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पीआरएस कैप्सूल्स

विविध

जनवरी 2019

  • 30 Apr 2019
  • 42 min read

PRS की मुख्य विशेषताएँ

  • संसद
    • राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में पिछले पाँच वर्षों की प्रमुख उपलब्धियों पर प्रकाश डाला
  • समष्टि-आर्थिक (मैक्रोइकॉनोमिक ) विकास
    • 2018-19 की तीसरी तिमाही (अक्तूबर से दिसंबर) में खुदरा मुद्रास्फीति और थोक मुद्रास्फीति क्रमशः 2.19%, 3.8% थी।
  • वित्त
    • अनियमित जमा योजनाओं पर प्रतिबंध लगाने संबंधी विधेयक-2018 पर स्थायी समिति की रिपोर्ट
    • RBI द्वारा डिजिटल भुगतान के सघनीकरण हेतु उच्च स्तरीय समिति का गठन
    • RBI द्वारा MSMEs पर गठित विशेषज्ञ समिति
    • CAG ने FRBM अधिनियम, 2003 के अनुपालन पर रिपोर्ट प्रस्तुत की
    • आपदाओं के लिये धन एकत्रित करने हेतु केरल में उपकर लगाने को मंज़ूरी
  • सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता
    • 124वाँ संवैधानिक संशोधन विधेयक पारित
  • शिक्षा
    • RTE (दूसरा संशोधन) विधेयक, 2017 संसद द्वारा पारित किया गया
    • केंद्रीय शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश हेतु आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्गों को आरक्षण
  • पर्यावरण
    • राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम की शुरुआत
  • कानून एवं न्याय
    • आधार एवं अन्य कानून (संशोधन) विधेयक लोकसभा द्वारा पारित
    • पर्सनल लॉ (संशोधन) विधेयक लोकसभा द्वारा पारित
    • नई दिल्ली अंतर्राष्ट्रीय मध्यस्थता केंद्र विधेयक, 2018 लोकसभा द्वारा पारित
  • विज्ञान प्रोद्योगिकी
    • DNA प्रौद्योगिकी (उपयोग एवं अनुप्रयोग) विनियमन विधेयक, 2018 लोकसभा द्वारा पारित
  • श्रम एवं रोज़गार
    • व्यापार संघ संशोधन विधेयक, 2019 लोकसभा में प्रस्तुत
  • जनजातीय मामले
    • असम एवं कर्नाटक में अनुसूचित जनजातियों की सूची में संशोधन हेतु बिल प्रस्तुत किया गया
  • ऊर्जा
    • गैस आधारित बिजली संयंत्रों में तनावग्रस्त परिसंपत्तियों पर स्थायी समिति की रिपोर्ट
  • सूचना एवं प्रसारण
    • सिनेमैटोग्राफ अधिनियम, 1952 में संशोधन का मसौदा जारी

संसद

राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में पिछले पाँच वर्षों की प्रमुख उपलब्धियों पर प्रकाश डाला

  • भारत के राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद ने 31 जनवरी, 2019 को संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक (Joint Sitting of both Houses) को संबोधित किया।
  • उन्होंने अपने संबोधन में सरकार की प्रमुख नीतिगत उपलब्धियों को रेखांकित किया।  इस संबोधन की मुख्य विशेषताओं में शामिल हैं:-
    • अर्थव्यवस्था: पिछले साढ़े चार वर्षों के दौरान देश की अर्थव्यवस्था में औसतन 7.3% की दर से वृद्धि हुई है। भारत दुनिया की 6वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में उभरा है।
    • वित्त एवं बैंकिंग: पिछले साढ़े चार वर्षों में प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (Direct Benefit Transfer-DBT) में विस्तार के परिणामस्वरूप लगभग 6.05 लाख करोड़ रुपए से अधिक की धनराशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में स्थानांतरित की गई है।
    • कानून एवं प्रशासन: सरकार ने नाबालिगों से बलात्कार जैसे जघन्य अपराधों के मामले में मौत की सज़ा का प्रावधान किया है तथा संसद में तीन तलाक विधेयक (Triple Talaq Bill) को पारित किये जाने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।
    • भ्रष्टाचार एवं काला धन: विमुद्रीकरण के माध्यम से काले धन के प्रवाह के लिये ज़िम्मेदार 3.3 लाख शेल कंपनियों के पंजीकरण को रद्द कर दिया गया है।
    • कौशल विकास तथा रोज़गार सृजन: प्रधानमंत्री रोज़गार योजना के अंतर्गत कर प्रोत्साहन के साथ नई नौकरियों के सृजन की शुरुआत की गई है।
    • इस योजना के अंतर्गत नियोक्ता द्वारा दिये जाने वाले 12% EPS (कर्मचारी पेंशन योजना) तथा EPF (कर्मचारी भविष्य निधि) का योगदान पहले तीन वर्षों के लिये सरकार द्वारा दिया जा रहा है।
    • स्वास्थ्य: गंभीर बीमारी की स्थिति में प्रति परिवार (प्रत्येक वर्ष) पाँच लाख रुपए तक की सहायता प्रदान करने वाली प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (Pradhan Mantri Jan Arogya Yojana-PMJAY) की शुरुआत की गई है।
    • इस योजना के तहत 10 लाख से अधिक लोगों ने अस्पतालों में मुफ्त इलाज का लाभ उठाया है।
    • स्वच्छता: स्वच्छ भारत अभियान के तहत 9 करोड़ से अधिक शौचालयों का निर्माण किया गया है।
    • ग्रामीण स्वच्छता का कवरेज़ जो वर्ष 2014 में 40% से भी कम था, बढ़कर 98% हो गया है।
    • महिला एवं बाल विकास: प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (Pradhan Mantri MUDRA Yojana- PMMY) के अंतर्गत महिलाओं द्वारा अधिकतम लाभ उठाया गया है। 15 करोड़ मुद्रा ऋणों में से 73% महिला उद्यमियों को वितरित किये गए हैं।
    • सरकार ने मातृत्व अवकाश को भी 12 सप्ताह से बढ़ाकर 26 सप्ताह कर दिया है।
  • राष्ट्रपति के अभिभाषण के साथ, संसद का बजट सत्र 31 जनवरी को शुरु हुआ तथा 13 फरवरी को इसका समापन हुआ।
  • इसमें कुल 10 सत्र आयोजित होते हैं।

