हिंदी साहित्य: पेन ड्राइव कोर्स
ध्यान दें:

डेली न्यूज़

अंतर्राष्ट्रीय संबंध

अमेरिका-ताइवान संबंध

  • 27 May 2022
  • 8 min read

प्रिलिम्स के लिये :

भारत और उसके पड़ोसी 

मेन्स के लिये:

भारत के हितों पर देशों की नीतियों और राजनीति का प्रभाव 

चर्चा में क्यों?   

जापान मे क्वाड शिखर सम्मेलन से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति ने चीन द्वारा आक्रमण की स्थिति में ताइवान को सैन्य सहायता प्रदान करने के संबंध में एक सवाल के जवाब में विवादास्पद बयान दिया है। 

  • इसने सवाल उठाया है कि क्या अमेरिका ताइवान पर रणनीतिक अस्पष्टता की अपनी दीर्घकालिक नीति से रणनीतिक स्पष्टता की ओर स्थानांतरित हो रहा है। 
  • क्वाड समूह में भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान शामिल हैं। 

US-Taiwan-Relations

ताइवान का मुद्दा: 

  • चीन-ताइवान संबंध: 
    • ताइवान, ताइवान जलडमरूमध्य में एक द्वीपीय क्षेत्र है, जो मुख्य भूमि चीन के तट पर स्थित है। 
    • 1945-1949 के चीनी गृहयुद्ध में कम्युनिस्ट ताकतों द्वारा पराजित होने के बाद चीन की सत्तारूढ़ कुओमितांग (राष्ट्रवादी सरकार)  ताइवान भाग गई। 
    • गृहयुद्ध में चीन और ताइवान के विभाजन के बाद चीन गणराज्य (ROC) सरकार को ताइवान में स्थानांतरित कर दिया गया था। दूसरी ओर, चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (CPC) ने मुख्य भूमि में पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना (PRC) की स्थापना की। 
      • PRC ने ताइवान को एक विश्वासघाती प्रांत के रूप में देखा है, हालाँकि वह ताइवान के साथ शांतिपूर्ण पुन: एकीकरण की प्रतीक्षा कर रहा है। 
    • इसके साथ ही ROC द्वारा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में अपनी स्थायी सीट बनाए रखने के लिये संयुक्त राष्ट्र की सदस्यता ज़ारी रखी गई। 
    • शीत युद्ध में PRC यूनियन ऑफ सोवियत सोशलिस्ट रिपब्लिक (USSR) और ROC संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ थाइसने चीन-ताइवान संबंधों को और अधिक तनावपूर्ण बना दिया। 
    • नतीजतन, 1950 के दशक में ताइवान में दो जलडमरूमध्य संकट हुए। 
  • चीन के साथ अमेरिका का सामंजस्य और उसके बाद की घटनाएंँ: 
    • अमेरिका और चीन ने 1970 के दशक में शीत युद्ध की बदलती भू-राजनीति के कारण सामंजस्य स्थापित किया, ताकि USSR के बढ़ते प्रभाव का मुकाबला किया जा सके। 
    • इसके बाद 1972 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति ने PRC की यात्रा की। 
    • बाद में ROC को संयुक्त राष्ट्र में आधिकारिक प्रतिनिधि के रूप में PRC द्वारा विस्थापित कर दिया गया। 
    • इसके बाद ही "एक-चीन सिद्धांत (One-Chine- Principle)” सामने आया। 
  • एक-चीन सिद्धांत और इसका प्रभाव: 
    • इसका मतलब यह है कि जो राष्ट्र PRC के साथ राजनयिक संबंध रखना चाहते हैं, उन्हें चीन के रूप में PRC को मान्यता देनी होगी न कि ROC को। 
    • इसके साथ ही चीन अपनी आर्थिक प्रणाली में सुधार के साथ-साथ एक बहु-दलीय लोकतंत्र के रूप में विकसित हुआ। 
    • तब से दोनों देश आर्थिक रूप से उलझ गए और लगातार प्रतिस्पर्द्धा करते रहे हैं। 

