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डेली न्यूज़

  • 06 Mar, 2020
  • 26 min read
शासन व्यवस्था

नेशनल इंटरलिंकिंग ऑफ रिवर ऑथोरिटी

प्रीलिम्स के लिये:

राष्ट्रीय नदी जोड़ो परियोजना

मेन्स के लिये:

राष्ट्रीय नदी जोड़ो परियोजना से संबंधित मुद्दे

चर्चा में क्यों?

केंद्र सरकार नदियों को जोड़ने से संबंधित परियोजनाओं को लागू करने के लिये एक प्राधिकरण गठित करने पर कार्य कर रही है जिसे नेशनल इंटरलिंकिंग ऑफ रिवर ऑथोरिटी (National Interlinking of Rivers Authority-NIRA) के नाम से जाना जाएगाI

NIRA के बारे में:

  • प्रस्तावित निकाय अंतर-राज्य (Inter-State) और अंतरा-राज्य (Intra-State) दोनों परियोजनाओं के लिये कार्य करेगाI
  • यह परियोजनाओं हेतु आंतरिक एवं बाह्य स्रोतों से धन जुटाने का कार्य भी करेगाI
  • इस निकाय की स्थापना के लिये इंटरलिंकिंग ऑफ रिवर (Interlinking of Rivers- ILR) परियोजना के तहत एक बैठक का आयोजन किया गयाI हालाँकि इसकी स्थापना हेतु कोई समय-सीमा तय नहीं की गई हैI

राष्ट्रीय नदी जोड़ो परियोजना (NRLP):

  • राष्ट्रीय नदी जोड़ो परियोजना (National River Linking Project- NRLP) के तहत देश में जल को इसकी अधिकता वाले क्षेत्रों से जल की कमी वाले क्षेत्रों में स्थानांतरित करना है।
  • परियोजना का मुख्य उद्देश्य सूखाग्रस्त एवं वर्षा वाले क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता बढ़ाकर, ऐसे क्षेत्रों में पानी का अधिकाधिक वितरण सुनिश्चित करना है।
  • यह परियोजना का प्रबंधन राष्ट्रीय जल विकास एजेंसी (National Water Development Agency-NWDA) द्वारा किया जाना है।

NWDA-

  • NWDA केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय की एक एजेंसी है।
  • इसकी स्थापना 17 जुलाई, 1982 को भारत सरकार द्वारा सोसाइटी पंजीकरण अधिनियम,1860 के तहत की गई।
  • NWDA पूरी तरह से भारत सरकार द्वारा वित्तपोषित है।
  • इसकी स्थापना विभिन्न प्रायद्वीपीय नदी प्रणालियों और हिमालयी नदी प्रणालियों में पानी की मात्रा के बारे में विस्तृत अध्ययन करने इत्यादि के उद्देश्य से की गई थी।

भारत में ILR परियोजनाएँ:

वर्तमान में भारत की छह ILR परियोजनाएँ परीक्षण के दौर में है जो इस प्रकार हैं-

  • केन-बेतवा (Ken-Betwa)
  • दमनगंगा-पिंजाल (Damanganga- Pinjal)
  • पर-तापी-नर्मदा (Par-Tapi-Narmada)
  • मनास-संकोश-तिस्ता-गंगा (Manas-Sankosh-Teesta-Ganga)
  • महानदी-गोदावरी (Mahanadi-Godavari)
  • गोदावरी-कावेरी (Godavari-Cauvery)

ILR परियोजना के तहत केंद्र सरकार द्वारा प्रायद्वीपीय भारत की नदियों में महानदी- गोदावरी-कृष्णा-पेनार-कावेरी तथा गोदावरी-कावेरी लिंक पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।

ILR परियोजना का लाभ:

  • पेयजल की समस्या का समाधान होगा।
  • सूखे और बाढ़ की समस्या में कमी आएगी।
  • कृषि सिंचित क्षेत्र में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
  • जलविद्युत की उपलब्धता से सस्ती एवं स्वच्छ ऊर्जा की प्राप्ति होगी।
  • नौवहन के विकास से परिवहन लागत में कमी आएगी।
  • पर्यटन स्थलों के निर्माण से विकास का स्तर बढ़ेगा।
  • वनीकरण को प्रोत्साहन।

ILR परियोजना से समबंधित चिंताए:

