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सूक्ष्म जलवायु

  • 19 Aug 2020
  • 6 min read

पृथ्वी पर विभिन्न प्रकार के जलवायु क्षेत्र पाए जाते हैं। अलग-अलग जलवायु प्रदेशों में पाई जाने वाली वनस्पति, जीव-जंतु आदि में अंतर पाया जाता है। वस्तुत: जलवायु एक व्यापक शब्द है।

  • विस्तृत क्षेत्र पर लंबी अवधि के दौरान मौसम के घटकों यथा- तापमान, आर्द्रता, वायुदाब, पवन आदि के औसत को जलवायु कहते हैं। ध्यातव्य है कि लंबी अवधि से आशय सामान्यत: 38 वर्ष से है।

क्या है सूक्ष्म जलवायु?

  • सामान्य जलवायु क्षेत्र व्यापक होते हैं। इन सामान्य जलवायु क्षेत्रों में स्थान विशेष पर जलवायुवीय विशेषताओं में (जलवायु के घटकों के आधार पर) भिन्नता देखने को मिलती है।
  • वस्तुत: ‘सूक्ष्म जलवायु’ सामान्य जलवायु क्षेत्र के भीतर एक छोटा क्षेत्र होता है, जिसकी अपनी विशिष्ट जलवायु होती है, और हल ‘सूक्ष्म जलवायु क्षेत्र’ की जलवायु को ‘सूक्ष्म जलवायु (Micro-climate)’ कहते हैं। उदाहरणस्वरूप किसी बाग‌, पार्क, घाटी या पर्वतीय क्षेत्र अथवा क्षेत्रों की जलवायु। इसी प्रकार किसी स्थान के जल निकाय (Water Body) की जलवायु आसपास के क्षेत्र से अलग होगी।
  • किसी क्षेत्र विशेष की जलवायु विभिन्न कारकों पर निर्भर करती है जैसे- वहाँ की भौगोलिक अवस्थिति, उच्चावच, अक्षांश, स्थलाकृति आदि।
  • तापमान, वर्षा, पवन अथवा आर्द्रता के समग्र रूप से और पूरे क्षेत्र में विद्यमान स्थितियों के कारण अलग-अलग होने से ‘सूक्ष्म जलवायु’ का मौसम भिन्न हो सकता है।
  • अत: हम कह सकते हैं कि विस्तृत सामान्य जलवायु क्षेत्रों के अंतर्गत छोटे क्षेत्र विशेष की विशिष्ट जलवायु को सूक्ष्म जलवायु कहते हैं जिसके भिन्न-भिन्न कारण हो सकते हैं। साथ ही यह जलवायु अपने आस-पास की सामान्य जलवायु से भिन्न होती है।

माइक्रोक्लाइमेट (Microclimate) क्षेत्र बनने के कारण ?

  • विभिन्न कारकों के प्रभाव से ‘माइक्रोक्लाइमेट’ क्षेत्र बन सकते हैं-
    • जल निकाय की उपस्थिति
    • शहरी क्षेत्र की ऊष्मा प्रतिहारक क्षमता
    • पर्वतीय ढलान
    • वनस्पति की उपस्थिति अथवा संरक्षित क्षेत्र में वनस्पति की अधिक सघनता
    • मृदा के प्रकार आदि।

माइक्रोक्लाइमेट के कुछ उदाहरण

  • उच्च भूमि क्षेत्र (Upland Regions):

    • उच्च भूमि क्षेत्र की जलवायु उससे संलग्न निम्न भूमि क्षेत्र से भिन्न होती है। गौरतलब है कि ऊँचाई बढ़ने के साथ-साथ तापमान में सामान्यत: क्रमिक रूप से गिरावट आती है। तापमान में आने वाली यह गिरावट 5-10ºC होती है जो आर्द्रता पर निर्भर करती है।
    • पर्वतीय क्षेत्रों में तापमान व्युत्क्रमण के कारण भी माइक्रोक्लाइमेट क्षेत्र का विकास होता है। यथा ठंड के मौसम में रात के समय पर्वतों की उच्च भूमि का तापमान अत्यधिक कम हो जाता है। फलस्वरूप सामान्य जलवायु से अलग विशिष्ट जलवायु का विकास होता है।
  • तटीय क्षेत्र (Coastal Regions):

    • तटीय क्षेत्रों में सागर एवं स्थल दोनों की विशेषताओं का समागम होता है, अत: ये सागर एवं स्थल दोनों से प्रभावित रहते हैं।
    • जल स्थलीय भाग की अपेक्षा गर्मियों में देर से गर्म होता है तथा ठंड के समय देर से ठंडा होता है। इन्हीं भिन्नताओं के कारण तटीय क्षेत्र की जलवायु स्थलीय एवं जलीय दोनों क्षेत्रों से भिन्न होती है।
    • उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में जलीय सतह का तापांतर कम होता है, अत: यहाँ तटीय क्षेत्रों की सूक्ष्म जलवायु संलग्न स्थलीय भाग के रात के शीतलन ‍एवं दिन के उष्मन पर अधिक निर्भर करती है।
    • वहीं समशीतोष्ण प्रदेशों में यह तटीय माइक्रोक्लाइमेट स्थल एवं तटीय भूमि की अपेक्षा समुद्र से अधिक प्रभावित होती है।
  • वन भूमि (Forest Land):

    • वन क्षेत्रों में भी माइक्रोक्लाइमेट का विकास होता है। यथा- वृक्ष वाष्पोत्सर्जन द्वारा जल को वायुमंडल में स्थानांतरित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसके अलावा वन आस-पास के क्षेत्र की अपेक्षा हवा एवं और प्रकाश के अधिक करते हैं।
  • शहरी क्षेत्र (Urban Regions):

    • शहरी क्षेत्रों की जलवायु माइक्रो जलवायु का ही एक उदाहरण है। यथा विभिन्न कारणों से शहर का तापमान आस-पास के क्षेत्र की अपेक्षा अधिक होता है।
    • कंक्रीट की इमारतों, पक्की सड़कों, मोटर वाहनों आदि के कारण शहर हीट आइलैंड (ऊष्मा द्वीप) में तब्दील हो जाते हैं।
    • इसके अलावा कृत्रिम एवं प्राकृतिक जलाशयों व बाँधों के पास भी माइक्रोक्लाइमेट का निर्माण हो जाता है।

निष्कर्षत: सूक्ष्म जलवायु क्षेत्र, समान्य जलवायु क्षेत्र के अंतर्गत ही होते हैं। ये मानवीय एवं प्राकृतिक दोनों गतिविधियों के कारण उत्पन्न हो सकते हैं।

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