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संसद टीवी संवाद


भारतीय अर्थव्यवस्था

द बिग पिक्चर : मज़बूत होता भारत का इंफ्रास्ट्रक्चर

  • 30 May 2019
  • 16 min read

संदर्भ

वर्ष 2024 तक बुनियादी ढाँचा क्षेत्र में 100 ट्रिलियन निवेश के अपने चुनावी वादे के अनुरूप, एनडीए सरकार अपने दूसरे कार्यकाल के शुरुआती महीनों में मेट्रो परियोजनाओं, अंतर्देशीय जलमार्ग, प्राकृतिक गैस ग्रिड और हवाई अड्डों के निजीकरण के क्षेत्र में निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिये निजी क्षेत्र में निवेश करने पर ध्यान केंद्रित करेगी।

  • फिच रेटिंग्स एजेंसी के अनुसार, बीजेपी के पक्ष में अभूतपूर्व जनादेश निकट अवधि में नीतियों के प्रति अनिश्चितता को कम करने और सरकार को "आर्थिक सुधार के प्रयासों को जारी रखने" में मदद करेगा।
  • इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर भारतीय अर्थव्यवस्था का एक महत्त्वपूर्ण चालक है। यह क्षेत्र भारत के समग्र विकास के लिये अत्यंत महत्त्वपूर्ण है| सरकार द्वारा उन नीतियों पर गहन ध्यान केंद्रित किया गया है जो देश में विश्व स्तरीय बुनियादी ढाँचे के निर्माण को सुनिश्चित करेंगे।

वर्तमान स्थिति

  • देश में बुनियादी ढाँचे को विकसित करने के लिये दिया जा रहा प्रोत्साहन इस क्षेत्र के घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ियों को आकर्षित कर रहा है।
  • निजी क्षेत्र सड़क, संचार से लेकर बिजली तथा हवाई अड्डों के विभिन्न बुनियादी ढाँचों के निर्माण में प्रमुख प्लेयर के रूप में उभर रहा है।

बाज़ार का आकार

  • औद्योगिक नीति और संवर्द्धन विभाग (DIPP) के अनुसार, अप्रैल 2000 से दिसंबर 2018 तक निर्माण विकास क्षेत्र (टाउनशिप, आवास, निर्मित बुनियादी ढाँचा और निर्माण विकास परियोजनाएँ) में प्राप्त प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) 24.91 बिलियन अमेरिकी डॉलर था।
  • भारत में लॉजिस्टिक सेक्टर प्रतिवर्ष 10.5 प्रतिशत की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (Compound Annual Growth Rate-CAGR) की दर से बढ़ रहा है और 2020 में यह 215 बिलियन डॉलर तक पहुँचने की उम्मीद है।

निवेश (Investment)

  • भारत में 2022 तक सतत विकास के लिये बुनियादी ढाँचे में 50 ट्रिलियन (777.73 बिलियन डॉलर) के निवेश की आवश्यकता है। बुनियादी ढाँचे के निर्माण में अंतर्राष्ट्रीय निवेशक भारत में रुचि दिखा रहे हैं।
  • इस क्षेत्र में किये गए कुछ प्रमुख निवेश हैं-
  • 2018 में भारत के बुनियादी ढाँचा क्षेत्र में 1.97 बिलियन अमेरिकी डॉलर की निजी इक्विटी तथा वेंचर कैपिटल इंवेस्टमेंट के रूप में 1.97 बिलियन डॉलर का निवेश हुआ था।
  • जून 2018 में एशियन इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक (AIIB) ने नेशनल इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (NIIF) में 200 मिलियन अमेरिकी डॉलर के निवेश की घोषणा की।
  • 2017 में भारतीय बुनियादी ढाँचा क्षेत्र में 5.4 बिलियन अमेरिकी डॉलर के 91 विलय तथा अधिग्रहण (Merger and Acquisition-M&A) सौदे हुए।

सरकार द्वारा उठाए गए कदम

  • भारत सरकार को अवसंरचना क्षेत्र मुख्य रूप से राजमार्ग, नवीकरणीय ऊर्जा और शहरी परिवहन में अत्यधिक निवेश किये जाने की उम्मीद है।
  • बुनियादी ढाँचा क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिये भारत सरकार हर संभव प्रयास कर रही है। केंद्रीय बजट 2019-20 में इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में निम्नलिखित घोषणाएँ की गई हैं:
  • भारत सरकार ने 4.56 लाख करोड़ रुपए का आवंटन कर बुनियादी ढाँचा क्षेत्र में भारी निवेश की घोषणा की है।
  • संचार क्षेत्र में डाक और दूरसंचार विभागों के विकास के लिये 38,637.46 करोड़ रुपए आवंटित किये गए हैं।
  • भारतीय रेलवे को केंद्रीय बजट 2019-20 के तहत 66.77 बिलियन रुपए का आवंटन किया गया है|
  • सड़क परिवहन और राजमार्ग के विकास के लिये 83,015.97 करोड़ रुपए आवंटित किये गए हैं।
  • पवन और सौर ऊर्जा परियोजनाओं के साथ-साथ ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर परियोजना की क्षमता बढ़ाने के लिये 3,899.9 करोड़ रुपए आवंटित किये गए हैं।
  • दूरसंचार अवसंरचना को बढ़ावा देने के लिये 8,350.00 करोड़ रुपए का आवंटन किया गया है।
  • 500 शहरों में सभी घरों में पानी की आपूर्ति की जाएगी।

