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प्रिलिम्स फैक्ट्स

  • 17 Sep, 2022
  • 13 min read
प्रारंभिक परीक्षा

एशियाई स्याहगोश

एशियाई चीते के समरूप दिखने वाला तथा भारत के कुलीन वर्ग द्वारा तरह खेल में इस्तेमाल किया जाने वाला एशियाई स्याहगोश/कैरॅकेल अपने अस्तित्त्व के लिये संघर्ष कर रहा है, हालाँकि चीते और स्याहगोश की अतीत में लगभग समान आबादी थी।

Asiatic-Caracal

स्याहगोश (Caracal):

  • वैज्ञानिक नाम: कैरॅकेल कैरॅकेल श्मिट्ज़ी
  • परिचय:
    • एशियाई स्याहगोश मध्यम आकार की और भारत में स्थानीय रूप से संकटग्रस्त कैट स्पीशीज/प्रजाति है, जिसके व्यापक रूप से भारत में विलुप्त होने की सूचना है।
    • इसे इसके फारसी नाम सियाहगोश या 'ब्लैक ईयर' से भी जाना जाता है।
  • विस्तार:
    • वे ज़्यादातर राजस्थान, गुजरात और मध्य प्रदेश के क्रमशः कच्छ, मालवा पठार, अरावली पहाड़ी शृंखला में पाए जाते हैं।
    • भारत के अलावा स्याहगोश/कैरॅकेल अफ्रीका, मध्य-पूर्व, मध्य और दक्षिण एशिया के कई देशों में पाया जाता है।
  • प्राकृतिक वास:
    • इनका प्राकृतिक वास अर्द्ध-रेगिस्तानी परिदृश्य, सवाना, झाड़ीदार भूमि, शुष्क वन और नम आर्द्रभूमि या सदाबहार वनों में होता है।
    • यह खुले, शुष्क और झाड़ीदार प्राकृतिक वास में रहता है।
  • खतरे:
    • बड़े पैमाने पर शिकार, अवैध व्यापार और प्राकृतिक आवासों के नुकसान को प्रजातियों के लिये गंभीर खतरा माना जाता है।
  • सुरक्षा स्थिति:
  • संरक्षण पहल:
    • 2021 में राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड और पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने कैरॅकेल/स्याहगोश को गंभीर रूप से लुप्तप्राय प्रजातियों के रिकवरी कार्यक्रम के तहत गंभीर रूप से लुप्तप्राय प्रजातियों की सूची में शामिल किया।।

प्रजाति रिकवरी कार्यक्रम:

  • यह वन्यजीव आवास का एकीकृत विकास (IDWH) योजना के तीन घटकों में से एक है
  • IDWH को वर्ष 2008-2009 में केंद्र द्वारा प्रायोजित योजना के रूप में शुरू किया गया। यह संरक्षित क्षेत्रों (राष्ट्रीय उद्यानों, वन्यजीव अभयारण्यों, संरक्षण रिज़र्व और बाघ अभयारण्यों को छोड़कर सामुदायिक रिज़र्व), संरक्षित क्षेत्रों के बाहर वन्यजीवों की सुरक्षा और गंभीर रूप से लुप्तप्राय प्रजातियों के प्राकृतिक वासों को सुरक्षित करने के लिये रिकवरी कार्यक्रमों को सहायता प्रदान करने हेतु शुरू किया गया था।
  • गंभीर रूप से संकटापन्न प्रजाति पुनर्प्राप्ति कार्यक्रम में 22 प्रजातियाँ हैं।
    • स्नो लेपर्ड, बस्टर्ड (फ्लोरिकन सहित), डॉल्फिन, हंगुल, नीलगिरि तहर, समुद्री कछुए, डुगोंग, एडिबल नेस्ट स्विफ्टलेट, एशियाई जंगली भैंस, निकोबार मेगापोड, मणिपुर ब्रो-एंटलर्ड हिरण, गिद्ध, मालाबार सिवेट, भारतीय गैंडा, एशियाई शेर, दलदल हिरण, जेर्डन कौरसर, उत्तरी नदी टेरापिन, क्लाउडेड लेपर्ड, अरब सागर हंपबैक व्हेल, रेड पांडा और काराकल।

  UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न:  

प्रश्न. निम्नलिखित पर विचार कीजिये: (2012)

  1. ब्लैक नेक क्रेन
  2. चीता
  3. उड़न गिलहरी
  4. हिम तेंदुआ

उपर्युक्त में से कौन-से स्वाभाविक रूप से भारत में पाए जातें हैं? 

