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अयोध्या में 200 वर्ष पुरानी ऐतिहासिक रामायण की पांडुलिपि मिली

  • 07 Apr 2026
  • 9 min read

चर्चा में क्यों?

200 वर्ष से अधिक पुरानी एक दुर्लभ रामायण पांडुलिपि को अयोध्या स्थित अंतर्राष्ट्रीय राम कथा संग्रहालय में संरक्षित किया जाएगा, जो भारत की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत के संरक्षण के प्रयासों को रेखांकित करता है।\

मुख्य बिंदु:

  • पांडुलिपि: नागरी लिपि (जो बाद में देवनागरी में विकसित हुई) में लिखी गई 200 वर्ष से अधिक पुरानी रामचरितमानस की एक पांडुलिपि को अयोध्या स्थित संग्रहालय के संग्रह में जोड़ा जाएगा।
  • संरक्षण पहल: संग्रहालय ने विद्वानों और संस्थानों से संस्कृत तथा अन्य भारतीय भाषाओं में उपलब्ध दुर्लभ रामायण पांडुलिपियों को दान करने का आग्रह किया है।
    • इस पहल का उद्देश्य रामायण पांडुलिपियों का एक राष्ट्रीय भंडार (रिपॉजिटरी) तैयार करना है, जिसमें क्षेत्रीय संस्करण, टीकाएँ तथा ताड़पत्र या कागज़ पर लिखी चित्रित पांडुलिपियाँ शामिल हों।
    • इन ऐतिहासिक ग्रंथों के संरक्षण और अध्ययन के लिये संग्रहालय में एक संरक्षण केंद्र स्थापित करने की स्वीकृति भी दी गई है।
  • अंतर्राष्ट्रीय राम कथा संग्रहालय:
    • इसकी स्थापना वर्ष 1988 में हुई थी।
    • यह भगवान राम के जीवन और विरासत को समर्पित है।

और पढ़ें: रामचरितमानस

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