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सामाजिक न्याय

मानव तस्करी

  • 08 Aug 2020
  • 16 min read

संदर्भ:   

हाल ही में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय (Office of the United Nations High Commissioner for Human Rights- OHCHR) द्वारा COVID-19 महामारी के कारण विश्वभर में मानव तस्करी में वृद्धि की चेतावनी जारी की गई है। OHCHR की चेतावनी के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने देश के सभी राज्य सरकारों को स्थानीय तस्करी रोधी तंत्र को और अधिक मज़बूत बनाने के निर्देश दिए हैं।       

 

प्रमुख बिंदु: 

  • केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मानव तस्करी की समस्या से निपटने और इसकी रोकथाम हेतु सभी राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों को नई मानव तस्करी रोधी इकाइयों (Anti-Human Trafficking Units- AHTU) की स्थापना में तेज़ी लाने और पहले से स्थापित इकाइयों के नवीनीकरण का भी निर्देश दिया है।   
  • प्रत्येक वर्ष 30 जुलाई को ‘विश्व मानव तस्करी निरोधक दिवस’ के रूप में मनाया जाता है।
  • वर्तमान में देश में लगभग 330 से अधिक मानव तस्करी रोधी इकाइयाँ सक्रिय है, जो देश के अंदर तथा बाहरी मानव तस्करी पर केंद्रीय गृह मंत्रालय, केंद्रीय महिला और बाल विकास मंत्रालय, केंद्रीय श्रम तथा रोज़गार मंत्रालय एवं केंद्रीय विदेश मंत्रालय के बीच अभिसरण केंद्र के रूप में कार्य करते हैं।
  • राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो के अनुसार, वर्ष 2018 में देश में मानव तस्करी के 4000 मामले दर्ज किये गए, इसमें में 99% मामलों में पीड़ित को देश के अंदर ही रखा गया था।
  • देश में होने वाली मानव तस्करी की घटनाओं के अतिरिक्त भारत क्षेत्र के अन्य देशों (नेपाल, म्यांमार, बांग्लादेश आदि) से होने वाली मानव तस्करी के लिये एक मार्ग बन गया है।         
  • हाल के वर्षों में मानव अंगों की तस्करी के मामलों में काफी वृद्धि देखने को मिली है।                       

मानव तस्करी रोधी इकाई (Anti-Human Trafficking Unit- AHTU):

  • भारत में पहली एकीकृत मानव तस्करी रोधी इकाई की स्थापना वर्ष 2007 में  की गई थी। 
  • AHTUs मानव तस्करी के खतरे की रोकथाम के लिये स्थपित एक एकीकृत कार्य बल है।
  • पुलिस, महिला और बाल विकास विभाग, अन्य संबंधित विभागों तथा गैर-सरकारी संगठनों के प्रशिक्षित प्रतिनिधि इस इकाई का हिस्सा होते हैं। 
  • मानव तस्करी रोधी इकाईयों के बुनियादी ढाँचे की स्थापना के हेतु केंद्र सरकार द्वारा वितीय सहायता प्रदान की जाती है जबकि इन इकाइयों में उपयुक्त कर्मचारियों की नियुक्ति और उनका प्रबंधन का दायित्व राज्य सरकारों का होता है। 

मानव तस्करी की विभीषिका:

  • अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (International Labour Organisation- ILO) के अनुसार, वर्ष 2019 में लगभग 2 करोड़ से अधिक लोग किसी न किसी रूप में आधुनिक गुलामी (Modern Slavery) का शिकार हुए।
    • इसमें से लगभग 68% (लगभग 1.4 करोड़) लोग बंधुआ मज़दूरी (Forced Labour) का शिकार हुए।
    • लगभग 22% लोगों को देह व्यापार और मानव अंगों की तस्करी आदि से जुड़े अपराधों का शिकार होना पड़ा।
    • लगभग 10% को राज्य प्रायोजित जबरन मज़दूरी का शिकार होना पड़ा।
  • एक रिपोर्ट के अनुसार, मानव तस्करी के 92% मामलों में पीड़ित महिलाएँ अथवा बच्चे होते हैं।  
  • ILO के अनुसार, अंतर्रष्ट्रीय स्तर पर मानव तस्करी के अवैध बाज़ार का वार्षिक मुनाफा लगभग 150 बिलियन डॉलर का है। 

कारण: 

  • केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा जारी सुझाव के अनुसार घरेलू हिंसा, भावनात्मक या मनोवैज्ञानिक दुर्व्यवहार, उपेक्षा और आघात या अन्य किसी प्रकार की हिंसा व्यक्ति को मानव तस्करी के प्रति सुभेद बनती है। 
  • अधिकांश तस्कर लोगों  को नौकरी, बेहतर जीवन स्तर आदि का झूठा प्रलोभन देकर कमज़ोरियों का लाभ उठाने का प्रयास करते हैं।      
  • मानव तस्करी की घटनाओं में वृद्धि के कुछ अन्य कारण निम्नलिखित हैं-   
  • गरीबी और सामाजिक असमानता: 
    • वैश्विक स्तर समाज के विभिन्न वर्गों के बीच आर्थिक और सामाजिक असमानता के बढ़ने से मानव तस्करी और देह व्यापार के मामलों में वृद्धि हुई है। 
    • मानव तस्करी के अधिकांश मामलों में देखा गया है कि लोगों को अपनी परिस्थितों के कारण गलत निर्णय लेने पड़ते हैं।      
  • प्राकृतिक आपदा और अस्थिरता:  
    • बाढ़ और अन्य प्राकृतिक आपदाओं के अतिरिक्त राजनीतिक अस्थिरता की स्थिति में समाज के निम्न वर्गों से जुड़े लोग दैनिक भोजन और वस्त्र जैसी ज़रूरतों को पूरा करने के लिये बंधुआ मज़दूरी से लेकर अपने शरीर अंगों को बेचने पर विवश होना पड़ता है। 
  • प्रवासन और रोज़गार:    
    • स्थानीय/क्षेत्रीय स्तर पर औद्योगिक विकास की कमी और बैंकिंग पहुँच न होने से लोगों को अपनी आजीविका के लिये अन्य राज्यों या देश में पलायन करना पड़ता है।  
    • रोज़गार के अवसरों की कमी और प्रवासन को मानव तस्करी के मामलों में हो रही वृद्धि का एक बड़ा कारण मन जाता है।
  • प्रशासनिक लापरवाही:    
    • देश में मानव तस्करी और बंधुआ मज़दूरी जैसे अपराधों की रोकथाम हेतु पर्याप्त कानून होने के बाद भी ऐसे अपराधों की संख्या में कमी नहीं आई है और कई मामलों में पुलिस में अपील के बाद भी पीड़ित दोबारा अपराध का शिकार हो गए हैं।
    • क्षेत्रीय पुलिस स्टेशन पर पहले से ही काम के दबाव और आवश्यक स्टाफ की कमी के कारण मानव तस्करी से जुड़े मामलों को प्राथमिकता नहीं मिल पाती।  
    • देश में मानव तस्करी से जुड़े अनेक मामलों को ‘गुमशुदा व्यक्ति’ या अन्य अपराधों के तहत पंजीकृत किया जाता है, साथ ही लंबे समय से इस दिशा में कोई प्रभावी सुधार नहीं हो सका है।      
  • इसके अतिरिक्त मानव तस्करी या देह व्यापार से जुड़े कई मामलों में आर्थिक लाभ के लिये परिवार के लोगों की भूमिका भी पाई गई है। 

सरकार के प्रयास:

  • केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2010 से 2019 के बीच देश के 50% ज़िलों में मानव तस्करी रोधी इकाइयों की स्थापना हेतु धन जारी किया गया था 
  • मार्च 2020 में केंद्र सरकार द्वारा देशभर में ज़िला स्तर पर मानव तस्करी रोधी इकाइयों की स्थापना हेतु निर्भया फंड से 100 करोड़ रुपए जारी किये गए थे।
  • केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मानव तस्करी पर नियंत्रण के लिये राज्य सरकार को कुछ महत्वपूर्ण निर्देश जारी किये हैं।
    • पुलिस को मानव तस्करी से जुड़े गिरोहों की पहचान हेतु विशिष्ट 'खुफिया' और 'निगरानी' तंत्र की स्थापना करना तथा समूह के इतिहास, सदस्यों की पहचान एवं गतिविधियों आदि की जानकारी करना। 
    • साथ ही महिलाओं और बच्चों के लिये आश्रय गृह को खुला रखना तथा सीमा पर तैनात पुलिस कर्मियों को आवश्यकता पड़ने पर तस्करी का शिकार हुए बच्चों की तलाश में सहायता करना। 
    • पुलिस को राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो द्वारा लॉन्च किये गए ‘अपराध और आपराधिक ट्रैकिंग नेटवर्क और प्रणाली’ (Crime & Criminals Tracking Network and Systems-CCTNS) और Cri-MAC एप्लीकेशन का पूरा प्रयोग करना चाहिये। 

कानूनी प्रावधान:   

