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प्रिलिम्स फैक्ट्स: 31 अगस्त, 2020

  • 31 Aug 2020
  • 17 min read

अफ्रीकन बाओबाब 

African Baobab 

हाल ही में ‘साइंटिफिक रिपोर्ट्स’ (Scientific Reports) जर्नल में प्रकाशित एक शोध में बताया गया है कि अफ्रीकन बाओबाब (African Baobab) नामक वृक्ष में 168 गुणसूत्र (Chromosomes) होते हैं जो आने वाले समय में आनुवंशिक अध्ययन, संरक्षण एवं कृषि उद्देश्यों के लिये महत्त्वपूर्ण जानकारी दे सकते हैं।

  • गौरतलब है कि इससे पहले किये गए अध्ययनों में अफ्रीकन बाओबाब में 96 से 166 के बीच गुणसूत्र होने की जानकारी दी गई थी।  

African-Baobab

प्रमुख बिंदु:

  • शोधकर्त्ताओं ने वृक्ष की कोशिकाओं (जो गहने की तरह चमकती हैं) के भीतर व्यक्तिगत गुणसूत्रों (Individual Chromosomes) के आनुवंशिक घटकों को देखने के लिये फ्लोरोसेंट जाँच (Fluorescent Probes) का उपयोग किया।
  • अध्ययन के विश्लेषण से यह भी पता चला कि पेड़ में एक बड़े पैमाने पर ‘न्यूक्लिओलस आर्गेनाइज़र रीजन’ (Nucleolus Organizer Region- NOR) है। मुख्य गुणसूत्र निकाय के सापेक्ष यह क्षेत्र किसी भी अन्य पौधों की प्रजातियों की तुलना में बड़ा दिखाई देता है।
    • कोशिका चक्र के कुछ चरणों के दौरान ‘न्यूक्लिओलस आर्गेनाइज़र रीजन’ (NORs) पर न्यूक्लिओली (Nucleoli) का गठन होता है।
    • न्यूक्लिओली, यूकैरियोट्स (Eukaryotes) में राइबोसोम के गठन एवं प्रोटीन संश्लेषण के लिये आवश्यक हैं और यह (न्यूक्लिओली) एक महत्त्वपूर्ण विशेषता है जो यूकैरियोट्स को प्रोकैरियोट्स (Prokaryotes) से अलग करती है।

महत्त्व:

  • अफ्रीकन बाओबाब के ये आनुवंशिक निष्कर्ष मूलभूत हैं, इन निष्कर्षों के माध्यम से इसके आनुवंशिक संरक्षण को अधिक कुशल एवं प्रभावी बनाया जा सकता है।
  • यह अनुसंधान, वृक्ष प्रजनन कार्यक्रमों (Tree Breeding Programs) के लिये एक मार्गदर्शक भी है जहाँ सिल्वीकल्चरल (Silvicultural) अनुप्रयोगों के लिये बाओबाब में सुधार करने की मांग की जा रही है।

अफ्रीकन बाओबाब (African Baobab):

  • अफ्रीकन बाओबाब [वैज्ञानिक नाम- एडानसोनिया डिजीटाटा (Adansonia Digitata)] को ‘ट्री ऑफ लाइफ’ (Tree Of Life) भी कहा जाता है।
  • बाओबाब वृक्ष एक हज़ार से अधिक वर्षों तक जीवित रह सकता है और यह भोजन, पशुओं के लिये चारा, औषधीय यौगिक एवं कच्चा माल प्रदान करता है।

अफ्रीकन बाओबाब की विशेषता:

  • अफ्रीका में, विशेष रूप से सवाना क्षेत्र में जहाँ मौसम शुष्क एवं गंभीर रूप से जलवायु परिवर्तन की स्थिति से प्रभावित होता है वहाँ कई पेड़ों का जीवित रह पाना मुश्किल हो जाता है किंतु इन विपरीत परिस्थितियों के बावजूद बाओबाब वृक्ष वर्ष भर जीवित रहता है और कई जीवों के लिये जीवन ऊर्जा का स्रोत भी होता है।
  • इसके बड़े तनों में वर्षा जल को अवशोषित करने एवं संग्रहीत करने की क्षमता होती है और यह सूखे मौसम के दौरान पोषक तत्वों से युक्त फलों के साथ-साथ मनुष्यों एवं जानवरों के लिये भोजन, जल एवं आश्रय प्रदान करता है।
  • बाओबाब वृक्ष अविश्वसनीय रूप से महत्त्वपूर्ण हैं किंतु इसके संरक्षण से संबंधित कई चुनौतियाँ हैं और अब तक इसके बारे में आनुवंशिक जानकारी की कमी भी है।