समष्टि-आर्थिक (मैक्रोइकॉनोमिक ) विकास

2018-19 की तीसरी तिमाही (अक्तूबर से दिसंबर) में खुदरा मुद्रास्फीति (Retail Inflation) तथा थोक मुद्रास्फीति (Wholesale Inflation) क्रमशः 2.19% एवं 3.8% रहा।

  • उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (Consumer Price Index- CPI) मुद्रास्फीति (आधार वर्ष: 2011-12, वर्ष-दर-वर्ष) अक्तूबर 2018 में 3.38% से सीमांत रूप से घटकर दिसंबर 2018 में 2.19% हो गई है।
  • प्रत्येक तिमाही में खाद्य कीमतों में कमी आई है, अक्तूबर 2018 में इसमें 0.86% तथा दिसंबर 2018 में 2.51% तक की कमी दर्ज की गई।
  • थोक मूल्य सूचकांक (Wholesale Price Index- WPI) मुद्रास्फीति (आधार वर्ष: 2011-12, वर्ष-दर-वर्ष) अक्तूबर 2018 में 5.54% से घटकर दिसंबर 2018 में 3.8% हो गई हैं।

वित्त

अनियमित जमा योजनाओं पर प्रतिबंध लगाने संबंधी विधेयक-2018 पर स्थायी समिति की रिपोर्ट

  • अनियमित जमा योजनाओं पर प्रतिबंध लगाने संबंधी विधेयक-2018 (Banning of Unregulated Deposit Schemes Bill) में अनियमित जमा योजनाओं पर प्रतिबंध लगाने तथा जमाकर्त्ताओं के हितों की रक्षा के लिये एक तंत्र का प्रावधान है।
  • यह विधेयक तीन कानूनों में संशोधन का प्रावधान करता है:
    • भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम (Reserve Bank of India Act) 1934
    • बहु-राज्य सहकारी समिति अधिनियम (Multi State Cooperative Societies Act) 2002
    • भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड अधिनियम (Securities and Exchange Board of India Act), 1992
  • समिति की मुख्य अवलोकन तथा सिफारिशों में शामिल हैं:
    • अनियमित जमा योजना की परिभाषा: विधेयक के अंतर्गत 'विनियमित जमाराशियों' (Regulated Deposits) को उन सभी जमा लेने वाली योजनाओं के रूप में सूचीबद्ध किया जाता है जिनकी देखरेख एवं विनियमन नौ निर्दिष्ट नियामकों द्वारा किया जाता हैं, इनमें शामिल हैं:
      • भारतीय रिज़र्व बैंक
      • भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड
      • कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय
      • राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेश सरकारें

यदि कोई जमा-योजना, विधेयक में सूचीबद्ध नियामकों के साथ पंजीकृत नहीं है तो इसे 'अनियमित जमा-योजना' के रूप में परिभाषित किया जाता है।

