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प्रिलिम्स फैक्ट्स: 12 सितंबर, 2020

  • 12 Sep 2020
  • 18 min read

स्टार्टअप परितंत्र के समर्थन पर राज्यों की रैकिंग

Ranking of States on Support to Startup Ecosystems

11 सितंबर, 2020 को वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री ने वर्चुअल समारोह के माध्यम से स्टार्टअप परितंत्र के लिये समर्थन पर राज्यों की रैकिंग के दूसरे संस्करण के परिणाम जारी किये।  

Ranking-of-states

प्रमुख बिंदु:

  • उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्द्धन विभाग (Department for Promotion of Industry and Internal Trade- DPIIT) ने राज्यों एवं संघ शासित क्षेत्रों के बीच प्रतिस्पर्द्धा बढ़ाने और स्टार्टअप परितंत्र के संदर्भ में सक्रियता से कार्य करने के लिये राज्यों की स्टार्टअप रैंकिंग के दूसरे संस्करण का संचालन किया। 
  • इस रैंकिंग के माध्यम से राज्यों की क्षमता का विकास होगा, राज्य आपसी सहयोग के द्वारा अपने अनुभव साझा करने के लिये प्रोत्साहित होंगे तथा इससे नीति निर्माण एवं कार्यान्वयन में सहायता मिलेगी।

राज्य स्टार्टअप रैंकिंग फ्रेमवर्क:

  • राज्य स्टार्टअप रैंकिंग फ्रेमवर्क 2019 में 7 व्यापक सुधार क्षेत्र शामिल किये गए हैं जिसमें 30 कार्य बिंदु शामिल हैं। इन कार्य बिंदुओं में निम्नलिखित शामिल हैं:
    • संस्थागत समर्थन 
    • आसान अनुपालन
    • सार्वजनिक खरीद मानदंडों में छूट 
    • इन्क्यूबेशन समर्थन
    • सीड फंडिंग सहायता
    • उद्यम अनुदान सहायता 
    • जागरूकता एवं आउटरीच

राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों का वर्गीकरण:

  • इस रैंकिंग प्रक्रिया में कुल 22 राज्यों एवं 3 केंद्र शासित प्रदेशों ने भाग लिया। रैंकिंग प्रक्रिया में एकरूपता स्थापित करने एवं मानकीकरण सुनिश्चित करने के लिये राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को दो समूहों में विभाजित किया गया है।
    • श्रेणी Y: दिल्ली को छोड़कर सभी संघ शासित क्षेत्र एवं असम को छोड़कर पूर्वोत्तर के सभी राज्य ‘श्रेणी Y’ में रखे गए हैं।
    • श्रेणी X: शेष अन्य राज्यों एवं संघशासित क्षेत्र दिल्ली को ‘श्रेणी X’ में रखा गया है।
  • रैंकिंग के उद्देश्य से राज्यों को 5 श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है:
    • सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले राज्य
    • उत्तम प्रदर्शन करने वाले राज्य  
    • अग्रणी राज्य
    • आकांक्षी अग्रणी राज्य 
    • उभरते हुए स्टार्टअप पारितंत्र वाले राज्य
  • प्रत्येक श्रेणी में इकाइयों को वर्णमाला के क्रम में रखा गया है। राज्यों को स्टार्टअप्स के समर्थन के 7 सुधार क्षेत्रों में अग्रणी के रूप में भी मान्यता दी गई है।
  • राज्य स्टार्टअप रैंकिंग-2019

श्रेणी X  

श्रेणी 

राज्य

सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 

गुजरात

उत्तम प्रदर्शन

कर्नाटक

केरल

अग्रणी

बिहार 

महाराष्ट्र

ओडिशा 

राजस्थान 

आकांक्षी अग्रणी 

हरियाणा 

झारखंड

पंजाब

तेलंगाना

उत्तराखंड

उभरते हुए स्टार्टअप पारितंत्र

आंध्रप्रदेश 

असम 

छत्तीसगढ़

दिल्ली 

हिमाचल प्रदेश

मध्य प्रदेश

तमिलनाडु

उत्तरप्रदेश 

श्रेणी Y

श्रेणी 

राज्य 

सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 

अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह

अग्रणी

चंडीगढ़

आकांक्षी अग्रणी

नागालैंड

उभरते हुए स्टार्टअप पारितंत्र

मिज़ोरम

सिक्किम

  • सभी 7 सुधार क्षेत्रों में अग्रणी: प्रत्येक सुधार क्षेत्र में सबसे ज्यादा अंक हासिल करने वाले राज्यों को अग्रणी (लीडर) के रूप में मान्यता दी गई है।

क्रम.

