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द बिग पिक्चर: इंडिया-यू.के. ट्रेड

  • 20 May 2021
  • 11 min read

चर्चा में क्यों?

हाल ही में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ने ब्रिटेन में वैक्सीन व्यवसाय के लिये भारत के सीरम इंस्टीट्यूट द्वारा 240 मिलियन पाउंड के निवेश सहित एक नए भारत-यू.के. व्यापार और 1 बिलियन पाउंड के निवेश की घोषणा की है।

प्रमुख बिंदु

  • भारत के साथ यू.के. का व्यापार सौदा: इस पैकेज में 533 मिलियन पाउंड से अधिक के नए भारतीय निवेश शामिल हैं, इससे स्वास्थ्य और प्रौद्योगिकी जैसे महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों में 6,000 से अधिक नौकरियाँ सृजित होने की उम्मीद है।
    • इसमें भारत को 446 मिलियन पाउंड से अधिक का ब्रिटिश निर्यात भी शामिल है साथ ही इन सौदों में से 200 मिलियन पाउंड के समझौते निम्न कार्बन विकास का समर्थन करेंगे। 
  • उन्नत व्यापार साझेदारी: ब्रिटिश प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, निवेश एक उन्नत व्यापार साझेदारी (Enhanced Trade Partnership- ETP) का हिस्सा है, जिससे भविष्य के मुक्त व्यापार समझौते (Free Trade Agreement- FTA) का मार्ग प्रशस्त होने की उम्मीद है।
    • ETP द्वारा पहली बार भारत में संबंधित व्यापार बाधाओं में ब्रिटेन में फलों के उत्पादकों को ब्रिटिश सेब, नाशपाती और कुइन (Quince) का निर्यात करने में सक्षम बनाने के लिये प्रतिबंध को हटाना शामिल है।
    • वे कानूनी सेवाओं के पारस्परिक सहयोग की दिशा में भी काम करेंगे।
  • भारत पर ज़ोर दे रहा ब्रिटेन: ब्रिटेन ने खुद को वैश्विक ब्रिटेन के रूप में और भारत को वैश्विक भारत के रूप में महत्त्व दिया है।
    • ब्रिटेन ने यह भी कहा है कि भारत को छोड़कर विश्व भर में कोई भी बड़ा निर्णय नहीं किया जा सकता है।
    • यह भारत को एक वैश्विक नेतृत्त्वकर्त्ता के रूप में प्रस्तावित और पेश कर रहा है जो भारत को प्रतीकात्मक एवं ठोस लाभ प्रदान कर सकता है।
  • भारत-यू.के. व्यापार का महत्त्व: दोनों ने वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का एक महत्त्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है।
    • व्यापार सौदे के आर्थिक महत्त्व के अलावा यह दोनों देशों के राजनीतिक इच्छाशक्ति को भी दर्शाता है।
    • चूँकि बिगड़ते हालात के बीच चीन द्वारा अपना दबदबा कायम करने की संभावना तेज़ी से बढ़ रही है ऐसे में भारत और यू.के. के के बीच यह व्यापार समझौता बहुत अधिक महत्त्व रखता है।
      • व्यापार समझौते से संकेत मिलता है कि भारत के सहयोगी विश्व भर में है।

ब्रिटेन और भारत के बीच व्यापार

  • ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था: लगभग 80% ब्रिटिश अर्थव्यवस्था सेवाओं पर निर्भर है।
    • ब्रिटेन के निर्यात में 50% हिस्सेदारी सेवाओं की है और उनमें से अधिकांश यूरोपीय संघ (European Union- EU) के पास हैं।
    • यूरोपीय संघ के साथ नए व्यापार समझौते के पुनर्गठन के चलते ब्रिटेन स्पष्ट रूप से अपनी सेवाओं के निर्यात हेतु अन्य संभावित खरीदारों की ओर रुख कर रहा है।
    • जापान, कनाडा, तुर्की आदि के साथ यह पहले ही FTA पर हस्ताक्षर कर चुका है।
  • भारत के लिये ब्रिटेन का महत्त्व: भारत ने उन 5 क्षेत्रों को भी स्पष्ट किया है जहाँ वह अपनी प्रगति को तेज़ करने के लिये तैयार है जिसमें जीवन विज्ञान (Life Sciences), सूचना प्रौद्योगिकी (Information Technology), रसायन (Chemicals), सेवाएँ और खाद्य तथा पेय (Services and Food & Drinks) शामिल हैं।
    • पहले ब्रिटेन को बड़े पैमाने पर यूरोपीय संघ के प्रवेश द्वार के रूप में देखा जाता था, लेकिन वर्तमान में भारत के लिये इसका बहुत अधिक महत्त्व है।
      • हाल ही में ब्रिटेन ने भारत को 900+ ऑक्सीजन सिलेंडर की आपूर्ति की है। 
      • भारत महामारी, स्वास्थ्य देखभाल, जलवायु परिवर्तन, रक्षा सहयोग आदि से निपटने के मामले में ब्रिटेन के साथ मिलकर काम करना चाहता है।
  • ब्रिटेन के लिये भारत का महत्त्व: व्यापार और निवेश क्षेत्र में दोनों के बीच द्विपक्षीय संबंधों में पिछले 4 वर्षों में उतार-चढ़ाव देखा गया है।
    • ब्रिटेन और यूरोपीय संघ की तुलना में भारत बड़ी आबादी वाला एक बड़ा बाज़ार है। ब्रिटेन, भारत में अपनी सेवाओं का निर्यात करने का उद्देश्य भी रखता है।
    • भारत, संयुक्त राज्य अमेरिका के बाद आज ब्रिटेन में दूसरा सबसे बड़ा निवेशक है और जर्मनी तथा फ्राँस जैसे देश भारत के बाद आते हैं।
    • ब्रिटेन में भारतीय मूल के लगभग 1.4 मिलियन लोग हैं और इंफोसिस (Infosys) जैसी 1000+ भारतीय कंपनियाँ ब्रिटेन में मौजूद हैं जो बड़ी संख्या में लोगों को रोज़गार प्रदान कर रही हैं।

