हिंदी साहित्य: पेन ड्राइव कोर्स
ध्यान दें:

स्टेट पी.सी.एस.

  • 19 Aug 2022
  • 0 min read
  • Switch Date:  
उत्तर प्रदेश Switch to English

लखनऊ में शुरू होगी देश की पहली नाइट सफारी

चर्चा में क्यों?

16 अगस्त, 2022 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में राजधानी लखनऊ में देश की पहली नाइट सफारी शुरू करने के उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग के प्रस्ताव को मंज़ूरी दी गई।

प्रमुख बिंदु

  • इस बारे में पर्यटन और संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि सिंगापुर की विश्व की पहली नाईट सफारी की तर्ज़ पर 2027.46 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैले कुकरैल वन क्षेत्र में 350 एकड़ में नाईट सफारी विकसित की जाएगी और 150 एकड़ में प्राणि उद्यान बनाया जाएगा।
  • यह नाइट सफारी बिल्कुल सिंगापुर की तर्ज़ पर विकसित होगी, जहाँ टाइगर, तेंदुआ और भालू के लिये अलग-अलग सफारी बनाई जाएंगी। लखनऊ के ऐतिहासिक नवाब वाज़िद अली शाह प्राणि उद्यान को वर्तमान जगह से हटाकर नाइट सफारी में शिफ्ट किया जाएगा। कुकरैल नदी को खूबसूरत रिवरफ्रंट के रूप में विकसित किया जाएगा। नाइट सफारी में टॉय ट्रेन भी चलाई जाएगी।
  • गौरतलब है कि देश की यह पहली नाइट सफारी होगी। वर्तमान में देश में 13 ओपन डे सफारी हैं, लेकिन एक भी नाइट सफारी नहीं है।
  • नाइट सफारी का प्रवेश द्वार भव्य एवं आकर्षक होगा। यहाँ व्याख्या केंद्र, बटरफ्लाई इंटरप्रिटेशन सेंटर भी बनाया जाएगा। इसके अलावा 75 एकड़ में तेंदुआ सफारी, 60 एकड़ में भालू सफारी और 75 एकड़ में टाइगर सफारी बनाने की योजना है।
  • वन्य जीव बाड़े में न रखकर खुले आकाश में केटल ग्रिड में रखे जाएंगे। यहाँ एक ओपन एयर निशाचर चिड़ियाघर होगा, जो केवल रात में खुलेगा। सफारी में रात में जानवरों के लिये चंद्रमा की रोशनी की तरह मंद प्रकाश की व्यवस्था की जाएगी। दिन में पर्यटकों के लिये आधुनिक थीम पार्क बनाया जाएगा।
  • विश्वस्तरीय सुविधाओं के तहत नाइट सफारी में स्थानीय गाइड के साथ ट्रेन की सवारी और जीप की सवारी भी की जा सकेगी। इसके अलावा कैनोपी वाक, कैंपिंग गतिविधि, माउंटेन बाइक ट्रैक, दीवार पर्वतारोहण, ट्री टॉप रेस्टोरेंट, नेचर ट्रेल और फूड कोर्ट आदि सुविधाएँ विकसित की जाएंगी।

राजस्थान Switch to English

राजीव गांधी ग्रामीण ओलंपिक के सफल आयोजन हेतु ग्राम पंचायत व खंड स्तर पर होगा समितियों का गठन

चर्चा में क्यों?

18 अगस्त, 2022 को राजस्थान के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के सचिव नवीन जैन ने राजीव गांधी ग्रामीण ओलंपिक्स-2022 के आयोजन की तैयारियों को लेकर सभी ज़िलों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों एवं विकास अधिकारियों को ग्राम पंचायत व खंड स्तर पर समितियों के गठन के निर्देश जारी किये।

