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06 Mar 2026
सामान्य अध्ययन पेपर 1
भारतीय समाज
Q. भारत में शहरीकरण से कई सामाजिक-आर्थिक चुनौतियाँ उत्पन्न हुई हैं। इन समस्याओं पर चर्चा करते हुए इनके निराकरण हेतु उपाय बताइये। (उत्तर 200 शब्दों में दीजिये)
उत्तर
हल करने का दृष्टिकोणः
- भारत में नगरीकरण एवं इसकी तीव्रता को परिभाषित कीजिये।
- विभिन्न सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों तथा इनके निराकरण हेतु उपाय बताइये।
- शहरी चुनौतियों के एकीकृत समाधान की आवश्यकता बताते हुए निष्कर्ष लिखिये।
परिचय
वर्ष 2035 तक शहरी क्षेत्र में रहने वाले मध्य वर्ष में भारत में आबादी का प्रतिशत 43.2% होगा (संयुक्त राष्ट्र पर्यावास की विश्व शहर रिपोर्ट 2022)।
मुख्य भाग
शहरीकरण की समस्याएँ
- अत्यधिक जनसंख्या और अवसंरचना तनावः तेजी से शहरी प्रवास से भीड़भाड़ वाले शहर बनते हैं, परिवहन, जल आपूर्ति और अपशिष्ट प्रबंधन जैसे बुनियादी ढाँचे पर दबाव पड़ता है। उदाहरण के लिये, मुंबई जैसे शहरों को जनसंख्या घनत्व के कारण पानी की गंभीर कमी का सामना करना पड़ता है।
- आवास की कमी और झुग्गी निर्माणः किफायती आवास की कमी कई लोगों को झुग्गियों में रहने के लिये मजबूर करती है। लगभग 17% शहरी आबादी झुग्गियों में रहती है, जिसमें पानी और स्वच्छता जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी है, जैसा कि धारावी में देखा गया है।
- बेरोजगारी और अल्परोजगारः शहरी क्षेत्र उच्च बेरोजगारी से जूझते हैं। 2020-21 में, शहरी बेरोजगारी दर 5.1% थी, जिसमें कई लोग बिना सुरक्षा के अनौपचारिक, कम वेतन वाली नौकरियों में काम कर रहे थे।
- पर्यावरण क्षरणः शहरीकरण वायु और जल प्रदूषण, वनों की कटाई और बढ़ते तापमान की ओर जाता है। दिल्ली अक्सर विश्व स्तर पर सबसे प्रदूषित शहरों में शुमार होती है, जिससे गंभीर स्वास्थ्य समस्याएँ होती हैं।
- सामाजिक असमानता और अपराधः शहरों में आर्थिक विभाजन असमानता और अपराध को बढ़ावा देता है। दिल्ली और बेंगलुरु जैसे शहरों में अपराध दर में वृद्धि देखी गई है, विशेष रूप से चोरी और हिंसा, आंशिक रूप से सामाजिक असमानताओं के कारण।
सुधारात्मक उपाय
- किफायती आवासः प्रधानमंत्री आवास योजना (Pradhan Mantri Awas Yojana– PMAY- शहरी) 2.0 जैसी सरकारी पहलों से 1 करोड़ शहरी गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों को सहायता मिलेगी। सैटेलाइट शहर भी शहरों पर दबाव कम करने में भी मदद कर सकते हैं।
- बेहतर शहरी अवसंरचनाः स्मार्ट सिटीज मिशन (Smart Cities Mission) और अमृत (AMRUT) जैसे कार्यक्रम शहरी बुनियादी ढाँचे का आधुनिकीकरण, सार्वजनिक परिवहन, जल आपूर्ति और स्वच्छता प्रणालियों में सुधार कर रहे हैं।
- रोजगार सृजनः स्किल इंडिया और स्टार्ट-अप इंडिया जैसी योजनाएँ शहरी युवाओं को कुशल बनाने और रोजगार सृजन एवं बेरोजगारी को कम करने के लिये लघु उद्योगों को बढ़ावा देने पर केंद्रित हैं।
- पर्यावरणीय स्थिरताः शहरों को पर्यावरण के अनुकूल शहरी नियोजन की आवश्यकता है, जैसे अपशिष्ट प्रबंधन और सार्वजनिक परिवहन समाधान। इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने और हरित स्थान बढ़ाने से प्रदूषण कम हो सकता है।
- असमानता को कम करनाः असमानता को दूर करने के लिये शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और महिलाओं की सुरक्षा को लक्षित करने वाली समावेशी नीतियाँ आवश्यक हैं। हाशिये के समूहों को सशक्त बनाने से अपराध कम होंगे और आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।
निष्कर्ष
शहरीकरण का उचित प्रबंधन किया जाए तो यह आर्थिक वृद्धि और विकास का वाहक बन सकता है। संतुलित दृष्टिकोण यह सुनिश्चित करेगा कि शहरीकरण से सामाजिक-आर्थिक विभाजन को बढ़ाने के बजाय सभी के जीवन स्तर में सुधार हो।