संबंधित मुद्दे

  • चीनी पहलू: यह व्यापार सौदा केवल व्यापार के बारे में नहीं है बल्कि संबंधों के राजनीतिक और रणनीतिक तत्वों के बारे में भी है। ब्रिटेन, चीन के लिये खतरा नहीं, बल्कि इसके साथ संलग्नता के बारे में बात कर रहा है।
    • भारत को चीन के साथ ब्रिटेन के हितों के बारे में बहुत यथार्थवादी होने की ज़रूरत है जो भारत से काफी अलग हैं।
  • फलों का निर्यात: ब्रिटेन पहली बार भारत में फलों का निर्यात करने जा रहा है जिसके लिये केवल ब्रिटेन से प्रमाणन की आवश्यकता होगी और भारत को किसी अतिरिक्त प्रमाणन की आवश्यकता नहीं होगी।
  • ब्रिटेन द्वारा भारत की प्राथमिकताओं की कोई मान्यता नहीं: इस सौदे पर हस्ताक्षर करने से ब्रिटेन को जो फायदे होंगे, उस पर ज़ोर दिया जा रहा है, न कि भारत के फायदे पर।
    • भारत में ब्रिटिश निर्यात और ब्रिटेन में भारतीय निवेश के बारे में चर्चा है लेकिन भारतीय दृष्टिकोण को ज़्यादा महत्त्व नहीं दिया जा रहा है।
    • ब्रिटेन भारत में अपने स्वयं के एजेंडे को आगे बढ़ा रहा है और यह सुनिश्चित करना चाहता है कि भारत को ब्रिटिश निर्यात की अनुमति देने के मामले में टैरिफ तथा गैर-टैरिफ दोनों बाधाओं को हटा दिया जाए और साथ ही कई कोटा हटा दिये जाएं।
  • भारत और ब्रिटेन के अलग-अलग हित: इस FTA में भारतीय और ब्रिटिश हित पूरी तरह से मेल नहीं खा रहे हैं। ब्रिटेन भारतीय बाज़ार तक अधिक पहुँच चाहता है।
    • भारत ब्रिटेन को भारत में कानूनी सेवाओं की अनुमति दे रहा है लेकिन ब्रिटेन में भारतीय IT पेशेवरों और कुशल जनशक्ति की पहुँच के बारे में कोई बातचीत नहीं हो रही है।
    • क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी (RCEP) से भारत की वापसी का कारण भी यही था।

आगे की राह 

  • ब्रिटेन के लिये जनशक्ति का आंदोलन: भारत को ब्रिटेन तक पहुँच के लिये एक ऐसी पहल की आवश्यकता है जो भारतीय छात्रों को ब्रिटेन में अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्हें वहीं रहने और काम करने की अनुमति देता हो तथा IT पेशेवरों एवं कुशल कर्मचारियों को काम करने की अनुमति भी देता हो।
    • इसके लिये एक ऐसी पहल की आवश्यकता है जिसमें न केवल व्यापार बल्कि जनशक्ति के आवागमन को भी शामिल किया गया हो।
  • भारत की क्षमता को समझना: भारत को उस अवसर का सर्वोत्तम उपयोग करना चाहिये जो उसे प्रदान किया गया है। भारत, ब्रिटेन के दूसरे सबसे बड़े निवेशक और दुनिया की पाँचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में अन्य देशों के मुकाबले आगे बढ़ रहा  है।
    • इसे उसी तरह खत्म नहीं होना चाहिये जैसा कि RCEP के मामले में भारत के लिये हुआ था, क्योंकि यह एक द्विपक्षीय साझेदारी है, भारत भी ब्रिटेन में जो हासिल करना चाहता है उस पर अपने एजेंडे को आगे बढ़ाएगा।

निष्कर्ष

  • व्यापार किन्हीं दो देशों के बीच संबंधों को जोड़ने तथा इन संबंधों को बनाए रखने के सबसे आसान तरीकों में से एक है। भारत और UK के बीच व्यापार भागीदारी में वृद्धि और FTA ऐसे तत्त्व हैं जो दोनों के बीच एक मज़बूत और जीवंत साझेदारी को कायम करेंगे।
  • भारत के लिये अपने स्वयं के एजेंडे और प्राथमिकताओं को महत्त्व देना महत्त्वपूर्ण है लेकिन इसके साथ ही यह भी सुनिश्चित करना आवश्यक है कि आगामी व्यापार तथा सौदे दोनों देशों के लिये फायदेमंद हो।
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