  • इस परियोजना के अंतर्गत बड़े बाँधों का निर्माण किया जाना शामिल है जिसके चलते लोगों को विस्थापन की समस्या का सामना करना पड़ता है।
  • पर्यावरणीय समस्याएँ उत्पन्न होती हैं क्योंकि हर नदी का अपना अलग पारिस्थितिकी तंत्र होता है, अत: दो नदियों के पानी के मिश्रण से जैव विविधता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
  • साथ ही कृषि पैटर्न में बदलाव आता है जिसके चलते लोगों की आजीविका पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

स्रोत: द हिंदू


सामाजिक न्याय

वृद्ध कलाकारों को पेंशन और चिकित्सा सहायता

प्रीलिम्स के लिये:

वृद्ध कलाकारों को पेंशन और चिकित्सा सहायता हेतु योजनाएँ

मैन्स के लिये:

भारत में वृद्ध कलाकारों से संबंधित योजनाएँ

चर्चा में क्यों?

हाल ही में संस्कृति मंत्रालय (Ministry of Culture) द्वारा वृद्ध लोक कलाकारों की वित्तीय और सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार हेतु “कलाकारों के लियेपेंशन और चिकित्सा सहायता के लिये योजना” नामक योजना प्रारंभ की गई।

प्रमुख बिंदु:

  • संस्कृति मंत्रालय ने “कलाकारों के लिये पेंशन और चिकित्सा सहायता के लिये योजना” वृद्ध लोक कलाकारों और विद्वानों जिन्होंने कला, पत्र आदि क्षेत्रों में अपना विशिष्ट योगदान दिया है तथा ग़रीबी की स्थिति में हैं, की वित्तीय और सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार करने हेतु यह योजना कार्यान्वित की गई।
  • नाटककार भी इस योजना के पात्र है।
  • प्रत्येक लाभार्थी को अधिकतम प्रति माह 4000/- रूपए दिया जाएगा, जिसमें से न्यूनतम 500/- रूपए राज्य/केंद्रशासित प्रदेश सरकार से वित्तीय सहायता शामिल है।
  • लाभार्थी की मृत्यु होने पर वित्तीय सहायता को लाभार्थी के पति/पत्नी के नाम पर हस्तांतरित किया जा सकता है। इस प्रकार के अनुरोध हेतु लाभार्थी के पति/पत्नी द्वारा मंत्रालय में मृत्यु की तारीख से छह माह के भीतर अपेक्षित दस्तावेजों को प्रस्तुत करना होगा।

आदिवासियों की भाषाओं, लोक नृत्य, कला और संस्कृति को संरक्षित करने एवं बढ़ावा देने हेतु योजनाएँ :