अन्य प्रयास:

  • भारत सरकार ने ‘अंतरराष्‍ट्रीय संगठित अपराध के खिलाफ संयुक्‍त राष्‍ट्र सम्‍मेलन’ (United Nations Convention on Transnational Organised Crime- UNCTOC) की पुष्टि की है।  
    • इसके तहत मानव तस्करी और विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों के अवैध व्यापार को रोकने हेतु सजा का प्रावधान है। 
  • भारत ने वेश्यावृत्ति के लिए महिलाओं और बच्चों के अवैध व्यापार से निपटने तथा इसकी रोकथाम पर सार्क सम्मेलन की पुष्टि की है।

द्विपक्षीय समझौते:  

  • सीमा-पार तस्करी और अवैध व्यापार से जुड़ी अनेक समस्याओं से निपटने हेतु भारत और बांग्लादेश के साझा सहयोग से एक कार्यबल का गठन किया गया है 
  • भारत और बांग्लादेश के बीच मानव तस्करी की रोकथाम, अवैध व्यापार के पीड़ितों की खोज और उनके प्रत्यावर्तन के लिये द्वि-पक्षीय सहयोग हेतु जून, 2015 में एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया गया था।

चुनौतियाँ:

  • मानव तस्करों द्वारा तकनीकी और डार्क वेब (Dark Web) आदि के प्रयोग ने प्रशासन के कार्य को और अधिक चुनौतीपूर्ण बना दिया है। 
  • देश की स्वतंत्रता के 73 वर्षों के बाद भी आर्थिक और सामाजिक असमानता के समाप्त न होने के कारण यह मानव तस्करी जैसी कई गंभीर समस्याओं के अंत में एक बड़ी चुनौती है।
  • वर्तमान में मानव तस्करी को लेकर सरकार की अलग-अलग संस्थाओं और राज्यों के बीच समन्वय की कमी एक बड़ी समस्या है।
  • हाल के वर्षों में तकनीकी और इंटरनेट के विकास ने शिक्षा को अधिक वहनीय और सुलभ बना दिया है परंतु आवश्यक जागरूकता के अभाव में अक्सर छात्र इंटरनेट पर मानव तस्करी और ऐसे ही अन्य अपराधों का शिकार हो जाते हैं। 
  • COVID-19 महामारी के कारण देश के अधिकांश भागों में रोज़गार के अवसरों में आई कमी के कारण लोगों के लिये दैनिक आवश्यकताओं को पूरा करना कठिन हो गया है ऐसे में मानव तस्करी के मामलों में देखी जा सकती है।     

आगे की राह :

  • राज्यों में मानव तस्करी से जुड़े मामलों की शीघ्र जाँच और रोकथाम हेतु कई गैर-सरकारी संस्थानों ने सरकार से AHTUs  को सामान्य पुलिस स्टेशन के सामान ही शक्ति प्रदान करने की मांग की है।  
  • सीमापार मानव तस्करी के मामलों में हो रही वृद्धि को देखते हुए स्थानीय प्रशासन को मज़बूत करने के साथ बिम्सटेक (BIMSTEC) और सार्क (SAARC) जैसे क्षेत्रीय समूहों के माध्यम से सीमावर्ती देशों की सुरक्षा संस्थाओं के साथ द्विपक्षीय सहयोग को बढ़ाया जाना चाहिये। 
  • मानव तस्करी के मामलों में इंटरनेट और तकनीकी के प्रयोग में हुई वृद्धि को देखते हुए पुलिस और अन्य संबंधित संस्थाओं को ऐसी चुनौतियों से निपटने हेतु आवश्यक प्रशिक्षण प्रदान किया जाना चाहिये। 
  • सरकार को देश के विभिन्न राज्यों में सक्रिय सरकारी और स्वयंसेवी संस्थाओं के बीच व्यापक स्तर पर जानकारी साझा करने का प्रबंध करना चाहिये तथा सीमावर्ती देशों के बीच भी ऐसे ही एक मज़बूत तंत्र की स्थापना की जानी चाहिये। 
  • छात्रों को मानव तस्करी और इंटरनेट से जुड़े अपराधों के बारे जागरूक करना और साथ ही पंचायत स्तर पर ऐसे जागरूकता कार्यक्रमों का नियमित रूप से आयोजन किया जाना चाहिये।         

अभ्यास प्रश्न:  मानव तस्करी के मामलों में लगातार हो रही वृद्धि के कारणों पर चर्चा करते हुए इसके रोकथाम की प्रमुख चुनौतियों और समाधान के विकल्पों पर प्रकाश डालिये।

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