प्रमुख बिंदु

  • राजीव गांधी ग्रामीण ओलंपिक्स-2022 के लिये ग्राम पंचायत स्तरीय प्रतियोगिताएँ 29 अगस्त से 1 सितंबर के मध्य आयोजित होंगी। ग्राम पंचायत स्तर पर विजेता टीम खंड स्तर पर 12 सितंबर से आयोजित प्रतियोगिताओं में भाग लेंगी।
  • ग्राम पंचायत स्तर पर समिति- समिति के संयोजक ग्राम पंचायत के सरपंच होंगे। राजकीय विद्यालयों के प्रधानाचार्य, ग्राम सचिव, पटवारी तथा शारीरिक शिक्षक समिति के सदस्य होंगे।
  • खंड स्तर पर समिति- खंड स्तर समिति के संयोजक पंचायत समिति के उपखंड अधिकारी होंगे तथा ब्लॉक विकास अधिकारी सदस्य सचिव होंगे। इसमें ब्लॉक पंचायत समिति के प्रधान, मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग व ज़िला खेल अधिकारी का प्रतिनिधि तथा राजकीय शारीरिक शिक्षक सदस्य होंगे।
  • उल्लेखनीय है कि प्रदेश में पहली बार राजीव गांधी ग्रामीण ओलंपिक खेल आयोजित होंगे। 29 अगस्त से शुरू होने वाले इस आयोजन में गाँव-ढाणी की खेल प्रतिभाओं को राज्यस्तरीय मंच मिलेगा और प्रदेश को भविष्य के लिये उभरते खिलाड़ी मिलेंगे।
  • इन खेलों के लिये 30 लाख ग्रामीणों ने रजिस्ट्रेशन करवाया है। इसमें कबड्डी, खो-खो, टेनिसबॉल क्रिकेट, वालीबॉल, हॉकी और शूटिंग जैसे खेल खेले जाएंगे। ज़िलों के बाद विजेता टीमों के बीच राज्यस्तरीय खेल जयपुर के सवाई मानसिंह स्टेडियम में होंगे।

हरियाणा Switch to English

हथनीकुंड डैम प्रोजेक्ट

चर्चा में क्यों?

18 अगस्त, 2022 को हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने महत्त्वाकांक्षी हथनीकुंड डैम परियोजना की हरियाणा सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग द्वारा तैयार की गई प्राथमिक रिपोर्ट को केंद्रीय जल आयोग को समक्ष भेजने की मंज़ूरी दी। जल आयोग के अतिरिक्त यह रिपोर्ट पाँच राज्यों में भी भेजी जाएगी।

प्रमुख बिंदु

  • मुख्यमंत्री ने कहा कि हथनीकुंड डैम हरियाणा सरकार का एक महत्त्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है। इस प्रोजेक्ट के निर्माण में यह रिपोर्ट बेहद अहम है। हर वर्ष बारिश के दिनों में पानी बर्बाद होता है और यमुना नदी के क्षेत्र में बाढ़ आती है। इसी के चलते हरियाणा सरकार ने हथनीकुंड में डैम बनाने का निर्णय लिया है।
  • इस डैम का कैचमेंट एरिया लगभग 11,170 स्क्वायर किमी. होगा। इसके बनने से हरियाणा को न केवल बिजली मिलेगी, बल्कि पानी की आपूर्ति भी होगी। हथिनीकुंड डैम की वार्षिक बिजली उत्पादन क्षमता 763 एमयू होगी।
  • यह डैम हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के क्षेत्र में बनाया जाना है। इस रिपोर्ट को केंद्रीय जल आयोग, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और दिल्ली को भेजा जाएगा।
  • मुख्यमंत्री ने कहा कि हथनीकुंड डैम के बनने से आसपास के क्षेत्र में ग्राउंड वाटर रिचार्जिंग होगी और इससे किसानों को लाभ मिलेगा। इसके अतिरिक्त यमुना नदी के क्षेत्र में हर वर्ष बारिश के दिनों में बाढ़ की स्थिति पैदा हो जाती है। इससे किसानों की फसलें खराब हो जाती हैं। डैम के बनने से बाढ़ की समस्या से निजात मिलेगी।
  • इस डैम के बनने का फायदा रेणुका, किसाऊ और लखवार, तीनों डैम को मिलेगा। इन तीनों डैम का बैलेंसिंग रिजरवायर फंक्शन हथनीकुंड डैम को बनाया जाएगा।
  • मुख्यमंत्री ने कहा कि डैम बिजली और पानी की आपूर्ति तो करेगा ही, साथ ही इसे पर्यटन का केंद्र भी बनाया जाएगा। कोई भी  डैम  पर्यटन की दृष्टि से भी महत्त्वपूर्ण होता है।

झारखंड Switch to English

सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड को मिला सुरक्षा और स्थिरता श्रेणी में कोयला मंत्री पुरस्कार 2021-22

चर्चा में क्यों?