गुणसूत्र (Chromosomes):

  • गुणसूत्र पशुओं एवं पौधों की कोशिकाओं के केंद्रक के अंदर स्थित धागे जैसी संरचनाएँ हैं।
  • प्रत्येक गुणसूत्र प्रोटीन एवं ‘डीऑक्सीराइबोन्यूक्लिक एसिड’ (डीएनए) के एक एकल अणु से मिलकर बना होता है।

सिल्वीकल्चरल (Silvicultural):

Silvicultural

  • यह मूल्यों एवं ज़रूरतों विशेष रूप से लकड़ी के उत्पादन एवं माँग को पूरा करने के लिये वनों की वृद्धि, संगठन/संरचना एवं गुणवत्ता को नियंत्रित करने का अभ्यास है।
  • वानिकी (Forestry) और सिल्वीकल्चर के बीच अंतर यह है कि फाॅरेस्ट स्टैंड लेवल (Forest Stand Level) पर सिल्विकल्चर को अपनाया जाता है जबकि वानिकी (Forestry) एक व्यापक अवधारणा है।
    • ‘फाॅरेस्ट स्टैंड’ वृक्षों का एक सन्निहित समुदाय है जिसमें वृक्षों के संगठन, संरचना, आयु, आकार, वर्ग, वितरण, स्थानिक व्यवस्था, स्थान की गुणवत्ता, स्थिति आदि के संदर्भ में एकरूपता होती है और यह आसन्न समुदायों से भिन्न होता है।


राष्ट्रीय खेल दिवस-2020

National Sports Day-2020

प्रत्येक वर्ष 29 अगस्त को हॉकी के जादूगर कहे जाने वाले मेजर ध्यान चंद (Major Dhyan Chand) की जयंती को भारत में राष्ट्रीय खेल दिवस (National Sports Day) के तौर पर मनाया जाता है। 

National-Sports-Day-2020

प्रमुख बिंदु:

  • दूसरे विश्व युद्ध से पहले मेजर ध्यान चंद ने वर्ष 1928 (एम्सटर्डम), वर्ष 1932 (लॉस एंजेलस) और वर्ष 1936 (बर्लिन) में लगातार तीन ओलंपिक खेलों में हॉकी के क्षेत्र में भारत का प्रतिनिधित्त्व किया था और तीनों बार देश को स्वर्ण पदक दिलाया था।
    • वर्ष 1956 में उन्हें पद्मभूषण से सम्मानित किया गया था। 
  • उल्लेखनीय है कि मेजर ध्यान चंद की जयंती के दिन ही खेल जगत में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को भारत के राष्ट्रपति द्वारा राष्ट्रीय खेल पुरस्कारों से सम्मानित किया जाता है। इसके तहत भारतीय खिलाड़ियों को राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार, ध्यान चंद पुरस्कार और द्रोणाचार्य पुरस्कारों के अलावा अर्जुन पुरस्कार प्रदान किये जाते हैं।
    • वर्ष 2020 के लिये भारत के सर्वोच्च खेल सम्मान ‘राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार’ (Rajiv Gandhi Khel Ratna Award) से रोहित शर्मा (क्रिकेट), मनिका बत्रा (टेबल टेनिस), विनेश फोगाट (रेसलिंग), रानी रामपाल (हॉकी), मरियप्पन थंगावेलू (पैरा-एथलीट) को सम्मानित किया गया है। 
  • गौरतलब है कि हाल ही में युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री ने राष्‍ट्रीय खेल एवं साहस पुरस्‍कार की 7 श्रेणियों में से 4 श्रेणियों में पुरस्‍कार की राशि बढ़ा दी है।
  • राजीव गांधी खेल रत्‍न पुरस्‍कार की राशि 7.5 लाख रूपए से बढ़ाकर 25 लाख रूपए कर दी गई है। 
    • राजीव गांधी खेल रत्न जिसे आधिकारिक तौर पर ‘स्पोर्ट्स एंड गेम्स में राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार’ के रूप में जाना जाता है, भारत गणराज्य का सर्वोच्च खेल सम्मान है। इस पुरस्कार की शुरुआत वर्ष 1991–92 में हुई थी। यह पुरस्कार युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय (Ministry of Youth Affairs and Sports) द्वारा प्रतिवर्ष प्रदान किया जाता है।
  • अर्जुन पुरस्‍कार और द्रोणाचार्य आजीवन पुरस्‍कार की राशि 5-5 लाख रूपए से बढ़ाकर 15-15 लाख रूपए कर दी गई है। 
  • द्रोणाचार्य नियमित और ध्‍यान चंद पुरस्‍कार की राशि भी 5-5 लाख रूपए से बढ़ाकर 10-10 लाख रूपए कर दी गई है। 

