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स्टेट पी.सी.एस.

  • 18 Aug 2022
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राजस्थान Switch to English

सामाजिक समरसता अभियान

चर्चा में क्यों?

17 अगस्त, 2022 को राजस्थान के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के मंत्री टीकाराम जूली ने शासन सचिवालय में उच्चाधिकारियों के साथ एक बैठक की। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों को प्रदेश भर में ‘सामाजिक समरसता अभियान’ चलाने और अभियान की कार्य योजना बनाने के लिये निर्देशित किया।

प्रमुख बिंदु 

  • गौरतलब है कि हाल ही में जालौर में स्कूल टीचर द्वारा बच्चे की पिटाई के बाद हुई मौत की घटना के संबंध में शासन सचिवालय में उच्चाधिकारियों के साथ एक बैठक आयोजित की गई
  • उन्होंने बताया कि अभियान के तहत संविधान एवं अनुसूचित जाति और जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम में उल्लेखित प्रावधानों के बारे में आम जन में जागरूकता लाई जाएगी। लोगों को समरसता, जोकि सभी धर्मों, विचारों और समाज को एकता के सूत्र में पिरोती है, के संबंध में जागरूक किया जाएगा।
  • इसके साथ ही मंत्री टीकाराम जूली ने गृह, उच्च शिक्षा एवं स्कूल शिक्षा विभाग को पत्र लिखने के निर्देश दिये। उन्होंने बच्चों के साथ खाने-पीने, बैठने, कार्य करने व अन्य किसी भी प्रकार का भेदभाव न करने के लिये उच्च शिक्षा व स्कूल शिक्षा विभाग को तथा अनुसूचित जाति व जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज प्रकरणों में प्राथमिकता से जाँच करते हुए शीघ्र चालान पेश करने के संबंध में गृह विभाग को पत्र लिखने के निर्देश दिये।
  • उन्होंने अधिकारियों को अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत गठित ज़िला व ब्लॉकस्तरीय सतर्कता और मॉनिटरिंग समिति के बैठकें समय-समय पर आयोजित करने के भी निर्देश दिये। 

हरियाणा Switch to English

चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय ने विकसित की सरसों की दो उन्नत किस्में

चर्चा में क्यों?

17 अगस्त, 2022 को चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार के प्रवत्ता ने जानकारी देते हुए बताया कि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने सरसों की दो नई उन्नत किस्में विकसित की हैं। इन किस्मों का हरियाणा के साथ पंजाब, दिल्ली, उत्तरी राजस्थान और जम्मू राज्यों के किसानों को भी लाभ होगा।

प्रमुख बिंदु 

  • प्रवक्ता ने बताया कि विश्वविद्यालय के तिलहन वैज्ञानिकों की टीम ने सरसों की आरएच 1424 व आरएच 1706 दो नई किस्में विकसित की हैं।
  • इन किस्मों की अधिक उपज और बेहतर तेल गुणवत्ता के कारण राजस्थान कृषि अनुसंधान संस्थान, दुर्गापुर (राजस्थान) में अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना (सरसों) की हुई बैठक में हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, उत्तरी राजस्थान और जम्मू राज्यों में खेती के लिए पहचान की गई है।
  • उन्होंने बताया कि आरएच 1424 किस्म इन राज्यों में समय पर बुवाई और बारानी परिस्थितियों में खेती के लिये, जबकि आरएच 1706 जोकि एक मूल्यवर्द्धित किस्म है, इन राज्यों के सिंचित क्षेत्रों में समय पर बुवाई के लिये बहुत उपयुक्त किस्म पाई गई है। ये किस्में उपरोक्त सरसों उगाने वाले राज्यों की उत्पादकता को बढ़ाने में मील का पत्थर साबित होंगी।
  • उन्होंने बताया कि हरियाणा पिछले कई वर्षों से सरसों की फसल की उत्पादकता के मामले में देश में शीर्ष स्थान पर है। यह इस विश्वविद्यालय में सरसों की अधिक उपज देने वाली किस्मों के विकास और किसानों द्वारा उन्नत तकनीकों को अपनाने के कारण संभव हुआ है।
  • हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय देश में सरसों अनुसंधान में अग्रणी केंद्र है और अब तक यहाँ अच्छी उपज क्षमता वाली सरसों की कुल 21 किस्मों को विकसित किया गया है। हाल ही में यहाँ विकसित सरसों की किस्म आरएच 725 कई सरसों उगाने वाले राज्यों के किसानों के बीच बहुत लोकप्रिय है।    

झारखंड Switch to English

नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज को पुन: अधिसूचित नहीं करने के प्रस्ताव को मंज़ूरी

चर्चा में क्यों?