18 अगस्त, 2022 को नई दिल्ली में आयोजित समारोह में कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) की झारखंड स्थित सहायक कंपनी सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (सीसीएल) को 2021-22 के कोयला मंत्री पुरस्कार में सुरक्षा श्रेणी में द्वितीय और स्थिरता श्रेणी में तृतीय पुरस्कार मिला।

प्रमुख बिंदु

  • केंद्रीय कोयला, खान और संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने विभिन्न श्रेणियों में कोयला मंत्री पुरस्कार, 2021-22 प्रदान किये।
  • प्रह्लाद जोशी ने कोयला सचिव अनिल कुमार जैन और सीआईएल के अध्यक्ष प्रमोद अग्रवाल की उपस्थिति में सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (सीसीएल) के सीएमडी पी. एम. प्रसाद को ट्रॉफी प्रदान की।
  • पिछले वर्ष पहली बार शुरू किये गए ये पुरस्कार तीन श्रेणियों- सुरक्षा (safety), उत्पादन एवं उत्पादकता (production & productivity) और निरंतरता (sustainability) में प्रदान किये गए थे।
  • इन पुरस्कारों के दायरे में विस्तार करते हुए इस वर्ष गुणवत्ता (quality) और ईआरपी कार्यान्वयन (ERP implementation) की दो नई अतिरिक्त श्रेणियाँ जोड़ी गई हैं। एक अन्य पहलू के रूप में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले क्षेत्रों के महाप्रबंधकों (General Managers) को भी इस वर्ष चार उप-श्रेणियों में सम्मानित किया गया।
  • पाँच श्रेणियों में दिये गए पुरस्कारों में से महानदी कोल फील्ड्स लिमिटेड (एमसीएल) ने तीन श्रेणियों, अर्थात् ‘सुरक्षा’, ‘उत्पादन एवं उत्पादकता’और ‘गुणवत्ता’में प्रथम पुरस्कार प्राप्त किया। ‘निरंतरता’श्रेणी में प्रथम पुरस्कार जहाँ वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (डब्ल्यूसीएल) को मिला, वहीं नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एनसीएल) ने ‘ईआरपी के कार्यान्वयन’में प्रथम पुरस्कार प्राप्त किया।
  • गौरतलब है कि सीसीएल की स्घ्थापना (सर्वप्रथम एनसीडीसी लिमिटेड) 1 नवंबर, 1975 को सीआईएल की पाँच सहायक कंपनियों में से एक सहायक कंपनी के रूप में हुई थी। सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड वर्ष 2007 से कैटेगरी 1 मिनीरत्न कंपनी है।
  • सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड ने स्थापना के बाद से पिछले वित्तीय वर्ष 2021-22 में 68.8 मिलियन टन (एमटी) का उच्चतम उत्पादन और 71.8 मिलियन टन (एमटी) का प्रेषण दर्ज किया है।
  • उल्लेखनीय है कि कोल इंडिया लिमिटेड कोयला हेतु देश की प्रथम नियंत्रक कंपनी है। शुरुआत में इसकी पाँच सहायक कंपनियाँ थीं, जबकि अभी सीआईएल की आठ सहायक कंपनियाँ हैं।
  • कोल इंडिया लिमिटेड राज्य के स्वामित्व वाली कोयला खनन निगम नवंबर, 1975 को अस्तित्व में आया। अपनी स्थापना के वर्ष में 79 मिलियन टन (एमटी) का साधारण उत्पादन करने वाली कोल इंडिया लिमिटेड आज (11 अगस्त, 2022 तक) 224 मिलियन टन (एमटी) के उत्पादन के साथ दुनिया की सबसे बड़ी कोयला उत्पादक तथा 2,48,550 (1 अप्रैल, 2022 के अनुसार) की जनशक्ति के साथ सबसे बड़ी कॉर्पोरेट नियोक्ता में से एक है।
  • भारत के आठ राज्यों में फैली सीआईएल, अपनी अनुषंगी कंपनियों के 84 खनन क्षेत्रों में माध्यम से प्रचालनरत् है। कोल इंडिया लिमिटेड की 318 खदानें हैं (1 अप्रैल, 2022 के अनुसार), जिनमें से 141 भूमिगत, 158 खुली खदानें और 19 मिश्रित खदानें हैं। सीआईएल के 21 प्रशिक्षण संस्थान और 76 व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्र भी हैं।

छत्तीसगढ़ Switch to English

छत्तीसगढ़ में खुलेंगे स्वामी आत्मानंद इंग्लिश मीडियम आदर्श महाविद्यालय

चर्चा में क्यों?

