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सजावटी मत्स्य पालन

  • 03 Mar 2023
  • 3 min read

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (Indian Council of Agricultural Research- ICAR) के तहत राष्ट्रीय मत्स्य आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो (National Bureau of Fish Genetic Resources- NBFGR) सजावटी मत्स्य पालन हेतु लक्षद्वीपवासियों को गहन प्रशिक्षण प्रदान करने के लिये तकनीकी सहायता प्रदान कर रहा है।

सजावटी मत्स्य पालन:  

  • सजावटी मत्स्य पालन का आशय एक छोटे जलीय वातावरण में विभिन्न प्रकार की विशेषताओं वाली रंगीन, आकर्षक मछली पालन की कला से है।
  • इसका उत्पादन मुख्य रूप से कृषकों एवं इसको पसंद करने वाले लोगों द्वारा किया जाता है और इन मछलियों को सजीव गहने (Living jewels) के रूप में भी जाना जाता है। 

 पहल: 

  • परिचय: 
    • सामुदायिक जलीय कृषि के माध्यम से आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक प्रायोगिक पहल के माध्यम से 77 महिलाओं सहित कुल 82 द्वीपवासियों को प्रशिक्षण दिया गया।
    • NBFGR ने क्षमता निर्माण के लिये समर्थन और आपूर्ति की सुविधा प्रदान की, जिसमें कल्चर उपकरण और झींगा/क्लाउनफिश बीज शामिल हैं।
    • चार सामुदायिक जलीय कृषि इकाइयाँ स्थापित की गईं, जिनमें 46 महिलाएँ शामिल थीं और इन्होंने सफलतापूर्वक सजावटी झींगे के व्यापार को विपणन योग्य बना दिया है।
    • अगत्ती द्वीप पर NBFGR समुद्री सजावटी जीवों की सुरक्षा के लिये और द्वीपवासियों हेतुआय के स्रोत के रूप में जर्मप्लाज़्म संसाधन केंद्र का प्रबंधन भी करता है। 
  • महत्त्व: 
    • द्वीप पर सीमित संसाधन, ज़्यादातर नारियल और टूना मछली के रूप में इसे महत्त्वपूर्ण बनाते हैं। 
    • मानसून के मौसम के दौरान मछली पकड़ना प्रायः रुक जाता है, जिससे एक प्रमुख आर्थिक गतिविधि बंद हो जाती है। 
      • हालाँकि द्वीपों के अर्थव्यवस्था चक्र को बनाए रखने के लिये सजावटी मत्स्य पालन की उम्मीद है। 

ICAR-NBFGR क्या है? 

  • राष्ट्रीय मत्स्य आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो (ICAR-National Bureau of Fish Genetic Resources) की स्थापना दिसंबर 1983 में इलाहाबाद में हुई थी। 
    • इसका कार्यालय वर्तमान में लखनऊ, उत्तर प्रदेश, भारत में स्थित है।
  • यह भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (Indian Council of Agricultural Research- ICAR) के तत्त्वावधान में स्थापित किया गया था।
  • इसका उद्देश्य देश के मत्स्य जननद्रव्य संसाधनों के संरक्षण से संबंधित अनुसंधान करना है।

स्रोत: द हिंदू

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