  • जमाकर्त्ताओं के दावों की प्राथमिकता: विधेयक निर्दिष्ट करता है कि-
    • जब तक वित्तीय आस्तियों का प्रतिभूतिकरण एवं पुनर्निर्माण तथा प्रतिभूति हित प्रवर्तन अधिनियम, 2002 (Securitisation and Reconstruction of Financial Assets and Enforcement of Securities Interest- SARFAESI ACT) तथा दिवाला और दिवालियापन संहिता, 2016 (Insolvency and Bankruptcy Code- IBC) द्वारा अन्यथा प्रावधान नहीं किया जाता है, तब तक जमाकर्त्ताओं की देय राशि का भुगतान जमाकर्त्ता द्वारा देय सभी अन्य ऋणों पर प्राथमिकता से किया जाएगा।
    • समिति ने सिफारिश की है कि जमाकर्त्ताओं के बकाये की अदायगी के लिये एक समय-सीमा निर्दिष्ट की जाए।
  • ट्रैकिंग एवं शिकायतें: समिति ने यह सुझाव दिया है कि एक सार्वजनिक वेबसाइट (Public Website) विकसित की जानी चाहिये:
    • ताकि लोग यह परीक्षण कर सकें कि एक संस्था जो जमा स्वीकार कर रही है, उसे नियामक के पास पंजीकृत किया गया है अथवा नहीं,
    • ताकि इस वेबसाइट के माध्यम से अनियमित जमा स्वीकार करने वालों के खिलाफ शिकायतों को दर्ज एवं ट्रैक किया जा सके।

डिजिटल भुगतान के सघनीकरण हेतु उच्च स्तरीय समिति का गठन

  • RBI ने डिजिटल भुगतान के सघनीकरण (Deepening of Digital Payments) हेतु एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है। समिति की अध्यक्षता नंदन नीलेकणी [पूर्व अध्यक्ष, भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (Unique Identification Authority of India-UIDAI)] करेंगे। इसमें सरकार एवं बैंकिंग उद्योग के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे।
  • उच्च स्तरीय समिति के विचारार्थ विषयों में शामिल हैं:
    • वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) की सुविधाजनक बनाने में डिजिटल भुगतान के वर्तमान स्तरों का आकलन करना।
    • भुगतान के डिजिटलीकरण की मौजूदा स्थिति की समीक्षा करना तथा डिजिटल भुगतान बढ़ाने की रणनीति पर सुझाव देना।
    • डिजिटल भुगतान के संरक्षण तथा सुरक्षा को मज़बूत करने के उपाय सुझाना।
    • वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं का अध्ययन जिसे डिजिटल भुगतान के उपयोग के माध्यम से डिजिटलीकरण एवं वित्तीय समावेशन में तेज़ी लाने के लिये अपनाया जा सकता है।

RBI द्वारा MSMEs पर विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया

  • भारतीय रिज़र्व बैंक ने सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSMEs) पर एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया हैं। इस समिति की अध्यक्षता श्री यू के सिन्हा (पूर्व अध्यक्ष, प्रतिभूति तथा विनिमय बोर्ड) करेंगे।
  • विशेषज्ञ समिति की शर्तों या संदर्भों में शामिल हैं:
    • MSME क्षेत्र का समर्थन करने वाले वर्तमान संस्थागत ढांचे की समीक्षा करना,
    • समयबद्ध तथा पर्याप्त वित्तपोषण को प्रभावित करने वाले कारकों का परिक्षण करना,
    • इस क्षेत्र पर हाल के आर्थिक सुधारों के प्रभावों का परिक्षण करना, तथा
    • इस क्षेत्र के विकास में तेज़ी लाने के लिये प्रौद्योगिकी का लाभ उठाने हेतु उपाय सुझाना।

FRBM अधिनियम, 2003 के अनुपालन पर CAG की रिपोर्ट

भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (Comptroller and Auditor General of India-CAG) ने वर्ष 2016-17 के लिये राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन (Fiscal Responsibility and Budget Management- FRBM) अधिनियम, 2003 के अनुपालन पर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की।

FRBM अधिनियम केंद्र सरकार को एक ज़िम्मेदार राजकोषीय प्रबंधन तथा दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करने की अपेक्षा करता है।

इस अधिनियम में उधार, ऋण तथा घाटे को सीमित कर विवेकपूर्ण ऋण प्रबंधन सुनिश्चित करना भी अपेक्षित है।

CAG की प्रमुख टिप्पणियों एवं सिफारिशों में शामिल हैं:

  • ऑफ-बजट फाइनेंसिंग: CAG ने यह पाया कि केंद्र सरकार ने अपनी व्यय संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिये वित्तपोषण के ऑफ-बजट तरीकों का सहारा लिया है।
  • ऑफ-बजट वित्तपोषण (Off-Budget Financing) का तात्पर्य सरकार के उस वित्त से है, जिसका बजट दस्तावेज़ों में कोई हिसाब नहीं है।
  • राजस्व व्यय: अपर्याप्त बजटीय आवंटन के कारण, सब्सिडी का कुछ बकाया बाद के वित्तीय वर्षों में स्थानांतरित कर दिया जाता है।
  • उदाहरण के तौर पर 2016-17 के अंत में खाद तथा खाद्य सब्सिडी के बकाये के भुगतान के  स्थगन के कारण देयता की सीमा 1.2 लाख करोड़ रुपए थी।
  • 2011-17 की अवधि के दौरान खाद्य सब्सिडी के बकाये को आगे के वित्तीय वर्षों में स्थानांतरित किये जाने के कारण देयता में 350% की वृद्धि हुई।
  • ऑफ-बजट वित्तपोषण पर प्रकटीकरण: CAG के अनुसार, वर्तमान नीति ढाँचे में ऑफ-बजट वित्तपोषण के लिये पारदर्शी प्रकटीकरण तथा प्रबंधन रणनीति का अभाव है।
  • इसने सिफारिश की है कि सरकार को एक नीतिगत रूपरेखा तैयार करनी चाहिये, जिसमें अन्य बातों के साथ संसद में प्रकटीकरण के मुद्दे को भी शामिल किया जाना चाहिये।
  • इस प्रकटीकरण में सरकार द्वारा पर्याप्त स्वामित्व वाले सभी संगठनों को वर्ष में किये गए ऑफ-बजट वित्तपोषण का विवरण प्रदान किया जाना चाहिये।