18 अगस्त, 2022 को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ में चरणबद्ध रूप से स्वामी आत्मानंद इंग्लिश मीडियम आदर्श महाविद्यालय प्रारंभ करने का निर्णय लिया है।

प्रमुख बिंदु

  • मुख्यमंत्री ने स्वामी आत्मानंद इंग्लिश मीडियम आदर्श महाविद्यालय प्रारंभ करने के संबंध में मुख्य सचिव को 10 दिनों में कार्ययोजना प्रस्तुत करने के निर्देश दिये हैं।
  • मुख्यमंत्री के इस निर्णय से इंग्लिश मीडियम स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को 12वीं के बाद उच्च शिक्षा के लिये अब बाहर नहीं जाना पड़ेगा। राज्य में ही अंग्रेज़ी माध्यम में गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा उपलब्ध होगी।
  • प्रथम चरण में आगामी शैक्षणिक सत्र जून 2023 से राज्य के प्रमुख नगरों में कम-से-कम 10 इंग्लिश मीडियम कॉलेज खोले जाएंगे। इसी तरह आगामी तीन साल में राज्य के सभी ज़िला मुख्यालयों में इंग्लिश मीडियम कॉलेज खोले जाएंगे।
  • गौरतलब है कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की विशेष पहल पर राज्य शासन द्वारा समाज के कमज़ोर तबके और मध्यमवर्गीय परिवारों के बच्चों को अंग्रेज़ी माध्यम में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिये स्वामी आत्मानंद अंग्रेज़ी माध्यम स्कूल प्रारंभ किये गए हैं। विगत वर्ष 51 स्कूल प्रारंभ किये गए थे, इन स्कूलों की लोकप्रियता के कारण स्वामी आत्मानंद अंग्रेज़ी माध्यम स्कूल की संख्या वर्तमान में बढ़कर 247 हो गई है।
  • अब स्वामी आत्मानंद इंग्लिश मीडियम आदर्श महाविद्यालय प्रारंभ होने से इन स्कूलों में पढ़ाई करने वाले बच्चों के साथ-साथ अंग्रेज़ी माध्यम के निजी स्कूलों के बच्चों को अंग्रेज़ी माध्यम में उच्च शिक्षा के लिये बाहर नहीं जाना पड़ेगा।
  • मुख्यमंत्री ने इस योजना की सफलता को देखते हुए 15 अगस्त, 2022 को राज्य में आगामी शिक्षा सत्र के पूर्व राज्य के 422 स्कूलों में स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय योजना लागू करने की घोषणा की थी। इनमें से 252 स्कूल बस्तर एवं सरगुजा संभाग में होंगे।
  • दंतेवाड़ा ज़िले के शत-प्रतिशत शासकीय हाई स्कूल एवं हायर सेकेंडरी स्कूलों को स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय का स्वरूप दिया जाएगा।
  • मुख्यमंत्री ने कहा है कि छत्तीसगढ़ की शिक्षा क्रांति आने वाले समय में देश का सबसे अच्छा ‘एजुकेशन मॉडल’प्रस्तुत करेगी।

उत्तराखंड Switch to English

केंद्र ने ऋषिकेश के विकास का प्रस्ताव जर्मन बैंक को भेजा

चर्चा में क्यों?

हाल ही में केंद्र सरकार ने योगनगरी ऋषिकेश की एकीकृत शहरी अवस्थापना विकास परियोजना के लिये जर्मन बैंक केएफडब्ल्यू को 1600 करोड़ रुपए का प्रस्ताव भेज दिया है। इस प्रोजेक्ट की फंडिंग जर्मन बैंक करेगा।

प्रमुख बिंदु

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर ऋषिकेश शहर के इंटिग्रेटेड डेवलपमेंट (एकीकृत विकास) को लेकर वित्त मंत्रालय ने जर्मन फंडिंग एजेंसी केएफडब्ल्यू को 160 मिलियन यूरो, यानी करीब 1295 करोड़ रुपए का प्रस्ताव भेजा है।
  • इस प्रोजेक्ट की कुल लागत लगभग 200 मिलियन यूरो (करीब 1600 करोड़ रुपए) है। परियोजना के लिये केंद्र सरकार व राज्य सरकार का वित्तीय अनुपात 80:20 होगा।
  • ऋषिकेश में एकीकृत शहरी अवस्थापना विकास परियोजना से विश्व में योगनगरी के रूप में विख्यात ऋषिकेश नगर में स्थानीय नागरिकों एवं पर्यटकों को बेहतर मूलभूत सुविधाएँ उपलब्ध होंगी।
  • गौरतलब है कि ऋषिकेश में हर साल लाखों पर्यटक आते हैं। चारधाम यात्रा के दौरान तीर्थयात्रियों की भीड़ की वजह से यातायात व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित होती है। इसके लिये ऋषिकेश में एलिवेटेड रोड बनाई जाएंगी, जिनसे ट्रैफिक जाम से मुक्ति मिलेगी।
  • इस परियोजना के पूरा होने पर नागरिक जीवन-शैली व जीवन योग्यता मानकों (अर्बन लाइवेबिलिटी स्टैंडर्ड) में बढ़ोतरी होगी। स्थानीय लोगों के व्यापारिक व आजीविका स्तर में सुधार होगा। नागरिकों व पर्यटकों को बेहतर पेयजल और स्वच्छता सुविधाएँ मिलेंगी। उनके जीविकोपार्जन की गतिविधियों में इजाफा होगा।