ताइवान मुद्दे पर अमेरिका का रुख:  

  • अमेरिका के रुख का विकास:: 
    • शंघाई कम्युनिक (1972), नॉर्मलाइज़ेशन कम्युनिक (1979) और 1982 कम्युनिक ताइवान के संबंध में अमेरिका-चीन की आपसी समझ को रेखांकित करने वाले तीन दस्तावेज़ हैं। 
    • 1979 की विज्ञप्ति के अनुसार, अमेरिका ताइवान को चीन का एक हिस्सा मानते हुए 'एक चीन सिद्धांत' को स्वीकार करता है। 
    • हालाँकि अमेरिका ने दोनों देशों के लोगों के नाम पर ताइवान के साथ अनौपचारिक संबंध बनाए रखना शुरू कर दिया। 
    • 1982 की विज्ञप्ति में चीन ने ताइवान संबंध अधिनियम, 1979 के प्रावधानों के अनुसार, अमेरिका द्वारा ताइवान को हथियारों की निरंतर आपूर्ति की संभावना पर अपनी चिंता व्यक्त की। 
    • इस तरह अमेरिका ने ताइवान की चिंताओं के साथ-साथ PRC की अपनी मान्यता को संतुलित किया है। 
  • ताइवान पर प्रभाव: 
    • ताइवान में डेमोक्रेटिक पीपुल्स पार्टी (DPP) स्वतंत्र निर्वाचन क्षेत्र का समर्थन करने वाली ताइवान की सबसे शक्तिशाली राजनीतिक शक्ति बन गई है। 
    • DPP चीन के प्रभाव रहित स्वयं के आर्थिक संबंधों का विस्तार करना चाहती है। 
    • चीन, ताइवान को उच्च भू-राजनीतिक महत्त्व वाला क्षेत्र मानता है क्योंकि यह जापान और दक्षिण चीन सागर के बीच प्रथम द्वीप शृंखला में केंद्रीय रूप से स्थित है। 
    • इस पूरे क्षेत्र में अमेरिका की सैन्य चौकियांँ हैं। इसलिये ताइवान पर नियंत्रण चीन के लिये एक महत्त्वपूर्ण सफलता होगी। 
    • लेकिन शांतिपूर्ण एकीकरण की संभावना बहुत कम है। 
    • साथ ही रूस-यूक्रेन संघर्ष के समानांतर तनाव बढ़ रहा है। 

आगे की राह 

  • रूस-यूक्रेन संघर्ष की पृष्ठभूमि में चीन के धैर्य और ताइवान के तेज़ी से स्वतंत्रता समर्थक झुकाव को देखते हुए विरोधियों के लिये एक मज़बूत संदेश आवश्यक हो जाता है। हो सकता है कि यह उस बिंदु पर पहुँच गया हो जहांँ सामरिक अस्पष्टता सामरिक स्पष्टता के लिये अपनी प्रासंगिकता खो रही हो 
  • हालाँकि एक और प्रशंसनीय व्याख्या यह हो सकती है कि इस संदेश का उद्देश्य अमेरिका द्वारा प्रतिक्रिया प्राप्त करना और भारत-प्रशांत के लिये चीन के गेम प्लान का अनुभव प्राप्त करने के लिये जल का परीक्षण करना हो। 

यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्षों के प्रश्न (PYQ): 

प्रश्न्र. 'ट्रांस-पैसिफिक पार्टनरशिप' के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये: (2016)  

  1. यह चीन और रूस को छोड़कर प्रशांत महासागर तटीय सभी देशों के मध्य एक समझौता है।
  2. यह केवल तटवर्ती सुरक्षा के प्रयोजन से किया गया सामरिक गठबंधन है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? 

(a) केवल 1 
(b) केवल 2 
(c) 1 और 2 दोनों 
(d) न तो 1 और न ही 2 

उत्तर: (d)  

स्रोत: द हिंदू 

एसएमएस अलर्ट
Share Page