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एशिया-प्रशांत सतत् विकास लक्ष्य प्रगति रिपोर्ट, 2024

  • 21 Feb 2024
  • 13 min read

प्रिलिम्स के लिये:

सतत् विकास लक्ष्य (Sustainable Development Goals- SDG), एशिया और प्रशांत SDG प्रगति रिपोर्ट 2024, एशिया-प्रशांत हेतु संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक आयोग (UNESCAP)

मेन्स के लिये:

एशिया और प्रशांत SDG प्रगति रिपोर्ट- 2024, निर्धनता और भूख से संबंधित मुद्दे।

स्रोत: डाउन टू अर्थ 

चर्चा में क्यों?

हाल ही में एशिया-प्रशांत हेतु संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक आयोग (UNESCAP) ने एशिया-प्रशांत SDG प्रगति रिपोर्ट- 2024 प्रकाशित की। यह रिपोर्ट सतत् विकास लक्ष्यों की दिशा में किये गए प्रयासों की सफलता की कहानियों, रुझानों और क्षेत्र के विभिन्न हिस्सों में आने वाली विशिष्ट चुनौतियों पर केंद्रित है।

एशिया और प्रशांत SDG प्रगति रिपोर्ट क्या है?

  • एशिया और प्रशांत SDG प्रगति रिपोर्ट, संयुक्त राष्ट्र ESCAP के वार्षिक प्रमुख प्रकाशनों में से एक है। यह क्षेत्र में SDG प्रगति का एक संक्षिप्त विवरण/समीक्षा प्रदान करती है जो ESCAP और उसके भागीदारों द्वारा संचालित कई अन्य गतिविधियों के लिये आधार के रूप में कार्य करती है।
  • यह SDG संकेतकों पर डेटा उपलब्धता बढ़ाने के लिये प्राथमिकताओं, विशेष रूप से सबसे कमज़ोर जनसंख्या समूहों को रेखांकित करती है, जो अधिक न्यायसंगत और समावेशी विकास रणनीतियों को आयाम देने में मदद कर सकती है।

रिपोर्ट के मुख्य तथ्य क्या हैं?

  • समग्र प्रगति में विलंब:
    • 17 सतत् विकास लक्ष्यों (SDG) की प्रगति आबादी के विभिन्न क्षेत्रों तथा एशिया और प्रशांत के पाँच उपक्षेत्रों के मध्य असमान एवं अपर्याप्त रूप से हुई है। 
    • वर्तमान प्रगति दर से, यह क्षेत्र 2062 तक भी सभी SDG लक्ष्यों को प्राप्त नहीं कर पाएगा, जो तय वर्ष 2030 से लगभग 32 वर्षों के अत्यधिक विलंब को चिह्नित करता है।

  • परिमेय लक्ष्यों पर सीमित प्रगति:
    • 116 परिमेय (निर्धारण/मापने योग्य) SDG लक्ष्यों में से केवल 11% को ही पूरा किया जा रहा है। यदि वर्तमान प्रक्षेप-पथ जारी रहता है, तो वर्ष 2030 तक क्षेत्र को आवश्यक प्रगति का केवल एक-तिहाई ही प्राप्त होने का अनुमान है।
  • जलवायु कार्रवाई में विलंब:
    • SDG 13 (जलवायु कार्रवाई) पर प्रगति गंभीर रूप से पीछे है, SDG 13 के सभी लक्ष्य या तो स्थिर हैं या इनकी गति मंद है, जो राष्ट्रीय नीतियों में जलवायु कार्रवाई को शामिल करने और जलवायु से संबंधित आपदाओं से निपटने के लिये समुत्थानशक्ति को सुदृढ़ करने की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित करते हैं।

