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भारतीय अर्थव्यवस्था

सार्वजानिक-निजी भागीदारी के माध्यम से 16 स्टेशनों के लिये बोली लगाएगा रेलवे

  • 13 Oct 2022
  • 12 min read

प्रिलिम्स के लिये:

पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल, बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर (बीओटी), बिल्ड-ओन-ऑपरेट (बीओओ), बिल्ड-ऑपरेट-लीज-ट्रांसफर (बीओएलटी) डिज़ाइन-बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर (डीबीएफओटी), लीज -विकास-संचालन (एलडीओ), संचालन-रखरखाव-स्थानांतरण (ओएमटी), आदर्श स्टेशन योजना।

मेन्स के लिये:

सार्वजनिक-निजी भागीदारी के विभिन्न निवेश मॉडल का महत्त्व।

चर्चा में क्यों?

रेल मंत्रालय सार्वजनिक-निजी भागीदारी (Public-Private Partnership-PPP) मॉडल के तहत 16 स्टेशनों के लिये बोली लगाने की योजना बना रहा है। यात्रियों के लिये बेहतर बुनियादी सुविधाओं और पहुँच को सुनिश्चित करने के लिये इन रेलवे स्टेशनों का उन्नयन किया जाएगा।

  • यह उन 1253 रेलवे स्टेशनों के अतिरिक्त है, जिन्हें आदर्श स्टेशन योजना के तहत विकास के लिये चिह्नित किया गया है।

सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP):

  • परिचय:
    • यह सार्वजनिक संपत्ति और/या सार्वजनिक सेवाओं के प्रावधान के लिये सरकार एवं निजी क्षेत्र के मध्य एक व्यवस्था है। सार्वजनिक-निजी भागीदारी बड़े पैमाने पर सरकारी परियोजनाओं, जैसे सड़कों, पुलों, या अस्पतालों को निजी वित्तपोषण के साथ पूरा करने की अनुमति देती है।
    • इस प्रकार की साझेदारी में,निजी क्षेत्र की संस्था द्वारा एक निर्दिष्ट अवधि के लिये निवेश किया जाता है।
    • चूंँकि PPP मॉडल में सेवाएँ प्रदान करने के लिये सरकार द्वारा ज़िम्मेदारी का पूर्ण प्रतिधारण शामिल है, यह निजीकरण की प्रक्रिया नहीं है।
    • इसमें निजी और सार्वजनिक इकाई के मध्य जोखिम का एक सुव्यवस्थित तरीके से आवंटन होता है।
    • निजी इकाई को खुली प्रतिस्पर्द्धी बोली के आधार पर चुना जाता है और वह प्रदर्शन आधारित भुगतान प्राप्त करती है।
    • PPP मार्ग उन विकासशील देशों में एक विकल्प हो सकता है, जहाँ सरकारों को महत्त्वपूर्ण परियोजनाओं के लिये ऋण लेने में विभिन्न बाधाओं का सामना करना पड़ता है।
    • यह बड़ी परियोजनाओं की योजना बनाने या उन्हें क्रियान्वित करने में आवश्यक विशेषज्ञता भी प्रदान कर सकता है।
  • लाभ:
    • PPP मॉडल निवेश, परिचालन दक्षता और आधुनिक एवं स्वच्छ प्रौद्योगिकी को शामिल करता है।
    • PPP के तहत रेलवे रेल पटरियों के साझा उपयोग के लिये प्रदान करती हैं, जिससे राज्यों और निजी निवेशकों के लिये लाभ एवं राजस्व आधार (या कम लागत के आधार) को बढ़ाया जा सकता है।
    • PPP रेलवे परियोजनाएँ रेल पटरियों के साझा उपयोग के लिये प्रदान करती हैं, जो राज्यों और निजी निवेशकों के लिये दक्षता लाभ और बढ़े हुए राजस्व आधार (या कम लागत के आधार) हो सकते हैं।
    • इसके अतिरिक्त इससे प्रतिस्पर्द्धा में वृद्धि हो सकती है और रेलवे के बुनियादी ढाँचे का आधुनिकीकरण हो सकता है।
  • चुनौतियाँ:
    • PPP परियोजनाएँ मौजूदा अनुबंधों में विवाद, पूंजी की अनुपलब्धता और भूमि अधिग्रहण से संबंधित नियामक बाधाओं जैसे मुद्दों में उलझी हुई हैं।
    • भूमि अधिग्रहण में देरी होने के कारण PPP को व्यवहार में विनियमित करने में भारत सरकार का खराब रिकॉर्ड है।
    • ऐसा माना जाता है कि भारत में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के गैर-निष्पादनकारी परिसंपत्ति पोर्टफोलियो के एक बड़े हिस्से में बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं के लिये ऋण शामिल हैं।
    • कई क्षेत्रों में PPP परियोजनाएँ क्रोनी कैपिटलिज़्म के वाहक के रूप में तब्दील हो गई हैं।
    • बुनियादी ढाँचा क्षेत्र में कई PPP परियोजनाएँ "राजनीति से जुड़ी कंपानियों" द्वारा चलाई जाती हैं जिन्होंने अनुबंध हासिल करने के लिये राजनीतिक संपर्क का उपयोग किया होता है।
    • PPP कंपनियाँ कम राजस्व या लागत में वृद्धि जैसे कारणों का हवाला देकर अनुबंधों पर फिर से बातचीत करने के लिये हर अवसर का उपयोग करती हैं जो भारत में एक मानदंड बन गया है।

सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के प्रकार:

  • बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर (BOT): यह एक पारंपरिक PPP मॉडल है जिसमें निजी भागीदार डिज़ाइन, निर्माण, संचालन (अनुबंधित अवधि के दौरान) और सुविधा को सार्वजनिक क्षेत्र में वापस स्थानांतरित करने के लिये ज़िम्मेदार होते है।
    • निजी क्षेत्र के भागीदार को किसी परियोजना के लिये वित्त की व्यवस्था करनी होती है और इसके निर्माण एवं रखरखाव की ज़िम्मेदारी लेनी होती है।
    • सार्वजनिक क्षेत्र, निजी क्षेत्र के भागीदारों को उपयोगकर्त्ताओं से राजस्व एकत्र करने की अनुमति देगा। PPP मोड के तहत NHAI द्वारा अनुबंधित राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाएँ BOT मॉडल का एक प्रमुख उदाहरण है।
  • बिल्ड-ओन-ऑपरेट (BOO): इस मॉडल में नवनिर्मित सुविधा का स्वामित्व निजी पार्टी के पास रहेगा।
    • पारस्परिक रूप से नियमों और शर्तों पर सार्वजनिक क्षेत्र की भागीदार परियोजना द्वारा उत्पादित वस्तुओं एवं सेवाओं की 'खरीद' करने पर सहमति बनाई जाती है।
  • बिल्ड-ओन-ऑपरेट-ट्रांसफर (BOOT): इसके अंतर्गत समय पर बातचीत के बाद परियोजना को सरकार या निजी ऑपरेटर को स्थानांतरित कर दिया जाता है।
    • BOOT मॉडल का उपयोग राजमार्गों और बंदरगाहों के विकास के लिये किया जाता है।
  • बिल्ड-ऑपरेट-लीज़-ट्रांसफर (BOLT): इस मॉडल में सरकार निजी साझेदार को सुविधाओं के निर्माण, डिज़ाइन, स्वामित्त्व और लीज़ का अधिकार देती है तथा लीज अवधि के अंत में सुविधा का स्वामित्व सरकार को हस्तांतरित किया जाता है।
  • डिज़ाइन-बिल्ड-फाइनेंस-ऑपरेट(DBFO): इस मॉडल में अनुबंधित अवधि के लिये परियोजना के डिज़ाइन, उसके विनिर्माण, वित्त और परिचालन का उत्तरदायित्त्व निजी साझीदार पर होता है।
  • लीज़-डेवलप-ऑपरेट (LDO): इस प्रकार के निवेश मॉडल में या तो सरकार या सार्वजनिक क्षेत्र के पास नवनिर्मित बुनियादी ढाँचे की सुविधा का स्वामित्व बरकरार रहता है और निजी प्रमोटर के साथ लीज़ समझौते के रूप में भुगतान प्राप्त किया जाता है।
    • इसका पालन अधिकतर एयरपोर्ट सुविधाओं के विकास में किया जाता है।
  • इंजीनियरिंग, खरीद और निर्माण (EPC) मॉडल: इस मॉडल के तहत लागत पूरी तरह से सरकार द्वारा वहन की जाती है। सरकार निजी कंपनियों से इंजीनियरिंग कार्य के लिये बोलियाँ आमंत्रित करती है। कच्चे माल की खरीद और निर्माण लागत सरकार द्वारा वहन की जाती है। निजी क्षेत्र की भागीदारी न्यूनतम और इंजीनियरिंग विशेषज्ञता के प्रावधान तक सीमित होती है। इस मॉडल की एक समस्या यह है कि इससे सरकार पर वित्तीय बोझ बढ़ता है।
  • हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (HAM): भारत में नया HAM, BOT-एन्युइटी और EPC मॉडल का मिश्रण है। डिज़ाइन के अनुसार, सरकार वार्षिक भुगतान के माध्यम से पहले पाँच वर्षों में परियोजना लागत का 40% योगदान देगी। शेष भुगतान सृजित परिसंपत्तियों और विकासकर्त्ता के प्रदर्शन के आधार पर किया जाएगा।

