हिंदी साहित्य: पेन ड्राइव कोर्स
ध्यान दें:
झारखण्ड संयुक्त असैनिक सेवा मुख्य प्रतियोगिता परीक्षा 2016 -परीक्षाफलछत्तीसगढ़ पीसीएस प्रश्नपत्र 2019छत्तीसगढ़ पी.सी.एस. (प्रारंभिक) परीक्षा, 2019 (महत्त्वपूर्ण अध्ययन सामग्री).छत्तीसगढ़ पी.सी.एस. प्रारंभिक परीक्षा – 2019 सामान्य अध्ययन – I (मॉडल पेपर )UPPCS मेन्स क्रैश कोर्स.
हिंदी साहित्य: पेन ड्राइव कोर्स (Hindi Literature: Pendrive Course)
मध्य प्रदेश पी.सी.एस. (प्रारंभिक) परीक्षा , 2019 (महत्वपूर्ण अध्ययन सामग्री)मध्य प्रदेश पी.सी.एस. परीक्षा मॉडल पेपर.Download : उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (प्रवर) प्रारंभिक परीक्षा 2019 - प्रश्नपत्र & उत्तर कुंजीअब आप हमसे Telegram पर भी जुड़ सकते हैं !यू.पी.पी.सी.एस. परीक्षा 2017 चयनित उम्मीदवार.UPSC CSE 2020 : प्रारंभिक परीक्षा टेस्ट सीरीज़

महत्त्वपूर्ण संस्थान/संगठन

महत्त्वपूर्ण संस्थान

G-7

  • 12 Dec 2019
  • 15 min read

G7 में कनाडा, फ्रांँस, जर्मनी, इटली, जापान, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका शामिल हैं। यह एक अंतर-सरकारी संगठन है जिसका गठन वर्ष 1975 में उस समय की शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं द्वारा वैश्विक मुद्दों पर चर्चा करने के लिये एक अनौपचारिक मंच के रूप में किया गया था। इसके तहत वैश्विक आर्थिक व्यवस्था, अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा और ऊर्जा नीति जैसे साझा हित के मुद्दों पर चर्चा करने के लिये वार्षिक रूप से बैठक की जाती है।

इतिहास

  • G-7 की उत्पत्ति 1973 के तेल संकट के मद्देनज़र फ्रांँस, पश्चिम जर्मनी, यू.एस., ग्रेट ब्रिटेन और जापान (पाँच देशों के समूह/Group of Five) के वित्त मंत्रियों की अनौपचारिक बैठक से हुई।
    • वैश्विक तेल संकट पर आगे की चर्चा के लिये वर्ष 1975 में फ्रांँस के राष्ट्रपति ने पश्चिम जर्मनी, यू.एस., ग्रेट ब्रिटेन, जापान और इटली के नेताओं को रामबौइलेट (फ्रांस) में आमंत्रित किया था।

सदस्यता

  • फ्रांँस, पश्चिम जर्मनी, इटली, जापान, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका ने 1975 में छह देशों के समूह (Group of Six) का गठन किया ताकि औद्योगिक लोकतंत्रों की आर्थिक चिंताओं को दूर करने के लिये एक मंच प्रदान किया जा सके।
    • 1976 में कनाडा को भी समूह में शामिल होने के लिये आमंत्रित किया गया और सभी G-7 राष्ट्रों की पहली बैठक संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा वर्ष 1976 में प्यूर्टो रिको में आयोजित की गई।
  • यूरोपीय संघ ने "गैर-गणनीय" (Non enumerated) सदस्य के रूप में वर्ष 1981 से G-7 बैठकों में पूर्णकालिक भागीदारी प्रारंभ की है।
    • इसका प्रतिनिधित्व यूरोपीय परिषद के अध्यक्षों द्वारा किया जाता है, जो यूरोपीय संघ के सदस्य देशों के नेताओं और यूरोपीय आयोग (यूरोपीय संघ की कार्यकारी शाखा) का प्रतिनिधित्व करते हैं।
  • 1997 में इस मूल सात देशों के समूह में रूस के शामिल होने के बाद G-7 को कई वर्षों तक G-8 के रूप में जाना जाता था। G-7 में रूस को शामिल करने का उद्देश्य 1991 में सोवियत संघ के पतन के बाद पूर्वी और पश्चिमी देशों के बीच सहयोग को बढ़ावा देना था।
    • रूस द्वारा यूक्रेन के क्रीमिया क्षेत्र के अधिग्रहण के बाद वर्ष 2014 में रूस की सदस्यता रद्द कर दी गई और यह समूह पुनः G-7 कहा जाने लगा।
  • इसकी सदस्यता के लिये कोई औपचारिक मानदंड नहीं है, लेकिन इसके सभी प्रतिभागी अति विकसित व लोकतांत्रिक देश हैं। G-7 के सदस्य देशों का कुल सकल घरेलू उत्पाद वैश्विक अर्थव्यवस्था का लगभग 50 प्रतिशत है और यह विश्व की 10 प्रतिशत आबादी का प्रतिनिधित्व करता है।