आपदाओं हेतु धन एकत्रित करने के लिये केरल में उपकर लगाने को मंज़ूरी

  • जीएसटी परिषद (GST Council) ने केरल को वस्तुओं एवं सेवाओं के अंतर-राज्य आपूर्ति पर उपकर (Cess) लगाने की अनुमति दी।
  • उपकर लगाने से प्राप्त होने वाले राजस्व का उपयोग प्राकृतिक आपदाओं के बाद किये जाने वाले आवश्यक राहत उपायों हेतु वित्तपोषण के रूप में किया जाएगा।
  • संविधान का अनुच्छेद 279A (4) जीएसटी परिषद को किसी भी प्राकृतिक आपदा या आपदा के दौरान अतिरिक्त संसाधन जुटाने के लिये केंद्र एवं राज्यों को किसी विशेष दर (निर्दिष्ट अवधि के लिये) पर सिफारिशें देने का प्रावधान करता है।

जीएसटी अपीलीय न्यायाधिकरण की राष्ट्रीय पीठ के गठन को मंज़ूरी

  • केंद्रीय मंत्रिमंडल ने वस्तु एवं सेवा कर अपीलीय न्यायाधिकरण (Goods and Services Tax Appellate Tribunal-GSTAT) की राष्ट्रीय पीठ के गठन को मंज़ूरी दी।
  • केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम, 2017 में केंद्र सरकार को राष्ट्रीय स्तर पर जीएसटी अपीलीय न्यायाधिकरण तथा राज्य स्तर पर इसकी पीठों के गठन करने का प्रावधान करता है।
  • GSTAT केंद्रीय एवं राज्य जीएसटी कानूनों के तहत गठित अपीलीय अधिकारियों द्वारा पारित आदेशों के खिलाफ अपील पर सुनवाई करेगा।
  • GSTAT में एक अध्यक्ष (न्यायिक सदस्य) के अलावा कर प्रशासन में अनुभवी दो तकनीकी सदस्य शामिल होंगे।

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता

124वाँ संवैधानिक संशोधन विधेयक

  • संविधान (124वाँ संशोधन) विधेयक, 2019 संसद द्वारा पेश एवं पारित किया गया।
  • यह विधेयक ‘आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्गों’ (Economically Weaker Sections) के नागरिकों की उन्नति का प्रावधान करता है।
  • संविधान में किये गए संशोधन निम्नलिखित हैं:
    • अनुच्छेद 15: विधेयक ‘आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्गों’ की उन्नति हेतु सरकार को अतिरिक्त अनुमति देने के लिये अनुच्छेद 15 (पहले से अनुमत-सामाजिक तथा शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्ग, या अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के लिये) में संशोधन करने का प्रावधान करता है।
    • शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश हेतु ऐसे वर्गों के लिये 10% तक सीटें आरक्षित की जा सकती हैं। अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों में इस तरह का आरक्षण लागू नहीं होगा।
    • अनुच्छेद 16: विधेयक ‘आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्गों’ के नागरिकों हेतु सरकार को सभी पदों के 10% तक आरक्षण की अनुमति देने के लिये अनुच्छेद 16 में संशोधन करने का प्रावधान करता है।
    • शैक्षणिक संस्थानों तथा सार्वजनिक रोज़गार में ‘आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्गों’ को 10% तक का आरक्षण मौजूदा आरक्षण के अतिरिक्त दिया जाएगा।
    • केंद्र सरकार पारिवारिक आय तथा आर्थिक पिछड़ेपन के अन्य संकेतकों के आधार पर  ‘आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्गों’ के नागरिकों को अधिसूचित करेगी।

शिक्षा

निशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार (दूसरा संशोधन) विधेयक, 2017

