रैपिड फायर
सुजलाम भारत शिखर सम्मेलन 2025
- 29 Nov 2025
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जल शक्ति मंत्रालय नई दिल्ली में 'सुजलाम भारत शिखर सम्मेलन 2025' (Vision for Sujalam Bharat Summit 2025) की मेजबानी करेगा, जो एकीकृत और व्यावहारिक जल सुरक्षा ढाँचा बनाने के लिये एक प्रमुख राष्ट्रीय प्रयास है।
- उत्पत्ति: इसकी परिकल्पना प्रधानमंत्री के उस दृष्टिकोण के अनुरूप की गई थी, जिसमें ऐसे शिखर सम्मेलनों का आयोजन किया जाता है, जिनमें केंद्र और राज्यों के अधिकारी के साथ कनिष्ठ संवर्ग के अधिकारी भी शामिल होते हैं।
- उद्देश्य: भारत में जल सतत् को तेज़ी से आगे बढ़ाने के लिये साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण, क्षेत्रीय सुधारों और जल प्रशासन में सहकारी संघवाद को बढ़ावा देना।
- कार्यक्षेत्र: इसमें 6 महत्त्वपूर्ण विषयगत क्षेत्र शामिल हैं:
- नदियों और झरनों का पुनरुद्धार : आर्द्रभूमि पुनरुद्धार, जलग्रहण संरक्षण और सामुदायिक नदी प्रबंधन।
- ग्रे वाटर प्रबंधन: परिपत्र जल उपयोग, मूल्य निर्धारण मॉडल, प्रकृति-आधारित समाधान और सेप्टेज प्रबंधन।
- प्रौद्योगिकी-संचालित जल प्रबंधन : AI-आधारित निगरानी, सूक्ष्म सिंचाई, हानि में कमी, रिसाव का पता लगाना और सटीक कृषि।
- जल संरक्षण: जलभृत पुनर्भरण, पारंपरिक जल प्रणालियाँ और LiFE-संरेखित व्यवहार परिवर्तन।
- सतत् पेयजल आपूर्ति: जलवायु-अनुकूलन प्रणालियाँ, स्रोत स्थिरता और समुदाय-आधारित संचालन और रखरखाव।
- सामुदायिक सहभागिता: जल परिसंपत्तियों की दीर्घकालिक स्थिरता के लिये पंचायती राज संस्थाओं, स्वयं सहायता समूहों और स्थानीय निकायों को सशक्त बनाना।
- राष्ट्रीय प्राथमिकताओं की पहचान: मंत्रालय ने इनपुट को पाँच राष्ट्रीय प्राथमिकताओं में समेकित किया: स्रोत स्थिरता, भूजल पुनर्भरण, आधुनिक और प्रकृति-आधारित समाधान, सामुदायिक और संस्थागत सहभागिता और अंतर-विभागीय अभिसरण ।
- महत्त्व: यह समग्र सरकारी दृष्टिकोण को अपनाता है, नीति निर्माताओं और कार्यान्वयनकर्त्ताओं को जोड़ता है ताकि रणनीति को प्रभावी कार्रवाई में बदला जा सके, जो राष्ट्र को सच्चे सुजलाम और संपोषित भारत के साझा लक्ष्य की ओर तेज़ी से अग्रसर करता है।
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