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प्रीलिम्स फैक्ट्स

  • 04 Jun, 2020
  • 12 min read
प्रारंभिक परीक्षा

प्रीलिम्स फैक्ट्स: 04 जून, 2020

भारतीय औषधि एवं होम्योपैथी के लिये औषधिकोश आयोग

Pharmacopoeia Commission for Indian Medicine & Homoeopathy

हाल ही में प्रधानमंत्री की अध्‍यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आयुष मंत्रालय के अंतर्गत अधीनस्‍थ कार्यालय के रूप में ‘भारतीय औषधि एवं होम्‍योपैथी के लिये औषधकोश आयोग’ (Pharmacopoeia Commission for Indian Medicine & Homoeopathy- PCIM&H) की पुनर्स्थापना को अपनी मंज़ूरी दे दी।

प्रमुख बिंदु: 

  • इस आयोग में वर्ष 1975 में उत्तर प्रदेश के गाज़ियाबाद में स्थापित दो केंद्रीय प्रयोगशालाओं [भारतीय औषधि के लिये औषधिकोष प्रयोगशाला (Pharmacopoeia Laboratory for Indian Medicine- PLIM) और होम्योपैथिक औषधिकोष  प्रयोगशाला (Homoeopathic Pharmacopoeia Laboratory- HPL)] का विलय किया गया है।
  • आयुष मंत्रालय के अंतर्गत वर्ष 2010 में स्‍थापित ‘भारतीय औषधि एवं होम्‍योपैथी के लिये औषधकोश आयोग’ (PCIM&H) एक स्‍वयत्‍तशासी संगठन है।

तीनों संस्थानों के विलय का उद्देश्य: 

  • इस विलय का उद्देश्‍य प्रभावी विनियमन एवं गुणवत्‍ता नियंत्रण की दिशा में आयुर्वेद, सिद्ध, यूनानी एवं होम्‍योपैथी दवाओं के नतीज़ों के मानकीकरण को बढ़ाने के लिये तीनों संस्थानों की बुनियादी ढाँचा सुविधाओं, तकनीकी जनशक्ति और वित्‍तीय संसाधनों का अधिकतम उपयोग करना है।
  • इसका एक अन्य उद्देश्य ‘ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स रूल्स, 1945’ (Drugs and Cosmetics Rules, 1945) में आवश्यक संशोधन करके PCIM&H एवं इसकी प्रयोगशालाओं के विलय वाले ढाँचे को कानूनी दर्जा देना भी है।

विलय का लाभ:

  • यह विलय आयुष दवा मानकों के सामंजस्यपूर्ण विकास तथा औषधिकोष एवं सूत्रीकरण (पंजीकृत किये गए नुस्खे) के प्रकाशन की सुविधा प्रदान करेगा।
  • विलय के बाद PCIM&H के पास आयुष मंत्रालय के अंतर्गत पर्याप्‍त प्रशासनिक ढाँचा होगा जिससे औषधकोष आधारित कार्य की क्षमता एवं परिणामों में वृद्धि तथा आयुर्वेद, सिद्ध, यूनानी और होम्‍योपैथी औषधियों के औषधकोश मानकों के परस्‍पर हितों को हासिल करने का प्रयास किया जाएगा 
  • इससे औषधियों के मानकीकरण आधारित कार्य के दुहराव एवं ओवरलेपिंग को रोका जा सकेगा जिससे संसाधनों का प्रभावी तरीके से अधिकतम इस्‍तेमाल हो सकेगा।

स्वदेस

SWADES

COVID-19 के कारण वंदे भारत मिशन के तहत विश्व के विभिन्न देशों से वापस लौटने वाले कुशल कर्मचारियों के सर्वश्रेष्‍ठ उपयोग हेतु भारत सरकार ने इन नागरिकों का कौशल मानचित्रण करने के लिये एक नई पहल ‘स्‍वदेस’ (SWADES- Skilled Workers Arrival Database for Employment Support) शुरू की।