17 अगस्त, 2022 को झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने जनहित को ध्यान में रखते हुए नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज को पुन:अधिसूचित नहीं करने के प्रस्ताव पर सहमति प्रदान की। मुख्यमंत्री के इस निर्णय से हज़ारों आदिवासियों का 30 वर्षों का संघर्ष समाप्त होगा।

प्रमुख बिंदु 

  • गौरतलब है कि 1964 में शुरू हुए नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज का तत्कालीन बिहार सरकार द्वारा 1999 में अवधि विस्तार किया गया था।
  • नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज के विरोध में लातेहार ज़िला के करीब 39 राजस्व ग्रामों द्वारा आमसभा के माध्यम से राज्यपाल को भी ज्ञापन सौंपा गया था, जिसमें नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज से प्रभावित जनता द्वारा बताया गया था कि लातेहार व गुमला ज़िला पाँचवी अनुसूची के अंतर्गत आते हैं। यहाँ पेसा एक्ट 1996 लागू है, जिसके तहत ग्रामसभा को संवैधानिक अधिकार प्राप्त है।
  • इसी के तहत नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज के प्रभावित इलाके के ग्राम प्रधानों ने प्रभावित जनता की मांग पर ग्रामसभा का आयोजन कर नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज के लिये गाँव की सीमा के अंदर की ज़मीन सेना के फायरिंग अभ्यास हेतु उपलब्ध नहीं कराने का निर्णय लिया था। साथ ही नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज की अधिसूचना को आगे और विस्तार न कर विधिवत् अधिसूचना प्रकाशित कर परियोजना को रद्द करने का अनुरोध किया था।
  • गौरतलब है कि नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज से प्रभावित जनता द्वारा पिछले लगभग 30 वर्षों से लगातार नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज की अधिसूचना को रद्द करने हेतु विरोध-प्रदर्शन किया जा रहा था। वर्तमान में भी प्रत्येक वर्ष की भाँति नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज के विरोध में 22-23 मार्च को विरोध-प्रदर्शन किया गया था।  

छत्तीसगढ़ Switch to English

छत्तीसगढ़ की अंकिता ने स्वतंत्रता दिवस पर यूरोप की सबसे ऊँची चोटी माउंट एलब्रूस पर फहराया तिरंगा

चर्चा में क्यों?

15 अगस्त, 2022 को स्वतंत्रता के अमृत महोत्सव के गौरवशाली अवसर पर छत्तीसगढ़ की अंकिता गुप्ता ने यूरोपीय महाद्वीप की सबसे ऊँची चोटी माउंट एलब्रूस पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा दिया गया तिरंगा फहराया।

प्रमुख बिंदु 

  • मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने यूरोप जाने से पहले विगत 3 अगस्त को युवा पर्वतारोही अंकिता को अपने निवास में राष्ट्रीय ध्वज भेंट किया था।
  • गौरतलब है कि यूरोपीय महाद्वीप की सबसे ऊँची चोटी माउंट एलब्रूस (पश्चिम) की ऊँचाई 5642 मीटर (18,510 फीट) है, यहाँ का तापमान -25 से -30 डिग्री सेल्सियस तक और हवा की गति 45 से 50 किमी. तक रहती है। इन विषम परिस्थितियों में भी 15 अगस्त की सुबह 5 बजकर 43 मिनट में तिरंगा लहराकर अंकिता ने आज़ादी की 76वीं वर्षगाँठ को और यादगार बना दिया। 
  • चोटी पर पहुँचकर अंकिता ने राज्य सरकार के न्याय एवं सशक्तीकरण के छत्तीसगढ़ मॉडल को प्रदर्शित किया। इसके बाद उन्होंने दूसरे ही दिन 16 अगस्त को यूरोप महाद्वीप में स्थित 5621 मीटर ऊँचे माउंट एलब्रूस (पूर्व) पर्वत पर सुबह 4 बजकर 23 मिनट पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया।
  • अंकिता गुप्ता मूलत: कवर्धा की रहने वाली हैं। वर्तमान में वह कबीरधाम ज़िले में पुलिस विभाग के अंतर्गत आरक्षक के पद पर कार्य कर रही हैं। छत्तीसगढ़ राज्य सरकार द्वारा अंकिता को यूरोप में पर्वतारोहण में शामिल होने के लिये पाँच लाख रुपए की आर्थिक सहायता दी गई है।
  • अंकिता गुप्ता ने कहा कि यह सफलता देश के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी व शहीदों को समर्पित है। उन्होंने बताया कि विगत जनवरी माह में -39 डिग्री सेल्सियस पर लेह लद्दाख के यूटी कांगड़ी की 6080 मीटर ऊँची चोटी फतेह की थी। उनका लक्ष्य अब सातों महाद्वीपों की चोटी में तिरंगा फहराकर देश का मान बढ़ाना है।

छत्तीसगढ़ Switch to English

दलहनी फसलों के अनुसंधान एवं विकास पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारंभ

चर्चा में क्यों?

