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UP PCS Mains-2025

  • 18 Mar 2026 सामान्य अध्ययन पेपर 6 उत्तर प्रदेश स्पेशल

    प्रश्न : उत्तर प्रदेश का बुंदेलखंड क्षेत्र किस प्रकार जलवायु संवेदनशीलता का उदाहरण है?(125 words)

    उत्तर

    हल करने का दृष्टिकोण:

    • बुंदेलखंड में जलवायु संबंधी संवेदनशीलता का परिचय देना, जल की कमी और सामाजिक-आर्थिक कारकों पर ध्यान केंद्रित करना।
    • सरकारी आंकड़ों और शोध निष्कर्षों का संदर्भ देते हुए जल की कमी, कृषि और सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों के प्रभावों पर चर्चा करें।
    • लचीलापन बढ़ाने के लिए जल प्रबंधन और सामुदायिक सशक्तिकरण जैसी एकीकृत रणनीतियों की आवश्यकता के साथ निष्कर्ष निकालें।

    परिचय   

    उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में फैला बुंदेलखंड क्षेत्र अपनी अर्ध-शुष्क जलवायु, जल की कमी और सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों के कारण जलवायु संवेदनशीलता का उदाहरण है। प्रभावी अनुकूलन और शमन रणनीतियों को विकसित करने के लिए इन कारकों को समझना महत्वपूर्ण है।

     मुख्य भाग

    (Figure: Depicting the Bundelkhand region of Uttar Pradesh)

    बुंदेलखंड में जलवायु संवेदनशीलता

    • जल संकट: बुंदेलखंड में पानी की भारी कमी है, प्रति व्यक्ति पानी की उपलब्धता अनुशंसित सीमा से कम हो गई है। जलवायु परिवर्तन इस समस्या को और बढ़ा देता है, जिससे भूजल में कमी आती है और बार-बार सूखा पड़ता है। जलवायु संवेदनशीलता सूचकांक में, बुंदेलखंड क्षेत्र के उत्तर प्रदेश के जिलों में पानी की कमी एक बड़ी चिंता का विषय है।
    • कृषि प्रभाव: इस क्षेत्र की कृषि, जो मुख्य रूप से वर्षा पर निर्भर है, जलवायु परिवर्तनों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील है। अनियमित वर्षा और बढ़ते तापमान से फसल उत्पादन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है, जिससे खाद्य सुरक्षा और आजीविका को खतरा होता है। शोध बताते हैं कि जलवायु परिवर्तन ने सूखे की घटनाओं को तेज कर दिया है और सामाजिक-आर्थिक स्थिरता को बाधित करते हुए भेद्यता को बढ़ा दिया है।
    • सामाजिक-आर्थिक चुनौतियाँ: बुंदेलखंड में उच्च गरीबी स्तर और कम साक्षरता दर जलवायु परिवर्तन के प्रति इसकी संवेदनशीलता को बढ़ाती है। सीमित संसाधन और सूचना तक पहुँच अनुकूलन प्रयासों को कमज़ोर करती है। क्षेत्र के लिए जलवायु भेद्यता सूचकांक लचीलापन बढ़ाने के लिए इन सामाजिक-आर्थिक मुद्दों को संबोधित करने पर जोर देता है।

    निष्कर्ष

    बुंदेलखंड की जलवायु संवेदनशीलता पर्यावरणीय और सामाजिक-आर्थिक कारकों का एक जटिल अंतर्संबंध है। इन चुनौतियों से निपटने के लिए जल प्रबंधन, टिकाऊ कृषि और सामुदायिक सशक्तिकरण पर ध्यान केंद्रित करने वाली एकीकृत रणनीतियों की आवश्यकता है ताकि लचीलापन बढ़ाया जा सके।

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