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13 Mar 2026
सामान्य अध्ययन पेपर 3
आंतरिक सुरक्षा
Q2. भारत में बढ़ते उग्रवाद के कारणों का विश्लेषण करते हुए इसका समाधान करने के क्रम में सरकार द्वारा अपनाई गई रणनीतियों का आकलन कीजिये। (उत्तर 200 शब्दों में दीजिये)
उत्तर
हल करने का दृष्टिकोणः
- भारत में वामपंथी उग्रवाद (LWE) का संक्षिप्त अवलोकन प्रस्तुत कीजिये।
- भारत में बढ़ते उग्रवाद के कारणों पर प्रकाश डालिये। उग्रवाद से निपटने के लिये सरकार की रणनीतियों पर चर्चा कीजिये।
- तद्नुसार निष्कर्ष लिखिये।
परिचय
भारत में वामपंथी उग्रवाद (LWE) का मूल उद्देश्य हिंसक गतिविधियों के माध्यम से मार्क्सवादी-लेनिनवादी विचारधारा पर आधारित राज्य की स्थापना करना है। ये समूह मुख्य रूप से कमज़ोर और वंचित लोगों, विशेष रूप से अविकसित, दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासी समुदायों से समर्थन प्राप्त करते हैं। विडंबना यह है कि ये कमज़ोर आबादी चरमपंथी हिंसा का साधन और पीड़ित दोनों बन जाती है।
मुख्य भाग
बढ़ते उग्रवाद के कारण
- विकासात्मक असमानताएँः
- भूमि सुधार, वन अधिकार अधिनियम और PESA का अनुचित क्रियान्वयन।
- पाँचवी अनुसूची के तहत सुरक्षात्मक कानूनों का अपर्याप्त प्रवर्तन।
- उचित मुआवजे या पुनर्वास के बिना बड़े पैमाने पर भूमि अधिग्रहण और विस्थापन।
- अभिजात वर्ग द्वारा जनजातीय भूमि पर अतिक्रमण तथा साझा संपत्ति संसाधनों तक पहुँच की क्षति।
- भोजन और शिक्षा समेत बुनियादी जीवन सुरक्षा का अभाव।
- वैकल्पिक आजीविका के अवसरों के बिना पारंपरिक व्यवसायों में व्यवधान।
- सामाजिक सुभेद्यताः
- जातीयता, धर्म या जाति के आधार पर भेदभाव, जिसमें अस्पृश्यता का बने रहना भी शामिल है।
- विशेष कानून, जैसे अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम तथा बंधुआ मजदूरी प्रणाली (उन्मूलन) अधिनियम, के अनुचित कार्यान्वयन के कारण शिकायतों का शोषण।
- राजनीतिक अस्थिरता और प्रशासनिक विफलताएँः
- राजनीतिक व्यवस्था की कथित विफलता के कारण चरमपंथी विचारधाराएँ जन्म ले रही हैं।
- कमज़ोर शासन, भ्रष्टाचार और राजनीतिक अस्थिरता के कारण चरमपंथी समूहों का शोषण हो रहा है।
- वैचारिक शिक्षाः
- राज्य के विरुद्ध सशस्त्र संघर्ष को बढ़ावा देने वाला तथा एक काल्पनिक मार्क्सवादी-लेनिनवादी समाज का वादा करने वाला क्रांतिकारी प्रचार करना।
- माओवादी एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिये भर्ती, धन जुटाने, विधिक सहायता और जन-आंदोलन में संलग्न अग्रणी संगठन।
उग्रवाद का सामना करने के लिये सरकारी रणनीतियाँ
सरकार ने एक समग्र दृष्टिकोण अपनाया है जो सुरक्षा, विकास, अधिकार, शासन और धारणा प्रबंधन को एकीकृत करता है।
- सुरक्षा उपायः
- केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) और भारतीय रिजर्व बटालियनों की तैनाती।
- राज्य पुलिस बलों का आधुनिकीकरण तथा उग्रवाद एवं आतंकवाद निरोधक (CIAT) स्कूलों की स्थापना।
- वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में पुलिस स्टेशनों का सुदृढ़ीकरण।
- विकास संबंधी पहलः
- विशेष केंद्रीय सहायता (SCA): वामपंथी उग्रवाद प्रभावित जिलों में महत्त्वपूर्ण बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं को वित्तपोषित करती है।
- सड़क संपर्क परियोजनाएँ (RRP-I और RCPLWE): दूरस्थ क्षेत्रों में बुनियादी ढाँचे में सुधार।
- वामपंथी उग्रवाद मोबाइल टॉवर परियोजनाः मोबाइल नेटवर्क कनेक्टिविटी को बढ़ाती है।
- आकांक्षी जिला कार्यक्रमः वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित 35 जिलों में विकास पर ध्यान केंद्रित करता है।
- व्यापक योजनाएँः
- समाधान सिद्धांतः सुरक्षात्मक एवं विकास के मुद्दों को संबोधित करने वाली एक बहुस्तरीय रणनीति।
- राष्ट्रीय नीति और कार्य योजना (वर्ष 2015): इसमें सुरक्षा संबंधी उपाय, विकास संबंधी प्रयास और सामुदायिक अधिकारों का संरक्षण शामिल है।
- विशेष अवसंरचना योजना (SIS): सुरक्षा-संबंधी अवसंरचना के विकास को समर्थन देती है।
- सामुदायिक भागीदारी और जागरूकताः
- सिविक एक्शन प्रोग्राम (CAP): विश्वास निर्माण हेतु सुरक्षात्मक बलों द्वारा कल्याणकारी गतिविधियों को बढ़ावा देना।
- मीडिया योजनाः लक्षित संचार के माध्यम से चरमपंथी प्रचार का सामना करना।
निष्कर्ष
भारत जैसे जीवंत लोकतंत्र में, हिंसा और विनाश में निहित विचारधाराओं का विफल होना निश्चित है, क्योंकि राष्ट्र समावेशी विकास और न्याय की ओर अग्रसर है।