  • डेटा अंतराल के कारण निगरानी में व्यवधान:
    • वर्तमान में एशिया-प्रशांत क्षेत्र में 169 SDG लक्ष्यों में से लगभग 67% आकलन योग्य/परिमेय नहीं हैं।
      • जलवायु लक्ष्य (SDG 13) के तहत 62.5% संकेतकों में प्रगति की निगरानी के लिये आवश्यक डेटा का अभाव है।
    • वर्ष 2017 के बाद से डेटा उपलब्धता में सुधार हुआ है लेकिन यह 3 जलवायु कार्रवाई लक्ष्यों सहित 53 लक्ष्यों के लिये अपर्याप्त है।
  • लिंग असमानता:
    • स्कूल नामांकन दर में समग्र प्रगति के बावजूद, क्षेत्र में महिलाओं और लड़कियों को शिक्षा तथा रोज़गार के अवसरों तक पहुँचने में काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
    • उनकी नामांकन दर कम है और उन्हें साक्षर होने के लिये संघर्ष करना पड़ता है। युवा महिलाओं को भी श्रम बाज़ारों तक पहुँचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, जिससे युवा बेरोज़गारी की दर अधिक हो जाती है।
    • इस बीच, पुरुषों के सामने आने वाली चुनौतियाँ उनके स्वास्थ्य या व्यक्तिगत सुरक्षा से संबंधित होती हैं।
      • वे आत्महत्या, दीर्घकालिक व्याधियों और सड़क दुर्घटनाओं से होने वाली मौतों की उच्च दर से पीड़ित हैं।
  • लक्ष्यों की परस्पर संबद्धता:
    • भुखमरी की समाप्ति (SDG 2), अच्छा स्वास्थ्य और जीवनस्तर (SDG 3), स्वच्छ जल एवं स्वच्छता (SDG 6), किफायती तथा स्वच्छ ऊर्जा (SDG 7) व टिकाऊ शहरी व सामुदायिक विकास (SDG 11) जैसे लक्ष्यों पर प्रगति को भी सीमित कर दिया गया है।
    • ये लक्ष्य जलवायु परिवर्तन से निकटता से संबंधित हैं और उन चुनौतियों का सामना करते हैं जो क्षेत्र में प्रगति को बाधित कर सकती हैं।
  • वैश्विक जोखिमों पर चेतावनी:
    • जलवायु परिवर्तन और मौसम की चरम घटनाओं को अगले दशक में गंभीर वैश्विक जोखिमों के रूप में पहचाना गया है, जिससे SDG लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिये जलवायु कार्रवाई को संबोधित करने के महत्त्व पर ज़ोर दिया गया है।
  • राष्ट्रीय सफलता की कहानियाँ:
    • फिलीपींस में दिव्यांग बच्चों के समर्थन की लागत का अनुमान लगाने के उद्देश्य से समर्पित अनुसंधान और विश्लेषण ने विकलांगता भत्ता प्रदान करने, विकलांग बच्चों को सहायता प्रदान करने के लिये हाल के कानून को प्रभावित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।
    • वियतनाम में राष्ट्रव्यापी डिजिटल प्रशिक्षण कार्यक्रमों ने डिजिटल परिवर्तन में तेज़ी लाने और युवाओं तथा प्रवासी श्रमिकों के लिये कौशल एवं रोज़गार अंतर को समाप्त करने में सार्वजनिक-निजी भागीदारी के मूल्य पर प्रकाश डाला है। 
    • इस बीच उत्तर और मध्य एशिया में, कज़ाखस्तान, किर्गिस्तान, तुर्कमेनिस्तान तथा उज़्बेकिस्तान में राष्ट्रीय सांख्यिकीय प्रणालियों को राज्यविहीन आबादी को बेहतर समर्थन देने के लिये उन्नत किया गया है।
  • रिपोर्ट की प्रमुख सिफारिशें:
    • महिलाओं, लड़कियों, ग्रामीण आबादी और शहरी गरीबों सहित हाशिए पर रहने वाले समूहों को प्रभावित करने वाली असमानताओं को संबोधित करने की तत्काल आवश्यकता है, जो स्वयं को शिक्षा तथा रोज़गार के अवसरों से वंचित पाते हैं।
    • जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न चुनौतियों से निपटने और विभिन्न सतत् विकास लक्ष्य (SDG) हासिल करने के लिये संधारणीय बुनियादी ढाँचे तथा नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों में निवेश में उल्लेखनीय वृद्धि की आवश्यकता है।
  • रिपोर्ट के अनुसार SDG पर भारत की प्रगति:
    • भारत के समग्र SDG स्कोर में 6 अंकों का सुधार हुआ, जो वर्ष 2019 में 60 से बढ़कर वर्ष 2020-21 में 66 हो गया।
    • उल्लेखनीय उपलब्धियों में क्रमशः 83 और 92 के समग्र लक्ष्य स्कोर के साथ लक्ष्य 6 (स्वच्छ जल व स्वच्छता) तथा लक्ष्य 7 (सस्ती व शुद्ध ऊर्जा) शामिल हैं।