  • बच्चों को मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार (दूसरा संशोधन) विधेयक, 2017 [Right of Children to Free and Compulsory Education (Second Amendment) Bill] संसद द्वारा पारित किया गया।
  • RTE अधिनियम, 2009 प्रारंभिक शिक्षा यानी कक्षा 8 तक बच्चों के निरोध को प्रतिबंधित करता है।
  • विधेयक में केंद्र या राज्य सरकार को सशक्त बनाने के लिये इस प्रावधान में संशोधन करने का प्रयास किया गया है ताकि स्कूलों को कक्षा 5, कक्षा 8 या दोनों कक्षाओं में किसी बच्चे को वापस रखने की अनुमति मिल सके।
  • विधेयक इस प्रावधान में संशोधन करता है कि प्रत्येक शैक्षणिक वर्ष के अंत में कक्षा 5 एवं कक्षा 8 में एक नियमित परीक्षा आयोजित की जाएगी।
  • यदि कोई बच्चा परीक्षा में असफल होता है, तो उसे अतिरिक्त निर्देश दिया जाएगा तथा वह फिर से परीक्षा देगा। यदि वह पुन: परीक्षा में असफल हो जाता है, तो संबंधित केंद्र या राज्य सरकार स्कूल को बच्चे को उसी कक्षा में रखने की अनुमति देने का निर्णय ले सकती है।

केंद्रीय शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश के लिये आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्गों को आरक्षण

  • उच्च शिक्षा विभाग (Department of Higher Education) ने शैक्षणिक वर्ष 2019-20 से सभी केंद्रीय शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश में आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्गों के लिये 10% तक आरक्षण  अधिसूचित किया है।
  • आरक्षण सभी केंद्रीय शैक्षिक संस्थानों में प्रदान किया जाएगा, जिसमें संसद के अधिनियमों द्वारा स्थापित विश्वविद्यालय, राष्ट्रीय महत्त्व के संस्थान (Institutions of National Importance) तथा डीम्ड विश्वविद्यालय (Deemed University) शामिल हैं।
  • उपयुक्त प्राधिकारी (जैसे विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, या बार काउंसिल ऑफ इंडिया) की पूर्व स्वीकृति के साथ प्रत्येक केंद्रीय शैक्षणिक संस्थान को अपनी वार्षिक अनुमत शक्ति से ऊपर सीटें बढ़ानी चाहिये। ताकि आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्गों से संबंधित विद्यार्थियों लिये आरक्षित सीटों को छोड़कर, उपलब्ध सीटों की संख्या, पिछले शैक्षणिक सत्र की सीटों की संख्या से कम न हो।

पर्यावरण

राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम

पर्यावरण, वन तथा जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (National Clean Air Program-NCAP) नामक एक पंचवर्षीय कार्ययोजना शुरु की है।

  • NCAP का लक्ष्य देश के सभी स्थानों पर निर्धारित वार्षिक औसत परिवेशी वायु गुणवत्ता मानकों को पूरा करना है।

उद्देश्य

  • वायु प्रदूषण की रोकथाम, नियंत्रण और उन्मूलन के लिये प्रबंधन योजना बनाना।
  • देश भर में एक प्रभावी परिवेशी वायु गुणवत्ता निगरानी नेटवर्क विकसित करना।
  • डेटा प्रसार एवं सार्वजनिक पहुँच प्रदान करने वाले कार्यक्रमों के माध्यम से सार्वजनिक जागरूकता और क्षमता-निर्माण उपायों को बढ़ाना।
  • प्रवर्तन: NCAP के कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिये प्रशिक्षित श्रम-शक्ति में वृद्धि तथा नियमित निरीक्षण अभियान शुरू किये जाएंगे।
  • शमन: यह वायु गुणवत्ता निगरानी नेटवर्क में वृद्धि कर निगरानी स्टेशनों की संख्या को मौजूदा 703 से बढ़ाकर 1,500 करने का प्रस्ताव करता है।
  • ग्रामीण क्षेत्रों को भी मौजूदा राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता निगरानी कार्यक्रम के तहत लाने की योजना है। इस दिशा में यह ग्रामीण क्षेत्रों में 75 निगरानी स्टेशन स्थापित करेगा।
  • प्रमाणन: खराब डेटा गुणवत्ता की चिंताओं को दूर करने के लिये NCAP ने एक प्रमाणन योजना स्थापित करने की योजना बनाई है।
  • यह योजना पर्यावरण निगरानी में उपयोग किये जाने वाले उपकरणों के परीक्षण, जाँच तथा प्रमाणन के लिये एक व्यापक एवं लागत प्रभावी समाधान प्रदान करने का लक्ष्य रखेगी।
  • यह योजना एक वायु गुणवत्ता पूर्वानुमान प्रणाली स्थापित करने की भी परिकल्पना करती है जो दैनिक आधार पर वायु प्रदूषण का सटीक अनुमान लगाएगी तथा संभावित वायु प्रदूषण का पूर्वानुमान प्रदान करेगी।

