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इस्पात उत्पादन में सिनगैस

  • 07 Apr 2026
  • 10 min read

स्रोत: द हिंदू 

हाल ही में प्राकृतिक गैस, LPG और प्रोपेन की कमी को दूर करने के लिये इस्पात उद्योग की भट्ठियों में सिनगैस (सिंथेसिस गैस) का उपयोग किया गया है। यह गैल्वनाइजिंग और कलर-कोटिंग भट्ठियों में अपनी तरह का पहला अनुप्रयोग है, जो ईंधन व्यवधानों के दौरान संचालन की निरंतरता सुनिश्चित करता है।

सिनगैस

  • परिचय: यह कोयला गैसीकरण के माध्यम से उत्पादित एक स्वच्छ ईंधन है, जो कोयला, बायोमास या अपशिष्ट को उपयोगी ऊर्जा में परिवर्तित करता है। यह मुख्य रूप से कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) एवं हाइड्रोजन (H₂) से बना होता है।
  • अनुप्रयोग: इसका उपयोग गैल्वनाइजिंग और कलर-कोटिंग भट्ठियों जैसी उच्च-तापमान औद्योगिक प्रक्रियाओं के साथ-साथ डायरेक्ट रिड्यूस आयरन (DRI) उत्पादन और ब्लास्ट फर्नेस में किया जाता है।
  • ऊर्जा सुरक्षा: यह LNG और कोकिंग कोयला जैसे आयातित ईंधनों पर निर्भरता कम करता है, साथ ही मेथनॉल और अमोनिया जैसे रसायनों के लिये फीडस्टॉक के रूप में भी कार्य करता है।
  • महत्त्व: यह कार्बन उत्सर्जन तीव्रता को कम करता है, कम-कार्बन इस्पात उत्पादन और ऊर्जा सुरक्षा का समर्थन करता है, साथ ही कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मेकैनिज़्म (CBAM) के अनुपालन में सहायता करता है और निर्यात प्रतिस्पर्द्धात्मकता को बढ़ाता है।

और पढ़ें: कोयला गैसीकरण

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