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फ्रीडम इन द वर्ल्ड 2020 रिपोर्ट

  • 06 Mar 2020
  • 7 min read

प्रीलिम्स के लिये:

फ्रीडम इन द वर्ल्ड 2020 रिपोर्ट

मेन्स के लिये:

फ्रीडम इन द वर्ल्ड 2020 रिपोर्ट में भारत की खराब स्थिति का कारण

चर्चा में क्यों?

हाल ही में एक अमेरिकी संस्था फ्रीडम हाउस (Freedom House) ने ‘फ्रीडम इन द वर्ल्ड 2020’ (The Freedom in the World 2020) नामक एक रिपोर्ट जारी की है।

मुख्य बिंदु:

  • फ्रीडम इन द वर्ल्ड 2020 रिपोर्ट 195 देशों और 15 क्षेत्रों में वर्ष 2019 के दौरान स्वतंत्रता की स्थिति का मूल्यांकन करती है।
  • इस रिपोर्ट में दो संकेतकों का प्रयोग किया गया है-
    • राजनीतिक अधिकार (0–40 अंक)
    • नागरिक स्वतंत्रता (0–60 अंक)
  • इन अंकों को देशों में व्याप्त स्वतंत्रता की निम्नलिखित स्थितियों के आधार पर प्रदान किया जाता है-
    • स्वतंत्र (Free)
    • आंशिक रूप से स्वतंत्र (Partly Free)
    • स्वतंत्र नहीं (Not Free)
  • इस रिपोर्ट में फिनलैंड, नॉर्वे और स्वीडन को 100 में से 100 अंक मिले हैं।

रिपोर्ट में भारत की स्थिति:

  • इस रिपोर्ट के अनुसार, भारत को दुनिया के ‘स्वतंत्र’ (Free) देशों की श्रेणी में रखा गया है।
  • द फ्रीडम इन द वर्ल्ड 2020 रिपोर्ट में भारत को तिमोर-लेस्ते (Timor-Leste) और सेनेगल (Senegal) के साथ 83वें स्थान पर रखा गया है।
  • ‘स्वतंत्र’ वर्ग के रूप में वर्गीकृत देशों में केवल ट्यूनीशिया को भारत से कम स्कोर प्राप्त हुआ है।
  • इस वर्ष भारत का स्कोर चार अंक गिरकर 71 हो गया, जो इस वर्ष विश्व के 25 सबसे बड़े लोकतंत्रों के स्कोर में सबसे अधिक गिरावट है।
  • भारत ने राजनीतिक अधिकार श्रेणी में 40 में से 34 अंक प्राप्त किये हैं, लेकिन नागरिक स्वतंत्रता श्रेणी में इसे 60 में से केवल 37 अंक प्राप्त हुए हैं।
  • पिछले संस्करण में भारत को इस रिपोर्ट में 75 अंक प्राप्त हुए थे।

भारत की स्थिति कमज़ोर होने के कारण:

  • इस रिपोर्ट में कश्मीर में शटडाउन, नागरिक रजिस्टर और नागरिकता (संशोधन) अधिनियम के साथ-साथ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों की कार्रवाई को स्वतंत्रता की समाप्ति के मुख्य कारणों के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।
  • इस रिपोर्ट के अनुसार, इन तीन कार्यों ने भारत में विधि के शासन को हिला दिया है और इसकी राजनीतिक प्रणाली के धर्मनिरपेक्ष और समावेशी स्वरूप पर खतरा उत्पन्न कर दिया है।
  • इस रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान सरकार ने देश की बहुलता और व्यक्तिगत अधिकारों के लिये अपनी प्रतिबद्धता से खुद को दूर कर लिया है, जिसके बिना लोकतंत्र लंबे समय तक जीवित नहीं रह सकता है।
  • रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत को लंबे समय से चीन के लोकतांत्रिक प्रतिरोधी के रूप में देखा जाता रहा है और इसलिये इस क्षेत्र में भारत संयुक्त राज्य अमेरिका का एक महत्त्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार है। हालाँकि यह दृष्टिकोण बदल रहा है और चीन के समान भारत को भी लोकतांत्रिक मुद्दों पर आलोचना झेलनी पड़ रही है।

deterring democracy

  • इस रिपोर्ट के अनुसार, जिस तरह चीन ने वर्ष 2019 में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उइगर और अन्य मुस्लिम समूहों के खिलाफ दमनात्मक कृत्यों का समर्थन किया उसी तरह वर्तमान भारत सरकार ने अपनी हिंदू राष्ट्रवादी नीतियों की आलोचना को दृढ़ता से खारिज कर दिया।
  • इस रिपोर्ट में कश्मीर में इंटरनेट शटडाउन को एक लोकतांत्रिक देश द्वारा लगाया गया सबसे लंबा शटडाउन बताया गया।
  • इस रिपोर्ट के अनुसार, भारत में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर तब सवाल उठे जब राजनीतिक रूप से संवेदनशील विषयों को संबोधित करते हुए पत्रकारों, शिक्षाविदों और अन्य लोगों को उत्पीड़न और धमकी का सामना करना पड़ रहा था।

अन्य बिंदु:

  • यह रिपोर्ट वर्ष 1948 में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा अपनाई गई मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा को अपनी कार्यप्रणाली का आधार बनाती है।
  • यह रिपोर्ट विभिन्न देशों में चुनावी प्रक्रिया, राजनीतिक बहुलवाद, भागीदारी और सरकारी कामकाज जैसे राजनीतिक अधिकारों के संकेतकों के आधार पर स्कोर प्रदान करती है।

फ्रीडम हाउस:

  • फ्रीडम हाउस दुनिया भर में लोकतंत्र के समर्थन और संरक्षण के लिये समर्पित सबसे पुराना अमेरिकी संगठन है।
  • द्वितीय विश्वयुद्ध में अमेरिकी भागीदारी और फासीवाद के खिलाफ लड़ाई को बढ़ावा देने के लिये इसे 1941 में न्यूयॉर्क में औपचारिक रूप से स्थापित किया गया था।
  • यह संस्था राजनीतिक अधिकारों और नागरिक स्वतंत्रता पर ध्यान देने के साथ मानव अधिकारों की रक्षा और लोकतांत्रिक परिवर्तन को बढ़ावा देने का कार्य करती है।
  • यह संस्था विश्लेषण, वकालत और कार्रवाई के संयोजन के माध्यम से स्वतंत्रता के लिये उत्प्रेरक के रूप में कार्य करती है।

स्रोत- द हिंदू

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