आधार

राज्य

1.

संस्थागत अग्रणी

कर्नाटक

केरल

ओडिशा

2.

विनियामकीय परिवर्तन चैंपियंस

कर्नाटक

केरल

ओडिशा

उत्तराखंड

3.

खरीद में अग्रणी

कर्नाटक

केरल

तेलंगाना

4.

इनक्यूबेशन हब

गुजरात

केरल

5.

नवाचार की शुरुआत (सीडिंग इनोवेशन) में अग्रणी

बिहार

केरल

महाराष्ट्र

6.

स्केलिंग इनोवेशन में अग्रणी

गुजरात

केरल

महाराष्ट्र

राजस्थान

7.

जागरूकता और पहुँच (आउटरीच) में चैंपियन

गुजरात

महाराष्ट्र

राजस्थान


जलवायु स्मार्ट शहरों का आकलन ढाँचा

Climate Smart Cities Assessment Framework

11 सितंबर, 2020 को केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री ने ‘जलवायु स्मार्ट शहर आकलन ढाँचा-2.0’ (Climate Smart Cities Assessment Framework- CSCAF 2.0) और ‘स्ट्रीट्स फॉर पीपल चैलेंज’ (Streets for People Challenge) अभियान का शुभारंभ किया।  

CSCAF

जलवायु स्मार्ट शहर आकलन ढाँचा- 2.0 (CSCAF 2.0):

  • इसका उद्देश्य शहरों को निवेश समेत अपनी योजनाओं को क्रियान्वित करने के दौरान सामने आने वाली जलवायु चुनौतियों से निपटने के लिये स्पष्ट रोडमैप उपलब्ध कराना है। 
  • यह आकलन फ्रेमवर्क विश्व में वर्तमान समय में अपनाए जाने वाले आकलन फ्रेमवर्क के अध्ययन एवं विभिन्न क्षेत्रों के 26 संस्थानों तथा 60 विशेषज्ञों से विचार-विमर्श के बाद तैयार किया गया है।
  • इस फ्रेमवर्क में पाँच श्रेणियों के तहत 28 संकेतकों को शामिल किया गया है जिसमें निम्नलिखित क्षेत्र शामिल हैं: 
    • ऊर्जा एवं हरित इमारतें 
    • शहरी नियोजन, हरित क्षेत्र एवं जैव विविधता
    • आवागमन तथा वायु गुणवत्ता 
    • जल प्रबंधन 
    • अपशिष्ट प्रबंधन 
  • ‘नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ अर्बन अफेयर्स’ (National Institute of Urban Affairs- NIUA) के तहत शहरों के लिये जलवायु केंद्र CSCAF के कार्यान्वयन में केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय समर्थन कर रहा है।

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ अर्बन अफेयर्स (NIUA):

  • यह नई दिल्ली में शहरी विकास एवं प्रबंधन में अनुसंधान, प्रशिक्षण एवं सूचना प्रसार के लिये एक संस्थान है।
  • इसे वर्ष 1976 में सोसायटी पंजीकरण अधिनियम-1860 के तहत एक स्वायत्त निकाय के रूप में स्थापित किया गया था।

महत्त्व:

  • पिछले एक दशक में भारतीय शहरों के समक्ष चक्रवाती तूफान, बाढ़, लू का प्रकोप, पानी की समस्या और सूखे जैसी विषम स्थितियाँ आई हैं।
    • इससे जान एवं माल दोनों के नुकसान के साथ-साथ आर्थिक विकास भी प्रभावित हुआ है। इस संदर्भ में CSCAF पहल जलवायु परिवर्तन संबंधी पहलुओं के मद्देनज़र भारत में शहरी नियोजन एवं विकास में मदद करेगी।

स्ट्रीट्स फॉर पीपल चैलेंज’ (Streets for People Challenge):

