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'टॉम्ब ऑफ सैंड' ने जीता अंतर्राष्ट्रीय बुकर पुरस्कार

  • 27 May 2022
  • 2 min read

'टॉम्ब ऑफ सैंड' किसी भारतीय भाषा में लिखी गई पहली पुस्तक बन गई है जिसे अंतर्राष्ट्रीय बुकर पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। 

  • मूल रूप से हिंदी में रेत समाधि के रूप में प्रकाशित पुस्तक लेखक गीतांजलि श्री द्वारा लिखी गई है और डेज़ी रॉकवेल द्वारा अंग्रेज़ी में अनुवादित है। 
  • यह किताब एक 80 वर्षीय महिला की कहानी बताती है जो अपने पति की मृत्यु के बाद एक गहरे अवसाद का अनुभव करती है। आखिरकार, वह अपने अवसाद को दूर करती है और अंततः अतीत का सामना करने के लिये पाकिस्तान का दौरा करने का फैसला करती है जिसे उसने विभाजन के दौरान पीछे छोड़ दिया था। 

Tomb-of-Sand

अंतर्राष्ट्रीय बुकर पुरस्कार: 

  • अंतर्राष्ट्रीय बुकर पुरस्कार वार्षिक रूप से किसी एक पुस्तक को प्रदान किया जाता है जिसका अंग्रेज़ी में अनुवाद किया गया हो और यूके या आयरलैंड में प्रकाशित किया गया हो। 
  • अंतर्राष्ट्रीय बुकर पुरस्कार की शुरुआत वर्ष 2005 में मैन बुकर अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार के रूप में हुई। 
  • इस पुरस्कार का उद्देश्य विश्व भर के उच्च-गुणवत्ता वाले उपन्यासों को अधिक से अधिक पढ़ने को प्रोत्साहित करना है। 
  • हालाँकि इसका यूके में पहले से ही काफी प्रभाव पड़ा है। 
  • अनुवादकों के महत्त्वपूर्ण काम का जश्न मनाया जाता है जिसमें 50,000 पाउंड की पुरस्कार राशि लेखक और अनुवादक के बीच समान रूप से विभाजित होती है। 
  • प्रत्येक शॉर्टलिस्ट किये गए लेखक और अनुवादक को भी 2,500 पाउंड प्राप्त होते हैं। 
  • उपन्यास और लघु कथाओं के संग्रह दोनों ही इसके लिये पात्र हैं। 

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस 

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