प्रमुख राष्‍ट्रीय खेल एवं साहस पुरस्‍कार-2020:

राष्‍ट्रीय खेल एवं साहस पुरस्‍कार-2020 

प्राप्तकर्त्ता

1. द्रोणाचार्य पुरस्‍कार (आजीवन)

धर्मेंद्र तिवारी (तीरंदाजी), पुरुषोत्तम राय (एथलेटिक्स), शिव सिंह (मुक्केबाज़ी), रोमेश पठानिया (हॉकी), कृष्ण कुमार हुड्डा (कबड्डी), विजय भालचंद्र मुनीश्वर (पैरा पावरलिफ्टिंग), नरेश कुमार (टेनिस), ओम प्रकाश दहिया (कुश्ती)

2. द्रोणाचार्य पुरस्‍कार (नियमित)

जूड फेलिक्स (हॉकी), योगेश मालवीय (मल्लखंब), जसपाल राणा (निशानेबाजी), कुलदीप कुमार हांडू (वुशु), गौरव खन्ना (पैरा बैडमिंटन)

3. ध्यान चंद पुरस्कार

कुलदीप सिंह भुल्लर (एथलेटिक्स), जिंसी फिलिप्स (एथलेटिक्स), प्रदीप श्रीकृष्ण गांधे (बैडमिंटन), तृप्ति मुर्गंडे (बैडमिंटन), एन उषा (मुक्केबाजी), लाखा सिंह (मुक्केबाजी), सुखविंदर सिंह संधू (फुटबॉल), अजीत सिंह (हॉकी) आदि

4. अर्जुन पुरस्‍कार

अटानु दास (तीरंदाजी), दुती चंद (एथलेटिक्स), सात्विक साईराज रनकिरेड्डी (बैडमिंटन), चिराग चंद्रशेखर शेट्टी (बैडमिंटन), विशेष भृगुवंशी (बास्केटबॉल), मनीष कौशिक (बॉक्सिंग) आदि

5. मौलाना अबुल कलाम आज़ाद ट्रॉफी 

पंजाब विश्वविद्यालय (चंडीगढ़)

6. राष्ट्रीय खेल प्रोत्साहन पुरस्कार

लक्ष्य इंस्टीट्यूट, आर्मी स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट, तेल और प्राकृतिक गैस निगम (ONGC) लिमिटेड, वायु सेना का खेल नियंत्रण बोर्ड, अंतर्राष्ट्रीय खेल प्रबंधन संस्थान (IISM)


ओणम

Onam

भारतीय उपराष्ट्रपति ने ओणम (Onam) की पूर्व संध्या पर एक संदेश के माध्यम से देशवासियों को बधाई दी।

Onam

प्रमुख बिंदु:

  • केरल के महान शासक राजा महाबली (King Mahabali) की स्मृति के सम्मान में ओणम (Onam) का त्योहार मनाया जाता है।
  • केरल का सबसे लोकप्रिय पर्व ओणम प्रायः सितंबर माह के पहले पखवाड़े में मनाया जाता है। यह राज्य का कृषि पर्व कहलाता है तथा इसे मुख्य तौर पर मलयाली हिंदू मनाते हैं।
  • ओणम मलयालम कैलेंडर के पहले महीने ‘चिंगम’ से शुरू होता है, इसलिये इसे मलयाली हिंदुओं का नववर्ष भी कहा जाता है।
  • लगभग 10-12 दिन तक चलने वाले इस उत्सव का पहला और आखिरी दिन सबसे महत्त्वपूर्ण होता है।
  • यह त्यौहार असुर राजा महाबलि के पुनः घर आगमन का भी प्रतीक है। ओणम पर 26 पकवानों वाले सद्या (Sadya) को केले के पत्ते पर खास तरीके व क्रम में परोसा जाता है, जिसे सद्या थाली कहते हैं तथा इस भव्य महाभोज को 'ओणासद्या' (Onasadya) कहा जाता है। यह ओणम का सबसे महत्त्वपूर्ण आयोजन होता है।
  • ओणम के दिन पारंपरिक खेलों, संगीत और नृत्य का आयोजन होता है।