कानून एवं न्याय

आधार तथा अन्य कानून (संशोधन) विधेयक

  • लोकसभा ने आधार और अन्य विधियाँ संशोधन विधेयक, 2018 को मंज़ूरी दे दी है। इस विधेयक का उद्देश्य तीन मौजूदा कानूनों में संशोधन करना है:
  • आधार (वित्तीय एवं अन्य सब्सिडी, लाभ और सेवा का लक्षित वितरण) अधिनियम, 2016 [Aadhaar (Targeted Delivery of Financial and other Subsidies, benefits and services) Act, 2016]
  • भारतीय टेलीग्राफ अधिनियम, 1885 (The Indian Telegraph Act, 1885)
  • धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 (The Prevention of Money Laundering Act, 2002)
  • निम्नलिखित कानूनों में किये गए संशोधन हैं:
    • ऑफ़लाइन सत्यापन: बिल में विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (Unique Identification Authority of India-UIDAI) द्वारा निर्दिष्ट नियमों के तहत किसी व्यक्ति की पहचान हेतु ’ऑफ़लाइन सत्यापन’ (आधार प्रमाणीकरण) की अनुमति देने के लिये आधार अधिनियम में एक नया प्रावधान शामिल किया गया है।
  • इस विधेयक में टेलीग्राफ अधिनियम, 1885 तथा धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 में संशोधन किया गया है जिससे:
    • दूरसंचार कंपनियों, बैंकों तथा वित्तीय संस्थानों द्वारा अपने ग्राहकों की पहचान को निम्न प्रकार से सत्यापित किया जा सकता है
  1. आधार का प्रमाणीकरण या ऑफलाइन सत्यापन द्वारा, या
  2. पासपोर्ट द्वारा, या
  3. केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित कोई अन्य दस्तावेज़ द्वारा।
  • UIDAI फंड: अधिनियम के तहत UIDAI द्वारा एकत्रित सभी शुल्क तथा राजस्व भारत के समेकित फंड में जमा किये जाएंगे।
  • विधेयक इस प्रावधान को हटाता है तथा भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण कोष का गठन करता है।
  • UIDAI द्वारा प्राप्त सभी शुल्क, अनुदान तथा किराया इस निधि में जमा किये जाएंगे।
  • निधि का उपयोग UIDAI के खर्चों के लिये किया जाएगा, जिसमें कर्मचारियों के वेतन एवं भत्ते शामिल हैं।

पर्सनल लॉ (संशोधन) विधेयक लोकसभा द्वारा पारित

  • पर्सनल लॉ (संशोधन) विधेयक, 2018 [Personal Laws (Amendment) Bill, 2018] लोकसभा द्वारा पारित किया गया, जो निम्नलिखित पाँच अधिनियमों में संशोधन का प्रावधान करता है:
  • तलाक अधिनियम, 1869 (Divorce Act, 1869)
  • मुस्लिम विवाह विघटन अधिनियम, 1939 (Dissolution of Muslim Marriage Act, 1939)
  • विशेष विवाह अधिनियम, 1954 (Special Marriage Act-1954)
  • हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 (Hindu Marriage Act, 1955)
  • हिन्दू दत्तक तथा भरण-पोषण अधिनियम, 1956 (Hindu Adoptions and Maintenance Act, 1956)
  • इनमें से प्रत्येक अधिनियम जीवनसाथी से तलाक या अलगाव के लिये कुष्ठ रोग को एक आधार मानता है।
  • यह विधेयक तलाक या अलगाव के लिये एक आधार के रूप में कुष्ठ रोग की मान्यता को रद्द करने का प्रावधान करता है।

नई दिल्ली अंतर्राष्ट्रीय मध्यस्थता केंद्र विधेयक, 2018

देश की राजधानी को वाणिज्यिक मामलों की मध्यस्थता का केंद्र बनाने के उद्देश्य से लाए गए 'नई दिल्ली अंतर्राष्ट्रीय मध्यस्थता केंद्र विधेयक-2018' (New Delhi International Arbitration Centre Bill, 2018) को लोकसभा ने मंज़ूरी प्रदान की।

  • यह भारत में मध्यस्थता के बेहतर प्रबंधन के लिये एक स्वायत्त तथा स्वतंत्र संस्थान स्थापित करने का प्रावधान करता है।
  • विधेयक की मुख्य विशेषताओं में शामिल हैं:
    • विधेयक विवेचन, मध्यस्थता तथा सुलह कार्यवाहियों के संचालन के लिये नई दिल्ली अंतर्राष्ट्रीय मध्यस्थता केंद्र (New Delhi International Arbitration Centre-NDIAC) की स्थापना हेतु प्रावधान करता है।
    • विधेयक NDIAC को राष्ट्रीय महत्त्व की संस्था घोषित करता है।
    • वैकल्पिक विवाद समाधान के लिये अंतर्राष्ट्रीय केंद्र (International Centre For Alternative Dispute Resolution-ICADR): यह वैकल्पिक विवाद समाधान विधियों (जैसे विवेचन तथा मध्यस्थता) के माध्यम से विवादों के समाधान को बढ़ावा देने के लिये एक पंजीकृत संस्था है।
    • यह भारत सरकार द्वारा अंतर्राष्ट्रीय एवं घरेलू वाणिज्यिक विवादों को जल्द-से-जल्द हल करने के लिये स्थापित किया गया था।
    • विधेयक मौजूदा ICADR को केंद्र सरकार को हस्तांतरित करने का प्रावधान करता है।
    • केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित किये जाने पर ICADR के सभी अधिकार, शीर्षक तथा लाभ NDIAC को हस्तांतरित कर दिये जाएंगे।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

