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Rapid Fire (करेंट अफेयर्स): 31 अक्तूबर, 2022

  • 31 Oct 2022
  • 6 min read

राष्ट्रीय एकता दिवस

प्रतिवर्ष 31 अक्तूबर को स्वतंत्र भारत के पहले उप-प्रधानमंत्री सरदार बल्लभ भाई पटेल की जयंती को पूरे देश में ‘राष्ट्रीय एकता दिवस’ (National Unity Day) के रूप में मनाया जाता है। वर्ष 2014 में पहली बार केंद्र सरकार द्वारा 31 अक्तूबर को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया था। सरदार बल्लभ भाई पटेल का जन्म 31 अक्तूबर, 1875 को गुजरात के नाडियाड (Nadiad) शहर में हुआ था। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में अपना योगदान देने के साथ ही उन्होंने स्वतंत्रता के पश्चात देश की सभी रियासतों के एकीकरण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। वर्ष 1928 में गुजरात के बारडोली में किसान आंदोलन की सफलता के बाद वहाँ की महिलाओं ने उन्हें ‘सरदार’ (नेता या प्रमुख) की उपाधि प्रदान की। उन्हें ‘भारतीय नागरिक सेवाओं के संरक्षक संत’ (Patron Saint of India’s civil services) के रूप में भी जाना जाता है। सरदार बल्लभ भाई पटेल स्वतंत्र भारत के पहले उप-प्रधानमंत्री और पहले गृह मंत्री बने। राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी ने सरदार पटेल को ‘लौह पुरुष’ की उपाधि प्रदान की। वर्ष 1991 में उन्हें मरणोपरांत ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया गया। उल्लेखनीय है कि 31 अक्तूबर, 2018 को भारत सरकार द्वारा गुजरात के वडोदरा में नर्मदा नदी के तट पर स्थित स्टैच्यू ऑफ यूनिटी (Statue Of Unity) का अनावरण किया गया जो कि 182 मीटर (597 फीट) की ऊँचाई के साथ विश्व की सबसे बड़ी मूर्ति है।

गोवा समुद्री संगोष्ठी (गोवा मेरीटाइम सिम्पोजियम-GMS) 2022

गोवा समुद्री संगोष्ठी (GMS) का चौथा संस्करण गोवा में नौसेना युद्ध कॉलेज (NWC) द्वारा 31 अक्तूबर से 1 नवंबर 2022 तक आयोजित किया जा रहा है। इस संगोष्ठी के प्रतिभागियों में कैप्टेन/नौसेनाओं के कमांडर अथवा समकक्ष रैंक के अधिकारी/भारत के अलावा मित्र देशों जैसे बांग्लादेश, कोमोरोस, इंडोनेशिया, मेडागास्कर, मलेशिया, मालदीव, मॉरीशस, म्याँमार, सेशेल्स, सिंगापुर, श्रीलंका तथा थाईलैंड के समुद्री बल शामिल हैं। वर्ष 2016 में भारतीय नौसेना द्वारा संकल्पित एवं स्थापित, GMS भारत और हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) के प्रमुख समुद्री देशों के बीच सहयोगात्मक सोच, सहयोग व आपसी समझ को बढ़ावा देने हेतु एक मंच है। इस संगोष्ठी का आयोजन नौसेना युद्ध कॉलेज, गोवा द्वारा द्विवार्षिक रूप से किया जाता है तथा अब तक इस कार्यक्रम के तीन संस्करण आयोजित किये जा चुके हैं। संगोष्ठी का उद्घाटन नेवल वॉर कॉलेज के कमांडेंट द्वारा किया जाएगा। इसका विषय 'समुद्री क्षेत्र में सभी के लिये सुरक्षा और विकास' के विचार और समुद्री सुरक्षा के पाँच सिद्धांतों पर आधारित है, जिसका अर्थ है कि हमारे क्षेत्र की समृद्धि हिंद महासागर क्षेत्र के सभी देशों के साथ जुड़ी हुई है।

स्वतंत्रता सेनानी पसुम्पोन मुथुरामलिंग थेवर 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता सेनानी पसुम्पोन मुथुरामलिंग थेवर को उनकी गुरु पूजा के अवसर पर श्रद्धांजलि अर्पित की। गुरु पूजा को प्रत्येक वर्ष 30 अक्तूबर को पसुंपोन मुथुरामलिंगा थेवार की जयंती के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। वह एक स्वतंत्रता सेनानी-सह-आध्यात्मिक नेता थे। उन्हें मुकुलथोर समुदाय के बीच एक देवता के रूप में देखा जाता है, यह कल्लर, मरावर और अहंबादियार नामक समुदायों में से एक है। मुकुलथोर समुदाय के लोग अभी भी प्रसाद चढ़ाते हैं जैसा कि मंदिरों में देवताओं के लिये उनकी जयंती और गुरु पूजा समारोहों पर किया जाता है। उन्होंने पारंपरिक हिंदू धर्म को स्वीकार नहीं किया क्योंकि यह 'वर्णाश्रम' का समर्थन करता था। उन्होंने हमेशा हिंदू धर्म की बुराइयों के खिलाफ लड़ाई लड़ी। उन्होंने खुले तौर पर धार्मिक अंधविश्वासों और संकीर्ण सोच की निंदा की। समाजवादी और सुभाष चंद्र बोस के सहयोगी होने के नाते उन्होंने वर्ष 1952 से अखिल भारतीय फॉरवर्ड ब्लॉक (AIFB) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के रूप में कार्य किया। वह AIFB के राष्ट्रीय संसदीय क्षेत्र के लिये तीन बार चुने गए। उनका जन्म 30 अक्तूबर, 1908 को तमिलनाडु के रामनाथपुरम ज़िले के पसुंपोन में हुआ था। 30 अक्तूबर, 1963 को बीमारी के कारण उनका निधन हो गया। 

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