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पर्वतीय हिम-कोर संरक्षण हेतु विश्व की पहली रिपॉज़िटरी

  • 17 Jan 2026
  • 15 min read

स्रोत: टाइम्स ऑफ इंडिया

हाल ही में वैज्ञानिकों ने अंटार्कटिक पठार पर स्थित कॉनकॉर्डिया अनुसंधान स्टेशन में पर्वतीय आइस/हिम-कोरों का विश्व का पहला वैश्विक भंडार उद्घाटित किया है, जिसका उद्देश्य ग्लोबल वार्मिंग के कारण तीव्र ग्लेशियर क्षय से जोखिम में पड़े महत्त्वपूर्ण जलवायु रिकॉर्ड को संरक्षित करना है।

  • आइस मेमोरी सैंक्चुअरी नामक यह सुविधा आइस मेमोरी फाउंडेशन द्वारा विकसित की गई है, जो फ्राँस, इटली और स्विट्ज़रलैंड के यूरोपीय अनुसंधान संस्थानों का एक संघ है।
  • यह आइस वॉल्ट सघनित हिम में निर्मित की गई एक गुफा है, जिसे लगभग -52°C के स्थिर तापमान पर बनाए रखा जाता है, ताकि भविष्य के वैज्ञानिक अनुसंधान के लिये हिम-कोरों का दीर्घकालिक संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।
  • पहले हिम-कोर जो अभयारण्य में संगृहीत किये गए थे, वे फ्राँस के मोंट ब्लांक और स्विट्ज़रलैंड के ग्रैंड कॉम्बिन पर्वत समूह से ड्रिल किये गए थे और उन्हें रेफ्रिजरेटेड जहाज़ों और विमानों का उपयोग करते हुए 50 दिनों की यात्रा के दौरान अंटार्कटिका ले जाया गया।
    • हिम-कोर वायुमंडलीय टाइम कैप्सूल के रूप में कार्य करते हैं, जो हिम के दीर्घकालिक संपीडन से निर्मित होते हैं और इनमें गैसों, एयरोसोल, धूल, प्रदूषकों तथा अतीत की जलवायु परिस्थितियों के अन्य संकेतकों के अंश संरक्षित रहते हैं।
  • ये प्रतिदर्श वैज्ञानिकों को सदियों के दौरान जलवायु में हुए ऐतिहासिक परिवर्तनों, जैसे– वायुमंडलीय संरचना, पर्यावरणीय प्रदूषण तथा जलवायु परिवर्तन की गति और कारणों का पुनर्निर्माण करने में सक्षम बनाते हैं।
  • आइस मेमोरी परियोजना, जिसे वर्ष 2015 में शुरू किया गया था, अब तक विश्व भर के 10 ग्लेशियर स्थलों से हिम-कोर की पहचान कर उनकी ड्रिलिंग कर चुकी है। साथ ही, अगले एक दशक में इन प्रतिदर्शों को भविष्य की पीढ़ियों के लिये सुरक्षित रखने हेतु भंडारण के विस्तार और एक अंतर्राष्ट्रीय अभिसमय की स्थापना स्थापित किये जाने की योजना भी है।

और पढ़ें: अंटार्कटिक और भारत 

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