डीएनए प्रौद्योगिकी (उपयोग एवं अनुप्रयोग) विनियमन विधेयक, 2018

8 जनवरी, 2019 को लोकसभा में DNA टेक्नोलॉजी (उपयोग एवं अनुप्रयोग) विनियमन विधेयक, 2018 [DNA Technology (Use and Application) Regulation Bill] पारित हुआ। इस विधेयक में कुछ लोगों की पहचान स्थापित करने हेतु DNA टेक्नोलॉजी के प्रयोग के रेगुलेशन का प्रावधान है।

  • विधेयक की मुख्य विशेषताओं में शामिल हैं:
    • डीएनए डेटा का उपयोग: विधेयक के तहत डीएनए परीक्षण केवल विधेयक की अनुसूची में सूचीबद्ध मामलों जैसे- भारतीय दंड संहिता, 1860 के तहत अपराधों, पितृत्व वाद या परित्यक्त बच्चों की पहचान करने के लिये अनुमत है।
    • डीएनए का संग्रह: जाँच अधिकारी पीड़ितों तथा संदिग्धों के डीएनए नमूने को उनकी लिखित सहमति से एकत्रित कर सकते हैं।
    • यदि किसी को ऐसे अपराध के लिये गिरफ्तार किया जाता है जिसमें 7 साल से अधिक की सज़ा का प्रावधान है, तो सहमति की आवश्यकता नहीं होती है।
    • डीएनए डेटा बैंक: विधेयक राष्ट्रीय डीएनए डेटा बैंक तथा क्षेत्रीय डीएनए डेटा बैंकों की स्थापना के लिये प्रावधान करता है।
    • ये डेटा बैंक डीएनए प्रोफाइल का भंडारण करेंगे।
  • डेटा बैंकों में डीएनए प्रोफाइल को पाँच सूचकांकों में व्यवस्थित किया जाएगा:
  1. अपराध दृश्य सूचकांक (Crime Scene Index)
  2. 'संदिग्ध या अंडर-ट्रायल' सूचकांक (Suspects’ or Under-Trials’ Index)
  3. अपराधियों का सूचकांक (Offenders’ Index)
  4. लापता व्यक्तियों का सूचकांक (Missing Persons’ Index)
  5. अज्ञात मृतक व्यक्तियों का सूचकांक (Unknown Deceased Persons’ Index)
  • DNA नियामक बोर्ड: विधेयक में DNA नियामक बोर्ड की स्थापना का प्रावधान है, जो DNA डेटा बैंकों तथा DNA प्रयोगशालाओं की निगरानी करेगा।
  • सूचना का संरक्षण: विधेयक के तहत बोर्ड को यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि डेटा बैंकों, प्रयोगशालाओं तथा अन्य व्यक्तियों के पास मौजूद DNA प्रोफाइल से संबंधित सभी जानकारी गोपनीय रखी जाए।
  • DNA डेटा का उपयोग केवल व्यक्ति की पहचान के लिये किया जा सकता है।

श्रम एवं रोज़गार

श्रमिक संघ संशोधन विधेयक, 2019

श्रमिक संघ (संशोधन) विधेयक, 2019 [The Trade Unions (Amendment) Bill, 2019] को लोकसभा में पेश किया गया।

  • विधेयक श्रमिक संघ अधिनियम, 1926 में संशोधन करता है, जो श्रमिक संघों के पंजीकरण एवं विनियमन के लिये प्रावधान करता है।
  • विधेयक की मुख्य विशेषताओं में शामिल हैं:
    • विधेयक केंद्र और राज्य सरकार द्वारा क्रमशः ट्रेड यूनियनों या केंद्र और राज्य स्तर पर ट्रेड यूनियनों के एक महासंघ को मान्यता प्रदान करने का प्रयास करता है।
  • केंद्र या राज्य सरकार इसके लिये नियम बना सकती है:
    • केंद्रीय या राज्य श्रमिक संघ की मान्यता के लिये।
    • ऐसी मान्यता से उत्पन्न विवादों का निर्णय करने का अधिकार तथा ऐसे विवादों का निपटान करने का तरीका।
  • संशोधनों से केंद्रीय एवं राज्य स्तर पर ट्रेड यूनियनों को मान्यता मिलेगी:
    • इन निकायों में श्रमिकों का सही प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने में।
    • सरकार द्वारा श्रमिकों के प्रतिनिधियों के मनमाने नामांकन पर रोक।
    • मुकदमों तथा औद्योगिक अशांति को कम करने में।

