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60वाँ ज्ञानपीठ पुरस्कार, 2025

  • 18 Mar 2026
  • 15 min read

चर्चा में क्यों?

वैरामुथु को 60वें ज्ञानपीठ पुरस्कार (2025) के लिये चुना गया है, जिससे वे इस सम्मान को प्राप्त करने वाले तीसरे तमिल लेखक और तमिल कविता के लिये मान्यता पाने वाले पहले लेखक बन गए हैं।

मुख्य बिंदु:

  • परिचय: ज्ञानपीठ पुरस्कार भारत का सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान है, जिसकी शुरुआत वर्ष 1961 में हुई थी और यह भारतीय भाषाओं के साहित्य में उत्कृष्ट योगदान के लिये प्रतिवर्ष प्रदान किया जाता है।
  • मान्यता: वैरामुथु, अकिलन (1975) और जयकांतन (2002) के बाद ज्ञानपीठ पुरस्कार प्राप्त करने वाले तीसरे तमिल लेखक हैं।
    • साहित्य के अतिरिक्त, वे तमिल सिनेमा के एक प्रसिद्ध गीतकार भी हैं, जिन्होंने 7,000–8,000 से अधिक गीत लिखे हैं और कई राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त किये हैं।
    • उनका उपन्यास कल्लिक्काट्टु इथिहासम, जो वैगई बाँध के कारण हुए विस्थापन को दर्शाता है, को वर्ष 2003 में साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला।
  • समर्पण: उन्होंने यह पुरस्कार तमिल जनता और समाज को समर्पित किया, जिससे इस सम्मान के सांस्कृतिक महत्त्व को रेखांकित किया।
  • प्रमुख पुरस्कार:
    • राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार (सर्वश्रेष्ठ गीत) – 7 बार
    • पद्म श्री (2003)
    • पद्म भूषण (2014)
    • साहित्य अकादमी पुरस्कार (2003)
  • पुरस्कार के घटक: इस पुरस्कार में ₹11 लाख की राशि, देवी सरस्वती (वाग्देवी) की कांस्य प्रतिमा और एक प्रशस्ति-पत्र शामिल होता है।
  • पूर्व विजेता:
    • 58वाँ (2023): जगद्गुरु रामभद्राचार्य एवं गुलज़ार
    • 59वाँ (2024): विनोद कुमार शुक्ल
  • प्रथम विजेता: पहला ज्ञानपीठ पुरस्कार (1965) जी. शंकर कुरुप को दिया गया था।
  • प्रथम महिला विजेता: पहली महिला ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेता आशापूर्णा देवी थीं, जिन्हें वर्ष 1976 में उनके उपन्यास प्रथम प्रतिश्रुति के लिये सम्मानित किया गया।
  • महत्त्व: यह पुरस्कार भारत की भाषायी विविधता को सुदृढ़ करता है और राष्ट्रीय सांस्कृतिक परिदृश्य में क्षेत्रीय साहित्य के योगदान को उजागर करता है।

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