उद्देश्य:

  • इसका उद्देश्य भारतीय एवं विदेशी कंपनियों की मांग को समझने और उसे पूरा करने के लिये उनके कौशल एवं अनुभव के आधार पर योग्य नागरिकों का एक डेटाबेस बनाना है।  

प्रमुख बिंदु: 

  • यह भारत सरकार के कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय, नागरिक उड्डयन मंत्रालय और विदेश मंत्रालय की एक संयुक्त पहल है। 
  • इस पहल के तहत लौटने वाले नागरिकों को एक ऑनलाइन ‘स्‍वदेस स्किल्स कार्ड’ भरना आवश्यक है।
    • एकत्रित जानकारी को देश में नियोजन के उपयुक्त अवसरों के लिये कंपनियों के साथ साझा किया जाएगा।
    • यह कार्ड राज्य सरकारों, उद्योग संघों एवं नियोक्ताओं सहित प्रमुख हितधारकों के साथ विचार-विमर्श के ज़रिये लौटने वाले नागरिकों को रोज़गार के उपयुक्त अवसर प्रदान करने के लिये एक रणनीतिक ढाँचा प्रदान करेगा।

स्‍वदेस कौशल फॉर्म/कार्ड:

  • ‘स्‍वदेस कौशल फॉर्म’ को 30 मई, 2020 को ऑनलाइन प्रसारित किया गया था और 3 जून, 2020 तक इसमें लगभग 7000 पंजीकरण किये जा चुके हैं। 
  • अब तक एकत्र किए गए आँकड़ों में जहाँ से नागरिक वापस लौट रहे हैं उन शीर्ष देशों में संयुक्त अरब अमीरात, ओमान, कतर, कुवैत और सऊदी अरब शामिल हैं।
  • कौशल मानचित्रण के अनुसार इन नागरिकों को मुख्य रूप से तेल एवं गैस, विनिर्माण, पर्यटन, मोटर वाहन और विमानन जैसे क्षेत्रों में नियोजित किया गया था।

श्यामा प्रसाद मुखर्जी ट्रस्ट

Syama Prasad Mookerjee Trust

हाल ही में प्रधानमंत्री की अध्‍यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ‘कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट’ (Kolkata Port Trust) का नया नाम ‘श्‍यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट ट्रस्ट’ (Syama Prasad Mookerjee Trust) रखने की अनुमति दी।  

प्रमुख बिंदु: 

  • उल्लेखनीय है कि ‘कोलकाता पोर्ट ट्रस्‍ट’ के ‘बोर्ड ऑफ ट्रस्‍टी’ ने 25 फरवरी, 2020 को हुई बैठक में एक प्रस्‍ताव पारित कर विधिवेत्‍ता, शिक्षक, विचारक एवं जन साधारण के नेता श्‍यामा प्रसाद मुखर्जी की बहुआयामी प्रतिभा का सम्मान करते हुए ‘कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट’ को नया नाम ‘श्‍यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट ट्रस्ट’ करने की मंज़ूरी दी थी।
  • कोलकाता बंदरगाह पहला प्रमुख बंदरगाह होने के साथ-साथ नदी के किनारे स्थित देश का पहला बंदरगाह है जो समुद्र से 203 किमी. की दूरी पर स्थित है।
  • यह हुगली नदी पर स्थित है। इस नदी में कई तीव्र मोड़ होने के कारण इसे एक कठिन नौवहन मार्ग माना जाता है। 
  • इस मार्ग को वर्ष भर नौवहन योग्य बनाए रखने के लिये निष्कर्षण (Dredging) संबंधी गतिविधियाँ चलती रहतीं हैं।
  • वर्ष 1975 में निर्मित फरक्का बैराज ने इस बंदरगाह की समस्या को तब काफी कम कर दिया जब गंगा के पानी को भागीरथी-हुगली नदी प्रणाली की तरफ मोड़ दिया गया।