जनजातीय मामले

असम तथा कर्नाटक में अनुसूचित जनजातियों की सूची में संशोधन के लिये विधेयक

  • असम तथा कर्नाटक में संविधान (अनुसूचित जनजाति) आदेश, 1950 में संशोधन के लिये राज्यसभा में दो विधेयक [The Constitution (Scheduled Tribes) Order (Second Amendment) Bill, 2019] प्रस्तुत किये गए।
  • संवैधानिक (अनुसूचित जनजाति) आदेश (संशोधन) विधेयक, 2019 आदेश के भाग II में संशोधन करता है जो असम में अनुसूचित जनजातियों को निर्दिष्ट करता है।
  • विधेयक में इन समुदायों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने के लिये 41 प्रविष्टियाँ सम्मिलित हैं।
  • इनमें शामिल है:
    • मटक
    • कोक राजबोंगशी
    • ताई अहोम
    • भील
    • भूमीज़
  • संवैधानिक (अनुसूचित जनजाति) आदेश (दूसरा संशोधन) विधेयक, 2019 आदेश के भाग VI में संशोधन करता है जो कर्नाटक में अनुसूचित जनजातियों को निर्दिष्ट करता है।
  • यह निम्न शब्दों को विस्थापित करता हैं:
    • नायकडा, नायक के स्थान पर नायकडा, नायक (जिसमें परिवार और तलवार शामिल है)।
    • सिद्दी (उत्तर कन्नड़ ज़िले में) के स्थान पर सिद्दी (बेलागवी, धारवाड़ और उत्तर कन्नड़ ज़िले में)।

ऊर्जा

गैस आधारित बिजली संयंत्रों में तनावग्रस्त परिसंपत्तियों पर स्थायी समिति की रिपोर्ट

  • ऊर्जा संबंधी स्थायी समिति ने गैस आधारित विद्युत संयंत्रों में तनावग्रस्त/गैर-निष्पादित आस्तियों (‘Stressed/Non-Performing Assets in Gas based Power Plants’) पर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की।
  • समिति के प्रमुख अवलोकन एवं सिफारिशें इस प्रकार हैं:-
    • वर्तमान में लगभग 345 GW की कुल स्थापित क्षमता में से 24.9 MW (7%) विद्युत् गैस आधारित ऊर्जा संयंत्रों से प्राप्त होती है।
    • हालाँकि गैस आधारित क्षमता (24.9 मेगावाट) की 14.30 गीगावॉट (57%) घरेलू गैस आपूर्ति और प्रतिस्पर्द्धी टैरिफ परिदृश्य की कमी के कारण अवरुद्ध हुई है।
  • 31 ऐसे अवरुद्ध गैस आधारित ऊर्जा संयंत्र हैं। इन सभी ऊर्जा संयंत्रों की योजना घरेलू गैस उत्पादन में वृद्धि की उम्मीद के आधार पर बनाई गई थी, विशेष रूप से कृष्णा गोदावरी धीरूभाई 6 (केजी-डी 6) क्षेत्र में।
  • हालाँकि केजी डी 6 क्षेत्र से उत्पादन मार्च 2013 के बाद काफी कम होकर शून्य हो गया है।
  • समिति ने सिफारिश की है कि पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय को प्राकृतिक गैस की उपलब्धता के बारे में भविष्य का अनुमान लगाने में सतर्क रहना चाहिये।
  • प्राकृतिक गैस का आवंटन: समिति ने उल्लेख किया है कि कई नीतियों में उतार-चढ़ाव के परिणामस्वरूप गैस आधारित बिजली संयंत्र अवरुद्ध हुए हैं। ये गैस आधारित संयंत्र अब अपने ऋण दायित्वों को पूरा करने में असमर्थ हैं तथा गैर-निष्पादित संपत्ति (NPA) बनने के कगार पर हैं।
  • इसने सिफारिश की है कि सरकार को भविष्य में अनिश्चित नीतिगत बदलाव से बचना चाहिये।
  • इसके अलावा गैस आवंटन में परिवर्तन के संबंध में कोई भी नीति या दिशा-निर्देश दूरदर्शी होने चाहिये जो मौजूदा उपयोगकर्त्ताओं को प्रभावित न करे।

सूचना एवं प्रसारण

सिनेमैटोग्राफ अधिनियम, 1952 में मसौदा संशोधन जारी

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने फीडबैक के लिये सिनेमैटोग्राफ अधिनियम, 1952 (Indian Cinematograph Act of 1952) का मसौदा संशोधन जारी किया है।

  • अधिनियम प्रदर्शनी के लिये फिल्मों को प्रमाणपत्र प्रदान करता है।
  • यह विभिन्न अपराधों के लिये दंड का प्रावधान करता है जैसे:
    • एक फिल्म की प्रदर्शनी जिसे सार्वजनिक प्रदर्शन के लिये प्रमाणित नहीं किया गया है, या
    • प्रमाणित होने के बाद किसी फिल्म के साथ छेड़छाड़ करना।
  • मसौदा संशोधन में फिल्म पाइरेसी के लिये अतिरिक्त दंड का प्रस्ताव है। प्रस्तावित दंड में तीन साल तक की कैद या दस लाख रुपए तक का जुर्माना, या दोनों शामिल हैं।
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