(a) केवल 1, 2 और 3
(b) केवल 1, 3 और 4
(c) केवल 2 और 4
(d) 1, 2, 3 और 4

उत्तर: (b)

व्याख्या:

  • ब्लैक नेक क्रेन आमतौर पर तिब्बती और ट्रांस-हिमालयी क्षेत्र में पाई जाती है। सर्दियों में वे भारतीय हिमालय के कम ठंडे क्षेत्रों में चले जाते हैं। IUCN सूची में इसे निकट संकट के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। अत: कथन 1 सही है।
  • चीता भारत में विलुप्त प्रजाति है। वे स्वतंत्रता पूर्व काल के दौरान मुख्य रूप से शिकार किये जाने के कारण विलुप्त हो गए। बीसवीं शताब्दी की शुरुआत तक इसकी प्रजातियाँ पहले से ही कई क्षेत्रों में विलुप्त होने की ओर बढ़ रही थीं। भारत में एशियाई चीतों की उपस्थिति का अंतिम भौतिक प्रमाण वर्ष 1947 में पूर्वी मध्य प्रदेश या उत्तरी छत्तीसगढ़ में मिला था। IUCN सूची में इसे संवेदनशील के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। अत: कथन 2 सही नहीं है।
  • उड़न गिलहरी पश्चिमी घाट, पूर्वोत्तर और अन्य भारतीय जंगलों में पाई जाती है। IUCN सूची में इसे कम चिंताजनक के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। अत: कथन 3 सही है।
  • हिम तेंदुआ जिसे IUCN सूची में संवेदनशील के रूप में सूचीबद्ध किया गया है, हिमालय पर्वतमाला में पाया जाता है। अत: कथन 4 सही है।

अतः विकल्प (b) सही है।

स्रोत: डाउन टू अर्थ


विविध

Rapid Fire (करेंट अफेयर्स): 17 सितंबर, 2022

हैदराबाद मुक्ति दिवस

तेलंगाना सरकार और केंद्र सरकार द्वारा हैदराबाद की मुक्ति के 75 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर 17 सितंबर, 2022 को हैदराबाद मुक्ति दिवस के रूप में मनाया जा रहा है, जो निज़ाम शासन के तहत भारतीय संघ के साथ तत्कालीन हैदराबाद राज्य के विलय को दर्शाता है। हैदराबाद भारत के सबसे बड़े मूल निवासी/रियासतों में से एक था। यह निजाम द्वारा शासित था जिसने ब्रिटिश संप्रभु की सर्वोच्चता को स्वीकार किया था। जूनागढ़ के नवाब और कश्मीर के शासक की तरह हैदराबाद का निज़ाम भारत की आज़ादी यानी 15 अगस्त, 1947 से पूर्व भारत में शामिल नहीं हुआ था। उसे पाकिस्तान और मुस्लिम मूल के नेताओं द्वारा एक स्वतंत्र शक्ति के रूप में अपना अस्तित्त्व बनाए रखने तथा एकीकरण का विरोध करने के लिये अपने सशस्त्र बलों में सुधार करने हेतु प्रोत्साहित किया गया था। इस सैन्य सुधार के दौरान, हैदराबाद राज्य में आंतरिक अराजकता का उदय हुआ, जिसके कारण 13 सितंबर, 1948 को भारतीय सेना को ‘ऑपरेशन पोलो’ (हैदराबाद को भारत संघ में मिलाने के लिये सैन्य अभियान) के तहत हैदराबाद भेजा गया था, क्योंकि हैदराबाद में कानून-व्यवस्था की स्थिति ने दक्षिण भारत की शांति के लिये खतरा पैदा कर दिया। सैनिकों को रज़ाकारों (एकीकरण का विरोध करने वाले निजी मिलिशिया) के हल्के-फुल्के प्रतिरोध का सामना करना पड़ा और 13-18 सितंबर के मध्य सेना ने राज्य पर पूर्ण नियंत्रण कर लिया। अंततः हैदराबाद का भारत में विलय हो गया।