एशिया और प्रशांत के लिये संयुक्त राष्ट्र आर्थिक तथा सामाजिक आयोग:

  • एशिया और प्रशांत के लिये संयुक्त राष्ट्र आर्थिक तथा सामाजिक आयोग (United Nations Economic and Social Commission for Asia and the Pacific- UNESCAP) संयुक्त राष्ट्र की क्षेत्रीय विकास शाखा है जिसका उद्देश्य एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सामाजिक एवं आर्थिक विकास को बढ़ावा देना है।
  • इसमें भारत सहित एशिया-प्रशांत क्षेत्र के 53 सदस्य देश और 9 सहयोगी सदस्य देश शामिल हैं।
  • गठन: इसका गठन वर्ष 1947 में किया गया था।
  • मुख्यालय: इसका मुख्यालय बैंकॉक, थाईलैंड में है।
  • उद्देश्य: सदस्य राज्यों को परिणाम-उन्मुख परियोजनाएँ, तकनीकी सहायता और क्षमता निर्माण में सहायता प्रदान कर संबद्ध क्षेत्र से संबंधित प्रमुख चुनौतियों का समाधान करना है।

  UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न  

प्रिलिम्स:

प्रश्न. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये: (2016)

  1. धारणीय विकास लक्ष्य (Sustainable Development Goals) पहली बार 1972 में एक वैश्विक विचार मंडल (थिंक टैंक) ने, जिसे 'क्लब ऑफ रोम' कहा जाता था, द्वारा प्रस्तावित किया गया था।
  2. धारणीय विकास लक्ष्य वर्ष 2030 तक प्राप्त किये जाने हैं।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2 दोनों
(d) न तो 1 और न ही 2

उत्तर: (b)

व्याख्या:

  • 17 सतत् विकास लक्ष्यों (SDG) को वैश्विक लक्ष्यों के रूप में भी जाना जाता है। इसे वर्ष 2015 में संयुक्त राष्ट्र द्वारा निर्धनता को समाप्त करने, ग्रह की रक्षा करने और वर्ष 2030 तक सभी की शांति तथा समृद्धि को सुनिश्चित करने के लिये एक सार्वभौमिक आह्वान के रूप में अपनाया गया था। 
  • ये पूर्व के निर्धारित विकास लक्ष्यों की सफलता के आधार पर बनाए गए हैं, जिसमें जलवायु परिवर्तन, आर्थिक असमानता, नवाचार, सतत् उपभोग, शांति और न्याय जैसे नए क्षेत्रों सहित अन्य प्राथमिकताएँ शामिल हैं।  
  • 17 SGDs परस्पर एकीकृत हैं- इन लक्ष्यों के अंतर्गत एक क्षेत्र में की गई कार्रवाई दूसरे क्षेत्र के परिणामों को भी प्रभावित करेगी। 
  • इसे वर्ष 2015 में अपनाया गया तथा जनवरी 2016 में कार्यान्वित किया गया। ये लक्ष्य वर्ष 2030 तक प्राप्त किये जाने हैं। अतः कथन 2 सही है।
  • SGD की अवधारणा की उत्पत्ति वर्ष 2012 में रियो डी जनेरियो में सतत् विकास पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन में हुई थी। क्लब ऑफ रोम ने वर्ष 1968 में पहली बार अधिक व्यवस्थित तरीके से संसाधन के संरक्षण का समर्थन किया। इसलिये कथन 1 सही नहीं है। अतः विकल्प (b) सही उत्तर है।

मेन्स:

प्रश्न. वहनीय (अफोर्डेबल), विश्वसनीय, धारणीय तथा आधुनिक ऊर्जा तक पहुँच संधारणीय विकास लक्ष्यों (एस.डी.जी.) को प्राप्त करने के लिये अनिवार्य है। भारत में इस संबंध में हुई प्रगति पर टिप्पणी कीजिये। (2018)

प्रश्न. राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 धारणीय विकास लक्ष्य-4 (2030) के साथ अनुरूपता में है। उसका ध्येय भारत में शिक्षा प्रणाली की पुनः संरचना एवं पुनः स्थापना करना है। इस कथन का समालोचनात्मक निरीक्षण कीजिये। (2020)

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