पिछले चार सालों में प्रमुख उपलब्धियाँ

  • वित्त वर्ष 2018 में कुल राष्ट्रीय राजमार्गों की लंबाई बढ़कर 122,434 किलोमीटर हो गई, जो वित्त वर्ष 2014 में 92,851 किलोमीटर थी।
  • वर्ल्ड बैंक की ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस - "गेटिंग इलेक्ट्रिसिटी" रैंकिंग में भारत की रैंकिंग 2014 के 137वें स्थान से बढ़कर 2018 में 24वीं हो गई।
  • वित्त वर्ष 2018 में ऊर्जा घाटा घटकर 0.7 प्रतिशत हो गया जो वित्त वर्ष 2014 में 4.2 प्रतिशत था।
  • 2018 में हवाई अड्डों की संख्या बढ़कर 102 हो गई है।

ग्रामीण अवसंरचना

  • इस तथ्य से इनकार नहीं किया जा सकता कि कृषि और गैर-कृषि क्षेत्रों सहित भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को फिर से सक्रिय करने की तत्काल आवश्यकता है।
  • ग्रामीण क्षेत्र के महत्त्व को इस लिहाज़ से समझने की आवश्यकता है कि भारत की 68.84 प्रतिशत आबादी ग्रामीण क्षेत्र में निवास करती है और 50 प्रतिशत से अधिक कार्यबल अपनी आजीविका के लिये कृषि में लगा हुआ है।
  • अतः कृषि उत्पादकता और कृषि एवं गैर-कृषि रोज़गार बढ़ाने तथा ग्रामीण गरीबी को कम करने के साथ ग्रामीण जीवन स्तर को बढ़ाने में ग्रामीण बुनियादी ढाँचे के महत्त्व पर ज़ोर दिया जाना चाहिये।
  • ग्रामीण बुनियादी ढाँचे में सुधार के लिये कई सरकारी पहलें की गई हैं, जिनमें से कुछ इस प्रकार हैं, जैसे : (i) ग्रामीण बुनियादी ढाँचा विकास निधि (RIDF), (ii) त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम, (iii) प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, (iv) राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना, (v) राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी अधिनियम 2005।

सड़क और बुनियादी ढाँचा

  • भारत में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सड़क नेटवर्क है, जो कुल 5.5 मिलियन किलोमीटर फैला हुआ है।
  • भारत में निजी क्षेत्र सड़क बुनियादी ढाँचे के विकास में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में उभरा है।
  • बढ़ती औद्योगिक गतिविधियों के साथ वाहनों की बढ़ती संख्या ने सड़क परिवहन बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं की संख्या में वृद्धि का समर्थन किया है।
  • सार्वजनिक निजी भागीदारी (PPP) के माध्यम से निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने की सरकार की नीति के कारण बड़ी संख्या में निजी क्षेत्र के उद्यमियों के प्रवेश से बुनियादी ढाँचा उद्योग के लिये एक वरदान साबित हुआ है।
  • सरकार द्वारा सड़क क्षेत्र में 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की अनुमति देने के साथ, कई विदेशी कंपनियों ने भारतीय कंपनियों के साथ भागीदारी की है।
  • निर्माण विकास (Construction Development) में संचयी FDI अप्रैल 2000 से दिसंबर 2018 तक 24.91 बिलियन अमेरिकी डॉलर रहा।
  • सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने वित्त वर्ष 2019 में 10,000 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण का लक्ष्य तय किया है।

शिपिंग उद्योग तथा बंदरगाह

  • भारत में 12 बड़े और 205 अधिसूचित छोटे और मध्यवर्ती बंदरगाह हैं।
  • सागरमाला परियोजना के तहत देश में छह नए मेगा पोर्ट विकसित किये जाएंगे।
  • भारतीय बंदरगाह और शिपिंग उद्योग देश के व्यापार और वाणिज्य में वृद्धि को बनाए रखने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
  • भारत दुनिया का सोलहवाँ सबसे बड़ा मेरीटाइम देश है, जिसका तटवर्ती क्षेत्र लगभग 7,517 किलोमीटर है।
  • बंदरगाहों के विकास के क्षेत्र में भारत सरकार महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है। सरकार ने बंदरगाह और बंदरगाह निर्माण तथा रख-रखाव परियोजनाओं के लिये स्वचालित मार्ग के तहत 100 प्रतिशत तक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की अनुमति दी है।
  • सरकार ने बंदरगाहों, अंतर्देशीय जलमार्गों और अंतर्देशीय बंदरगाहों को विकसित करने, मेंटेनेंस और संचालित करने वाले उद्यमों को 10 साल तक विभिन्न प्रकार के करों में छूट की सुविधा प्रदान की है।

