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विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

‘सतत’ पहल

  • 29 Sep 2018
  • 5 min read

चर्चा में क्यों?

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, 1 अक्टूबर, 2018 को नई दिल्ली में पीएसयू ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (ओएमसी, यानी आईओसी, बीपीसीएल और एचपीसीएल) के साथ एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EoI) आमंत्रित करते हुए एक अभिनव पहल सतत् (SATAT) की शुरुआत करेंगे।

  • इस पहल के तहत उद्यमियों से संपीड़ित जैव-गैस (Compressed Bio-Gas-CBG) उत्पादन संयंत्र स्थापित करने और स्वचालित ईंधन (Automotive Fuel) में CBG के उपयोग हेतु बाज़ार में इसकी उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिये कहा गया है।

उद्देश्य

  • सतत (SATAT) नामक इस पहल का उद्देश्य किफायती परिवहन के लिये सतत विकल्प (Sustainable Alternative towards Affordable Transportation-SATAT) प्रदान करना है जो वाहन-उपयोगकर्त्ताओं के साथ-साथ किसानों और उद्यमियों दोनों को लाभान्वित करेगा।

महत्त्व

  • इस महत्त्वपूर्ण पहल में अधिक किफायती परिवहन ईंधन, कृषि अवशेषों, मवेशियों का गोबर और नगरपालिका के ठोस अपशिष्ट के बेहतर उपयोग के साथ-साथ किसानों को अतिरिक्त राजस्व स्रोत प्रदान करने की क्षमता है।

कृषि अवशेष, गोबर और ठोस कचरे को CBG में परिवर्तित करने के लाभ

  • अपशिष्ट प्रबंधन, प्रदूषण तथा कार्बन उत्सर्जन में कमी।
  • किसानों के लिये अतिरिक्त राजस्व का स्रोत।
  • उद्यमिता, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और रोज़गार को बढ़ावा।
  • जलवायु परिवर्तन लक्ष्यों को प्राप्त करने हेतु राष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं में मदद।
  • प्राकृतिक गैस और कच्चे तेल के आयात में कमी।
  • कच्चे तेल/गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव के विरुद्ध सुरक्षा।

CBG की उत्पादन क्षमता तथा स्रोत

  • भारत में विभिन्न स्रोतों से संपीड़ित जैव-गैस के उत्पादन की अनुमानित क्षमता प्रतिवर्ष लगभग 62 मिलियन टन है।
  • संपीड़ित जैव-गैस संयंत्रों को मुख्य रूप से स्वतंत्र उद्यमियों के माध्यम से स्थापित करने का प्रस्ताव है।
  • इन संयंत्रों में उत्पादित CBG को हरित परिवहन ईंधन विकल्प के रूप में विपणन के लिये ओएमसी के ईंधन स्टेशन नेटवर्क में अधिक संख्या में सिलेंडरों के माध्यम से पहुँचाया जाएगा।
  • देश में 1,500 मज़बूत सीएनजी स्टेशन नेटवर्क वर्तमान में 32 लाख गैस आधारित वाहनों के माध्यम से जनता की सेवा कर रहे हैं।
  • जैव ईंधन के क्षेत्र में कार्यरत समूह, जैव ईंधन पर राष्ट्रीय नीति 2018 के तहत स्थापित, संपीड़ित जैव-गैस के लिये एक अखिल भारतीय मूल्य निर्धारण मॉडल की प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
  • उद्यमी निवेश पर रिटर्न बढ़ाने के लिये जैव-उर्वरक, कार्बन डाइऑक्साइड सहित इन संयंत्रों के माध्यम से अन्य उप-उत्पादों को अलग कर बाज़ार में बेचने में सक्षम होंगे।
  • जैव ईंधन पर राष्ट्रीय नीति, 2018 CBG समेत उन्नत जैव-ईंधन को बढ़ावा देने के लिये सक्रिय रूप से ज़ोर देती है।
  • भारत सरकार ने इस साल की शुरुआत में गोबर-धन (Galvanizing Organic Bio-Agro Resources Money - Dung-Money)) योजना शुरू की थी ताकि खेतों में मवेशियों के गोबर और ठोस अपशिष्ट को CBG तथा कंपोस्ट में परिवर्तित किया जा सके।
  • बजट 2018-19 में इस योजना के मुख्यत: दो उद्देश्य हैं : गाँवों को स्वच्छ बनाना एवं पशुओं और अन्य प्रकार के जैविक अपशिष्ट से अतिरिक्त आय तथा ऊर्जा उत्पन्न करना।
  • गोबर-धन योजना के अंतर्गत पशुओं के गोबर और खेतों के ठोस अपशिष्ट पदार्थों को कम्पोस्ट, बायोगैस, बायो-CNG में परिवर्तित किया जाएगा।
  • संपीड़ित जैव-गैस विभिन्न बायोमास/अपशिष्ट स्रोतों से उत्पादित की जा सकती है, जिसमें कृषि अवशेष, नगर पालिका ठोस अपशिष्ट, गन्ने का रस निकालने के बाद बचे अवशेष, डिस्टिलरी के अवशिष्ट, मवेशियों का गोबर और सीवेज उपचार संयंत्रों के अपशिष्ट शामिल हैं।
  • मौजूदा समय तथा भविष्य के बाज़ारों में घरेलू और खुदरा उपयोगकर्त्ताओं के लिये आपूर्ति को बढ़ावा देने हेतु संपीड़ित बायो-गैस नेटवर्क को सिटी गैस वितरण (CGD) नेटवर्क के साथ एकीकृत किया जा सकता है।
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