आदर्श स्टेशन योजना:

  • विषय: रेल मंत्रालय की आदर्श स्टेशन योजना वर्ष 2009 में शुरू की गई थी। इसका उद्देश्य भारत के उपनगरीय स्टेशनों को आदर्श स्टेशनों में अद्यतन करना है।
    • इस योजना के तहत रेलवे स्टेशनों का चयन सुविधाओं के उन्नयन की पहचान की आवश्यकता पर आधारित है।
  • प्रमुख बिंदु:
    • आदर्श स्टेशनों को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित और उन्नत किया जाएगा जैसे:
      • स्टेशन भवन के अग्रभाग का सुधार।
      • यातायात संचालन को विधिवत सुव्यवस्थित करना
      • मंच की सतह में सुधार
      • मौजूदा प्रतीक्षालय और विश्रामालयों में सुधार
      • शौचालय की सुविधा
      • फुट ओवर ब्रिज का प्रावधान
      • लिफ्ट और एस्केलेटर आदि की व्यवस्था।
    • उन्नयन प्रक्रिया की निगरानी भारत सरकार और भारतीय रेलवे द्वारा की जाएगी।

आगे की राह

  • नई परियोजनाएँ, विशेष रूप से बड़े पैमाने पर पारगमन परियोजनाएँ, गतिशीलता बढ़ाने और भूमि उपयोग प्रतिरूप में बदलावों की शृंखला के लिये महत्त्वपूर्ण हैं। PPP में बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं को बेहतर और तेज़ी से वितरित करने की क्षमता है। वर्तमान में PPP अनुबंध राजकोषीय लाभों पर अधिक ध्यान केंद्रित करते हैं।
  • इस मॉडल को अपनाने से पहले रेल परियोजनाओं में निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने के संभावित लाभों और प्रभावोत्पादकता की गंभीरता के साथ मूल्यांकन की आवश्यकता है।

  UPSC सिविल सेवा परीक्षा विगत वर्ष के प्रश्न  

प्रश्न: सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के तहत संयुक्त उद्यमों के माध्यम से भारत में हवाई अड्डों के विकास का परीक्षण कीजिये। इस संबंध में अधिकारियों के सामने क्या चुनौतियाँ हैं? (मुख्य परीक्षा, 2017)

प्रश्न. ढाँचागत परियोजनाओं में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) की आवश्यकता क्यों है? भारत में रेलवे स्टेशनों के पुनर्विकास में PPP मॉडल की भूमिका का परीक्षण कीजिये। (मुख्य परीक्षा, 2022)

स्रोत: इकोनॉमिक टाइम्स

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