Climate-smart-cities

  • भारतीय शहरों की गलियों को पैदल चलने वालों के लिये और अधिक सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से ‘स्ट्रीट्स फॉर पीपल चैलेंज’ (Streets for People Challenge) की शुरुआत की गई है। 
  • यह चैलेंज केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा जारी उस एडवाइज़री पर आधारित है जिसमें इस वर्ष की शुरुआत में बाज़ारों को पैदल चलने वालों के अनुकूल बनाने के लिये कहा गया था। 
  • यह चैलेंज देशभर के शहरों को एक समान गलियों के निर्माण में मदद करेगा जो विभिन्न पक्षकारों एवं नागरिकों से परामर्श पर आधारित होगा। 
    • इसके लिये एक प्रतिस्पर्द्धी प्रारूप अपनाया जाएगा ताकि विभिन्न शहरों को अपने स्वयं के डिज़ाइन प्रतियोगिताओं को शुरू करने के लिये निर्देशित किया जाएगा जिससे त्वरित, नवीन एवं कम लागत वाले सामरिक समाधानों के लिये पेशेवरों से नवीन विचारों को संग्रहित किया जा सके।
  • इसका उद्देश्य कम लागत एवं नए विचारों के साथ शहरी गलियों का निर्माण करना है जो पैदल चलने वालों के अनुकूल हो। 
  • इस प्रतिस्पर्द्धा में शामिल होने वाले सभी शहरों को ‘टेस्ट-लर्न-स्केल अप्रोच’ के लिये प्रोत्साहित किया जाएगा जिससे महत्त्वाकांक्षी एवं आसपास के खाली पड़े क्षेत्रों में पैदल चलने वाले रास्तों को बेहतर किया जा सके।
  • इस चैलेंज में केंद्रीय युवा मामले एवं खेल मंत्रालय के अंतर्गत फिट इंडिया मिशन, परिवहन विकास एवं योजना संस्थान (Institute for Transport Development and Policy- ITDP) के साथ स्मार्ट सिटी मिशन भी सहयोग कर रहे हैं।


पलक्कडेंसिस

Palakkadensis

हाल ही में वैज्ञानिकों ने केरल के पलक्कड (Palakkad) में एक पर्यटन स्थल अन्नकल (Annakal) से छिपकली (Gecko) की एक नई प्रजाति ‘पलक्कडेंसिस’ (Palakkadensis) की खोज की है।

Palakkadensis

प्रमुख बिंदु:

  • केरल में पश्चिमी घाटों से प्राप्त छिपकली की इस नई प्रजाति को वैज्ञानिकों द्वारा पलक्कड़ ड्वार्फ गेच्को (Palakkad Dwarf Gecko) या स्नेमास्पिस पलक्कडेंसिस (Cnemaspis Palakkadensis) नाम दिया गया है। 
  • यह प्रजाति, छिपकली की स्नेमास्पिस लिट्टोरालिस (Cnemaspis Littoralis) प्रजाति से काफी मिलती-जुलती है, ये दोनों प्रजातियाँ एक ही जीनस ‘स्नेमास्पिस’ (Cnemaspis) से संबंधित हैं। हालाँकि ये दोनों अनुवांशिक रूप से अलग हैं।

स्नेमास्पिस लिट्टोरालिस (Cnemaspis Littoralis):

Littoralis

  • ‘कोस्टल डे गेच्को’ (Coastal Day Gecko) या ‘स्नेमास्पिस लिट्टोरालिस’ (Cnemaspis Littoralis) को वर्ष 1854 में ब्रिटिश प्राणी विज्ञानी थॉमस सी जेरडॉन (Thomas C Jerdon) ने खोजा था।

शारीरिक विशेषताएँ:

  • इस प्रजाति के शरीर के ऊपरी हिस्से पर शल्क, स्पाइन-लाइन ट्यूबरकल (Spine-Line Tubercles) की अनुपस्थिति, शरीर के प्रत्येक तरफ 15 या 16 जघनास्थिक रोमकूप (Femoral Pores) को 14 रोमकूपविहीन शल्कों (Poreless Scales) द्वारा अलग किया गया है।
  • इसकी लंबाई लगभग 32 मिमी. है। 
  • इसके शरीर के ऊपरी तरफ सुंदर काले एवं भूरे रंग के पैच बने हुए हैं और इसकी ठोड़ी या उदर के निचले हिस्से पर एक नारंगी छाया है। 