ऊर्जा क्षेत्र

  • किसी भी देश के आर्थिक विकास और कल्याण के लिये ऊर्जा महत्त्वपूर्ण बुनियादी ढाँचों में एक है। भारतीय अर्थव्यवस्था की निरंतर वृद्धि के लिये पर्याप्त बुनियादी ढाँचे का विकास आवश्यक है।
  • भारत का विद्युत क्षेत्र दुनिया में सबसे अधिक विविधता वाला क्षेत्र है। यह बिजली उत्पादन के स्रोत जैसे- कोयला, लिग्नाइट, प्राकृतिक गैस, तेल, पनबिजली और परमाणु ऊर्जा जैसे पारंपरिक स्रोतों से लेकर पवन, सौर और कृषि और घरेलू कचरे जैसे गैर-पारंपरिक स्रोतों तक विस्तृत है।
  • देश में बिजली की मांग तेज़ी से बढ़ी है और आने वाले वर्षों में इसके और बढ़ने की उम्मीद है।
  • देश में बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिये स्थापित उत्पादन क्षमता में बड़े पैमाने पर वृद्धि किये जाने की आवश्यकता है।
  • फरवरी 2019 तक भारत में पावर स्टेशनों की कुल स्थापित क्षमता 350.16 गीगावाट (GW) थी।

भारतीय रेलवे

  • भारतीय रेलवे दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क है। इसका नेटवर्क 115,000 किमी. में फैला है।
  • भारत के रेलवे नेटवर्क को एकल प्रबंधन के मामले में दुनिया की सबसे बड़ी रेलवे प्रणालियों में से एक माना जाता है।
  • ऊर्जा दक्षता और कुशल परिवहन साधनों के अलावा रेलवे नेटवर्क लंबी दूरी की यात्रा और थोक वस्तुओं की आवाजाही के लिये भी आदर्श है।
  • भारत सरकार ने निवेशक-अनुकूल नीतियाँ बनाकर रेलवे के बुनियादी ढाँचे पर निवेश किये जाने पर ध्यान केंद्रित किया है।
  • माल ढुलाई और उच्च गति की ट्रेनों के बुनियादी ढाँचे में सुधार हेतु रेलवे में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) को सक्षम करने के लिये तेज़ी से काम हो रहा है।
  • वर्तमान में कई घरेलू और विदेशी कंपनियाँ भी भारतीय रेल परियोजनाओं में निवेश करने की इच्छुक हैं।
  • अप्रैल 2000 से दिसंबर 2018 तक रेलवे से संबंधित घटकों में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) 940.92 मिलियन अमेरिकी डॉलर था।
  • भारत सरकार मुंबई और नागपुर के बीच एक हाई स्पीड रेल कॉरिडोर परियोजना पर विचार कर रही है।
  • भारतीय रेलवे नई निर्यात नीति की योजना बना रहा है।
  • भारत सरकार एक ‘राष्ट्रीय रेल योजना’ (National Rail Plan) लाने जा रही है जो देश को परिवहन के अन्य साधनों के साथ रेल नेटवर्क को एकीकृत करने और एक बहु-मोडल परिवहन नेटवर्क विकसित करने में सक्षम बनाएगी।

आगे की राह

  • भारत के राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क के 2019 तक 50,000 किलोमीटर तक होने की उम्मीद है। भारत में राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण वर्ष 2017-18 में प्रतिवर्ष 20 प्रतिशत की दर से बढ़ा है।
  • भारत और जापान ने भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों में बुनियादी ढाँचे के विकास के लिये हाथ मिलाया है और ये पूर्वोत्तर में रणनीतिक बुनियादी ढाँचा परियोजनाएँ शुरू कर पूर्वोत्तर के विकास के लिये भारत-जापान समन्वय मंच की स्थापना भी कर रहे हैं।
  • भारतीय रेलवे नेटवर्क बेहतर गति से आगे बढ़ रहा है। अगले पाँच वर्षों में भारतीय रेलवे विश्व का तीसरा सबसे बड़ा बाजार होगा, जो वैश्विक बाज़ार का 10 प्रतिशत है।

निष्कर्ष

यद्यपि वर्तमान सरकार देश में अवसंरचनात्मक विकास की दिशा में आगे बढ़ रही है, इसके बावजूद स्वच्छ पेयजल, प्रदूषण रहित वायु, सार्वजनिक परिवहन की गुणवत्ता, यातायात प्रबंधन और पार्किंग की उपलब्धता, परिवहन एवं भूमि उपयोग की एकीकृत योजना, कानून-व्यवस्था, प्रबंधन और ठोस कचरे का सुरक्षित निपटान, अपशिष्ट जल का उपचार और किफायती आवास आदि सरकार के सामने चुनौतियाँ बनी हुई हैं। उम्मीद है कि वर्तमान सरकार का दूसरा कार्यकाल इन चुनौतियों से निपटने में कारगर सिद्ध होगा।

प्रश्न : ‘आर्थिक सुधार के प्रयासों को जारी रखने के कारण भारत का इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर मज़बूती से आगे बढ़ रहा है’ इस कथन की आलोचनात्मक विवेचना कीजिये।

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