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अंतर्राष्ट्रीय संबंध

47वाँ G7 शिखर सम्मेलन

  • 19 Jan 2021
  • 6 min read

चर्चा में क्यों?

यूनाइटेड किंगडम ने भारतीय प्रधानमंत्री को जून 2021 में आयोजित होने वाले 47वें G7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिये अतिथि के रूप में आमंत्रित किया है।

प्रमुख बिंदु

अन्य आमंत्रित देश

  • भारत के अलावा ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया को भी ‘अतिथि देशों’ के रूप में शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिये आमंत्रित किया गया है।

ब्रिटेन, भारत और G7

  • ब्रिटेन, भारत के लिये संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में स्थायी सीट का समर्थन करने वाला पहला P5 (सुरक्षा परिषद के पाँच स्थायी देश) सदस्य और वर्ष 2005 में G7 शिखर सम्मेलन में भारत को आमंत्रित करने वाला पहला G7 सदस्य देश था।

उद्देश्य

  • इस सम्मेलन का उद्देश्य कोरोना वायरस महामारी से मुकाबला करने में मदद के लिये विश्व के अग्रणी लोकतंत्रों को एकजुट करना और अधिक समृद्ध भविष्य का निर्माण करना है।

ग्रुप ऑफ सेवन (G-7)

G7-summit

परिचय

  • यह एक अंतर-सरकारी संगठन है, जिसकी स्थापना वर्ष 1975 में की गई थी।
  • वैश्विक आर्थिक शासन, अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा और ऊर्जा नीति जैसे सामान्य हित के मुद्दों पर चर्चा करने के लिये वार्षिक तौर पर संगठन के सदस्य देशों की बैठक आयोजित की जाती है।
  • G-7 संगठन का कोई औपचारिक संविधान और स्थायी मुख्यालय नहीं है। वार्षिक शिखर सम्मेलन के दौरान लिये गए निर्णय सदस्य देशों पर गैर-बाध्यकारी होते हैं।

सदस्य

  • G-7 औद्योगिक रूप से विकसित लोकतांत्रिक देशों यानी फ्राँस, जर्मनी, इटली, यूनाइटेड किंगडम, जापान, संयुक्त राज्य अमेरिका और कनाडा का समूह है।
  • वर्ष 1997 में रूस के इस समूह में शामिल होने के बाद कई वर्षों तक G-7 को 'G- 8' के रूप में जाना जाता रहा। 
  • हालाँकि रूस को वर्ष 2014 में क्रीमिया विवाद के बाद समूह से निष्कासित कर दिये जाने के पश्चात् समूह को एक बार पुनः G-7 कहा जाने लगा।

शिखर सम्मेलन

  • G-7 शिखर सम्मेलन का आयोजन प्रतिवर्ष किया जाता है और समूह के सदस्यों द्वारा रोटेशन के आधार पर इस सम्मेलन की मेज़बानी की जाती है।
  • शिखर सम्मेलन में होने वाली चर्चा के विषय और अनुवर्ती बैठकों समेत लगभग सभी मामले ‘शेरपा’ द्वारा नियंत्रित किये जाते हैं, जो कि आमतौर पर सम्मेलन में हिस्सा लेने वाले नेताओं के प्रतिनिधि अथवा राजनयिक स्टाफ के सदस्य होते हैं।
  • सम्मेलन के दौरान यूरोपीय संघ, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष, विश्व बैंक और संयुक्त राष्ट्र जैसे महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधियों को भी आमंत्रित किया जाता है।

चुनौतियाँ और चिंताएँ 

  • नीतियाँ 
    • G-7 सदस्य देशों के बीच आंतरिक तौर पर कई असहमतियाँ मौजूद हैं, उदाहरण के लिये आयात पर लगने वाले कर और जलवायु परिवर्तन से संबंधित कार्यवाहियों को लेकर अमेरिका और अन्य सदस्य देशों के बीच विवाद।
    • वैश्विक स्तर पर मौजूदा राजनीतिक एवं आर्थिक स्थिति को सही ढंग से प्रतिबिंबित न कर पाने की वजह से संगठन की आलोचना की जाती है।
  • प्रतिनिधित्व का अभाव 
    • अफ्रीका, लैटिन अमेरिका या दक्षिणी गोलार्द्ध का कोई देश G-7 संगठन का सदस्य नहीं है।
    • यह अंतर-सरकारी संगठन विश्व की अन्य तेज़ी से उभरती अर्थव्यवस्थाओं जैसे- भारत और ब्राज़ील आदि से चुनौतियों का सामना कर रहा है।
      • वर्ष 1999 में वैश्विक आर्थिक चिंताओं से निपटने और अधिक देशों को एक साथ लाने के लिये G-20 समूह का गठन किया गया था।

भारत और G-7

  • भागीदारी
    • वर्ष 2019 में फ्रांँस में आयोजित 45वें G-7 शिखर सम्मेलन में भारत की हिस्सेदारी एक प्रमुख आर्थिक और लोकतांत्रिक शक्ति के रूप में भारत की रणनीतिक स्थिति को प्रतिबिंबित करती है।
    • वर्ष 2020 में अमेरिका द्वारा भी भारत को शिखर सम्मेलन के लिये आमंत्रित किया गया था, हालाँकि यह सम्मेलन महामारी के कारण नहीं हो सका।
    • पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के शासनकाल के दौरान भी भारत ने पाँच बार G-7 (तत्कालीन G-8 समूह) के सम्मेलनों में भाग लिया था।
  • विचार-विमर्श हेतु महत्त्वपूर्ण मंच
    • यह व्यापार, कश्मीर मुद्दे और रूस तथा ईरान के साथ भारत के संबंधों पर G-7 सदस्यों से विचार-विमर्श करने के लिये एक बेहतर मंच उपलब्ध कराता है।
  • भारत के लिये G-7 का निहितार्थ
    • संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद, ब्रिक्स और G-20 आदि अंतर्राष्ट्रीय संगठनों में हिस्सेदारी के साथ भारत विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय मंचों के माध्यम से एक बेहतर वैश्विक व्यवस्था के निर्माण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

स्रोत: द हिंदू

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