  • प्रतिभाशाली युवा कलाकारों को पुरस्कार (Award to Young Talented Artists): “युवा प्रतिभाशाली कलाकार” योजना विशेष रूप से दुर्लभ कला के क्षेत्रों में युवा प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने और पहचान दिलाने हेतु शुरू किया गया है जिसमे 18-30 वर्ष की आयु वर्ग के प्रतिभाशाली युवाओं को चुनकर 10,000/- रूपए नकद पुरस्कार देने का प्रावधान है।
  • गुरु शिष्य परंम्परा (Guru Shishya Parampara): यह योजना आने वाली पीढ़ियों के लिये हमारी मूल्यवान परंपराओं को प्रसारित करने की परिकल्पना करती है एवं शिष्यों को कला के उन स्वरूपों में प्रशिक्षित किया जाता है जो दुर्लभ और लुप्त हैं। क्षेत्र के दुर्लभ और लुप्त हो रहे कला की पहचान तथा गुरुकुलों की परंपरा में प्रशिक्षण कार्यक्रमों को पूरा करने के लिये प्रख्यात प्रशिक्षकों का चयन किया जाता है। गुरु को 7500/- रूपए, सहयोगी को 3,750/- रूपए और शिष्य को 1,500/- रूपए मासिक पारिश्रमिक के तौर पर छह महीने से लेकर अधिकतम 1 वर्ष की अवधि तक दिये जाएंगे।
  • रंगमंच कायाकल्प (Theatre Rejuvenation): स्टेज शो और प्रोडक्शन आधारित वर्कशॉप सहित थिएटर गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिये TA और DA को छोड़कर प्रति शो 30,000/- रूपए का भुगतान किया जाता है एवं समूहों ने अपनी साख के साथ-साथ उनके द्वारा प्रस्तुत परियोजना की योग्यता के आधार पर अंतिम रूप दिया।
  • अनुसंधान और प्रलेखन (Research & Documentation): संगीत, नृत्य, रंगमंच, साहित्य, ललित कला इत्यादि लोक, जनजातीय और शास्त्रीय क्षेत्रों में लुप्त हो रहे दृश्य और प्रदर्शन कला रूपों को बढ़ावा देने तथा प्रचारित करने हेतु इस योजना को प्रारंभ किया गया।
  • शिल्पग्राम (Shilpgram): ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले कारीगरों को डिजाइन के विकास और विपणन सहायता हेतु संगोष्ठी, कार्यशालाओं, प्रदर्शनियों, शिल्प मेलों का आयोजन करके क्षेत्र की लोक, आदिवासी कला एवं शिल्प को बढ़ावा देना इस योजना का मुख्य लक्ष्य है।
  • ऑक्टेव (सप्तक) (Octave): उत्तर पूर्व क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने और प्रचार-प्रसार करने हेतु (जिसमें आठ राज्य हैं-अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, मिजोरम, सिक्किम, नागालैंड, मणिपुर और त्रिपुरा शामिल है) इस पहल को प्रारंभ किया गया।
  • राष्ट्रीय सांस्कृतिक विनिमय कार्यक्रम (National Cultural Exchange Programme-NCEP): इसे क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्रों की जीवन रेखा कहा जा सकता है। इस योजना के तहत सदस्य राज्यों में प्रदर्शन कला, प्रदर्शनियाँ, यात्रा आदि से संबंधित विभिन्न उत्सव आयोजित किए जाते हैं। अन्य क्षेत्रों/राज्यों के कलाकारों को इन कार्यक्रमों में भाग लेने हेतु आमंत्रित किया जाता है। देश के अन्य हिस्सों में आयोजित होने वाले समारोहों में कलाकारों की भागीदारी के प्रावधान है। ये त्यौहार हमारे देश की विभिन्न संस्कृतियों को जानने-समझने का अवसर प्रदान करते हैं।

स्रोत: पीआईबी


सामाजिक न्याय

फ्रीडम इन द वर्ल्ड 2020 रिपोर्ट

प्रीलिम्स के लिये:

फ्रीडम इन द वर्ल्ड 2020 रिपोर्ट

मेन्स के लिये:

फ्रीडम इन द वर्ल्ड 2020 रिपोर्ट में भारत की खराब स्थिति का कारण

चर्चा में क्यों?

हाल ही में एक अमेरिकी संस्था फ्रीडम हाउस (Freedom House) ने ‘फ्रीडम इन द वर्ल्ड 2020’ (The Freedom in the World 2020) नामक एक रिपोर्ट जारी की है।

मुख्य बिंदु:

  • फ्रीडम इन द वर्ल्ड 2020 रिपोर्ट 195 देशों और 15 क्षेत्रों में वर्ष 2019 के दौरान स्वतंत्रता की स्थिति का मूल्यांकन करती है।
  • इस रिपोर्ट में दो संकेतकों का प्रयोग किया गया है-
    • राजनीतिक अधिकार (0–40 अंक)
    • नागरिक स्वतंत्रता (0–60 अंक)
  • इन अंकों को देशों में व्याप्त स्वतंत्रता की निम्नलिखित स्थितियों के आधार पर प्रदान किया जाता है-
    • स्वतंत्र (Free)
    • आंशिक रूप से स्वतंत्र (Partly Free)
    • स्वतंत्र नहीं (Not Free)
  • इस रिपोर्ट में फिनलैंड, नॉर्वे और स्वीडन को 100 में से 100 अंक मिले हैं।

रिपोर्ट में भारत की स्थिति:

  • इस रिपोर्ट के अनुसार, भारत को दुनिया के ‘स्वतंत्र’ (Free) देशों की श्रेणी में रखा गया है।
  • द फ्रीडम इन द वर्ल्ड 2020 रिपोर्ट में भारत को तिमोर-लेस्ते (Timor-Leste) और सेनेगल (Senegal) के साथ 83वें स्थान पर रखा गया है।
  • ‘स्वतंत्र’ वर्ग के रूप में वर्गीकृत देशों में केवल ट्यूनीशिया को भारत से कम स्कोर प्राप्त हुआ है।
  • इस वर्ष भारत का स्कोर चार अंक गिरकर 71 हो गया, जो इस वर्ष विश्व के 25 सबसे बड़े लोकतंत्रों के स्कोर में सबसे अधिक गिरावट है।
  • भारत ने राजनीतिक अधिकार श्रेणी में 40 में से 34 अंक प्राप्त किये हैं, लेकिन नागरिक स्वतंत्रता श्रेणी में इसे 60 में से केवल 37 अंक प्राप्त हुए हैं।
  • पिछले संस्करण में भारत को इस रिपोर्ट में 75 अंक प्राप्त हुए थे।

भारत की स्थिति कमज़ोर होने के कारण:

  • इस रिपोर्ट में कश्मीर में शटडाउन, नागरिक रजिस्टर और नागरिकता (संशोधन) अधिनियम के साथ-साथ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों की कार्रवाई को स्वतंत्रता की समाप्ति के मुख्य कारणों के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।
  • इस रिपोर्ट के अनुसार, इन तीन कार्यों ने भारत में विधि के शासन को हिला दिया है और इसकी राजनीतिक प्रणाली के धर्मनिरपेक्ष और समावेशी स्वरूप पर खतरा उत्पन्न कर दिया है।
  • इस रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान सरकार ने देश की बहुलता और व्यक्तिगत अधिकारों के लिये अपनी प्रतिबद्धता से खुद को दूर कर लिया है, जिसके बिना लोकतंत्र लंबे समय तक जीवित नहीं रह सकता है।
  • रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत को लंबे समय से चीन के लोकतांत्रिक प्रतिरोधी के रूप में देखा जाता रहा है और इसलिये इस क्षेत्र में भारत संयुक्त राज्य अमेरिका का एक महत्त्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार है। हालाँकि यह दृष्टिकोण बदल रहा है और चीन के समान भारत को भी लोकतांत्रिक मुद्दों पर आलोचना झेलनी पड़ रही है।

deterring democracy

  • इस रिपोर्ट के अनुसार, जिस तरह चीन ने वर्ष 2019 में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उइगर और अन्य मुस्लिम समूहों के खिलाफ दमनात्मक कृत्यों का समर्थन किया उसी तरह वर्तमान भारत सरकार ने अपनी हिंदू राष्ट्रवादी नीतियों की आलोचना को दृढ़ता से खारिज कर दिया।
  • इस रिपोर्ट में कश्मीर में इंटरनेट शटडाउन को एक लोकतांत्रिक देश द्वारा लगाया गया सबसे लंबा शटडाउन बताया गया।
  • इस रिपोर्ट के अनुसार, भारत में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर तब सवाल उठे जब राजनीतिक रूप से संवेदनशील विषयों को संबोधित करते हुए पत्रकारों, शिक्षाविदों और अन्य लोगों को उत्पीड़न और धमकी का सामना करना पड़ रहा था।

अन्य बिंदु:

  • यह रिपोर्ट वर्ष 1948 में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा अपनाई गई मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा को अपनी कार्यप्रणाली का आधार बनाती है।
  • यह रिपोर्ट विभिन्न देशों में चुनावी प्रक्रिया, राजनीतिक बहुलवाद, भागीदारी और सरकारी कामकाज जैसे राजनीतिक अधिकारों के संकेतकों के आधार पर स्कोर प्रदान करती है।

फ्रीडम हाउस:

  • फ्रीडम हाउस दुनिया भर में लोकतंत्र के समर्थन और संरक्षण के लिये समर्पित सबसे पुराना अमेरिकी संगठन है।
  • द्वितीय विश्वयुद्ध में अमेरिकी भागीदारी और फासीवाद के खिलाफ लड़ाई को बढ़ावा देने के लिये इसे 1941 में न्यूयॉर्क में औपचारिक रूप से स्थापित किया गया था।
  • यह संस्था राजनीतिक अधिकारों और नागरिक स्वतंत्रता पर ध्यान देने के साथ मानव अधिकारों की रक्षा और लोकतांत्रिक परिवर्तन को बढ़ावा देने का कार्य करती है।
  • यह संस्था विश्लेषण, वकालत और कार्रवाई के संयोजन के माध्यम से स्वतंत्रता के लिये उत्प्रेरक के रूप में कार्य करती है।

स्रोत- द हिंदू


विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

अनगाॅर्डेड एक्स हाइपोथिसिस

प्रीलिम्स के लिये:

गुणसूत्र

मेन्स के लिये:

अनगाॅर्डेड एक्स हाइपोथिसिस क्या है

चर्चा में क्यों?