देश के अन्य बंदरगाहों के परिवर्तित नाम:

  • वर्ष 1988 में भारत सरकार ने ‘न्हावा शेवा पोर्ट ट्रस्ट’ (Nhava Sheva Port Trust) का नाम बदलकर ‘जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्‍ट’ कर दिया।
  • वर्ष 2011 में ‘तूतीकोरन पोर्ट ट्रस्‍ट’ का नाम बदलकर ‘वी. ओ. चिदंबरनार पोर्ट ट्रस्‍ट’ कर दिया गया। 
  • ‘एन्‍नौर बंदरगाह लिमिटेड’ को जाने माने स्‍वाधीनता सेनानी एवं तमिलनाडु के पूर्व मुख्‍यमंत्री के. कामराजार के सम्‍मान में ‘कामराजार बंदरगाह लिमिटेड’ नाम दिया गया। 
  • वर्ष 2017 में गुजरात के ‘कांडला बंदरगाह’ का नाम बदलकर ‘दीन दयाल बंदरगाह’ कर दिया गया।

एफएएसटी   

FAST   

चीन का ‘पाँच सौ मीटर एपर्चर वाला गोलाकार टेलीस्कोप’ (Five-hundred-meter Aperture Spherical Telescope- FAST) सितंबर, 2020 में एलियन के संकेतों की खोज शुरू करेगा।

FAST

प्रमुख बिंदु: 

  •  जनवरी, 2020 में चीन द्वारा इस टेलीस्कोप की पहली तस्वीर विश्व के लिये सार्वजनिक की गई थी।
  • ब्रह्माण्ड में पारलौकिक जीवन खोजने में मदद करने के अलावा यह टेलीस्कोप ब्रह्मांड संबंधी घटनाओं की एक विस्तृत श्रृंखला का अध्ययन करने के लिये डेटा एकत्र करेगा जिसमें ब्लैक होल, गैस क्लाउड, पल्सर एवं अधिकतम दूरी की आकाशगंगाएँ शामिल हैं।
  • इस टेलीस्कोप का व्यास लगभग 500 मीटर का है किंतु यह ध्यान रखना महत्त्वपूर्ण है कि यह केवल एक निश्चित समय में रिसीवर पर 300 मीटर व्यास वाले क्षेत्र को ही केंद्रित करता है।
  • पूर्ण रूप से तैयार होने के बाद यह प्यूर्टो रिको (Puerto Rico) में ‘अरेसिबो वेधशाला’ (Arecibo Observatory) द्वारा कवर किये गए आकाशीय क्षेत्र को दो बार स्कैन करने में सक्षम होगा जो अब तक दुनिया में सबसे बड़े ‘सिंगल-एपर्चर रेडियो टेलीस्कोप’ के लिये एक रिकॉर्ड है।
  • इस टेलीस्कोप का उल्लेख पहली बार वर्ष 1994 में किया गया था किंतु वास्तविक मंज़ूरी वर्ष 2007 में दी गई थी।
    • इस टेलीस्कोप को 36-फुट लंबाई के त्रिकोणीय आकार के 4,500 पैनलों का उपयोग करके बनाया गया है जो एक डिश पैनल जैसी संरचना बनाते हैं। यह एक 33-टन का ’रेटिना’ (Retina) उपकरण है जिसे 460-525 फीट की ऊँचाई पर लगाया गया है।
  • इस टेलीस्कोप को चीन के दक्षिण-पश्चिमी प्रांत गुइझोउ (Guizhou) के पिंगटांग काउंटी (Pingtang County) में स्थापित किया गया है। यह दुनिया का सबसे बड़ा एवं सबसे संवेदनशील रेडियो टेलीस्कोप है। इसे ‘आई ऑफ हेवन’ (Eye of Heaven) के रूप में भी जाना जाता है।

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