17 अगस्त, 2022 को छत्तीसगढ़ के कृषि मंत्री रविंद्र चौबे ने इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय द्वारा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली के सहयोग से आयोजित दोदिवसीय रबी दलहन कार्यशाला एवं वार्षिक समूह बैठक का शुभारंभ किया।

प्रमुख बिंदु 

  • इस दोदिवसीय रबी दलहन कार्यशाला में चना, मूंग, उड़द, मसूर, तिवड़ा, राजमा एवं मटर का उत्पादन बढ़ाने हेतु नवीन उन्नत किस्मों के विकास, अनुसंधान एवं उत्पादन तकनीकी पर विचार-मंथन किया जा रहा है।
  • उल्लेखनीय है कि देश में दलहनी फसलों के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिये अनुसंधान एवं विकास हेतु कार्य योजना एवं रणनीति तैयार करने के लिये आयोजित इस कार्यशाला एवं वार्षिक समूह बैठक में देश के विभिन्न राज्यों के 100 से अधिक दलहन वैज्ञानिक शामिल हुए हैं।
  • भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के उप महानिदेशक डॉ. टी.आर. शर्मा ने इस अवसर पर कहा कि केंद्र सरकार द्वारा भारत को दलहन उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने एवं इसका आयात कम करने के लिये विशेष प्रयास किये जा रहे हैं, जिसके परिणामस्वरूप देश में इस वर्ष 2 करोड़ 80 लाख मीट्रिक टन दलहन उत्पादन होने की संभावना है। गौरतलब है कि वर्ष 2016 में देश में 1 करोड़ 60 लाख मीट्रिक टन दलहन का उत्पादन होता था।
  • उन्होंने दलहनी फसलों के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिये इसकी रोगरोधी एवं उन्नतशील किस्में उगाने तथा यंत्रीकरण के उपयोग में वृद्धि करने पर ज़ोर दिया।
  • भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के सहायक महानिदेशक डॉ. संजीव गुप्ता ने कहा कि धान के कटोरे के रूप में प्रख्यात छत्तीसगढ़ आज दलहन उत्पादन के क्षेत्र में भी अपनी पहचान बना रहा है। उन्होंने इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय द्वारा दलहनी फसलों की नवीन उन्नतशील किस्में विकसित किये जाने पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में उगाई जाने वाली तिवड़ा की फसल खाद्य सुरक्षा उपलब्ध कराने के क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
  • इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने कहा कि छत्तीसगढ़ में वर्तमान समय में लगभग 11 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में दलहनी फसलें ली जा रहीं हैं, जिनमें अरहर, चना, मूंग, उड़द, मसूर, कुल्थी, तिवड़ा, राजमा एवं मटर प्रमुख हैं।
  • इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर में दलहनी फसलों पर अनुसंधान एवं प्रसार कार्य हेतु तीन अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजनाएँ - मुलार्प फसलें (मूंग, उड़द, मसूर, तिवड़ा, राजमा, मटर), चना एवं अरहर संचालित की जा रहीं हैं, जिसके तहत नवीन उन्नत किस्मों के विकास, उत्पादन तकनीक एवं कृषकों के खेतों पर अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन का कार्य किया जा रहा है।
  • विश्वविद्यालय द्वारा अबतक विभिन्न दलहनी फसलों की उन्नतशील एवं रोगरोधी कुल 25 किस्मों का विकास किया जा चुका है, जिनमें मूंग की 2, उड़द की 1, अरहर की 3, कुल्थी की 6, लोबिया की 1, चना की 5, मटर की 4, तिवड़ा की 2 एवं मसूर की 1 किस्म प्रमुख हैं।
  • कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा छत्तीसगढ़ की प्रमुख दलहन फसल तिवड़ा की दो उन्नत किस्में विकसित की गई हैं, जो मानव उपयोग हेतु पूर्णत: सुरक्षित हैं। दलहनी फसलों में यंत्रीकरण को बढ़ावा देने हेतु विश्वविद्यालय द्वारा नए कृषि यंत्र विकसित किये जा रहे हैं।
  • इस अवसर पर प्रदेश के कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे ने कहा कि छत्तीसगढ़ में दलहन फसलों के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिये दलहन उगाने वाले किसानों को विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है, जिसके तहत धान की जगह दलहन उत्पादन करने वाले किसानों को प्रति एकड़ नौ हज़ार रुपए का अनुदान दिया जा रहा है।
  • उन्होंने कहा कि दलहन उत्पादन को बढ़ावा देने के लिये राज्य सरकार द्वारा किसानों से अरहर एवं उड़द की खरीदी समर्थन मूल्य 6600 रुपए की जगह 8000 रुपए प्रति क्विंटल की दर पर की जा रही है।
  • राज्य सरकार के प्रयासों से पिछले वर्षों में राज्य में दलहन के रकबे एवं उत्पादन में बढ़ोतरी हुई है और आज 11 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में दलहन फसलों की खेती की जा रही है, जिसके आगामी दो वर्षों में बढ़कर 15 लाख हेक्टेयर होने की उम्मीद है।