हाल ही में यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू साउथ वेल्स ( University of New South Wales-UNSW) सिडनी के वैज्ञानिकों द्वारा ‘बॉयोलॉजी लेटर्स’ पत्रिका (Biology Letters Journal) में प्रकाशित एक शोध के अनुसार, विश्व में महिलाओं की तुलना में पुरुषों की कम उम्र का कारण लिंग गुणसूत्र (Sex Chromosomes) है।

अन्य बिंदु:

  • भारत में वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार पुरुषों की संख्या महिलाओं से 37 मिलियन अधिक थी लेकिन 60 वर्ष से अधिक की आयु वाली जनसंख्या में पुरुषों की तुलना में 1 मिलियन महिलाएँ अधिक थी।
  • विश्व में पुरुष महिलाओं की तुलना में कम समय तक जीवित रहते है जिसके पक्ष में वैज्ञानिकों द्वारा उनमे जोखिम लेने की प्रवृत्ति का अधिक पाया जाना, धूम्रपान तथा अल्कोहल का सेवन करना जैसे विभिन्न सिद्धांत प्रस्तुत किये गये।
  • नवीनतम शोध के अनुसार, पुरुषों में कम आयु प्रत्याशा लिंग गुणसूत्र (Sex Chromosomes) से संबंधित है।

गुणसूत्र:

  • मनुष्य का शरीर कोशिकाओं (Cells) से मिलकर बना होता है तथा प्रत्येक कोशिका के केंद्र में एक केंद्रक (Nucleus) होता है।
  • केंद्रक में गुणसूत्र विद्यमान होते हैं जिन पर जीन (Genes) उपस्थित होते हैं।
  • जीन द्वारा ही जीवों में विभिन्न लक्षणों जैसे-आँखों का रंग, रक्त समूह तथा लिंग का निर्धारण किया जाता है।
  • मानव की किसी भी कोशिका में 23 जोड़े गुणसूत्र पाये हैं जिनमें एक जोड़ी लिंग गुणसूत्रों होते हैं।जिन्हें ‘X’ एवं ‘Y’ गुणसूत्र कहा जाता है। लिंग निर्धारण में इन्ही गुणसूत्रों की महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है।
  • लिंग गुणसूत्रों के रूप में महिलाओं में एक जोड़ी ‘XX’ गुणसूत्र पाये जाते है जबकि पुरुषों में एक ‘X’तथा एक ‘Y’ गुणसूत्र पाया जाता है।

अनगाॅर्डेड एक्स हाइपोथिसिस:

  • इस परिकल्पना के अनुसार, XY गुणसूत्र में Y गुणसूत्र किसी भी व्यक्ति को उसके X गुणसूत्र पर व्यक्त हानिकारक जीन प्रभाव से बचाने में सक्षम नहीं है।
  • पुरुषों में Y गुणसूत्र X गुणसूत्र की तुलना में छोटा होता है जो हानिकारक उत्परिवर्तन (Mutation) करने वाले जीन का सामना करने में समर्थ/सक्षम नहीं होता।
  • परिकल्पना के अनुसार, महिलाओं में इस तरह की कोई समस्या देखने को नहीं मिलती क्योंकि महिलाओं में लिंग गुणसूत्रों के रूप में दोनों गुणसूत्र XX होते है।
  • ऐसी स्थिति में यदि एक X गुणसूत्र में किसी भी कारण से उत्परिवर्तन हो जाता है तो दूसरा स्वस्थ X गुणसूत्र उसके स्थान पर आ जाता है जिससे हानिकारक जीन का कोई प्रभाव उत्पन्न नहीं होता जो जीवों में लंबी आयु का कारण होता है।

परिकल्पना के लिये परीक्षण:

  • शोधकर्त्ताओं ने अपने अध्ययन में न केवल प्राइमेट्स (Primates) तथा स्तनधारियों (Mammals) को शामिल किया बल्कि पक्षियों (Birds), सरीसृपों (Reptiles), मछलियों (Fish), उभयचरों (Amphibians),अरचिन्ड्स (Arachnids), कॉकरोच (Cockroaches), टिड्डों (Grasshoppers), बीटल ( Beetles) और तितलियों (Butterflies) को भी शामिल किया गया।
  • अध्ययन में शोधकर्ताओं द्वारा देखा गया कि विषमलैंगिक लिंग ( Heterogametic Sex) यानि XY गुणसूत्र वाली प्रजाति/जीव, की आयु प्रत्याशा होमोगैमिक लिंग (Heterogametic Sex) यानि XX गुणसूत्र वाले जीवों की तुलना में कम हैं।
  • अध्ययन में देखा गया कि ऐसी प्रजातियाँ जहाँ नर विषम (XY) हैं वहां मादाएँ पुरुषों की तुलना में लगभग 21% अधिक जीवित रहती हैं।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस


विविध

Rapid Fire (करेंट अफेयर्स): 06 मार्च, 2020

सेबी स्कोर्स (Sebi SCORES) एप

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने निवेशकों के लिये एक मोबाइल एप सेबी स्कोर्स (Sebi SCORES) लॉन्च किया है। इस एप के माध्यम से निवेशक सेबी (SEBI) की शिकायत निपटान प्रणाली (SCORES) में अपनी शिकायतें दर्ज कर सकेंगे। स्कोर्स प्लेटफॉर्म पर निवेशक लिस्टेड कंपनियों, रजिस्टर्ड इंटरमीडियरीज़ और मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर इंस्टीट्यूशंस के विरुद्ध सेबी से ऑनलाइन शिकायत कर सकते हैं। सेबी के अनुसार, सेबी स्कोर्स (Sebi SCORES) एप IOS और एंड्रॉयड दोनों प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगा। इस मोबाइल एप के ज़रिये निवेशकों के लिये अपनी शिकायतें दर्ज करना आसान हो जाएगा। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड की स्थापना भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड अधिनियम, 1992 के प्रावधानों के अनुसार 12 अप्रैल, 1992 को हुई थी। इसका मुख्यालय मुंबई में है। इसका मुख्य कार्य प्रतिभूतियों (Securities) में निवेश करने वाले निवेशकों के हितों का संरक्षण करना है।

औरंगाबाद हवाई अड्डा

महाराष्ट्र सरकार ने औरंगाबाद हवाई अड्डे का नाम बदलकर छत्रपति संभाजी महाराज हवाई अड्डा करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में यह निर्णय किया गया है। औरंगाबाद हवाई अड्डा महाराष्ट्र के औरंगाबाद ज़िले में स्थिति है।

पेरेज़ डे क्यूबेलर

संयुक्‍त राष्‍ट्र संघ के पूर्व महासचिव पेरेज़ डे क्यूबेलर का 5 मार्च, 2020 को निधन हो गया। वे वर्ष 1981 से लेकर वर्ष 1991 तक संयुक्‍त राष्‍ट्र संघ के महासचिव रहे थे। पेरेज़ डी क्यूएलर ईरान-इराक युद्ध और अल सल्वाडोर में चल रहे गृह युद्ध के दौरान संयुक्‍त राष्‍ट्र के प्रमुख रहे थे। संयुक्‍त राष्‍ट्र संघ के महासचिव एंटोनियो गुतरेस ने पेरेज़ डे क्यूबेलर के महासचिव के रूप में किये गए योगदान की सराहना की है। प्रथम विश्वयुद्ध के बाद आपसी झगड़ों से निपटने हेतु एक अंतर्राष्ट्रीय संगठन की आवश्यकता महसूस हुई। इसी संदर्भ में ‘राष्ट्रसंघ’ का उदय हुआ। शुरुआती सफलताओं के बावजूद यह संगठन दूसरा विश्वयुद्ध (1939-45) न रोक सका। दूसरे विश्वयुद्ध की समाप्ति के तुरंत बाद वर्ष 1945 में ‘राष्ट्रसंघ’ के उत्तराधिकारी के रूप में संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना हुई। संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना का मुख्य उद्देश्य है अंतर्राष्ट्रीय झगड़ों को रोकना और राष्ट्रों के बीच सहयोग की राह दिखाना।


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