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माइक्रोफाइनेंस इंस्टीट्यूशन हेतु भारतीय रिज़र्व बैंक के प्रस्ताव

  • 24 Jun 2021
  • 7 min read

प्रिलिम्स के लिये 

भारतीय रिज़र्व बैंक, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी, सूक्ष्म वित्त संस्थान,अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक, लघु वित्त बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक

मेन्स के लिये 

माइक्रोफाइनेंस इंस्टीट्यूशन हेतु भारतीय रिज़र्व बैंक के प्रस्ताव एवं इसका महत्त्व , गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी - सूक्ष्म वित्त संस्थान (NBFC-​MFIs) के रूप में अर्हता प्राप्त करने की शर्तें

चर्चा में क्यों?

हाल ही में भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने माइक्रोफाइनेंस इंस्टीट्यूशन (MFI) के लिये ब्याज दर पर कोई सीमा नहीं रखने का प्रस्ताव दिया तथा कहा कि सभी सूक्ष्म ऋणों को दिशा-निर्देशों के एक सामान्य सेट द्वारा विनियमित किया जाना चाहिये, भले ही उन्हें कोई भी दे।

प्रमुख बिंदु

Breaking-Barriers

प्रस्ताव:

  • RBI का उद्देश्य सभी विनियमित संस्थाओं के लिये माइक्रोफाइनेंस ऋणों की एक सामान्य परिभाषा का सुझाव देना है।
  • सूक्ष्म-वित्त संस्थानों के लिये आरबीआई के नियमों के तहत एक सूक्ष्म-वित्त उधारकर्ता की वार्षिक घरेलू आय ग्रामीण क्षेत्रों के लिये 1.25 लाख रुपए तथा शहरी /अर्द्ध-शहरी क्षेत्रों के लिये 2 लाख रुपए तक संपार्श्विक-मुक्त ऋण होना चाहिये
    • इस प्रयोजन के लिये 'परिवार' का अर्थ सामान्य रूप में एक साथ रहने वाले तथा एक ही रसोई से भोजन प्राप्त करने वाले व्यक्तियों का समूह है।
  • RBI ने घरेलू आय के प्रतिशत के रूप में घरेलू आय के सभी बकाया ऋण दायित्वों के लिये ब्याज के भुगतान तथा मूलधन के पुनर्भुगतान को अधिकतम 50% की सीमा के अधीन रखा है।
  • गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (NBFC)-MFI जैसी कोई भी अन्य NBFC बोर्ड द्वारा अनुमोदित नीति और उचित व्यवहार संहिता के आधार पर  निर्देशित होगी, जिससे प्रकटीकरण और पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी।
  • ब्याज दर के लिये कोई सीमा निर्धारित नहीं होगी। सूक्ष्म ऋणों हेतु कोई संपार्श्विक अनुमति नहीं होगी।
  • कोई पूर्व-भुगतान जुर्माना नहीं होना चाहिये ,जबकि सभी संस्थाओं को उधारकर्ताओं को उनकी पसंद के अनुसार साप्ताहिक, पाक्षिक या मासिक किश्तों का भुगतान करने की अनुमति देनी होगी।

प्रस्ताव का महत्त्व: 

  • RBI ने इस कदम से माइक्रोफाइनेंस सेक्टर की परिपक्वता पर भरोसा जताया है।
  • यह एक दूरदर्शी कदम है जहाँ पारदर्शी शर्तों पर उचित ब्याज दर तय करने की ज़िम्मेदारी संस्था की है।

माइक्रोफाइनेंस इंस्टीट्यूशन (MFI) :

  • यह वित्तीय सेवा का एक रूप है, जो गरीब और कम आय वाले परिवारों को लघु ऋण और अन्य वित्तीय सेवाएँ प्रदान करता है।
  • माइक्रोफाइनेंस प्रदान करने वाले संस्थानों की संख्या और माइक्रोफाइनेंस ग्राहकों को उपलब्ध कराए गए क्रेडिट की मात्रा दोनों में वृद्धि के मामले में पिछले दो दशकों में भारतीय माइक्रोफाइनेंस क्षेत्र में अभूतपूर्व वृद्धि देखी गई है।
  • माइक्रो क्रेडिट विभिन्न संस्थागत चैनलों के माध्यम से वितरित किया जाता है, जैसे,
  • MFI वित्तीय कंपनियाँ उन लोगों को छोटे ऋण प्रदान करती हैं जो समाज के वंचित और कमज़ोर वर्गों से हैं तथा जिनकी बैंकिंग सुविधाओं तक पहुँच नहीं है। 
    • सूक्ष्म ऋण का अभिप्राय अलग-अलग देशों में भिन्न होता है। भारत में 1 लाख रुपए से कम के सभी ऋणों को माइक्रोलोन या सूक्ष्म ऋण माना जा सकता है।
  • महत्त्व :
    • यह वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने के लिये तैयार किया गया एक आर्थिक उपकरण है जो गरीब और निम्न-आय वाले परिवारों को गरीबी से बाहर निकालने, उनकी आय के स्तर को बढ़ाने तथा समग्र जीवन स्तर में सुधार करने में सक्षम बनाता है।
    • यह राष्ट्रीय नीतियों की उपलब्धि को सुगम बना सकता है जो गरीबी स्तर में  कमी करके, महिला सशक्तीकरण, कमज़ोर समूहों को सहायता तथा उनके जीवन स्तर में सुधार को लक्षित करती है।

गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी - सूक्ष्म वित्त संस्थान (NBFC-​MFIs) 

  • NBFC-​MFI एक गैर-जमा धारक वाली वित्तीय कंपनी है।
  • NBFC-MFI के रूप में अर्हता प्राप्त करने की शर्तें:
    • 5 करोड़ रुपए की न्यूनतम शुद्ध स्वामित्व वाली निधि  (NOF) । 
    • अर्हता संपत्ति की  प्रकृति में  इसकी शुद्ध संपत्ति का कम-से-कम 85% होना चाहिये।
      • अर्हता संपत्ति (Qualifying Assets ) वे संपत्तियाँ हैं जिनके पास अपने इच्छित उपयोग या बिक्री के लिये पर्याप्त समय है।
  • NBFC-​MFI और अन्य NBFC के बीच अंतर यह है कि जहाँ अन्य NBFC बहुत उच्च स्तर पर काम कर सकती हैं, वहीं ​MFI केवल लघु स्तर के सामाजिक पहलू को पूरा करते हैं, जिसमें ऋण के रूप में छोटी राशि की आवश्यकता होती है।

स्रोत : इंडियन एक्सप्रेस

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