छत्तीसगढ़ Switch to English

नया रायपुर में विद्युत उपकरणों की टेस्टिंग के लिये क्षेत्रीय टेस्ट प्रयोगशाला की होगी स्थापना

चर्चा में क्यों?

17 अगस्त, 2022 को छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अध्यक्षता में उनके निवास कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय विद्युत अनुसंधान संस्थान, बंगलूरू और छत्तीसगढ़ शासन के मध्य नवा रायपुर में विद्युत उपकरणों की टेस्टिंग के लिये राष्ट्रीय स्तर की प्रयोगशाला तथा परीक्षण केंद्र की स्थापना हेतु एमओयू पर हस्ताक्षर किये गए।

प्रमुख बिंदु 

  • छत्तीसगढ़ ऊर्जा विभाग के सचिव अंकित आनंद और सीपीआरआई के एडिशनल डायरेक्टर बी.ए. सावले ने एमओयू पर हस्ताक्षर किये।
  • नवा रायपुर में केंद्रीय विद्युत अनुसंधान संस्थान, बंगलूरू द्वारा स्थापित की जाने वाली क्षेत्रीय टेस्ट प्रयोगशाला मध्य भारत की सबसे बृहद् प्रयोगशाला होगी, जिसमें ट्रांसफॉर्मर, रुटीन टेस्ट, मीटर टेस्टिंग, ऑयल टेस्टिंग एवं समस्त विद्युत उपकरण के रुटीन टेस्ट की सुविधा होगी। वर्तमान में विद्युत उपकरणों को टेस्टिंग के लिये भोपाल भेजा जाता है।
  • छत्तीसगढ़ में यह सुविधा उपलब्ध होने से समय एवं राजस्व में बचत होगी। इस प्रयोगशाला में विद्युत कंपनियों को टेस्टिंग में 20 प्रतिशत की रियायत दी जाएगी। प्रयोगशाला के अंतर्गत ट्रेनिंग सेंटर की भी स्थापना की जाएगी, जिसमें विद्युत कंपनियों एवं निजी संस्थानों के कर्मचारियों की तकनीकी दक्षता में वृद्धि होगी।
  • प्रयोगशाला तथा परीक्षण केंद्र की स्थापना हेतु अटल नगर नया रायपुर विकास प्राधिकरण द्वारा नया रायपुर क्षेत्र के लेयर-2 ग्राम- तेंदुआ, सेक्टर-30 में 10 एकड़ भूमि का आवंटन किया गया है।
  • प्रयोगशाला की स्थापना का कार्य 20 करोड़ 70 लाख रुपए की लागत से 36 माह में पूर्ण किया जाएगा।
  • रायपुर में स्थापित होने वाली क्षेत्रीय टेस्ट लेबोरेटरी में हाई वोल्टेज लेबोरेटरी (इम्पल्स टेस्ट 400 केवी), रुटीन टेस्ट लेबोरेटरी फॉर ट्रांसफॉर्मर (10 एमवीए तक), टेम्परेचर राईज टेस्ट फेसिलिटी फॉर ट्रांसफॉर्मर (10 एमवीए तक), एनर्जी मीटर टेस्ट लेबोरेटरी फॉर स्मार्ट मीटर और साइबर सिक्यूरिटी टेस्ट लेबोरेटरी फॉर सबस्टेशन इक्यूपमेंट्स एंड स्मार्ट मीटर की सुविधा उपलब्ध होगी।
  • उल्लेखनीय है कि केंद्रीय विद्युत अनुसंधान संस्थान भारत सरकार, विद्युत मंत्रालय के अधीन गठित सार्वजनिक उपक्रम है। इस संस्थान द्वारा पावर सेक्टर के निर्माताओं एवं यूटिलिटी में गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिये विभिन्न सेवाओं, पावर सेक्टर में एप्लाइड रिसर्च को प्रोत्साहन तथा इंजीनियरिंग के क्षेत्र में दक्षता एवं विश्वसनीयता में सुधार हेतु परामर्श सेवाएँ दी जाती हैं।

छत्तीसगढ़ Switch to English

ऐतिहासिक अंतर्राष्ट्रीय मुक्केबाज़ी मुकाबले ‘द जंगल रंबल’ का राजधानी रायपुर में हुआ आयोजन

चर्चा में क्यों?

