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Rapid Fire (करेंट अफेयर्स): 06 अक्तूबर, 2022

  • 06 Oct 2022
  • 5 min read

विश्व शिक्षक दिवस

विश्व भर में 05 अक्तूबर को विश्व शिक्षक दिवस (World Teachers Day) मनाया जाता है। इसे अंतर्राष्ट्रीय शिक्षक दिवस (International Teachers Day) के रूप में भी जाना जाता है। यह दिवस दुनिया में शिक्षकों की स्थिति में सुधार लाने के उद्देश्य से मनाया जाता है। यूनेस्को और अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन के बीच वर्ष 1966 में हुई बैठक में इसका निर्णय लिया गया था। विश्व शिक्षक दिवस न केवल शिक्षकों के लिये बल्कि छात्रों के लिये भी एक विशेष दिन है। इस दिन शिक्षकों और सेवानिवृत्त शिक्षकों को उनके विशेष योगदान के लिये सम्मानित किया जाता है। प्रत्येक वर्ष यूनिसेफ, यूएनडीपी, अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन तथा यूनेस्को द्वारा एक साथ मिलकर विश्व शिक्षक दिवस के कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है। विश्व शिक्षक दिवस 2022 की थीम ‘शिक्षा का परिवर्तन शिक्षकों से शुरू होता है'(The Transformation of Education Begins with Teachers) है।

नानसेन रिफ्यूजी अवॉर्ड 

संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त (UNHCR) ने घोषणा की है कि पूर्व जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल को वर्ष 2022 का UNHCR नानसेन रिफ्यूजी अवॉर्ड प्रदान किया जाएगा। संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी के अनुसार, मर्केल को उनके नेतृत्व, साहस और करुणा के लिये इस पुरस्कार के लिये चुना गया है। जिनकी वजह से शरण की तलाश कर रहे लाखों हताश लोगों का संरक्षण सुनिश्चित करने में मदद मिली, मर्केल के नेतृत्व में जर्मनी ने वर्ष 2015 और 2016 में 1.2 मिलियन से अधिक शरणार्थियों एवं शरण चाहने वालों का स्वागत किया। ये शरणार्थी सीरिया समेत अन्य स्थानों पर हिंसक संघर्ष व टकराव के कारण जान बचाने के लिये जर्मनी पहुँचे थे। UNHCR के अनुसार, तत्कालीन जर्मन चांसलर ने अपने साथियों से  जर्मनों से विभाजनकारी राष्ट्रवाद को खारिज करने का आह्वान किया और उनसे आत्मनिर्भर एवं स्वतंत्र, दयालु तथा खुले विचारों को अपनाने का आग्रह किया। संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त द्वारा प्रत्येक वर्ष नानसेन पुरस्कार किसी व्यक्ति, समूह या संगठन को शरणार्थियों, स्टेटलेस या विस्थापित लोगों की सहायता हेतु उनके योगदान के लिये दिया जाता है। वर्ष 1954 में यह संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त आर्कटिक खोजकर्त्ता और मानवतावादी फ्रिड्टजॉफ नानसेन के सम्मान में स्थापित किया गया था। यह पुरस्कार पाने वाले पहले व्यक्ति एलेनोर रूज़वेल्ट थे।

शरत चन्द्र बोस

भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन का महत्त्व इतना भर नहीं है कि इससे देश को आज़ादी प्राप्त हुई, बल्कि इस दौरान भारतीय समाज के नवनिर्माण की प्रक्रिया रचनात्मक तरीके से शुरू हुई। यही वजह है कि जब हम उस दौर के नायकों के विषय में पढ़ते हैं तो हमे अनेकों वीर पुरूषों के जीवन के संघर्षों और योगदान का पता चलता है। शरत चन्द्र बोस इस संदर्भ में भिन्न नहीं है। शरत चन्द्र बोस का जन्म 7 सितंबर, 1889 में कलकत्ता में हुआ था, उन्होंने चितरंजन दास के निर्देशन में अपने करियर की शुरुआत की। शरत चन्द्र बोस काॅन्ग्रेस कार्यकारी समिति के सदस्य तथा बंगाल विधानसभा में काॅन्ग्रेस संसदीय पार्टी के नेता थे। उन्होने असहयोग आंदोलन में  सक्रिय रूप से हिस्सा लिया। अहिंसा में विश्वास रखने के बावजूद क्रांतिकारियों के प्रति उनका दृष्टिकोण सहानुभूतिपूर्ण था। वे अगस्त 1946 में केंद्र की अंतरिम सरकार में शामिल हुए तथा उन्हें खान और ऊर्जा मंत्रालय का प्रभार सौंपा गया, इसी दौरान उन्होंने भाई सुभाष चन्द्र बोस के साथ मिलकर इंडियन नेशनल आर्मी की नीव रखी। सुभाष चन्द्र बोस की मृत्यु के पश्चात उन्होंने इसकी ज़िम्मेदारी बखूबी निभाई। 

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