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नेल्ली नरसंहार पर तिवारी आयोग की रिपोर्ट

  • 29 Nov 2025
  • 14 min read

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

वर्ष 1983 का नेल्ली नरसंहार, जो असम आंदोलन (1979–1985) के दौरान हुआ था, असम सरकार द्वारा तिवारी आयोग की रिपोर्ट जारी किये जाने के बाद एक बार फिर सार्वजनिक रूप से चर्चा में आ गया है, जिसने इस त्रासदी पर नए तथ्य उजागर किये हैं।

  • आयोग के अनुसार, यह घटना रोकी जा सकती थी, परंतु देरी से की गई कार्रवाई, उपलब्ध खुफिया सूचनाओं की अनदेखी और प्रशासनिक तालमेल की कमी ने हालात को बिगड़ने दिया, जिसके परिणामस्वरूप हिंसा बेकाबू हो गई।

असम आंदोलन

  • परिचय: असम आंदोलन, जो मूल असमिया सांस्कृतिक, भाषाई एवं राजनीतिक पहचान खोने की आशंकाओं से प्रेरित था, का मुख्य उद्देश्य अवैध प्रवासियों मुख्यतः बांग्लादेश से आए लोगों की पहचान करना और उन्हें बाहर निकालना था।
    • यह ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (AASU) द्वारा संचालित किया गया था और इसका ध्यान तीन D पर केंद्रित था: वर्ष 1951 के बाद आए प्रवासियों की पहचान करना (Detecting), उनके नाम मतदाता सूची से हटाना (Deleting) और उन्हें भारत से निर्वासित करना (Deporting)
  • परिणाम: यह अशांति अंततः वर्ष 1985 के असम समझौते तक पहुँची, जिसे केंद्र सरकार, राज्य सरकार और आंदोलन के नेताओं द्वारा हस्ताक्षरित किया गया। असम समझौते की मुख्य धाराएँ इस प्रकार थीं:
    • इसने आधिकारिक रूप से 25 मार्च, 1971 को अवैध विदेशी व्यक्तियों की पहचान हेतु अंतिम तिथि के रूप में निर्धारित किया।
    • 1 जनवरी, 1966 से 24 मार्च, 1971 के बीच असम में प्रवेश करने वाले व्यक्तियों को विदेशी माना जाएगा और उनके नाम 10 वर्षों के लिये मतदाता सूची से हटाए जाएंगे तथा इसके बाद उनके नागरिकता संबंधी सभी अधिकार बहाल कर दिये जाएंगे।
    • 25 मार्च, 1971 या उसके बाद असम में प्रवेश करने वाले व्यक्तियों का पता लगाया जाएगा और उन्हें देश से बाहर (डीपोर्ट) किया जाएगा।

और पढ़ें: नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 6A

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