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भारत में अनुसंधान एवं विकास पर व्यय

  • 02 May 2020
  • 5 min read

प्रीलिम्स के लिये:

भारत में अनुसंधान एवं विकास पर व्यय

मेन्स के लिये:

भारत में अनुसंधान और विकास की स्थिति 

चर्चा में क्यों?

'राष्ट्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी सर्वेक्षण' 2018 पर आधारित ‘अनुसंधान एवं विकास सांख्यिकी तथा संकेतक’ 2019-20 के अनुसार, अनुसंधान एवं विकास (Research and Development- R&D में भारत का सकल व्यय वर्ष 2008 से 2018 के बीच बढ़कर तीन गुना हो गया है।

मुख्य बिंदु:

  • यह सर्वेक्षण 'विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग' (Department of Science and Technology- DST) के तहत आने वाले 'राष्ट्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी प्रबंधन सूचना प्रणाली' (National Science and Technology Management Information- NSTMIS) के अंतर्गत किया गया है।

अनुसंधान और विकास पर व्यय:

  • अनुसंधान और विकास में भारत का सकल व्यय वर्ष 2008 से 2018 के दौरान बढ़कर लगभग तीन गुना हो गया है।
  • देश में अनुसंधान और विकास पर सकल व्यय (Gross Expenditure on Research and Development- GERD) वित्तीय वर्ष 2007-08 के 39,437.77 करोड़ रुपए से बढ़कर वित्तीय वर्ष 2017-18 में 1,13,825.03 करोड़ रुपए हो गया है।
  • भारत का प्रति व्यक्ति R&D व्यय वित्तीय वर्ष 2007-08 में 29.2 डॉलर से बढ़कर वित्तीय वर्ष 2017-18 में बढ़कर 47.2 डॉलर हो गया है।
  • वित्तीय वर्ष 2017-18 में ब्रिक्स देशों में भारत ने अपने सकल घरेलू उत्पाद (Gross Domestic Product- GDP) का 0.7% ही अनुसंधान और विकास  पर व्यय किया, जबकि अन्य देशों में ब्राज़ील ने 1.3%, रूसी संघ ने 1.1%, चीन ने 2.1% और दक्षिण अफ्रीका ने 0.8% खर्च किया।

बाह्य (Extramural) अनुसंधान और विकास को समर्थन:

  • वित्तीय वर्ष 2016-17 के दौरान ‘विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग’ ने कुल बाह्य अनुसंधान और विकास के समर्थन में क्रमश: 63%  का योगदान दिया। 
    • बाह्य (Extramural) अनुसंधान में किसी संस्थागत इकाई द्वारा इकाई की सीमा से बाहर किये गए सभी अनुसंधान एवं विकास व्यय शामिल होते हैं।
  • सरकार द्वारा विज्ञान और प्रौद्योगिकी क्षेत्र में प्रारंभ की गई कई पहलों के कारण बाहरी अनुसंधान और विकास परियोजनाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है। 
  • देश में फैले अनुसंधान और विकास प्रतिष्ठानों में लगभग 5.52 लाख कर्मचारी कार्यरत हैं।

शोधकर्त्ताओं की संख्या में वृद्धि:

  • भारत में प्रति मिलियन आबादी पर शोधकर्त्ताओं की संख्या वर्ष 2000 में 110  बढ़कर वर्ष 2017 में 255 हो गई है।
  • भारत में विज्ञान और अभियांत्रिकी (Science and Engineering) में पीएचडी प्राप्त करने वाले लोह्गों की  संख्या के मामले में अमेरिका और चीन के बाद तीसरे स्थान पर है।
  • वित्तीय वर्ष 2017-18 के दौरान प्रति शोधकर्त्ता भारत का अनुसंधान और विकास व्यय 185 रूस, इज़राइल, हंगरी, स्पेन और ब्रिटेन से कहीं अधिक था।

वैज्ञानिक प्रकाशन में तीसरा स्थान:

  • भारत वैज्ञानिक प्रकाशन वाले देशों की सूची में तीसरे स्थान पर आ गया है
  • भारत में वैज्ञानिक प्रकाशन की वृद्धि दर क्रमशः 8.4% है जबकि विश्व का औसत क्रमशः 1.9% है। 

पेटेंट फाइलिंग:

  • विश्व में निवासी पेटेंट फाइलिंग गतिविधि के मामले में भारत 9 वें स्थान पर है वित्तीय वर्ष 2017-18 के दौरान भारत में कुल 47,854 पेटेंट दर्ज किये गए थे। जिसमें से 15,550 (32 प्रतिशत) पेटेंट भारतीयों द्वारा दायर किये गए थे।
  • विश्व बौद्धिक संपदा संगठन’ (World Intellectual Property Organization- WIPO) के अनुसार, भारत का पेटेंट कार्यालय विश्व के शीर्ष 10 पेटेंट दाखिल करने वाले कार्यालयों में 7 वें स्थान पर है। 

स्रोत: पीआईबी

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