पुलिक्कली (Pulikkali):

  • पुलिक्कली (Pulikkali) या टाइगर डांस (Tiger Dance) केरल के त्रिशूर (Thrissur) में मनाये जाने वाले ओणम (Onam) उत्सव का एक अनिवार्य हिस्सा है।
  • पुलिक्कली (Pulikkali) में कुछ विशेष लोग अपने शरीर पर चमकीले पीले एवं काले रंग से शेर की आकृति को चित्रित करके ड्रम एवं तीव्र म्यूज़िक के साथ शहर के चारों ओर घूमते हैं।

अरनमुला नौका दौड़:

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  • अरनमुला नौका दौड़ केरल की सबसे प्राचीन नौका दौड़ प्रतियोगिता है, जिसे ओणम (अगस्त-सितंबर) के दौरान आयोजित किया जाता है।
  • यह केरल के पथनमथित्ता (Pathanamthitta) ज़िले में पंंपा (Pampa) नदी में श्री कृष्ण और अर्जुन को समर्पित पार्थसारथी नामक हिंदू मंदिर के समीप मनाया जाता है।
  • इस त्योहार में गायन करते हुए और दर्शकों के शोर-शराबे के बीच साँप की आकृति वाली नौकाओं को जोड़े में दौड़ाया जाता है। 


शेतुरुंजी और भादर बांध

Shetrunji and Bhadar Dam

30 अगस्त, 2020 को गुजरात सरकार के सिंचाई विभाग ने अत्यधिक वर्षा के कारण सौराष्ट्र क्षेत्र में स्थित शेतरुंजी (Shetrunji) और भादर (Bhadar) बांधों से अत्यधिक मात्रा में जल का निर्वहन किया।

Shetrunji-and-Bhadar-Dam

प्रमुख बिंदु:

  • पिछले पाँच वर्षों में यह पहली बार हुआ है कि इन दोनों बांधों के पीछे निर्मित जलाशय एक साथ ओवरफ्लो हुए हैं।
  • गुजरात के भावनगर ज़िले के पालिताना (Palitana) तालुका में राजस्थली गाँव में स्थित शेतरुंजी बांध (Shetrunji Dam) में 308.68 मिलियन क्यूबिक मीटर (MCM) की सकल भंडारण क्षमता है जो गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र में स्थित सबसे बड़ा जलाशय है।  
  • राजकोट ज़िले के गोंडल (Gondal) तालुका के लिलाखा (Lilakha) गाँव में स्थित भादर बांध (Bhadar Dam) की सकल भंडारण क्षमता 188.14 मिलियन क्यूबिक मीटर (MCM) है जो सौराष्ट्र क्षेत्र में स्थित दूसरा सबसे बड़ा जलाशय है।
    • इन दोनों बांधों की एक साथ जल संचयी संग्रहण क्षमता लगभग 497 MCM है जो सौराष्ट्र के कुल 140 प्रमुख बांधों की कुल जल संचयी संग्रहण क्षमता (2540 MCM) का लगभग 20% है।

शेतरुंजी एवं भादर नदियाँ:

  • दोनों बांध शेतरुंजी एवं भादर नदियों पर अवस्थित हैं। ये नदियाँ विपरीत दिशाओं में बहती हैं और दोनों बांधों का अलग-अलग जलग्रहण क्षेत्र है।
  • हालाँकि भादर नदी का उद्गम राजकोट ज़िले के जसदान तालुका से हुआ है जबकि शेतरुंजी नदी का उद्गम राजकोट के पड़ोसी ज़िले अमरेली से हुआ है। 
    • गुजरात के अमरेली ज़िले के कुछ भाग भी भादर नदी के अपवाह क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं।

गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र में वर्षा संकेतक:

  • ये बांध दो अलग-अलग नदी घाटियों में अवस्थित हैं किंतु वे (शेतरुंजी एवं भादर बांध) एक साथ तभी ओवरफ्लो होते हैं जब सौराष्ट्र के अधिकांश क्षेत्र में काफी व्यापक वर्षा होती है।
  • सौराष्ट्र क्षेत्र में इस वर्ष औसतन 100% से अधिक बारिश हुई है जबकि विश्लेषक बताते हैं कि प्रायद्वीपीय क्षेत्र में लगभग प्रत्येक चौथी मानसून अवधि, वर्षा की कमी को दर्शाती है।
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