17 अगस्त, 2022 को छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के सरदार बलबीर सिंह जुनेजा स्टेडियम में अंतर्राष्ट्रीय मुक्केबाज़ी मुकाबले ‘द जंगल रंबल’का आयोजन किया गया। इस प्रतियोगिता के एक मुकाबले में पेशेवर भारतीय मुक्केबाज़ विजेंदर सिंह ने घाना के एलियासु सुले को हराया।

प्रमुख बिंदु

  • अंतर्राष्ट्रीय मुक्केबाज़ी मुकाबले ‘द जंगल रंबल’प्रतियोगिता में पाँच रोचक मुकाबले हुए। लाइट वेट ग्रुप में पहला मुकाबला अमेय नितिन और असद आसिफ खान के बीच हुआ। इस मुकाबले में असद ने बाजी मारी। वहीं दूसरा मुकाबला आशीष शर्मा और कार्तिक सतीश कुमार के बीच हुआ, जिसमें कार्तिक सतीश कुमार विजेता घोषित किये गए। तीसरा मैच शैकोम और गुरप्रीत सिंह के बीच हुआ। गुरप्रीत सिंह इस मैच के विजेता बने।
  • मुक्केबाज़ी का चौथा मुकाबला सचिन नौटियाल बनाम फैजान अनवर के बीच हुआ। सचिन नौटियाल प्रतिद्वंद्वी खिलाड़ी फैजान के पंच से पस्त हुए और रिंग छोड़ बाहर चले गए। खेल के नियमों के तहत रेफरी ने फैजान को विजेता घोषित किया।
  • बॉक्सिंग की इस प्रतियोगिता में सबसे ज़्यादा आकर्षण का केंद्र पेशेवर भारतीय मुक्केबाज़ विजेंदर सिंह और घाना के एलियासु सुले के बीच हुआ मुकाबला रहा। इस मैच में विजेंदर सिंह ने अपने तगड़े पंच से एलियासु सुले को मात दी। ‘द जंगल रंबल’के पाँचवें और इस आखिरी मुकाबले में केवल 02 मिनट 07 सेकेंड में ही एलियासु को धूल चटा दी।
  • गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में ये पहला पेशेवर मुक्केबाज़ी मुकाबला है। भारत के पहले पेशेवर मुक्केबाज़ विजेंदर सिंह इस मुकाबले के लिये बड़े पैमाने पर प्रशिक्षण ले रहे थे।
  • उल्लेखनीय है कि 8 जून को प्रोफेशनल मुक्केबाज़ विजेंदर सिंह ने मुख्यमंत्री भूपेंद्र बघेल से मुलाकात की थी और छत्तीसगढ़ में प्रोफेशनल बॉक्सिंग मैच का आयोजन करने के लिये अनुरोध किया था। मुख्यमंत्री ने इस अनुरोध को स्वीकार किया था और उसी तारतम्य में मुख्यमंत्री की पहल पर राजधानी रायपुर में अंतर्राष्ट्रीय बॉक्सिंग मुकाबला आयोजित किया गया। विजेंदर सिंह लगभग 19 महीनों के बाद रिंग में उतरे थे।
  • छत्तीसगढ़ में खेलों को बढ़ावा देने के प्रयासों के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में खेल अकादमी की स्थापना की गई है और खेलों के लिये अलग से प्राधिकरण भी बनाया गया है। इससे आधारभूत सुविधाओं के विकास और खिलाड़ियों को सँवारने के काम एक साथ होंगे।
  • बघेल ने कहा कि छत्तीसगढ़ में क्रिकेट का रोड सेफ्टी मैच हुआ। कई बड़े खिलाड़ियों ने अपने खेल का प्रदर्शन किया है। महिला हॉकी में पहले ही राज्य का प्रतिनिधित्व रहा है, अब कॉमनवेल्थ गेम्स में राज्य की बिटिया आरुषि कश्यप ने बैडमिंटन में मेडल जीता है। तीरंदाज़ी में भी यहाँ अनेक संभावनाएँ हैं। ऐसे आयोजनों से राज्य में खेलों को नया आयाम मिलेगा।

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