शिखर सम्मेलन में भागीदारी

  • इसके शिखर सम्मेलन का आयोजन प्रतिवर्ष किया जाता है और समूह के सदस्यों द्वारा इसकी मेज़बानी बारी-बारी से की जाती है। मेज़बान देश न केवल G-7 की अध्यक्षता करता है, बल्कि उस वर्ष के कार्य-विषय/एजेंडा का भी निर्धारण करता है।
  • मेज़बान देश द्वारा वैश्विक नेताओं को शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिये विशेष आमंत्रण दिया जाता है। चीन, भारत, मेक्सिको और ब्राज़ील जैसे देशों ने विभिन्न अवसरों पर इसके शिखर सम्मेलनों में भाग लिया है।
    • G-7 के शिखर सम्मेलन में यूरोपीय संघ, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष, विश्व बैंक और संयुक्त राष्ट्र जैसे महत्तवपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के नेताओं को भी आमंत्रित किया जाता है।

शेरपा (Sherpas)

  • चर्चा के लिये आरक्षित विषयों और अनुवर्ती बैठकों सहित शिखर सम्मेलन के ज़मीनी स्तर के कार्य "शेरपा" द्वारा किए जाते हैं, जो आमतौर पर व्यक्तिगत प्रतिनिधि या राजदूत जैसे राजनयिक होते हैं।

G-7

G-7 और G-20

  • G-20 की स्थापना 1997-1998 के एशियाई वित्तीय संकट के बाद 1999 में हुई थी, जिसकी आरंभिक बैठक में वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंकों के गवर्नरों ने भाग लिया था।
  • वर्ष 2008 के वित्तीय संकट की प्रतिक्रिया के रूप में वाशिंगटन डी.सी. में आयोजित G-20 के उद्घाटन शिखर सम्मेलन में राष्ट्र प्रमुख स्तर के प्रतिनिधियों की भागीदारी सुनिश्चित की गई।
  • G-7 मुख्य रूप से वैश्विक राजनीति से संबंध रखता है, जबकि G-20 एक व्यापक समूह है जो वैश्विक अर्थव्यवस्था पर केंद्रित है। इसे ‘वित्तीय बाज़ारों और विश्व अर्थव्यवस्था पर शिखर सम्मेलन’ के रूप में भी जाना जाता है यह वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद के 80 प्रतिशत का प्रतिनिधित्व करता है।
  • G-20 में G-7 देशों के अलावा अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, ब्राज़ील, चीन, भारत, इंडोनेशिया, मेक्सिको, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण कोरिया और तुर्की शामिल हैं।

G-7 की शक्ति कमज़ोर कैसे हुई?

