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प्रीलिम्स फैक्ट्स: 15 फरवरी, 2019

  • 15 Feb 2019
  • 7 min read

NASA का अपॉरच्यूनिटी मिशन हुआ निष्क्रिय

हाल ही में मंगल ग्रह पर नासा का अपॉरच्यूनिटी रोवर मिशन निष्क्रिय हो गया। गौरतलब है कि 15 वर्ष पुराना यह रोवर मंगल ग्रह पर सबसे ज़्यादा समय तक कार्य करने वाला रोवर था।

क्या है अपॉरच्यूनिटी रोवर मिशन?

  • नासा ने यह रोवर 15 साल पहले वर्ष 2004 में मंगल ग्रह की सतह पर उतारा था।
  • रोवर से संपर्क करने की कोशिश कर रहे नासा के इंजीनियरों ने मंगल ग्रह पर आए हालिया तूफानों के चलते इसकी आंतरिक बनावट में खराबी आने की आशंका जताई थी।
  • मंगल ग्रह के बारे में जानकारी जुटाने को अपॉरच्यूनिटी रोवर के लिये 90 दिन का समय तय किया गया था, लेकिन इसने 14 से ज्यादा साल मंगल पर बिताए।

  • इस रोवर मंगल ग्रह पर केवल 90 दिन और 1.006 किलोमीटर की दूरी तय करने के लिये भेजा गया था लेकिन यह रोवर मंगल ग्रह पर 45 किलोमीटर की दूरी तय करने के साथ ही 5 हज़ार दिन भी पूरा कर चुका था।
  • अपॉरच्यूनिटी रोवर के साथ वैज्ञानिकों का अंतिम संपर्क 10 जून, 2018 को हुआ था।

687 परियोजनाओं में से 682 को मंज़ूरी

  • पिछले कुछ वर्षों में राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड (National Board for Wildlife-NBWL) ने संरक्षित क्षेत्रों की वन भूमि को उद्योग हेतु मंज़ूरी प्रदान करते हुए 687 परियोजनाओं में से 682 (99.82%) को मंज़ूरी दे दी।
  • कुछ विशेषज्ञों ने आलोचना करते हुए इसे क्लीयरेंस हाउस की उपाधि दे दी, जबकि कुछ अधिकारियों ने मंज़ूरी की वज़हों का उल्लेख किया-

♦ सुव्यवस्थित प्रक्रियाएँ
♦ 2014 के बाद से नियमित बैठकें
♦ ऑनलाइन आवेदन
♦ राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड में वही परियोजनाएँ आती हैं जिनकी जाँच संबंधित राज्य सरकार पहले ही कर चुकी होती है।

राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड

  • नेशनल बोर्ड फॉर वाइल्डलाइफ एक वैधानिक बोर्ड है जिसका गठन 2003 में वन्य जीवन (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत आधिकारिक तौर पर किया गया था।
  • NBWL की अध्यक्षता प्रधानमंत्री करता है।
  • यह निकाय वन्यजीवन संबंधी सभी मामलों की समीक्षा के लिये और राष्ट्रीय उद्यानों तथा अभयारण्यों एवं इसके आस-पास परियोजनाओं की मंज़ूरी हेतु एक सर्वोच्च निकाय के रूप में कार्य करता है।
  • यह एक बहुत ही महत्त्वपूर्ण निकाय है क्योंकि यह वन्यजीव संबंधी सभी मामलों की समीक्षा करने और राष्ट्रीय उद्यानों और अभयारण्यों में तथा आस-पास की परियोजनाओं को स्वीकृति देने के लिये सर्वोच्च निकाय के रूप में कार्य करता है।
  • वर्तमान में राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की संरचना के तहत इसमें 15 अनिवार्य सदस्य और तीन गैर-सरकारी सदस्यों को रखने का प्रावधान है।

ताज व्यू गार्डन
(Taj View Garden)

हाल ही में संस्कृति मंत्रालय (Ministry of Culture) तथा पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (Ministry of Environment, Forest and Climate Change) ने आगरा के किले और ताजमहल के बीच ताज कॉरिडोर क्षेत्र में ‘ताज व्यू गार्डन’ की नींव रखी।

  • इस गार्डन के निर्माण का उद्देश्य बड़ी मात्रा में वृक्षारोपण करके ताजमहल के चारों ओर हरियाली को बढ़ावा देना है। इससे न केवल ताजमहल के आस-पास के प्रदूषण को कम करने में मदद मिलेगी बल्कि यह आगंतुकों को एक मनोरम दृश्य भी प्रदान करेगा।
  • ताज व्यू गार्डन को भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण द्वारा मुगलकालीन चारबाग उद्यान की तर्ज़ पर विकसित किया जा रहा है।
  • चारबाग शैली उद्यान स्थापत्य की एक फ़ारसी शैली है जिसमें एक वर्गाकार बाग को चार छोटे भागों में, चार पैदल पथों या बहते पानी द्वारा चार छोटे भागों में बाँटा जाता है।
  • इस तरह की उद्यान शैली ईरान और भारत सहित संपूर्ण पश्चिमी और दक्षिण एशियाई देशों में पाई जाती है।
  • भारत में हुमायूँ के मकबरे (दिल्ली) और ताज महल (आगरा) का निर्माण चारबाग शैली में किया गया है।

भारत ने जर्मनी और स्वीडन के साथ रक्षा समझौतों पर किये हस्ताक्षर

भारत ने जर्मनी और स्वीडन दोनों देशों के साथ रक्षा सहयोग और सुरक्षा समझौतों पर हस्ताक्षर किये हैं।

  • भारत और स्वीडन के बीच एक सुरक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किये गए हैं जिससे दोनों देश एक- दूसरे के साथ गोपनीय जानकारी को साझा करने में सक्षम होंगे।
  • उल्लेखनीय है कि भारत और स्वीडन ने वर्ष 2009 में रक्षा क्षेत्र में सहयोग संबंधी समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये थे।
  • इससे पहले जर्मनी में रक्षा मंत्री ने रक्षा और रक्षा उद्योग के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने हेतु उपायों को लागू करने के बारे में एक समझौते पर हस्‍ताक्षर किये जिससे दोनों देशों की सेनाओं के साथ रक्षा उद्योग और अनुसंधान तथा विकास संबंधों को और मज़बूत बनाया जा सकेगा।
  • जर्मनी और स्वीडन दोनों ही भारत को रक्षा उपकरणों के प्रमुख आपूर्तिकर्त्ता हैं और उनकी कंपनियाँ इस समय पनडुब्बियों और लड़ाकू विमानों की आपूर्ति के लिये कई निविदाओं की प्राप्ति के लिये प्रयासरत हैं।
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