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अंतर्राष्ट्रीय संबंध

G7 की बिल्ड बैक बेटर वर्ल्ड इनिशिएटिव

  • 17 Jul 2021
  • 9 min read

प्रिलिम्स के लिये: 

बिल्ड बैक बेटर वर्ल्ड, G7, बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव परियोजना

मेन्स के लिये: 

बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव परियोजना की चुनौतियाँ और समाधान, 'बिल्ड बैक बेटर वर्ल्ड’ का महत्त्व

चर्चा में क्यों?

हाल ही में G7 (Group of Seven) देशों ने चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव परियोजना (Belt and Road initiative- BRI) का मुकाबला करने के लिये 47वें G7 शिखर सम्मेलन में 'बिल्ड बैक बेटर वर्ल्ड’ (Build Back Better World- B3W) पहल का प्रस्ताव रखा।

ग्रुप ऑफ सेवन

  • यह एक अंतर-सरकारी संगठन है जिसका गठन वर्ष 1975 में किया गया था।
  • वैश्विक आर्थिक शासन, अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा और ऊर्जा नीति जैसे सामान्य हित के मुद्दों पर चर्चा करने के लिये इसकी सालाना बैठक होती है।
  • G7 देश यूके, कनाडा, फ्राँस, जर्मनी, इटली, जापान और अमेरिका हैं।
    • सभी G7 देश और भारत G20 का हिस्सा हैं।
  • G7 का कोई औपचारिक संविधान या कोई निश्चित मुख्यालय नहीं है। इसके वार्षिक शिखर सम्मेलन के दौरान नेताओं द्वारा लिये गए निर्णय गैर-बाध्यकारी होते हैं।

प्रमुख बिंदु 

बिल्ड बैक बेटर वर्ल्ड के विषय में:

  • इसका उद्देश्य विकासशील और कम आय वाले देशों में बुनियादी ढाँचे के निवेश घाटे को दूर करना है, जहाँ चीन ने BRI के अंतर्गत लगभग 2,600 परियोजनाओं के माध्यम से अरबों डॉलर का निवेश किया है।
    • BRI परियोजनाओं को विश्व में व्यापार, विदेश नीति और भू-राजनीति में अपने रणनीतिक प्रभुत्व के लिये चीन द्वारा बिछाए गए ऋण जाल के रूप में माना जाता है।
    • इसका समग्र ध्यान परिवहन, रसद और संचार विकसित करने पर है, जो चीन के व्यापार लागत को कम करेगा, चीनी बाज़ारों तक अधिक पहुँच प्रदान करेगा तथा ऊर्जा एवं अन्य संसाधनों की स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित करेगा।
  • इस योजना का नेतृत्व संयुक्त राज्य अमेरिका कर रहा है।
    • B3W पहल विकासशील देशों को वर्ष 2035 तक आवश्यक लगभग 40 ट्रिलियन डॉलर की मांग को पूरा करने के लिये एक पारदर्शी साझेदारी प्रदान करेगी।
  • यह जलवायु मानकों और श्रम कानूनों का पालन करते हुए निजी क्षेत्र के सहयोग से सैकड़ों अरबों डॉलर खर्च करने का आह्वान करती है।
  • हालाँकि इस विषय में अभी घोषणा नहीं की गई है कि योजना वास्तव में कैसे काम करेगी या अंततः कितनी पूंजी आवंटित करेगी।

चीन की BRI परियोजना:

  • इसे वर्ष 2013 में लॉन्च किया गया था। इसमें विकास और निवेश हेतु पहल शामिल हैं जो एशिया से यूरोप तथा उससे आगे तक विस्तृत हैं।
  • रेलवे, बंदरगाह, राजमार्ग और अन्य बुनियादी ढाँचे जैसी बीआरआई परियोजनाओं में सहयोग करने के लिये 100 से अधिक देशों ने चीन के साथ समझौतों पर हस्ताक्षर किये हैं।
  • BRI केज़रिये चीन का निवेश:
    • अपनी स्थापना के बाद से इसमें बाह्य निवेश अधिक हुआ है क्योंकि चीन का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश बहिर्वाह अनुपात 2001-10 के दौरान लगभग 0.34 से बढ़कर 1 हो गया।
    • मात्रा के लिहाज से FDI बहिर्वाह वर्ष 2016-19 में बढ़कर 140 अरब डॉलर हो गया, जो 2001-10 के दौरान वार्षिक औसत 25 अरब डॉलर था।
    • चीन व्यापक परिवहन नेटवर्क सुनिश्चित करने के लिये अफ्रीका में निवेश कर रहा है। चीन और आसियान देशों के बीच बेहतर एकीकरण हेतु चीन ने पूर्वी एशियाई क्षेत्र के साथ विभिन्न संपर्कों मार्गों हेतु भी हस्ताक्षर किये हैं, जिसमें ज़्यादातर परिवहन, रेलवे, सड़क मार्ग और जलमार्ग पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
  • महत्त्वपूर्ण परियोजनाएँ:
    • चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC), बांग्लादेश-चीन-म्याँमार आर्थिक गलियारा (BCIM) और श्रीलंका में कोलंबो पोर्ट सिटी परियोजना अन्य महत्त्वपूर्ण BRI परियोजनाएँ हैं।
    • चीन की BRI के हिस्से के रूप में मध्य एशियाई क्षेत्र के भीतर 4,000 किलोमीटर रेलवे और 10,000 किलोमीटर राजमार्गों को पूरा करने की योजना है।
  • भारत की चिंता:
    • भारत ने चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) के बारे में चिंता व्यक्त की है, क्योंकि यह पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर (PoK) से होकर गुज़रता है।
      • बड़े पैमाने पर बुनियादी ढाँचा परियोजना चीन के झिंजियांग प्रांत को पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में ग्वादर बंदरगाह से जोड़ती है।
    • भारत ने अतीत में चीनी पहल में शामिल होने से इनकार कर दिया और BRI के खिलाफ आवाज़उठाई।
    • चीनी प्रतिस्पर्द्धा के कारण भारत अपने उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता, बाज़ार पहुँच, संसाधन निष्कर्षण आदि पर प्रतिकूल व्यापार प्रभाव भी देखता है।

‘बिल्ड बैक बेटर वर्ल्ड’ का महत्त्व:

  • वर्ष 1991 में सोवियत संघ के पतन और शीत शुद्ध की समाप्ति के बाद एक प्रमुख वैश्विक शक्ति के रूप में चीन का फिर से उभरना हाल के समय की सबसे महत्त्वपूर्ण भू-राजनीतिक घटनाओं में से एक है।
  • वर्ष 1979 में चीन की अर्थव्यवस्था इटली की तुलना में छोटी थी, किंतु विदेशी निवेश के लिये खोले जाने और बाज़ार सुधारों को शुरू करने के बाद से चीन, दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है तथा यह नवीन प्रौद्योगिकियों के एक वैश्विक नेता के रूप में उभरा है।
  • हालाँकि ‘पारदर्शिता की कमी, खराब पर्यावरण और श्रम मानकों’ के प्रति चीन की सरकार के दृष्टिकोण के कारण वह पश्चिम में एक सकारात्मक विकल्प प्रस्तुत करने में विफल रहा है।

आगे की राह 

  • ‘बिल्ड बैक बेटर वर्ल्ड’ का प्रस्ताव निश्चित रूप से चीन की मेगा योजना के प्रतिकूल प्रभावों को रोकने के लिये एक स्वागत योग्य कदम है। हालाँकि ‘बिल्ड बैक बेटर वर्ल्ड’ में सुसंगत विचारों और उचित योजना का अभाव है लेकिन अभी भी इसमें देरी नहीं हुई है तथा इसे और अधिक बेहतर किया जा सकता है।
  • इसके अलावा यह देखना अभी शेष है कि भारत ‘बिल्ड बैक बेटर वर्ल्ड’ में क्या भूमिका निभाएगा, क्योंकि चीन के ‘बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव’ (BRI) का भारत प्रबल विरोधी रहा है।
  • चीन के प्रभाव को कम करने के लिये काउंटर-रणनीति आवश्यक है। संपूर्ण विश्व में ‘बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव’ परियोजनाओं का एक वृहद् विश्लेषण (मात्रा और निवेश पैटर्न के आधार पर), स्पष्ट रूप से चीन-केंद्रित अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक एकीकरण, उत्पादन नेटवर्क तथा एशिया-प्रशांत क्षेत्र एवं वैश्विक अर्थव्यवस्था में चीन के आधिपत्य को दर्शाता है।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

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