  • शक्ति में सूक्ष्म परिवर्तन: हालाँकि वर्ष 2008 में G-8 ने खाद्य मुद्रास्फीति और विश्व के अन्य सभी महत्त्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की किंतु वह वर्ष 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट पर संवाद करने से चूक गया।
    • जबकि इसी शिखर सम्मेलन में G-20 ने इस समस्या के मूल को संबोधित करते हुए संयुक्त राज्य अमेरिका से अपने वित्तीय बाज़ारों को अधिक विनियमित करने का अनुरोध किया।
    • इसके उपरांत ही यह स्पष्ट हो गया कि वित्तीय संकट से वृहत रूप से बचने में सफल रहे G-20 देशों के उभरते हुए बाज़ार किसी भी वैश्विक पहल के नैसर्गिक आवश्यक भागीदार हैं।
    • G-20 शिखर सम्मेलन का उभार वैश्विक नेताओं की सबसे महत्त्वपूर्ण बैठक के रूप में हुआ और इसने G-8 के महत्त्व को कम कर दिया।
    • परिणामस्वरूप इसने पुरानी विश्व व्यवस्था के अंत और एक नई व्यवस्था के आरंभ का संकेत दिया।
  • आलोचकों का मत है कि G-7 की छोटी और अपेक्षाकृत समरूप सदस्यता सामूहिक निर्णयन को तो बढ़ावा देती है, लेकिन इसमें प्रायः उन निर्णयों को अंतिम परिणाम तक पहुँचाने की इच्छाशक्ति का अभाव होता है और साथ ही इसकी सदस्यता से महत्त्वपूर्ण उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं को वंचित रखना इसकी एक बड़ी कमी है।
    • G-7 एक अनौपचारिक समूह है और निर्णयों को अनिवार्य रूप से लागू करने की क्षमता नहीं रखता, इसलिये शिखर सम्मेलन के अंत में नेताओं द्वारा की गई घोषणाएँ बाध्यकारी नहीं होतीं।
  • G-20 (जो भारत, चीन, ब्राज़ील जैसी उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं की आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करता है) के उभार ने G-7 जैसे पश्चिमी देशों के वर्चस्व वाले समूह को चुनौती दी है।

G-20 and G-7

G-7 और FATF

  • धनशोधन (Money Laundering) पर बढ़ती वैश्विक चिंता को प्रतिक्रिया स्वरूप वर्ष 1989 में पेरिस में G-7 द्वारा धनशोधन की समस्या के समाधान हेतु वित्तीय कार्रवाई कार्यबल (Financial Action Task Force on Money Laundering-FATF) का गठन किया गया।
    • वर्ष 2001 में इसकी कार्रवाई के दायरे का विस्तार करते हुए आतंकवाद के वित्तपोषण को भी इसमें शामिल कर दिया गया।
  • बैंकिंग प्रणाली और वित्तीय संस्थानों के समक्ष विद्यमान खतरे को चिह्नित करते हुए G-7 के राष्ट्रों या सरकार प्रमुखों और यूरोपीय आयोग के अध्यक्ष ने G-7 सदस्य देशों, यूरोपीय आयोग आठ अन्य देशों के सयुंक्त टास्क फोर्स या कार्य बल का गठन किया।
  • FATF का प्राथमिक उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि "वित्तीय प्रणाली और वृहत अर्थव्यवस्था को मनी लॉन्ड्रिंग के खतरे तथा आतंकवाद के वित्तपोषण व प्रसार से बचाया जाए ताकि वित्तीय क्षेत्र की अखंडता मज़बूत हो और बचाव एवं सुरक्षा में योगदान दिया जा सके।"

