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इस्लामोफोबिया का मुकाबला करने के लिये अंतर्राष्ट्रीय दिवस

  • 17 Mar 2022
  • 4 min read

हाल ही में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने इस्लामोफोबिया (Islamophobia) का मुकाबला करने के लिये 15 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय दिवस के रूप में स्थापित करने के प्रस्ताव को मंज़ूरी दी है

  • इस प्रस्ताव को पाकिस्तान द्वारा इस्लामिक सहयोग संगठन (Organisation of Islamic Cooperation- OIC) की ओर से पेश किया गया था।
  • इस प्रस्ताव को संयुक्त राष्ट्र महासभा में पारित किया गया है, जिसे लेकर भारत द्वारा चिंता व्यक्त की गई है।

प्रस्ताव के प्रमुख बिंदु: 

  • इस प्रस्ताव/संकल्प को 193 सदस्यीय विश्व निकाय द्वारा सर्वसम्मति से अपनाया गया, जो कि मुख्य रूप से 55 मुस्लिम देशों द्वारा प्रायोजित है।
  • यह प्रस्ताव सभी देशों, संयुक्त राष्ट्र निकायों, अंतर्राष्ट्रीय और क्षेत्रीय संगठनों, नागरिक समाज, निजी क्षेत्र एवं आस्था-आधारित संगठनों से "इस्लामोफोबिया को रोकने के बारे में सभी स्तरों पर प्रभावी ढंग से जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से विभिन्न उच्च-दृश्यता कार्यक्रमों (High-Visibility Events) के आयोजन और समर्थन का आह्वान करता है।
  • प्रस्ताव धर्म और विश्वास की स्वतंत्रता के अधिकार पर ज़ोर देता है तथा वर्ष 1981 के एक संकल्प को दोहराता है जिसमें "धर्म या आस्था के आधार पर सभी प्रकार की असहिष्णुता एवं भेदभाव को समाप्त करने" का आह्वान किया गया था।

भारत का पक्ष:

  • भारत ने एक धर्म को अंतर्राष्ट्रीय दिवस के स्तर तक बढ़ावा दिये जाने के खिलाफ चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि धार्मिक फोबिया के समकालीन रूप बढ़ रहे हैं, जिसमें विशेष रूप से हिंदू विरोधी, बौद्ध विरोधी और सिख विरोधी फोबिया शामिल हैं।
  • भारत ने यह भी उद्धृत किया कि इस प्रस्ताव में 'बहुलवाद' शब्द का कोई उल्लेख नहीं है।
  • भारत को उम्मीद है कि अपनाया गया प्रस्ताव "एक मिसाल कायम नहीं करता" जो चुनिंदा धर्मों के आधार पर फोबिया को लेकर कई प्रस्तावों को जन्म देगा और संयुक्त राष्ट्र को धार्मिक शिविरों में विभाजित करेगा।
  • ‘इस्लामोफोबिया’ शब्द की अंतर्राष्ट्रीय कानून में कोई सहमत परिभाषा नहीं है, जो धर्म या विश्वास की स्वतंत्रता के विपरीत है।

धर्म या विश्वास के आधार पर हिंसा के कृत्यों के पीड़ितों की स्मृति में अंतर्राष्ट्रीय दिवस: 

  • इससे पहले वर्ष 2019 में UNGA ने ‘धर्म या विश्वास के आधार पर हिंसा के कृत्यों के पीड़ितों की स्मृति में अंतर्राष्ट्रीय दिवस’ (22 अगस्त) मनाने का एक प्रस्ताव भी पारित किया है।
  • इसके संकल्प में धर्म या विश्वास के आधार पर हिंसा के पीड़ितों और उनके परिवारों के सदस्यों पर लागू कानून के अनुसार उचित समर्थन और सहायता प्रदान करने के महत्त्व को मान्यता देने की परिकल्पना की गई है।

विगत वर्षों के प्रश्न 

निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:

  1. यूनिसेफ द्वारा 21 फरवरी को अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस घोषित किया गया है।
  2. बांग्ला भाषा को राष्ट्रीय भाषाओं में से एक बनाने की मांग पाकिस्तान की संविधान सभा में उठाई गई थी।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

(a) केवल 1 
(b) केवल 2
(c) 1 और 2 दोनों 
(d) न तो 1 और न ही 2

उत्तर: (b)

स्रोत: इकोनॉमिक टाइम्स

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