उत्तर प्रदेश Switch to English

उत्तर प्रदेश ईको-टूरिज्म विकास बोर्ड के गठन को कैबिनेट की मंज़ूरी

चर्चा में क्यों?

16 अगस्त, 2022 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई उत्तर प्रदेश कैबिनेट की बैठक में राज्य के वन अभयारण्यों के बाहर अनुमेय क्षेत्र में पर्यटन अवसंरचना सुविधाओं के विकास एवं प्रबंधन के लिये उत्तर प्रदेश ईको-टूरिज्म विकास बोर्ड (UP Eco-Tourism Development Board ) के गठन के प्रस्ताव को मंज़ूरी दी गई।

प्रमुख बिंदु

  • ईका-टूरिज्म बोर्ड का मुख्यालय लखनऊ में होगा तथा मुख्यमंत्री इसके अध्यक्ष होंगे।
  • इस बोर्ड में 10 विभागों (पर्यटन, वन, आयुष, ग्रामीण विकास, सिंचाई, शहरी विकास, कृषि, बागवानी, खेल और परिवहन) को शामिल किया गया है।
  • बोर्ड की संरचना में ईको-टूरिज्म विकास बोर्ड तथा ईको-टूरिज्म कार्यकारी समिति रहेगी। कार्यकारी समिति पर्यावरण पर्यटन विकास बोर्ड के उद्देश्यों को पूरा करने के लिये आवश्यक कार्रवाई हेतु ज़िम्मेदार होगी।
  • इको-टूरिज्म विकास बोर्ड ट्रैकिंग, हाइकिंग, साइकलिंग, कारवां टूरिज्म, सीप्लेन और रिवर क्रूज, एडवेंचर टूरिज्म के साथ-साथ होटल, रिसॉर्ट्स और इंफ्रास्ट्रक्चर सुविधाओं, बैलूनिंग, जंगल कैंपिंग और ईको-पर्यटन क्षेत्र के विकास के लिये कल्याण पर्यटन, जैसे– आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक चिकित्सा जैसी गतिविधियों को अंजाम देने की सुविधा प्रदान करेगा।
  • विकास बोर्ड के सदस्य दो प्रकार के होंगे। इनमें शासकीय (पदेन) सदस्य एवं विशेष आमंत्री सदस्य रहेंगे। कृषि मंत्री, वन मंत्री, आयुष मंत्री, वित्त मंत्री, पर्यटन मंत्री, सिंचाई मंत्री, ग्राम्य विकास मंत्री, मुख्य सचिव, प्रधान मुख्य संरक्षक और विभागाध्यक्ष, उत्तर प्रदेश वन निगम के एमडी बोर्ड के सदस्य रहेंगे।
  • अपर मुख्य सचिव/प्रमुख सचिव/सचिव पर्यटन बोर्ड के सदस्य सचिव होंगे। अपर मुख्य सचिव/प्रमुख सचिव पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन इसके समन्वयक की भूमिका में होंगे।
  • आईआरसीटीसी के प्रतिनिधि, सशस्त्र सीमा बल उत्तर प्रदेश के प्रतिनिधि, वर्ल्ड वाइल्ड लाइफ फंड इंडिया के प्रतिनिधि, बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी के प्रतिनिधि, कछुआ कंजर्वेशन फंड के प्रतिनिधि, कतर्नियाघाट फाउंडेशन के प्रतिनिधि, पाँच नामित पर्यावरण एवं पर्यटन विशेषज्ञ विशेष आमंत्री होंगे। इसके अलावा विशेष आमंत्री के रूप में पर्यावरण के क्षेत्र में कार्य करने वाली दो अन्य ख्यातिप्राप्त संस्थाओं का चयन प्रत्येक दो वर्ष के लिये किया जाएगा।

 Switch to English
एसएमएस अलर्ट
Share Page