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11 Mar 2026
सामान्य अध्ययन पेपर 3
अर्थव्यवस्था
प्रश्न. "कुशल लॉजिस्टिक्स प्रणाली, वैश्विक बाज़ार में भारत की प्रतिस्पर्द्धात्मकता बढ़ाने के लिये महत्त्वपूर्ण है।" इस दिशा में हाल की सरकारी पहलों के प्रकाश में, कथन की चर्चा कीजिये। (उत्तर 200 शब्दों में दीजिये)
उत्तर
हल करने का दृष्टिकोणः
- भारत के लॉजिस्टिक्स क्षेत्र की स्थिति से परिचित कराइए।
- वैश्विक बाजार में भारत की प्रतिस्पर्द्धात्मकता पर सरकार की पहलों और उनके प्रभाव पर चर्चा कीजिये।
- लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में सुधार के उपाय सुझाइए। तद्नुसार निष्कर्ष लिखिये।
परिचय
भारतीय लॉजिस्टिक्स क्षेत्र, जिसका मूल्य वर्ष 2023 में लगभग 282.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर था, वर्ष 2032 तक 557.4 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँचने का अनुमान है, जो 7.85% की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) से बढ़ रहा है। इस वृद्धि के बावजूद, भारत की लॉजिस्टिक्स लागत उल्लेखनीय रूप से अधिक है, जो सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 13% है, जबकि वैश्विक औसत 8% है।
मुख्य भाग
इसे ध्यान में रखते हुए, भारत सरकार ने लॉजिस्टिक्स को सुव्यवस्थित करने और संबंधित लागतों को कम करने के लिये कई उपाय शुरू किये हैं।
सरकारी पहलः
- राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति (NLP) 2022: 21 सितंबर, 2022 को लॉन्च की गई NLP का उद्देश्य वर्ष 2030 तक लॉजिस्टिक्स लागत को वैश्विक बेंचमार्क तक कम करना और लॉजिस्टिक्स प्रदर्शन सूचकांक (LPI) में भारत की रैंकिंग में सुधार करना है ताकि वर्ष 2030 तक शीर्ष 25 देशों में भारत शामिल हो सके। नीति में विभिन्न परिवहन साधनों के एकीकरण, वेयरहाउसिंग सुविधाओं में वृद्धि और एक निर्बाध और कुशल लॉजिस्टिक्स नेटवर्क बनाने के लिये डिजिटलीकरण को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है।
- PM गति शक्ति योजनाः यह पहल विभिन्न आर्थिक क्षेत्रों में मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी बुनियादी ढाँचे को विकसित करने पर केंद्रित है, जिसका उद्देश्य दक्षता में सुधार और लॉजिस्टिक्स लागत को कम करना है।
- मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क (MMLP): सरकार देश के माल ढुलाई लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में सुधार के लिये MMLP विकसित कर रही है, जिससे माल ढुलाई की कुल लागत और समय में कमी आएगी, गोदाम की लागत में कटौती होगी और वाहनों से होने वाले प्रदूषण और भीड़भाड़ में कमी आएगी। इन पार्कों को निर्बाध इंटरमॉडल माल ढुलाई हस्तांतरण, विश्व स्तरीय बुनियादी ढाँचे और कुशल भंडारण सुविधाएँ प्रदान करने के लिये डिजाइन किया गया है।
- राज्य-विशिष्ट लॉजिस्टिक्स नीतियाँः वाणिज्य मंत्रालय के लॉजिस्टिक्स प्रभाग ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से अनुरोध किया है कि वे आर्थिक विकास में इस क्षेत्र की भूमिका पर जोर देते हुए, उनके लिये अनुकूलित लॉजिस्टिक्स नीतियाँ बनाएँ। ये नीतियाँ भारत के लॉजिस्टिक्स परिदृश्य में प्रतिस्पर्द्धात्मकता और दक्षता बढ़ाने के लिये IT समाधान, हरित प्रथाओं और रणनीतिक निवेश पर ध्यान केंद्रित करती हैं।
प्रतिस्पर्द्धात्मकता पर प्रभावः
- लागत में कमीः कुशल लॉजिस्टिक्स से वस्तुओं की लागत में उल्लेखनीय कमी आ सकती है, जिससे भारतीय उत्पाद वैश्विक स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्द्धी बन सकते हैं। NLP का लक्ष्य वैश्विक मानकों के अनुरूप वर्ष 2030 तक लॉजिस्टिक्स लागत को GDP के 8% तक लाना है।
- बेहतर रैंकिंगः लॉजिस्टिक्स प्रदर्शन सूचकांक (LPI 2023) के 7वें संस्करण में, भारत छह पायदान ऊपर चढ़कर 139 देशों में 38वें स्थान पर पहुँच गया, जो व्यापार सुविधा और बुनियादी ढाँचे में सुधार को दर्शाता है।
- निर्यात वृद्धि में वृद्धिः बेहतर लॉजिस्टिक्स ढाँचे से निर्यात प्रक्रिया अधिक सुचारू और लागत प्रभावी होने की उम्मीद है, जिससे वैश्विक बाजार में भारत की उपस्थिति बढ़ेगी।
भारत के लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में सुधार की दिशा में आगे की राह
- उन्नत प्रौद्योगिकियों को अपनानाः दक्षता बढ़ाने के लिये ब्लॉकचेन, बिग डेटा और क्लाउड कंप्यूटिंग को अपनाना, ICEGATE और E-Logs जैसी पहलों पर कार्य करना।
- स्थिरता पर ध्यान केंद्रित करनाः उत्सर्जन को कम करने और अंतर्राष्ट्रीय मानकों को पूरा करने के लिये ऊर्जा दक्षता मौजूदा जहाज सूचकांक जैसे वैश्विक मानदंडों के साथ तालमेल बैठाना।
- निवेश को बढ़ावा देनाः राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन के माध्यम से निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाना और परिवहन अवसंरचना में 100% FDI का पूर्ण उपयोग करना।
निष्कर्ष
लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में भारत सरकार की रणनीतिक पहल देश की वैश्विक प्रतिस्पर्द्धात्मकता को बढ़ाने में महत्त्वपूर्ण है। बुनियादी ढाँचे के विकास, नीतिगत सुधारों और तकनीकी एकीकरण पर ध्यान केंद्रित करके, इन उपायों का उद्देश्य एक अधिक कुशल और लागत प्रभावी लॉजिस्टिक्स पारिस्थितिकी तंत्र बनाना है, जिससे अंतर्राष्ट्रीय बाजार में भारत की स्थिति मजबूत होगी।