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Rapid Fire (करेंट अफेयर्स): 04 जनवरी, 2024

  • 04 Jan 2024
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तटीय कर्नाटक कस्बों में प्राचीन जल निकायों को पुनर्जीवित करना

हाल ही में, कर्नाटक के दो तटीय शहर मूडबिद्री और करकला, हजारों साल पहले के अपने प्राचीन जल निकायों को पुनर्जीवित कर रहे हैं।

  • ये जल निकाय शहरों की प्राकृतिक विरासत और सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा हैं, जो अपने जैन मंदिरों और मठों के लिये भी जाने जाते हैं।
  • नागरिकों ने अधिकारियों के समक्ष याचिका दायर करके, धन जुटाकर और सामुदायिक कार्यों में संलग्न होकर इन जल निकायों को पुनर्स्थापित करने की पहल की है।
  • मूडबिद्री शहर को 'जैन काशी' (जैनियों का बनारस) के रूप में जाना जाता है। यह जैन मंदिरों (बसदि और निशिदि) के साथ-साथ मठों का भी केंद्र है।
    • मूडबिद्री विश्व से जैन तीर्थयात्रियों को आकर्षित करता है और यह एक शैक्षिक केंद्र के रूप में भी विकसित हुआ है।
  • इन जल निकायों के पुनरुद्धार से कई लाभ होंगे जैसे भूजल पुनर्भरण में सुधार, जैव विविधता में वृद्धि, पेयजल उपलब्ध कराना और सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण।

सावित्रीबाई फुले जयंती

  • हाल ही में, भारत के प्रधान मंत्री ने सावित्रीबाई फुले को उनकी जयंती (3 जनवरी 1831) पर श्रद्धांजलि अर्पित की।     

और पढ़ें: सावित्रीबाई और ज्योतिराव फुले

रानी वेलु नचियार जयंती

भारत के प्रधान मंत्री ने रानी वेलु नचियार (3 जनवरी 1730 - 25 दिसंबर 1796) को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की है।

  • रानी वेलु नचियार, जिन्हें वीरमंगई के नाम से भी जाना जाता है, तमिलनाडु के रामनाथपुरम के रामनाद साम्राज्य की राजकुमारी थीं।
  • उन्हें भारत में ब्रिटिश औपनिवेशिक सत्ता के विरुद्ध लड़ने वाली पहली रानी के रूप में सम्मानित किया जाता है।
    • वह फ्रेंच, अंग्रेज़ी तथा उर्दू जैसी भाषाओं की ज्ञाता थीं।
  • वर्ष 1780 में अपने पति मुथुवदुगनाथपेरिया उदयथेवर की मृत्यु के बाद नचियार शिवगंगा एस्टेट (वर्तमान तमिलनाडु) की रानी बन गईं। उन्होंने वर्ष 1790 तक शासन किया।
    • उन्होंने पहले मानव बम के प्रयोग के साथ-साथ वर्ष 1700 के दशक के अंत में प्रशिक्षित महिला सैनिकों की पहली सेना की स्थापना की।

विश्व ब्रेल दिवस

वर्ष 2019 से प्रतिवर्ष 4 जनवरी को मनाया जाने वाला विश्व ब्रेल दिवस, नेत्रहीन और आंशिक दृष्टि वाले लोगों के लिये मानवाधिकारों की पूर्ण प्राप्ति में संचार के साधन के रूप में ब्रेल के महत्त्व के बारे में जागरूकता बढ़ाने हेतु मनाया जाता है।

  • ब्रेल वर्णमाला और संख्यात्मक प्रतीकों का एक स्पर्शपूर्ण प्रतिनिधित्व है, जिसमें प्रत्येक अक्षर और संख्या और यहाँ तक कि संगीत, गणितीय और वैज्ञानिक प्रतीकों को दर्शाने के लिये छह बिंदुओं का उपयोग किया जाता है।
    • ब्रेल (इसका नाम 19वीं सदी के फ्राँस में इसके आविष्कारक लुई ब्रेल के नाम पर रखा गया) का उपयोग नेत्रहीन और आंशिक दृष्टि वाले लोगों द्वारा उन्हीं पुस्तकों और पत्रिकाओं को पढ़ने के लिये किया जाता है जो दृश्य फॉन्ट में मुद्रित होती हैं।
  • ब्रेल शिक्षा, अभिव्यक्ति और राय की स्वतंत्रता के साथ-साथ सामाजिक समावेशन के संदर्भ में आवश्यक है, जैसा कि दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकारों पर कन्वेंशन के अनुच्छेद 2 में दर्शाया गया है।

और पढ़ें: भारत में दिव्यांग व्यक्ति

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