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05 Mar 2026
सामान्य अध्ययन पेपर 1
भूगोल
Q. उष्णकटिबंधीय एवं समशीतोष्ण चक्रवातों के बीच प्रमुख अंतर क्या हैं? (उत्तर 125 शब्दों में दीजिये)
उत्तर
हल करने का दृष्टिकोणः
- चक्रवात शब्द की विवेचना कीजिये।
- उष्णकटिबंधीय एवं समशीतोष्ण चक्रवातों के बीच अंतर बताइये।
- तदनुसार निष्कर्ष लिखिये।
परिचय
"चक्रवात" की उत्पत्ति यूनानी शब्द "साइक्लोस" से हुई है जिसका अर्थ साँप के कुंडलन से है। यह नाम हेनरी पेडिंगटन द्वारा बंगाल की खाड़ी एवं अरब सागर में देखे जाने वाले उष्णकटिबंधीय चक्रवातों का वर्णन करने के लिये दिया गया है। चक्रवातों को दो मुख्य प्रकारों में वर्गीकृत किया जाता हैः उष्णकटिबंधीय चक्रवात और अतिरिक्त-उष्णकटिबंधीय (या समशीतोष्ण) चक्रवात। इन्हें विभिन्न क्षेत्रों में विभिन्न नामों से जाना जाता है- चीन सागर एवं प्रशांत महासागर में टाइफून, कैरिबियन तथा अटलांटिक में हरिकेन आदि।
मुख्य भाग
उष्णकटिबंधीय और समशीतोष्ण चक्रवातों के बीच प्रमुख अंतरः
पैरामीटर
उष्णकटिबंधीय चक्रवात
समशीतोष्ण चक्रवात
अवस्थिति
उष्णकटिबंधीय चक्रवात मकर और कर्क रेखा के उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में विकसित होते हैं अर्थात भूमध्य रेखा के 100 से 300 उत्तर और दक्षिण के बीच।
शीतोष्ण कटिबंधीय क्षेत्रों (30°N से 60°N और 30°S से 60°S) में शीतोष्ण चक्रवात निर्मित होते हैं।
गठन
उष्णकटिबंधीय चक्रवात महासागर और वायुमंडल से प्रेरित होते हैं, जो समुद्र की ऊष्मा से संचालित होते हैं; तथा पूर्वी व्यापारिक पवनों एवं समशीतोष्ण पश्चिमी पवनों, उच्च ग्रहीय पवनों तथा अपनी स्वयं की ऊर्जा से प्रेरित होते हैं।
समशीतोष्ण चक्रवात मध्य अक्षांश क्षेत्रों में विकसित होते हैं जहाँ उष्णकटिबंधीय क्षेत्र की गर्म, नम पवनों तथा ध्रुवीय क्षेत्रों की ठंडी पवनों का अभिसरण होता है।
विशेषता और संरचना
उष्णकटिबंधीय चक्रवातों के निर्माण और तीव्रता के लिये अनुकूल परिस्थितियाँ निम्नलिखित हैंः
(i) 27°C से अधिक तापमान वाली वृहद समुद्री सतह;
(ii) कोरिओलिस बल की उपस्थिति;
(iii) ऊर्ध्वाधर पवनों की गति में कम भिन्नता;
(iv) पहले से मौजूद कम दबाव वाला क्षेत्र या निम्न-स्तरीय-चक्रवाती परिसंचरण;
(v) समुद्र तल प्रणाली के ऊपरी क्षेत्र में अपसरण
(i) उष्ण कटिबंध की गर्म, नम पवनों का ध्रुवीय क्षेत्रों की ठंडी, शुष्क वायु से अभिसरण।
(ii) वायुराशियों की अन्योन्यक्रिया के रूप में शीत और ऊष्ण वाताग्रों का निर्माण, जिससे निम्न दाब प्रणालियों का विकास होता है।
(iii) जेट स्ट्रीम की उपस्थिति, जिससे चक्रवात के विकास को बढ़ावा मिल सकता है और इसकी गति तीव्र हो सकती है।
भौगोलिक स्थिति
उत्तरी अटलांटिक (तूफान), पश्चिमी प्रशांत (टाइफून), हिंद महासागर एवं दक्षिण प्रशांत।
उत्तरी अटलांटिक, उत्तरी प्रशांत और दक्षिणी महासागर का मौसम प्रभावित होता है तथा पूर्वी अमेरिका, पश्चिमी यूरोप और दक्षिणी ऑस्ट्रेलिया जैसे क्षेत्रों पर प्रभाव पड़ता है।
उदाहरण
चक्रवाती तूफान आसना, हरिकेन बेरिल।
निष्कर्ष
उष्णकटिबंधीय चक्रवातों एवं शीतोष्ण तूफानों से अक्सर प्रभावित होने वाले भारत को आपदा प्रबंधन रणनीतियों को बेहतर करना चाहिये। इससे संबंधित प्रमुख उपायों में पूर्व चेतावनी प्रणाली में सुधार, बुनियादी ढाँचे को मजबूत करना तथा समय पर सामुदायिक सहायता प्रदान करना शामिल है। इन प्रयासों को प्राथमिकता देकर, भारत अपने नागरिकों को गंभीर मौसम की घटनाओं से बेहतर ढंग से बचा सकता है।