स्‍वच्‍छता पखवाड़ा 

रेल मंत्री अश्विनी वैष्‍णव ने 16 सितंबर, 2022 को स्‍वच्‍छता पखवाड़े की शुरुूआत की और पर्यावरण की स्थिरता पर वार्षिक रिपोर्ट जारी की। रेल मंत्रालय 16 सितंबर से 02 अक्तूबर तक स्‍वच्‍छता पखवाड़ा मना रहा है। स्‍वच्‍छता आम लोगों के लिये एक मिशन बन गया है। स्वच्छता पखवाडा अप्रैल 2016 में शुरू किया गया था जिसका उद्देश्य भारत सरकार के मंत्रालयों/ विभागों के कार्यक्षेत्र में स्वच्छता के मुद्दों और प्रथाओं पर गहनता से बल देने के लिये पखवाड़े का आयोजन करना है। पखवाड़ा गतिविधियों के लिये मंत्रालयों की पहल में सहायता हेतु वार्षिक कलेंडर पहले से ही मंत्रालयों के मध्य परिचालित किया गया है। स्वच्छता पखवाड़ा मना रहे मंत्रालयों की स्वच्छता समीक्षा की ऑनलाइन मॉनीटरिंग प्रणाली का उपयोग करके नज़दीकी से मॉनीटरिंग की जाती है, जिस पर वे स्वच्छता गतिविधियों से संबंधित कार्य योजनाएँ, चित्र, वीडियो अपलोड और साझा करते हैं। स्वच्छता पखवाड़ा मनाने के बाद मंत्रालय/विभाग प्रेस कॉन्फ्रेंस तथा अन्य संवाद के तरीकों के माध्यम से अपनी उपलब्धियों की घोषणा करते हैं। पखवाड़ा के दौरान पखवाड़ा मना रहे मंत्रालयों को स्वच्छता मंत्रालय के रूप में समझा जाता है और उनके कार्यक्षेत्र में गुणात्मक स्वच्छता सुधारों की अपेक्षा की जाती है। पखवाड़े में स्‍वच्‍छता के साथ टीबी रोगियों की सेवा पर ध्‍यान दिया जाएगा तथा महा-रक्‍तदान शिविर आयोजित किये जाएंगे। पर्यावरण की स्थिरता पर वार्षिक रिपोर्ट 2020-21 रेलवे द्वारा हरित एवं स्‍वच्‍छ ऊर्जा को बढावा देने के प्रमुख बिंदुओं पर आधारित एक समग्र दस्‍तावेज़ है। यह रिपोर्ट रेलवे के शून्‍य कार्बन उत्‍सर्जन प्रयासों को दर्शाती है।

एनएमडीसी को राजभाषा कीर्ति पुरस्कार 

राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा सूरत में 14 सितंबर, 2022 को आयोजित हिंदी दिवस समारोह के दौरान वर्ष 2021-22 के लिये राजभाषा कीर्ति पुरस्कार वितरित किये गए। समारोह की अध्यक्षता केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कीराष्ट्रीय खनिज विकास निगम लिमिटेड (NMDC) को सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की श्रेणी में राजभाषा कीर्ति-तृतीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। एनएमडीसी के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक सुमित देब ने यह पुरस्कार राज्यसभा के उप सभापति हरिवंश नारायण सिंह से ग्रहण किया। भारत सरकार के सार्वजनिक उपक्रम के रूप में वर्ष 1958 में निगमित एनएमडीसी भारत की सबसे बड़ी लौह अयस्क उत्पादक नवरत्न कंपनी है। इस्पात मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में निगम अपनी स्थापना के बाद से ही देश के कुछ सबसे दूरदराज़ के स्थानों में ताँबा, रॉक फॉस्फेट, चूना पत्थर, हीरा, टंगस्टन और समुद्री तट रेत सहित खनिजों की एक विस्तृत शृंखला का अन्वेषण कार्य कर रहा है| वर्ष 2021 में राजभाषा को बढ़ावा देने के क्रम में एनएमडीसी को इस्पात मंत्रालय के इस्पात राजभाषा सम्मान से सम्मानित किया गया। एनएमडीसी की रचनात्मक और तकनीकी लेखन को प्रोत्साहित करने वाली गृह पत्रिका 'खनिज भारती' को वर्ष 2021 में प्रकाशित पत्रिका की श्रेणी में प्रथम स्थान प्राप्त हुआ। 


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