कानून में राज्य बोर्डों के तहत संचालित निजी मदरसों को भी शामिल किया गया है, हालाँकि वे मदरसे जो निजी तौर पर संचालित है परंतु किसी भी राज्य बोर्ड के अधीन नहीं हैं, इस विधेयक के दायरे से बाहर हैं।
    • आमतौर पर  इस्लामी शिक्षा संस्थानों हेतु संक्षिप्त में अंग्रेजी में ‘मदरसा’ शब्द का प्रयोग किया जाता है।
    • इतिहासकारों और अन्य विद्वानों द्वारा इस्लामिक विश्व में ऐतिहासिक मदरसा संस्थानों को संदर्भित करने हेतु इस शब्द का इस्तेमाल किया गया है, जो एक ऐसा कॉलेज / स्कूल है जहाँ अन्य माध्यमिक विषयों के साथ-साथ इस्लामी कानून की भी शिक्षा दी जाती थी ।
  • माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, असम (Board of Secondary Education, Assam- SEBA) द्वारा संचालित मदरसों के नियमित स्कूलों के रूप में तब्दील होने के बाद उनके नाम और कार्य से मदरसा ’हटा दिया जाएगा।
    • मदरसों के कर्मचारियों, विशेष रूप से धार्मिक विषयों को पढ़ाने वाले शिक्षकों को या तो अन्य विषयों को पढ़ाने हेतु प्रशिक्षित किया जाएगा या उनकी क्षमता के अनुसार किसी अन्य कार्य हेतु उन्हें प्रशिक्षित किया जाएगा ।
  • इसे मुस्लिम समुदाय के सशक्तीकरण में महत्त्वपूर्ण कदम बताया जा रहा है।
  • यह बिल बी.आर.अंबेडकर के अनुकूल है जिनके अनुसार, धार्मिक शिक्षा का पाठ्यक्रम में कोई स्थान नहीं होना चाहिये।
    • कुरान को सरकारी खर्च पर नहीं पढ़ाया जाना चाहिये क्योंकि बाइबल या भगवद्गीता या अन्य धर्मों के ग्रंथों को भी सरकारी खर्चें पर नहीं पढ़ाया जाता है
    • सरकार द्वारा मदरसों और संस्कृत पाठशालाओं (संस्कृत शिक्षण केंद्र) पर सालाना 260 करोड़ रुपए खर्च किया जाता है।
  • इसके अलावा धर्मनिरपेक्षता संविधान की बुनियादी विशेषताओं में से एक है।
  • सरकार की इच्छा है कि भविष्य में निजी मदरसों में विज्ञान, गणित और धार्मिक विषयों के साथ अन्य विषयों को पढ़ाने के लिये भी एक कानून बनाया जाए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

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