भारत और 45वाँ G-7 शिखर सम्मेलन

  • 45वें G-7 शिखर सम्मेलन की मेज़बानी फ्राँस ने अगस्त 2019 में नौवेल्ले-एक्विटेन के बियारित्ज़ (Biarritz in Nouvelle-Aquitaine) में की।
  • फ्रांस के राष्ट्रपति ने लोकतंत्रात्मक व्यवस्था को बढ़ावा देने और महत्तवपूर्ण क्षेत्रीय प्रभाव रखने वाले चार भागीदार देशों (ऑस्ट्रेलिया, चिली, भारत और दक्षिण अफ्रीका); पाँच अफ्रीकी भागीदारों (बुर्किना फासो, सेनेगल, रवांडा एवं दक्षिण अफ्रीका और अफ्रीकी संघ आयोग (AUC) के अध्यक्ष मूसा फाकी) तथा नागरिक समाज के प्रतिनिधियों को इस सम्मेलन में आमंत्रित किया था।
    • G-7 के शिखर सम्मेलन में भारत की उपस्थिति से प्रमुख आर्थिक शक्ति के रूप में भारत का बढ़ता महत्व चिह्नित होता है।
    • इस बात को स्वीकार किया जा रहा है कि इक्कीसवीं सदी के लिये विश्व युद्ध बाद के वैश्विक अनुक्रम में सुधार हेतु उभरती अर्थव्यवस्थाओं, विशेष रूप से एशिया और अफ्रीका के नेतृत्व की आवश्यकता होगी।
  • शिखर सम्मेलन की पाँच प्रमुख प्राथमिकताएँ:
    • अवसर की असमानता के विरुद्ध संघर्ष, लैंगिक समानता को बढ़ावा देना और शिक्षा तथा उच्च-गुणवत्ता युक्त स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच बनाना;
    • जैव विविधता और महासागरों के संरक्षण पर आधारित जलवायु वित्त एवं उचित पारिस्थितिक संक्रमण के माध्यम से ग्रह की रक्षा करके पर्यावरणीय असमानता को कम करना;
    • शांति के लिये और सुरक्षा संबंधी खतरों व आतंकवाद के विरुद्ध कार्य करना;
    • डिजिटल प्रौद्योगिकी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) द्वारा सृजित अवसरों का नैतिक एवं मानव-उन्मुख तरीके से लाभ उठाना;
    • अफ्रीका के साथ एक नवीनीकृत साझेदारी के माध्यम से असमानता का मुकाबला करना।
  • भारत के प्रधानमंत्री ने शिखर सम्मेलन के दो सत्रों (जलवायु परिवर्तन और डिजिटलीकरण) में भाग लिया और संकेत दिया कि भारत उन मुद्दों पर नेतृत्वकारी भूमिका की अधिकाधिक इच्छा रखता है जो ट्रांस-अटलांटिक सदस्यों के लिये विवाद के बिंदु रहे हैं।
    • भारतीय प्रधानमंत्री ने पर्यावरण पर G-7 सत्र को संबोधित करते हुए संवहनीय भविष्य के लिये जलवायु सुरक्षा की दिशा में भारत द्वारा किये जा रहे प्रयासों की चर्चा की, जिसमें एकल-उपयोग प्लास्टिक पर रोक, जल संरक्षण, सौर ऊर्जा उत्पादन और वनस्पतियों एवं जीवों के संरक्षण जैसे प्रयास शामिल हैं।

45वें G-7 शिखर सम्मेलन की उपलब्धि

  • G-7 ने वित्तीय संकट जैसे मुद्दों पर चर्चा की और सोवियत संघ के पूर्व-सदस्य राष्ट्रों की आर्थिक स्थिति में बदलाव, आतंकवाद, हथियारों पर नियंत्रण तथा मादक पदार्थों की तस्करी जैसी विशिष्ट चुनौतियों से निपटने का लक्ष्य निर्धारित किया।
  • शिखर सम्मेलन ने G-7 नेताओं की घोषणा (G7 Leaders’ Declaration) को अंगीकार किया जो व्यापार तथा ईरान, लीबिया, यूक्रेन और हॉन्गकॉन्ग जैसे देशों की समस्याओं पर केंद्रित है।
  • शिखर सम्मेलन में सहमति बनी कि-
    • विश्व व्यापार संगठन में सुधार किया जाएगा ताकि बौद्धिक संपदा संरक्षण के संबंध में उसकी प्रभावकारिता में वृद्धि हो तथा विवादों को अधिक तीव्रता से हल किया जा सके और अनुचित व्यापार अभ्यासों को समाप्त किया जा सके।
    • आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (OECD) के ढाँचे के अंदर नियामकीय बाधाओं को सरल बनाने और अंतर्राष्ट्रीय कराधान को आधुनिक बनाने के लिये वर्ष 2020 तक एक समझौता संपन्न कर लिया जाएगा।
    • ईरान: यह सुनिश्चित किया जाएगा कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार प्राप्त न कर सके और क्षेत्र में शांति व स्थिरता बनी रहे।
    • लीबिया: लीबिया में युद्धविराम संधि का समर्थन, जो लंबे समय तक संघर्ष विराम को बढ़ावा देगा।
    • यूक्रेन: यूक्रेन में रूसी सैन्य हस्तक्षेप को संबोधित करना।
    • हॉन्गकॉन्ग: हॉन्गकॉन्ग में प्रत्यर्पण विधेयक के विरुद्ध आंदोलन को संबोधित करना।
एसएमएस अलर्ट
 

नोट्स देखने या बनाने के लिए कृपया लॉगिन या रजिस्टर करें|

नोट्स देखने या बनाने के लिए कृपया लॉगिन या रजिस्टर करें|

close

प्रोग्रेस सूची देखने के लिए कृपया लॉगिन या रजिस्टर करें|

close

आर्टिकल्स को बुकमार्क करने के लिए कृपया लॉगिन या रजिस्टर करें|

close