स्नेमास्पिस पलक्कडेंसिस का आहार:

  • यह प्रजाति सभी प्रकार के कीड़े-मकोड़ों जैसे- छोटे कीट, बीटल, तितली के लार्वा और यहाँ तक ​​कि छोटे मेंढकों को भी खाती है।

गौरतलब है कि इस प्रजाति की खोज से संबंधित शोध पत्र को अमेरिकी वैज्ञानिक पत्रिका 'एम्फीबियन एंड रेप्टाइल कंज़र्वेशन' (Amphibian and Reptile Conservation) में प्रकाशित किया गया है।


यू. एस. विदेशी एजेंट अधिनियम  

U.S. Foreign Agents Act

अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट (U.S. Department of Justice) के अधीन विदेशी एजेंट्स पंजीकरण अधिनियम (Foreign Agents Registration Act– FARA), 1938  के तहत ओवरसीज़ फ्रेंड्स ऑफ बीजेपी (Overseas Friends of the BJP- OFBJP) के पंजीकृत होने के बाद भारतीय जनता पार्टी, संयुक्त राज्य अमेरिका में किसी संगठन के विदेशी प्रमुख के रूप में नाम दर्ज कराने वाली भारत में मुख्यधारा की पहली राजनीतिक पार्टी बन गई है।

OFBJP

प्रमुख बिंदु:

  • OFBJP द्वारा दर्ज किये गए पंजीकरण के अनुसार, यह पंजीकरण 27 अगस्त, 2020 को किया गया था। पंजीकरण के बाद OFBJP को अमेरिकी सांसदों से बैठक, कार्यक्रमों के आयोजन, अमेरिकी समूहों से वित्तपोषण की घोषणा करनी होगी।
  • उल्लेखनीय है कि संयुक्त राज्य अमेरिका के आगामी चुनावों के दौरान OFBJP सदस्य संगठनात्मक सहयोग नहीं कर सकते हैं ऐसा करने पर इसे अमेरिकी चुनावों में विदेशी हस्तक्षेप के रूप में देखा जाएगा।

विदेशी एजेंट्स पंजीकरण अधिनियम

(Foreign Agents Registration Act– FARA):

FARA

  • वर्ष 1938 में इस अधिनियम (FARA) को संयुक्त राज्य अमेरिका में फासीवाद के प्रसार को रोकने के लिये लागू किया गया था।
  • इस अधिनियम के अंतर्गत विदेशी एजेंटों को अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट के तहत पंजीकृत कराना तथा अपनी गतिविधियों को जनता के सामने बताना अनिवार्य है।
  • इस अधिनियम के तहत राजनैतिक या अर्द्ध-राजनीतिक क्षमता के साथ विदेशी शक्तियों के हितों का प्रतिनिधित्त्व करने वाले एजेंटों को भी विदेशी सरकार के साथ अपने संबंधों एवं संबंधित वित्त के बारे में जानकारी का खुलासा करना होता है।

FARA का महत्त्व:

  • FARA, संयुक्त राज्य अमेरिका में विदेशी प्रभाव तथा राष्ट्रीय सुरक्षा हेतु खतरों की पहचान करने के लिये एक महत्त्वपूर्ण अधिनियम है।

FARA का उद्देश्य:

  • इस अधिनियम का मुख्य उद्देश्य संयुक्त राज्य अमेरिका के भीतर विदेशी प्रभाव के संबंध में पारदर्शिता को बढ़ावा देना है। 
    • इसके तहत अमेरिकी सार्वजनिक राय, नीति एवं कानूनों को प्रभावित करने की इच्छा रखने वाले विदेशी एजेंटों को अमेरिकी सरकार एवं जनता के समक्ष कुछ विशिष्ट जानकारियाँ देनी होती हैं।

FARA के उल्लंघन पर सजा का प्रावधान:

  • जानबूझ कर FARA का उल्लंघन करने पर पाँच वर्ष तक की जेल या 250,000 अमेरिकी डॉलर का जुर्माना या दोनों का प्रावधान है। 
    • जबकि इस कानून का कुछ सीमा तक उल्लंघन करने पर 6 महीने से अधिक की जेल या $ 5,000 का जुर्माना या दोनों का प्रावधान है।
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