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औषधीय पौधों का संरक्षण व संवर्द्धन

  • 02 Aug 2021
  • 2 min read

चर्चा में क्यों?

हाल ही में छत्तीसगढ़ में औषधीय पौधों के संरक्षण, संवर्द्धन एवं विकास की दिशा में हो रहे कार्यों की सराहना अंतर्राष्ट्रीय संस्था यूनाइटेड नेशन कन्वेंशन टू कंबैट डेजर्टीफिकेशन (United Nations Convention to Combat Desertification-UNCCD) द्वारा की गई है।

प्रमुख बिंदु 

  • उक्त संस्था UNCCD द्वारा इसके तहत राज्य के वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री मोहम्मद अकबर और छत्तीसगढ़ राज्य के पारंपरिक वैद्य संघ के प्रांतीय सचिव निर्मल अवस्थी को सम्मानित किया गया है।
  • यूएनसीसीडी ने मोहम्मद अकबर के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ में औषधीय पौधों के विषय में चलाए जा रहे जागरुकता अभियान की और निर्मल अवस्थी की होम हर्बल गार्डन योजना के तहत औषधीय पौधों का ज्ञान तथा पारंपरिक ज्ञान आधारित चिकित्सा पद्धति के पुनरुत्थान के लिये किए जा रहे प्रयासों की सराहना की है।
  • यूएनसीसीडी सचिवालय के रजेब बुलहारौत ने इसकी सरहाना करते हुए उन्हें सर्टिफिकेट जारी कर सम्मानित किया है।
  • गौरतलब है कि पारंपरिक वैद्य संघ द्वारा प्रतिवर्ष औषधीय पौधों का नि:शुल्क वितरण कर छत्तीसगढ़ राज्य की लोक स्वास्थ्य परंपरा, संवर्द्धन अभियान एवं ‘घर-अंगना, जड़ी-बूटी बगिया योजना’ के तहत जन-जागरुकता अभियान संचालित किया जा रहा है।
  • प्रदेश के पारंपरिक वैद्यों के द्वारा मौसमी बीमारियों के अलावा असाध्य रोगों में जीवनदायिनी वनौषधियों, जिसमें ब्राह्मी अश्वगंधा, सतावर, तुलसी, कालमेघ, गिलोय, अडूसा, चिरायता, पत्थर चूर, मंडूपपर्णी, भुईआंवला, भृंगराज, हड़जोड़ आदि बहुउपयोगी वनौषधियों का वितरण किया जाता है।
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