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पैलियो प्रॉक्सी

  • 04 Aug 2023
  • 5 min read

हाल ही में यह घोषणा की गई थी कि जुलाई 2023 का एक विशेष दिन 100,000 से अधिक वर्षों में सबसे गर्म दिन था, जो वैज्ञानिक रूप से निराधार है।

  • यह दावा थर्मामीटर के आविष्कार से पहले के तापमान अनुमानों पर आधारित था, जो "पैलियो प्रॉक्सी (Palaeo Proxies)" पर निर्भर हैं और दैनिक समय-सीमा तापमान प्रदान नहीं कर सकते हैं।

पैलियो प्रॉक्सी:

  • परिचय: 
    • पैलियो प्रॉक्सी, पैलियोक्लाइमेट प्रॉक्सी (Paleoclimate Proxies) या पैलियोएन्वायरमेंटल प्रॉक्सी (Paleoenvironmental Proxies) का संक्षिप्त रूप है, जो वैज्ञानिकों द्वारा अतीत की जलवायु तथा पर्यावरणीय स्थितियों के पुनर्निर्माण के लिये उपयोग किये जाने वाले संकेतक या रिकॉर्ड हैं।
    • ये प्रॉक्सी आमतौर पर भौतिक, जैविक या रासायनिक प्रक्रियाओं से प्राप्त होते हैं जो तापमान या अन्य जलवायु कारकों में परिवर्तन होने पर प्रतिक्रिया करते हैं।
    • चूँकि सुदूर अतीत की जलवायु की प्रत्यक्ष माप संभव नहीं है, वैज्ञानिक अतीत की जलवायु विविधताओं तथा दीर्घकालिक रुझानों को समझने के लिये इन प्रॉक्सी रिकॉर्ड पर भरोसा करते हैं।
  • उदाहरण: 
    • बर्फ के टुकड़े: ग्लेशियरों और ध्रुवीय बर्फ की चादरों से खोदे गए बर्फ के टुकड़ों में फँसे हुए हवा के बुलबुले और समस्थानिक रचनाएँ होती हैं जो तापमान और ग्रीनहाउस गैस सांद्रता सहित पिछली वायुमंडलीय स्थितियों के बारे में जानकारी प्रदान करती हैं।
    • वृक्ष वलय: वृक्ष वलय की चौड़ाई, घनत्व और समस्थानिक संरचना पिछले जलवायु परिवर्तन एवं वृक्षों की विकास स्थितियों को प्रकट कर सकती है, जो तापमान तथा वर्षा में परिवर्तन के लिये एक मूल्यवान प्रॉक्सी के रूप में कार्य करती है।
    • कोरल रिकॉर्ड (Coral Records): प्रवाल के विकास पैटर्न और समस्थानिक संरचनाएँ समुद्री सतह के पिछले तापमान तथा महासागर की स्थितियों के बारे में जानकारी प्रदान करती हैं।
    • पराग रिकॉर्ड (Pollen Records): तलछट कोर में संरक्षित विशिष्ट प्रकार के पराग की उपस्थिति और प्रचुरता पिछले वनस्पति एवं जलवायु परिवर्तनों का संकेत दे सकती है।
  • सीमाएँ: 
    • पैलियो प्रॉक्सी तकनीक को व्यावहारिक बनाने में एक प्रमुख धारणा यह है कि जिन प्रक्रियाओं के आधार पर प्रॉक्सी निर्धारित की जाती थी उनका संचालन तब भी उसी प्रकार होता था जिस प्रकार वर्तमान में होता है
    • प्रॉक्सी द्वारा दैनिक तापमान का अनुमान लगा पाना असंभव है क्योंकि सागरों और झीलों के अवसाद में दबे हुए प्रॉक्सी निर्धारकों के आधार पर केवल सदियों या हज़ारों वर्षों पूर्व के तापमान की विसंगतियों को रिकॉर्ड किया जा सकता है।
    • तापमान संबंधी प्रॉक्सी महत्त्वपूर्ण अनिश्चितताओं के साथ ऐतिहासिक तापमान विसंगतियों का केवल स्थानीय या क्षेत्रीय अनुमान प्रदान करते हैं।
    • स्थानीय प्रॉक्सी के औसत पर आधारित वैश्विक अनुमानों में और भी अधिक अनिश्चितताएँ हैं, जिससे वैश्विक स्तर पर दैनिक तापमान के बारे में किये जाने वाले दावे अविश्वसनीय हो जाते हैं।

दीर्घकालिक पैमाने पर अनुमानित तापमान पता करने की अन्य विधियाँ:

  • ज्ञात रेडियोधर्मी क्षय वाले कुछ आइसोटोप होलोसीन युग जैसे दीर्घकालिक पैमाने पर तापमान परिवर्तन का अनुमान प्रदान कर सकते हैं।
    • होलोसीन युग वर्तमान भू-वैज्ञानिक युग है जो लगभग 11,650 वर्ष पूर्व शुरू हुआ था। यह चतुर्थ कल्प का वर्तमान युग है।
  • विगत तापमान का अनुमान लगाने के लिये 5,000 से लेकर 10 मिलियन वर्ष तक के समय का पता लगाने हेतु कार्बन या सीसा आइसोटोप का उपयोग किया जाता है।
  • बहरहाल ये विधियाँ भी दीर्घकालिक का पता करने तक ही सीमित हैं, जो  दैनिक तापमान के आँकड़े प्रदान नहीं कर सकती हैं।

स्रोत: द हिंदू

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